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क्यों देवानंद ने की थी राजेश खन्ना के सुपरस्टार बनने की भविष्यवाणी? वजह जानकर होगी हैरानी।

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जब देवानंद ने राजेश खन्ना का हाथ पकड़ कर कहा घर जाओ और सो जाओ आराम से सो जाओ। तुम कल के सुपरस्टार बनने वाले हो। आज की कहानी सिर्फ एक फिल्म की नहीं है बल्कि उस रात की कहानी है जब हिंदी सिनेमा का इतिहास बदल गया।

एक तरफ थे उस दौर के सबसे बड़े रोमांटिक स्टार देवानंद जिनका स्टाइल मुस्कान और स्क्रीन प्रेजेंस लाखों युवाओं की पहचान बन चुकी थी। और दूसरी तरफ थे एक ऐसे युवा अभिनेता जो अभी तक सिर्फ कुछ फिल्मों में नजर आए थे। नाम राजेश खन्ना। उस रात किसी को अंदाजा नहीं था कि अगले कुछ महीनों में यही युवा भारतीय सिनेमा का पहला सुपरस्टार बन जाएगा। और सबसे पहले यह बात अगर किसी ने पहचानी तो वह थे देवानंद। वो शाम जिसने इतिहास बदल दिया।

साल 1969 मुंबई का मशहूर ओपेरा हाउस निर्देशक शक्ति सामंता अपनी नई फिल्म आराधना की स्पेशल स्क्रीनिंग रख रहे थे। फिल्म पूरी हो चुकी थी लेकिन असली फैसला अब दर्शकों के हाथ में था। फिल्म इंडस्ट्री के कई बड़े कलाकार बुलाए गए थे। उनमें देवांद भी शामिल थे। कहा जाता है कि मेहमानों के स्वागत की जिम्मेदारी खुद राजेश खन्ना ने संभाली थी।

वह हर मेहमान को उनकी सीट तक छोड़ने जा रहे थे। लेकिन उनके चेहरे पर मुस्कान जितनी थी अंदर उतनी ही घबराहट भी थी क्योंकि उन्हें मालूम था कि अगर यह फिल्म चल गई तो जिंदगी बदल जाएगी और अगर नहीं चली तो शायद एक और संघर्ष शुरू होगा।

फिल्म शुरू हुई लेकिन राजेश खन्ना अंदर नहीं बैठे। एक दिलचस्प बात कई संस्मरणों में मिलती है कि जब स्क्रीनिंग शुरू हुई राजेश खन्ना पूरे समय थिएटर के भीतर आराम से फिल्म देखने नहीं बैठे। वो बार-बार बाहर जाते, गेट के पास खड़े हो जाते और इंटरवल में लोगों के चेहरे पढ़ते। उन्हें कहानी से ज्यादा लोगों की प्रतिक्रिया में दिलचस्पी थी।

कौन मुस्कुरा रहा है? कौन भावुक है? कौन गाने गुनगुना रहा है? यही उनकी असली परीक्षा थी। वह चेहरे के एक्सप्रेशनंस को पढ़ रहे थे। और फिर आए देवानंद। फिल्म खत्म हुई। एक-एक करके सभी कलाकार बाहर आने लगे। सबने शिष्टाचार निभाया। बधाई दी। लेकिन तभी देवानंद सीधे राजेश खन्ना के पास पहुंचे। उन्होंने उनका हाथ पकड़ा और कुछ पल उनकी आंखों में देखा। और फिर मुस्कुराते हुए कहा यंग मैन गो होम एंड स्लीप। यू हैव डन अ वंडरफुल जॉब। यू आर गोइंग टू गो अ लॉन्ग वे इन दिस इंडस्ट्री।

यह सिर्फ तारीफ नहीं थी। यह भविष्यवाणी थी। और इतिहास गवाह है कि यह भविष्यवाणी सही साबित हुई। लेकिन क्या किसी ने सोचा था कि आराधना बनने तक भी फिल्म कई मुश्किलों से गुजरेगी? बहुत कम लोग जानते हैं कि फिल्म की शुरुआत में कहानी कुछ अलग दिशा में थी। शक्ति सामंता एक ऐसी प्रेम कहानी बनाना चाहते थे जिसमें भावनाएं हो, संगीत हो और त्याग भी हो। लेकिन फिल्म का सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब दोहरी भूमिका का विचार सामने आया।

डबल रोल का। राजेश खन्ना ने पिता और बेटे दोनों के किरदार निभाए और यही फैसला फिल्म की पहचान बन गया। शर्मिला टैगोर फिल्म की हीरोइन बनेंगी और उनके बनने की कहानी भी बहुत दिलचस्प है। फिल्म की नायिका के लिए शर्मिला टैगोर को चुना गया। उस समय वह पहले से एक स्थापित एक्ट्रेस थी। कई फिल्में उनकी आ चुकी थी जिनमें कुछ हिट भी रही।

राजेश खन्ना भी संघर्ष कर रहे थे। लेकिन कैमरे के सामने दोनों की केमिस्ट्री इतनी स्वाभाविक लगी कि आज भी उसे हिंदी सिनेमा की सबसे यादगार जोड़ियों में गिना जाता है। राजेश खन्ना के साथ-साथ यह फिल्म किशोर कुमार के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण थी। आराधना सिर्फ राजेश खन्ना की जिंदगी नहीं बदलती।

