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ओडिशा के जंगल में कहां से इंसान की तरह खाने पीने वाले 5 वनमानुष? पूरा इंटरनेट फ़िदा

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उड़ीसा के जंगल में आखिर कहां से आए पांच वनमानुष? सोचिए आप किसी जंगल में जाएं और वहां पेड़ों के बीच अचानक ऐसे जानवर दिखाई दे जिन्हें आपने शायद तस्वीरों और डॉक्यूमेंट्री में ही देखा हो। ओसा के बालासोर में पांच युवा औरंग गुटान यानी वनमानुष मिलने से वन विभाग भी हैरान है। इन पांचों को सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया गया है। लेकिन अब इनकी मौजूदगी से ज्यादा बड़ा सवाल इनका भारत तक पहुंचना बन गया है। क्योंकि इनके प्राकृतिक जंगल भारत से हजारों किलोमीटर दूर दक्षिण पूर्व एशिया में है और अधिकारी इंसानी दखल की आशंका जता रहे हैं। दरअसल मामला बालासोर के भोगराही इलाके के बड़ापाही गांव के पास स्थित विचित्रपुर के केसुरेना जंगल का है। 8 सितंबर की सुबह स्थानीय लोगों ने पेड़ों के बीच इन पांचों असामान्य जानवरों को देखा। शुरुआत में ग्रामीण भी समझ नहीं पाए कि आखिर यह कौन से जानवर हैं।

सूचना वन विभाग तक पहुंची तो टीम मौके पर पहुंची और जांच के बाद पता चला कि यह औरंग उटान है। जैसे-जैसे खबर फैली, बड़ी संख्या में लोग इन्हें देखने के लिए जंगल के आसपास जमा होने लगे। उदयपुर वन रेंजर संजय मोहंती के नेतृत्व में भीड़ बढ़ती देख वन विभाग ने सभी पांचों को सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू किया और उदयपुर वन सेक्शन ऑफिस ले जाकर निगरानी में रखा। उनके स्वास्थ्य की जांच के लिए पशु चिकित्सकों की टीमों को भी लगाया गया। एक रिपोर्ट के मुताबिक पांचों में से दो मादा है और तीन नर हैं। यह जानवर इंडोनेशिया और मलेशिया के कुछ हिस्सों में पाए जाते हैं और भारत के जंगलों में प्राकृतिक रूप से नहीं मिलते। अब इस पूरी कहानी का सबसे बड़ा रहस्य यही है कि जब औरंगुटान भारत के जंगलों में प्राकृतिक रूप से पाए ही नहीं जाते तो यह पांचों बालासोर के जंगल तक कैसे पहुंचे।

औरंगुटान का प्राकृतिक आवास दक्षिण पूर्व एशिया के ट्रॉपिकल रेनफॉरेस्ट है। जंगली औरंगुटान मुख्य रूप से बोर्नियों और सुमात्रा में पाए जाते हैं। भारत और उनके प्राकृतिक आवास के बीच ऐसा कोई भी प्राकृतिक जंगल कॉरिडोर भी नहीं है जिससे यह जानवर खुद चलकर या सामान्य वन्य जीव प्रवास के जरिए ओसा पहुंच सके। इसी वजह से वन अधिकारियों को शक है कि इनके भारत पहुंचने में मानवीय भूमिका हो सकती है। हालांकि अभी यह साबित नहीं हुआ है कि इन्हें तस्करी के जरिए भारत लाया गया था। इसीलिए इस वक्त इसे जांच के एंगल से ही माना जा रहा है। वन विभाग और दूसरी एजेंसियां इसी सवाल का जवाब तलाश रही हैं। अधिकारियों ने इस बात की संभावना जताई है कि पांचों औरंगोटान को कहीं और से लाकर इस इलाके में छोड़ा गया हो सकता है। कुछ अधिकारियों के मुताबिक इन्हें सड़क या

