पिछले 36 दिन से cjp और बाकी लोगो द्वारा धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की बात की जा रही थी जिसके बाद 25 जुलाई को उन्होंने इस्तीफा भी दिया। हालांकि कहा जा रहा है की धर्मेंद्र प्रधान ने इस प्रोटेस्ट के दौरान 2 बार इस्तीफा देना चाहा लेकिन सरकार ने मंजूर नहीं किया।
तो फिर ऐसा क्या हुआ की अचानक फैसला बदलना पड़ा?दरअसल सरकार का मानना था कि किसी मंत्री का इस्तीफा समस्या का समाधान नहीं है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार और जवाबदेही तय करना ज्यादा जरूरी है. सूत्रों के अनुसार, 20 जुलाई को वरिष्ठ मंत्रियों की एक उच्चस्तरीय बैठक में भी धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा देने की इच्छा जताई थी. हालांकि उस समय भी उन्हें शिक्षा क्षेत्र में चल रहे सुधारों को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी निभाने के लिए कहा गया और इस्तीफा स्वीकार नहीं किया गया.
सरकार के भीतर यह सोच थी कि किसी मंत्री का इस्तीफा देना सबसे आसान विकल्प होता है. यह जिम्मेदारी से मुंह मोड़ने जैसा है. मोदी सरकार की प्राथमिकता समस्या से पीछे हटने के बजाय उसके समाधान पर काम करने की रही है.
सूत्रों के मुताबिक, स्थिति उस समय बदली जब कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और केंद्र सरकार के बीच दूसरे दौर की बातचीत हुई. इस दौरान CJP ने 20 जुलाई के ‘चलो संसद’ मार्च जैसी एक और बड़े स्तर की रैली निकालने की चेतावनी दी. सरकार पहले से ही पुलिस कार्रवाई में छात्रों के घायल होने और आंदोलन के लगातार विस्तार को लेकर चिंतित थी.
इसी बीच सुरक्षा एजेंसियों ने सरकार को रिपोर्ट दी कि कुछ असामाजिक और राष्ट्रविरोधी तत्व आंदोलन का फायदा उठाने की कोशिश कर रहे हैं. डिजिटल मॉनिटरिंग के दौरान 400 से अधिक सोशल मीडिया अकाउंट्स की पहचान की गई, जिनमें करीब 100 इंस्टाग्राम अकाउंट पाकिस्तान से संचालित होने का दावा किया गया. सूत्रों के मुताबिक, शुरुआती जांच में इनमें से कई अकाउंट पहले भी भारत विरोधी प्रचार और भ्रामक सूचनाएं फैलाने से जुड़े पाए गए. प्रारंभिक विश्लेषण से पता चला है कि इनमें से कई खाते पहले ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सक्रिय थे, और कथित तौर पर भारतीय सुरक्षा बलों को निशाना बनाकर भारत विरोधी बातें, गलत सूचना और दुष्प्रचार फैला रहे थे.
सूत्रों के अनुसार, दिल्ली पुलिस की फेसियल रिकग्निशन सिस्टम (FRS) के जरिए 20 से 24 जुलाई के बीच जंतर-मंतर के आसपास करीब 400 ऐसे लोगों की पहचान भी की गई, जिनका आपराधिक रिकॉर्ड बताया गया. इनमें कुछ लोगों के 20 जुलाई की हिंसा और तोड़फोड़ से जुड़े होने की भी आशंका जताई गई.
इन सभी पहलुओं की समीक्षा के बाद सरकार इस निष्कर्ष पर पहुंची कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना और तनाव को बढ़ने से रोकना सर्वोच्च प्राथमिकता है. इसी के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने अपना इस्तीफा सौंपा, जिसे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने स्वीकार कर लिया.