कभी-कभी एक चमकता हुआ सितारा अचानक इस तरह टूट जाता है कि पीछे सिर्फ सवाल रह जाते हैं। एक ऐसी शख्सियत जिसने अपने चेहरे की मासूमियत से लोगों को हंसाया, अपने दर्द से रुलाया और अपनी अदाकारी से इतिहास लिख दिया। लेकिन क्या हो जब उसी कहानी का अंत एक ऐसे रहस्य में बदल जाए जिसका जवाब आज तक [संगीत] पूरी तरह सामने ना आया हो। एक होटल का कमरा, एक बंद दरवाजा, कुछ मिनटों की खामोशी और फिर एक ऐसी खबर जिसने पूरे देश को हिला दिया। सब कुछ सामान्य था, खुशियां थी, जश्न था, [संगीत] भविष्य के सपने थे। फिर ऐसा क्या हुआ कि कुछ ही पलों में सब खत्म हो गया। क्या यह सिर्फ एक हादसा था? या फिर उस रात कुछ ऐसा हुआ, जिसे कभी पूरी तरह बताया ही नहीं गया। आज की इस कहानी में हम सिर्फ एक सुपरस्टार की जिंदगी नहीं बल्कि उस रात के हर पहलू को समझने की कोशिश करेंगे। तैयार हो [संगीत] जाइए क्योंकि आगे जो आप जानने वाले हैं वह सिर्फ एक कहानी नहीं बल्कि एक अनसुलझा एहसास है। एक ऐसी कहानी जो सिर्फ एक स्टारडम तक सीमित नहीं रही [संगीत] बल्कि एक मिसाल बन गई। वो लड़की जिसने बचपन में कैमरे के सामने कदम रखा
और अपनी मासूमियत, टैलेंट [संगीत] और मेहनत से इंडस्ट्री की सबसे चमकदार सितारा बन गई। 80 और 90 के दशक में उनकी हर फिल्म सुपरहिट होती थी और वे देश की सबसे ज्यादा फीस लेने वाली एक्ट्रेस बनी। लेकिन फिर एक दिन एक [संगीत] खबर आई जिसने सबको चौंका दिया। उनकी अचानक मौत। क्या हुआ था उस रात? क्या यह एक हादसा था या कुछ और? उनकी जिंदगी जितनी शानदार थी, उनकी मौत उतनी ही रहस्यमई। आज हम बात करेंगे उस सुपरस्टार की जिनकी अदाकारी, मासूमियत और ग्रेस ने उन्हें बॉलीवुड की [संगीत] पहली फीमेल सुपरस्टार बना दिया। श्रीदेवी, 13 अगस्त 1963 को तमिलनाडु के मीनामपत्ती में जन्मी एक लड़की, जिसे पूरी दुनिया श्रीदेवी के नाम से जानने वाली थी। उनका असली नाम श्री अम्मा यंगर अयन था। एक साधारण मिडिल क्लास परिवार जहां पिता अयन यंगर पेशे से वकील थे और मां राजेश्वरी यंगर एक [संगीत] ग्रहणी। घर में भाई-बहन थे। प्यार और अपनापन था। लेकिन इस बच्ची के सपने आम नहीं थे। बचपन से ही उनके अंदर कुछ खास था। कुछ अलग जो उन्हें बाकी बच्चों से अलग बनाता था। आमतौर पर मिडिल क्लास परिवारों में माता-पिता बच्चों से पढ़ाई में अव्वल आने की उम्मीद रखते हैं। डॉक्टर या इंजीनियर बनने का सपना देखते हैं। लेकिन श्रीदेवी के केस में कहानी थोड़ी अलग थी। यह लड़की हमेशा कुछ ना कुछ गुनगुनाती रहती है। उनकी [संगीत] मां अक्सर गौर करती कि वह गानों की लाइनें दोहराती हैं। डायलॉग बोलती हैं। अकेले में खुद से नाटक करती रहती हैं। [संगीत] कभी-कभी घर में किसी फंक्शन में तो कभी स्कूल के कल्चरल इवेंट्स में।