समुद्री रास्ते से भारत लाए जाने की संभावना भी जांची जा रही है। वहीं वन्य जीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो यानी डब्ल्यूसीसीबी की टीम भी मामले की पड़ताल करेगी ताकि इन जानवरों की उत्पत्ति भारत तक पहुंचने का रास्ता और इनके पीछे किसी संभावित वन्य जीव तस्करी नेटवर्क का पता लगाया जा सके। एक रिपोर्ट में एक औरंगुटान की संभावित कीमत करीब ₹25 लाख तक बताई गई है। अब जरा इन बेहद खास जानवरों को समझिए। औरंगटान को हिंदी में आमतौर पर वनमानुष कहा जाता है। यह बंदर नहीं बल्कि ग्रेट एब्स यानी बड़े कपियों के समूह का हिस्सा है और इंसानों के करीबी रिश्तेदारों में शामिल है। इनकी सबसे खास पहचान है कि इनके लंबे हाथ, लाल, भूरे बाल और पेड़ों पर रहने की अद्भुत क्षमता। औरंगटान अपना ज्यादातर जीवन पेड़ों की ऊंची शाखाओं के बीच बिताते हैं।

इनके लंबे हाथ और मजबूत पकड़ इन्हें जंगल की ऊपरी परत में आसानी से घूमने में मदद करती है। इन्हें दुनिया के सबसे बड़े पेड़ पर रहने वाले स्तनधारी जीवों में गिना जाता है। इनकी बुद्धिमत्ता भी काफी उल्लेखनीय है। औरंगुटान चीजों का इस्तेमाल करने, समस्याओं को हल करने और अपने आसपास के वातावरण से सीखने की क्षमता के लिए जाने जाते हैं। और अंगूटान की तीन जीवित प्रजातियां मानी जाती हैं और तीनों गंभीर रूप से संकटग्रस्त हैं। जंगलों की कटाई, प्राकृतिक आवास का खत्म होना और अवैध वन्य जीवन व्यापार इनके अस्तित्व के लिए बड़े खतरे हैं। ऐसे में कम उम्र के पांच औरंगटान का एक साथ इस तरह भारत के जंगल में मिलना, वन्य जीव संरक्षण के लिहाज से बेहद गंभीर सवाल खड़े करता है। अगर इनके पीछे सच में अवैध वन्य जीव व्यापार का नेटवर्क है तो मामला सिर्फ पांच जानवरों तक सीमित नहीं हो सकता। फिलहाल पांचों औरंगोटान वन विभाग की निगरानी में है। उनकी मेडिकल जांच की जा रही है और उनके स्वास्थ्य, उम्र और अन्य जरूरी पहलुओं का आकलन किया जा रहा है। इसके बाद उन्हें कहां रखा जाएगा इस पर फैसला लिया जाएगा। नंदन कानन जूलॉजिकल पार्क में स्थानांतरण की संभावना भी सामने आई है। लेकिन अंतिम फैसला जांच और मेडिकल प्रक्रिया के बाद होगा। साथ ही इलाके में निगरानी बढ़ाई जा रही है और यह भी देखा जा रहा है कि कहीं आसपास ऐसे और वन्य जीव तो मौजूद नहीं है। पुलिस, वन विभाग और डब्ल्यूसीसीबी जैसी एजेंसियां मिलकर इस रहस्य को सुलझाने की कोशिश कर रही हैं।

बालासोर के जंगल में मिले यह पांच औरंगुटान देखने में भले ही लोगों के लिए कोतूहल का विषय हो, लेकिन इनके पीछे छिपी कहानी अगर वन्य जीव तस्करी से जुड़ी निकली तो यह बेहद गंभीर चिंता की बात होगी। क्योंकि जंगल किसी विदेशी और दुर्लभ जानवर को छिपाने की जगह नहीं है और वन्य जीव कोई सामान नहीं जिसे एक देश से दूसरे देश तक पहुंचाकर कहीं भी छोड़ दिया जाए। इन पांचों का भारत तक पहुंचना भी एक पहेली है और जांच पूरी होने तक किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। उम्मीद यही होनी चाहिए कि जांच सिर्फ यह पता लगाने तक सीमित ना रहे कि ये पांचों यहां कैसे पहुंचे बल्कि उन लोगों तक भी पहुंचे जिन्होंने अगर सच में इन्हें उनके प्राकृतिक आवाज से निकालकर अवैध तरीके से कहीं पहुंचाया है तो ऐसा क्यों किया और इसके पीछे कौन है? क्योंकि किसी वन्य जीव की आजादी छीनकर उसे दुनिया के किसी भी कोने में छोड़ देना रोमांच नहीं वन्य जीवों के साथ अन्याय है। आप इस पर क्या कुछ कहेंगे हमें कमेंट करके जरूर बताएं। मैं हूं अंशिका चौहान। देखते रहिए N 24 डिजिटल निष्पक्ष मतलब N 24

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