इस फिल्म ने किशोर कुमार के करियर को भी एक नई ऊंचाई दी। हालांकि फिल्म के संगीतकार एसडी बर्मन थे लेकिन रिकॉर्डिंग के दौरान उनकी तबीयत खराब हो गई। संगीत संयोजन में उनके बेटे आर डी बर्मन ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। रूप तेरा माना मेरे सपनों की रानी कब आएगी तू या कोरा कागज था यह मन मेरा।

इन गीतों ने इतिहास रच दिया। और इसके बाद तो किशोर कुमार राजेश खन्ना की आवाज बन गए। मेरे सपनों की रानी कब आएगी तू यह गाना बहुत मशहूर हुआ और शायद आपको मालूम ना हो कि दार्जिलिंग की टॉय ट्रेन वाला यह सीन जिसमें शर्मिला टैगोर ट्रेन में बैठी हैं और राजेश खन्ना जीप में उनका पीछा करते हैं उसे हिंदी फिल्मों के सबसे प्रतिष्ठित रोमांटिक सींस में गिना जाता है और दिलचस्प बात यह है कि शूटिंग बहुत सीमित समय में हुई थी और दोनों ने यह सीन अलग-अलग अलग शूट किए थे। यानी कि राजेश खन्ना का सीन अलग शूट हुआ और शर्मिला टैगोर का अलग।

कई शॉट चलते वाहन के साथ फिल्माए गए। आज के दौर की तरह ना तो तब ड्रोन थे ना डिजिटल कैमरे। लेकिन फिर भी अगर आप इस सीन को देखेंगे तो लगेगा कि दोनों साथ-साथ हो रहा है। और ऐसे ही एक गाना है रूप तेरा माना। यह सिर्फ एक टेक में हुआ और फिल्म इतिहास का शायद सबसे चर्चित किस्सा इस गीत का ही है। रूप तेरा माना यह पूरा गाना लगभग एक लंबे सिंगल टेक में फिल्माया गया। कैमरा लगातार चलता रहा। कलाकारों की टाइमिंग, लाइटिंग, कैमरा मूवमेंट सब कुछ एक साथ। उस दौर में यह बहुत कठिन तकनीकी उपलब्धि मानी जाती है।

इस फिल्म के साथ ही सुपरस्टार का जन्म हुआ। आराधना रिलीज हुई और फिर जो हुआ वह पहले कभी नहीं हुआ था। सिनेमा हॉल के बाहर लंबी कतारें, ब्लैक में टिकट। राजेश खन्ना की तस्वीरों पर लड़कियों की लिपस्टिक के निशान मिलने लगे। उनकी कार पर लोगों की भीड़ इस कदर उमड़ती कि जब कार के पास से भीड़ हटती तो उस कार पर लिपस्टिक के निशान होते।

उनकी कार की धूल से मांग भरने की कहानियां भी अब आम होने लगी। हालांकि इन किस्सों का कुछ हिस्सा समय के साथ किमवदंती का रूप ले चुका है। लेकिन इसमें कोई संदेह नहीं कि उनकी लोकप्रियता अभूतपूर्व थी। 1969 से 1971 के बीच उन्होंने लगातार कई सफल फिल्में दी और हिंदी सिनेमा में स्टारडम का एक नया मानक सेट कर दिया। राजेश खन्ना कई इंटरव्यूज में स्वीकार कर चुके थे कि अभिनय के शुरुआती दिनों में वह देवनंद के स्टाइल से बहुत प्रभावित थे।

देव साहब के चलने का अंदाज, डायलॉग बोलने का तरीका, हल्की मुस्कान सब में कहीं ना कहीं देवानंद की छाप दिखाई देती थी। लेकिन बाद में राजेश खन्ना ने अपनी एक अलग शैली अपनाई। भीमी आवाज, आंखों से अभिनय और गर्दन को हल्का झुकाकर डायलॉग बोलने का उनका अंदाज यह उनकी पहचान बन गया। शक्ति सामंता को विश्वास था कि राजेश खन्ना में कुछ अलग है। सोनू ने जोखिम उठाया और वही जोखिम भारतीय सिनेमा के सबसे बड़े फैसलों में बदल गया। बाद में इसी जोड़ी ने कटी पतंग, अमर प्रेम जैसी यादगार फिल्में भी दी।

कभी-कभी इतिहास बदलने के लिए सिर्फ एक फिल्म काफी ही होती है। और कभी-कभी सिर्फ एक वाक्य देवनंद का वो एक वाक्य यंग मैन घर जाओ और सो जाओ। आज भी भारतीय सिनेमा के सबसे यादगार आशीर्वादों में गिना जाता है। उस रात एक वरिष्ठ सितारे ने एक नए सितारे के भीतर छिपे सूरज को पहचान लिया था और अगले कुछ वर्षों में वह सूरज इतनी तेजी से चमका कि भारतीय सिनेमा ने पहली बार किसी अभिनेता के लिए एक नया शब्द गढ़ा सुपरस्टार।

यही थे राजेश खन्ना और यही थी आराधना की कहानी। जिसने सिर्फ एक फिल्म नहीं बल्कि हिंदी सिनेमा का इतिहास बदल दिया।

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