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क्या आसिम मुनीर मुसलमान नहीं है? तो फिर वह इस्लाम विरोधी काम क्यों कर रहा है?

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जो चीज इस्लाम में हराम मानी जाती है वही अब पाकिस्तान की मजबूरी बन गई है। जी हां, एक ऐसा देश जो खुद को इस्लामिक गणराज्य कहता है। जहां आम मुस्लिम नागरिकों के लिए शराब पूरी तरह प्रतिबंधित है। वहीं अब देश दुनिया को शराब बेचने की तैयारी कर रहा है। आर्थिक संकट से जूझ रहा पाकिस्तान। कर्ज के बोझ तले दबा पाकिस्तान अब अपने सिद्धांतों और हकीकत के बीच फंसा नजर आ रहा है। करीब 50 साल बाद पाकिस्तान ने एक बड़ा यूटर्न लिया है।

देश की सबसे पुरानी शराब कंपनी मुरी बैबरी को अब शराब निर्यात की अनुमति मिल गई है। तो सवाल यह है क्या यह सिर्फ आर्थिक मजबूरी है या सिर्फ पाकिस्तान अपने ही बनाए नियमों से समझौता कर रहा है? तो आखिर इस्लाम में शराब को हराम क्यों माना जाता है? आइए समझते हैं यह पूरी कहानी। नमस्कार, मैं हूं आपके साथ गरिमा शर्मा और आप देख रहे हैं भारत फैक्ट्स। [संगीत] [संगीत] पाकिस्तान इस वक्त अपने सबसे बड़े आर्थिक संकटों में से एक से गुजर रहा है। विदेशी कर्ज गिरती अर्थव्यवस्था और बढ़ती महंगाई ने सरकार को ऐसे फैसले लेने पर मजबूर कर दिया है जो पहले शायद सोचे भी नहीं गए हो। इसी कड़ी में करीब 160 साल पुरानी कंपनी मुरी बेबरी को सरकार ने शराब निर्यात की इजाजत दे दी है। अप्रैल 2026 में कंपनी ने ब्रिटेन, जापान, पुर्तगाल और थाईलैंड जैसे देशों को बियर और शराब बेचनी शुरू कर दी है। लेकिन यहां एक दिलचस्प और विरोधाभास सी बात है।

पाकिस्तान के अंदर मुस्लिम नागरिकों के लिए शराब आज भी पूरी तरह प्रतिबंधित है। सिर्फ गैर मुस्लिम और विदेशी नागरिक ही लाइसेंस के तहत शराब खरीद सकते हैं। ऐसे में चलिए जानते हैं कि इस्लाम में शराब हराम क्यों है। इस्लाम में शराब को हराम यानी प्रतिबंधित माना गया है। इसके [संगीत] पीछे कई धार्मिक और सामाजिक कारण है। पहली वजह है कुरान में स्पष्ट मनाही। इस्लामिक मान्यता के अनुसार शराब इंसान की सोच और समझ को प्रभावित करती है और उसे सही गलत का फर्क समझने से रोकती है। दूसरा कारण नशा और नियंत्रण खोना। शराब पीने से इंसान अपने व्यवहार पर नियंत्रण खो सकता है। जिससे हिंसा गलत फैसले और सामाजिक समस्याएं बढ़ सकती हैं। तीसरी वजह समाज पर नकारात्मक असर। इस्लाम एक अनुशासित और संतुलित समाज की बात करता है। जहां नशे जैसी चीजें सामाजिक बुराइयों को जन्म देती हैं।

इसीलिए पाकिस्तान जैसे इस्लामिक देश में 1977 में ही तत्कालीन प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो ने शराब पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया था। आज का बदलता पाकिस्तान। अब करीब 50 साल बाद वही पाकिस्तान शराब को एक्सपोर्ट कर [संगीत] रहा है। कंपनी का कहना है कि वह उन देशों को टारगेट कर रही है जो इस्लामिक देशों के संगठन ओआईसी का हिस्सा नहीं है। यानी अंदर हराम बाहर बिजनेस। यही है विरोधाभास। जो आज पाकिस्तान की सियासत और समाज दोनों को सवालों के घेरे में ला रहा है और दिलचस्प बात यह है कि यह ब्रेवरी पाकिस्तान के सेना प्रमुख के आवास के सामने स्थित है। ऐसे में अब सवाल उठता है कि क्या यह सिर्फ आर्थिक मजबूरी है या फिर एक सोची समझी रणनीति? पाकिस्तान का यह फैसला सिर्फ एक व्यापारिक कदम नहीं है बल्कि यह उन दबाव की कहानी है जहां आर्थिक संकट धार्मिक [संगीत] सिद्धांतों पर भारी पड़ता दिखाई देता है।

एक तरफ इस्लाम में शराब पूरी तरह हराम है। दूसरी तरफ उसी शराब से विदेशी मुद्रा कमाने की कोशिश। यह दोहरी नीति है या मजबूरी? क्या आने वाले समय में पाकिस्तान अपने अंदर ही नियम बदल सकता है या फिर सिर्फ बाहर के लिए कारोबार। अंदर के लिए कानून वाला मॉडल रहेगा। फिलहाल इतना तो तय है जब अर्थव्यवस्था संकट में होती है तो सिद्धांत भी अक्सर समझौते की मेज पर आ [संगीत] जाते हैं। आज के भारत फैक्ट्स में इतना ही। आप अपनी राय हमें कमेंट्स में जरूर बताएं। वीडियो पसंद आए तो [संगीत] लाइक, शेयर और india.com को सब्सक्राइब करना ना भूलें। अब आप जहां भी हैं वहीं से खबर भेज सकते हैं। आपके आसपास कुछ घट रहा है या कोई खास बात? तो बस अपना मोबाइल उठाइए और पिन न्यूज़ के ऐप पर शेयर कर दीजिए।

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