वो हमेशा सबसे आगे रहती। तू हमेशा डांस और एक्टिंग में लगी रहती है। पढ़ाई पर भी ध्यान दें। स्कूल में टीचर्स कभी-कभी टोक देती। लेकिन बाकी बच्चे और बाकी टीचर भी जानते थे कि इसमें कुछ अलग बात है। श्रीदेवी पढ़ाई में एवरेज थी। लेकिन जब बात स्टेज पर जाने की आती तो वह किसी और ही दुनिया में होती। चाहे डांस हो, सिंगिंग हो या ड्रामा वो हमेशा सेंटर स्टेज पर रहती। बाकी बच्चे जब झिझकते वो कॉन्फिडेंस के साथ आगे बढ़ जाती। उनके माता-पिता ने भी जल्दी समझ लिया कि यह लड़की कुछ बड़ा करने वाली है। उन्होंने ना सिर्फ श्रीदेवी को सपोर्ट किया बल्कि उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित भी किया। अगर तुझे इसमें खुशी मिलती है तो तुझे वही करना चाहिए। उनकी मां ने कहा और बस यह वो मोड़ था जब श्रीदेवी को यकीन हो गया कि उन्हें किस रास्ते पर चलना है। शायद किस्मत को भी पता था कि यह लड़की सिर्फ एक नाम नहीं बल्कि आने वाले सालों में इंडियन सिनेमा की सबसे चमकदार सुपरस्टार बनने वाली थी और यह सब तब की बात है जब श्रीदेवी सिर्फ 4 साल की थी। हां, सिर्फ 4 साल की। इतनी छोटी उम्र में जब बच्चे ठीक से बोलना सीख रहे होते हैं। एक फिल्म डायरेक्टर ने उनमें वो हुनर देख लिया जो आने वाले समय में उन्हें एक लेजेंड बनाने वाला था। जब डायरेक्टर ने उन्हें अपनी फिल्म में काम करने का ऑफर दिया तो उनके परिवार ने बिना किसी हिचकिचाहट के हामी भर दी क्योंकि जैसा कि मैंने पहले बताया उनके माता-पिता उनकी कला को समझते थे और उन्हें आगे बढ़ने के लिए पूरा सपोर्ट देते थे। अगर आपने श्रीदेवी की पुरानी फिल्में देखी हैं तो आपको भी एहसास होगा कि वह किसी भी किरदार को निभाने में कितनी शानदार थी। उनकी मासूमियत, एक्सप्रेशंस और नेचुरल एक्टिंग यह सब कुछ उन्हें बाकी कलाकारों से अलग बनाता था। श्रीदेवी ने अपने करियर की शुरुआत साउथ इंडियन सिनेमा से की थी और उनकी जबरदस्त एक्टिंग ने उन्हें वहां बहुत जल्दी पहचान दिला दी। फिर आया वो वक्त जब उन्होंने बॉलीवुड में एंट्री ली और सदमा मिस्टर इंडिया चांदनी जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्मों से पूरे देश को अपना दीवाना बना दिया। धीरे-धीरे उनका स्टारडम ऐसा बढ़ा कि हर फिल्म, हर डांस मूव, हर एक्सप्रेशन उन्हें एक ट्रू लेजेंड बना रहा था। उन्होंने अपने करियर में 300 से भी ज्यादा फिल्मों में काम किया और अपने शानदार परफॉर्मेंस के लिए कई प्रतिष्ठित अवार्ड्स जीते। नेशनल फिल्म अवार्ड, चार फिल्म फेयर अवार्ड्स, एक फिल्मफेयर लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड और तीन फिल्मफेयर साउथ अवार्ड्स। यह सिर्फ नाम के लिए नहीं थे बल्कि इस बात का सबूत थे कि उन्होंने इंडस्ट्री में अपनी अलग पहचान बनाई थी। श्रीदेवी सिर्फ एक एक्ट्रेस नहीं थी। वो एक इमोशन थी जिन्होंने अपने हर रोल से लोगों के दिलों में जगह बनाई और यही वजह थी कि उन्हें बॉलीवुड का फर्स्ट फीमेल सुपरस्टार कहा जाता है। अब तक हमने बात की उनके करियर की। लेकिन सवाल यह उठता है कि श्रीदेवी असल जिंदगी में कैसी थी? वह खूबसूरत थी, टैलेंटेड थी, सुपरस्टार थी और जाहिर [संगीत] है बहुत अमीर भी। लेकिन उनकी निजी जिंदगी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं थी। 1980 का दौर श्रीदेवी अपने करियर के पीक पर थी और उसी [संगीत] दौरान उनके और मिथुन चक्रवर्ती के अफेयर की खबरें मीडिया में आग की तरह फैल गई। कहा जाता है कि दोनों के बीच नजदीकियां कई फिल्मों में साथ काम करने के दौरान बढ़ी।
