यह चिमनियां देख रहे हैं आप? यह चिमनियां कभी नहीं रुकती। अंदर प्रोडक्शन चलता रहता है। मुनाफा बढ़ता रहता है। लेकिन इनसे जो निकलता है पीएम 2.5, SO2, फ्लैश यह जाता है उन गांव में, उन लोगों के फेफड़ों में जिनका इन प्रोडक्शन से कोई लेना देना नहीं है।
और इस जहरीली हवा में हर साल लाखों लोगों की उम्र 5 साल तक घट रही है। यहां के लोग यहां की नदियों को कैंसर रिवर बुलाते हैं। यहां के लोगों ने इस जहर से बचने का एक ही रास्ता निकाला। माइग्रेशन यानी पलायन क्योंकि आसपास के लोग, गांव के लोग अपनी जमीन छोड़कर जा रहे हैं। अपना घर बार छोड़कर जा रहे हैं।
क्योंकि यहां रहने का मतलब है बीमारी और मौत। इन बंद घरों के पीछे एक कहानी है। वो परिवार जो कभी यहां रहते थे वो ये गांव छोड़ के चले गए। क्यों गए? क्या शहर में या किसी दूसरे गांव में उन्हें कोई बेहतर मौका मिला? कोई अच्छी अपॉर्चुनिटी मिली? नहीं।
इसका जवाब है नहीं। वो इसलिए गए क्योंकि इस गांव में रहना हो गया था। एक महीना हो गया। एक महीना हो गया। क्यों छोड़े भाई साहब? आप भी देख लो यहां क्या रहने के लिए वातावरण है क्या? जल खराब हो गया और वायु प्रदूषण देख लो। मैं बीमार आदमी हूं। तो मैंने बहुत संघर्ष किया।
कई बार सोचा मीटिंग में भी गया कि भाई कोई समाधान हो। जब देखा कोई समाधान नहीं हो रहा तो फिर मैंने यहां से पलायन करना ही सही समझा। मुझे एक महीना हो गया जाए और बहुत बढ़िया आनंद आ रहा है। यहां पर हूं। बस इतना ही कहूंगा कि इसमें कुछ नहीं होगा। आप भी मेहनत कर रहे हैं।
गांव वाले भी हैं, बेचारे बोल रहे, भागदौड़ कर रहे हैं। पर मैं लिख के दे सकता हूं इसमें कुछ नहीं होगा। कोई उम्मीद नहीं है आपको। उम्मीद का मतलब ही सवाल ही पैदा नहीं होता। भाई साहब यहां का जीवन इतना खराब हो गया कि हम ना तो खुली हवा में सो सकते हैं, ना बैठ सकते हैं, ना बात कर सकते हैं।
अगर खेत में काम करने जाएंगे तो हमें सांस नहीं आता। इसके अलावा जो है एक चीज और है कि यहां गंदे नाले हैं दो तीन उनमें रात में इतना प्रदूषित जल ये प्रवाहित करते हैं उन हां नालों में प्रदूषित जल इतना प्रवाहित करते हैं कि उसमें जो है ना तो कोई वाटर लेवल भी खत्म मेरे ठीक पीछे पेपर मिल है और देखिए यहां पे हवा के साथ-साथ पानी में किस तरह जहर घोला जा रहा है और यह वही पानी है जो इन खेतों के नीचे जा रहा है। यह वही पानी है जो इस गांव के पूरे गांव के नलों के नीचे है। वही पानी कुछ लोग इसे फ़िल्टर करके पीते हैं। कुछ ऐसे ही पीते हैं जिनके पास नहीं है।
साधन वो ऐसे-ऐसे ही पीते हैं। ऐसे ही नहाते हैं इसमें। तो देखिए यह इतना बड़ा स्कैम है कि मैं अभी एक पाइप पे खड़ा हूं और हमारे साथ योगेश जी हैं। योगेश जी जरा समझाइए कि ये जो है पानी ये बिल्कुल पेपर मिल के अंदर से आ रहा है। ये पानी जो है पेपर मिल के अंदर से आ रहा है और हर पेपर मिल के सामने जो है अंदर से दो पाइप तीन पाइप जो है निकले हुए हैं। और उसमें जो है दिन में तो थोड़ी मात्रा में प्रदूषित आता है ।
लेकिन रात में तो पूरी रात जो है इनमें प्रदूषित जल पूरी तरह से प्रवाहित होता है। अच्छा सर मेरे सामने जो ढेर है ये किस चीज का ढेर है जरा बताएंगे और उस बगल में कचरा जो रखा हुआ है वो क्या है जो कचरा है ये गाजीपुर बॉर्डर से दिल्ली से और आपका जो है पंजाब से देहरादून से मुरादाबाद से लखनऊ से इतनी इतनी दूर से ये कचरा जो है ईंधन के रूप में आ रहा है जिसे ये आरडीएफ का नाम दे रहे हैं।
लेकिन ये नहीं ये टोटल नगर पालिका का कचरा है गीला भी है और इसमें कुत्ते बिल्ली और बहुत सी ऐसी चीजें हैं इलेक्ट्रॉनिक सामान सामान भी इसमें है। वो सारा का सारा ये ईंधन के रूप में जला रहे हैं।