कुछ रिपोर्ट्स तो यह भी कहती हैं कि उन्होंने सीक्रेट कोर्ट मैरिज कर ली थी। अगर दो लोग बार-बार मिलते हैं साथ में काम करते हैं तो ऐसा होना लाजमी है। उस वक्त लोग यही कह रहे थे। लेकिन मुश्किल यह थी कि मिथुन पहले से शादीशुदा थे। जब यह खबरें बाहर आई, तो इसे एक बड़े स्कैंडल की तरह पेश किया गया। मिथुन और श्रीदेवी दोनों ही इन रूमर्स से बचने की कोशिश करते रहे। मीडिया से दूर रहे लेकिन पापा राजी की नजरें उन पर टिकी रहीं। कुछ सालों तक यह रिश्ता चला लेकिन फिर एक दिन सब खत्म हो गया। इसके बाद श्रीदेवी की जिंदगी में आए बोनी कपूर। शायद आप में से कुछ लोग सोच रहे होंगे कौन थे बोनी कपूर। लेकिन उस दौर में फिल्म इंडस्ट्री में उनका बड़ा नाम था। बतौर प्रोड्यूसर उन्होंने कई हिट फिल्में दी थी। लेकिन डायरेक्टर्स और प्रोड्यूसर्स के नाम अक्सर लाइमलाइट में नहीं आते। पर इस बार कहानी कुछ और थी। जैसे ही श्रीदेवी और बोनी कपूर का नाम जुड़ा हर जगह सिर्फ इसी की चर्चा होने लगी और फिर वही हुआ एक और स्कैंडल क्योंकि बोनी कपूर पहले से शादीशुदा थे। उनकी पत्नी मोना कपूर और दो बच्चे अर्जुन कपूर और अंशुला कपूर पहले से थे। लेकिन प्यार किसी रुकावट को नहीं देखता। बोनी कपूर और श्रीदेवी का रिश्ता आगे बढ़ता गया और 1996 में बोनी ने मोना को तलाक देकर श्रीदेवी से शादी कर ली। शादी के बाद उनकी दो बेटियां हुई। जानवी कपूर और खुशी कपूर। शादी के बाद श्रीदेवी ने अपने करियर से ब्रेक लिया। उन्होंने करीब 15 साल अपने बच्चों की परवरिश में लगा दी। एक सुपरस्टार जिसने इंडस्ट्री पर राज किया था उसने बिना किसी अफसोस के अपने परिवार को प्राथमिकता दी। फिर 2012 में जब उन्होंने इंग्लिश विंग्लिश से कमबैक किया तो लोगों ने देखा कि उनकी अदाकारी पहले से भी ज्यादा निखर चुकी थी। इसके बाद मॉम जैसी फिल्में उन्होंने ऐसा परफॉर्मेंस दिया कि हर कोई कह उठा। श्रीदेवी लौट आई हैं। जब उन्होंने इंग्लिश-विंग्लिश और फिर मॉम जैसी फिल्मों से कमबैक किया तो लोगों ने देखा कि वक्त ने उनके टैलेंट पर कोई असर नहीं डाला था। वह पहले से भी ज्यादा शानदार थी और यही वजह थी कि मॉम के लिए उन्हें बेस्ट एक्ट्रेस का नेशनल अवार्ड मिला। सब कुछ परफेक्ट लग रहा था। उनके पास एक खूबसूरत फैमिली थी। उनके प्यारे बच्चे थे। वो वही कर रही थी। जो उन्हें सबसे ज्यादा पसंद था। एक्टिंग और दिलचस्प बात यह थी कि उन्होंने तीन और फिल्में साइन कर ली थी। पर किसे पता था कि किस्मत के पास कोई और ही प्लान था। 18 फरवरी 2018 दुबई। श्रीदेवी अपनी छोटी बेटी खुशी कपूर के साथ अपने भतीजे मोहित मारवा की शादी अटेंड करने गई थी। यह कोई आम शादी नहीं थी बल्कि एक ग्रैंड डेस्टिनेशन वेडिंग थी जो यूएई के रास अलख खैमा में हो रही थी। इंडिया के टॉप बिजनेस टकूनस और बॉलीवुड सुपरस्टार्स वहां मौजूद थे। [संगीत] हर तरफ चकाचौंध थी। पार्टी थी, सेलिब्रेशन था और श्रीदेवी वह खुश नजर आ रही थी। एकदम चिर परिचित अंदाज में ग्रेसफुल और एलगेंट। 22 फरवरी सब कुछ नॉर्मल था। शादी की सभी रस्में पूरी हो चुकी थी। 22 फरवरी को सारे गेस्ट प्राइवेट जेट से इंडिया वापस लौट आए। लेकिन श्रीदेवी ने रुकने का फैसला किया। क्यों? क्योंकि उनकी बड़ी बेटी जानवी का 21वां जन्मदिन आने वाला था और वह उसके लिए शॉपिंग करना चाहती थी।
यही थी कि उन्होंने दुबई में थोड़ा और ठहरने का फैसला किया। श्रीदेवी की बहन भी वहीं रहती थी। तो उनका प्लान था कि वह कुछ दिन बहन के साथ बिताएंगी। फिर अचानक उन्होंने प्लान बदल दिया। एक पल के लिए सोचिए सब कुछ नॉर्मल था। बॉलीवुड स्टार्स के सोशल मीडिया पर वेडिंग की तस्वीरें आ रही थी। श्रीदेवी अपनी बेटी के लिए शॉपिंग करने की प्लानिंग कर रही थी पर फिर एक अनएक्सेक्टेड डिसीजन उन्होंने अचानक अपने पति बोनी कपूर को कॉल किया मैं यहां और रुकूंगा हैरान हुए होंगे लेकिन उन्होंने ज्यादा सवाल नहीं किए [संगीत] श्रीदेवी दुबई में अकेले रुकने का फैसला कर चुकी थी और यही वो अंतिम फैसला था जिसके बाद किसी ने सोचा भी नहीं था कि क्या होने वाला है आपको क्या लगता है अगर श्रीदेवी इंडिया लौट आती तो क्या आज कहानी कुछ और होती कमेंट में अपनी राय जरूर बताइए उन्होंने चेक इन किया जुमेरा एमरेट्स टावर्स होटल में एक बेहद लैविश और महंगा होटल। लेकिन इसमें कोई हैरानी की बात नहीं थी। आखिरकार वह बॉलीवुड की पहली महिला सुपरस्टार थी। पर एक चीज अजीब थी। कुछ तो अजीब था। श्रीदेवी को यूएई में शॉपिंग करनी थी। लेकिन 22 और 23 फरवरी को भी उन्होंने होटल से एक कदम तक बाहर नहीं रखा। ना तो वह बाहर गई ना ही होटल की सीसीटीवी में वह कहीं दिखी। यहां तक कि रूम का दरवाजा खोलते हुए भी नहीं। इसी दौरान उनके पति बोनी कपूर इंडिया पहुंच चुके थे। उन्होंने लखनऊ [संगीत] में इन्वेस्टर्स समिट में हिस्सा लिया और फिर मुंबई वापस लौट आए। लेकिन जैसे ही मुंबई पहुंचे उनके मन में ख्याल आया क्यों ना मैं श्रीदेवी को सरप्राइज़ दूं उन्हें लगा कि अगर वह बिना बताए दुबई पहुंचेंगे तो श्रीदेवी बहुत खुश हो जाएंगी 24 फरवरी एक ट्रिकी प्लान बोनी कपूर ने तुरंत फैसला लिया उन्होंने फ्लाइट पकड़ी और 24 फरवरी की शाम 6:01 पर दुबई पहुंचे फिर सीधे होटल गए रूम नंबर 2201 श्रीदेवी का कमरा दरवाजा खुला सरप्राइज़ श्रीदेवी चौंक गई उनकी आंखों में चमक आ गई अरे तुम यहां बोनी कपूर हंस दिए बस तुम्हें मिस कर रहा था। सोचा बिना बताए आ जाऊं। श्रीदेवी बहुत खुश हुई। फिर वह लिविंग रूम में बैठकर करीब 15 मिनट तक बातें करते रहे। बोनी कपूर का पूरा प्लान तैयार था। पहले शॉपिंग फिर एक रोमांटिक डिनर और फिर हम दोनों इंडिया वापस। श्रीदेवी ने एक्साइटमेंट में मुस्कुरा दिया। 6:30 पर बोनी कपूर ने उन्हें बताया कि वह शाम को डिनर के लिए बाहर जाने वाले हैं। श्रीदेवी ने अपने मास्टर बेडरूम के अटैच वॉशरूम में जाकर एक और ड्रेस पहनने का फैसला किया। वह चाहती थी कि वह परफेक्ट डिनर लुक में नजर आए। फिर वह वाशरूम में चली गई। बोनी कपूर लिविंग रूम में बैठे उनका इंतजार कर रहे थे, पर उन्हें नहीं पता था कि अब वह दोबारा श्रीदेवी को जिंदा नहीं देख पाएंगे। आपको क्या लगता है? क्या उस रात कुछ अजीब हुआ था? क्या यह सिर्फ एक एक्सीडेंट था? या कुछ [संगीत] और? अपनी राय कमेंट में बताइए। बोनी कपूर लिविंग रूम में बैठे टीवी ऑन कर चुके थे। स्क्रीन पर क्रिकेट मैच चल रहा था। बिल्कुल लाइव। इसका प्रूफ भी मौजूद है कि उस वक्त सच में मैच चल रहा था। पर बोनी कपूर के जहन में कुछ और ही चल रहा था। 15 [संगीत] मिनट, 20 मिनट, फिर 30 मिनट वो मैच देखते रहे। लेकिन श्रीदेवी अब तक बाहर नहीं आई थी। उन्होंने सोचा शायद थोड़ा वक्त लग रहा होगा तैयार होने में। वह परेशान नहीं हुए।
थोड़ा और इंतजार करने लगे। पर अब 45 मिनट बीत चुके थे। अब मामला अजीब लगने लगा। पहली घंटी कोई जवाब नहीं। बोनी कपूर ने लिविंग रूम के फोन से वॉशरूम में कॉल किया। एक [संगीत] बार, दो बार, पर श्रीदेवी ने फोन नहीं उठाया। फिर उन्होंने आवाज लगाई, कोई जवाब नहीं। अब बोनी कपूर को घबराहट होने लगी। वह [संगीत] उठे और वॉशरूम के दरवाजे तक पहुंचे। उन्होंने धीरे से दरवाज़े पर नॉक किया। श्री, कोई जवाब [संगीत] नहीं। उन्होंने फिर नॉक किया श्रीदेवी अब उनकी आवाज में बेचैनी थी पर अंदर अब खामोशी थी। दरवाजा खुला था और जो दिखा वह डरावना था। अब बिना सोचे उन्होंने झटके से दरवाजा खोल दिया। दरवाजा पहले से ही अनलॉक था और जैसे ही उन्होंने अंदर कदम रखा जो उन्होंने देखा वह उनके होश उड़ाने के लिए काफी था। वह बाप के पास ठिटक गए। श्रीदेवी का शरीर पानी में डूबा हुआ था। उनके पैर और सिर दोनों पानी के नीचे थे। वह बेहोश थी। बोनी कपूर कुछ समझ ही नहीं पाए। श्री उन्होंने घबरा कर पुकारा लेकिन कोई जवाब नहीं आया। उनका दिमाग सुन्न पड़ चुका था। आखिर अभी कुछ देर पहले तक तो सब ठीक था। अब यह क्या हो गया? आपको क्या लगता है? यह हादसा था या कुछ और? अपनी राय कमेंट में बताइए। बोनी कपूर के लिए यह सब कुछ किसी बुरे सपने जैसा था जिसे वह चाहकर भी रोक नहीं सकते थे। घबराए हुए उन्होंने सबसे पहले अपने करीबी दोस्त को फोन किया जो उसी होटल में ठहरे हुए थे। आवाज में घबराहट साफ झलक रही थी। तुरंत मेरे रूम में आओ। कुछ ही देर में दोस्त वहां पहुंचा और उसके बाद होटल स्टाफ को बुलाया गया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए होटल मैनेजमेंट ने तुरंत डॉक्टर को सूचित किया लेकिन जब तक डॉक्टर वहां पहुंचे बहुत देर हो [संगीत] चुकी थी। डॉक्टर ने बिना किसी संदेह के ऐलान कर दिया। श्रीदेवी अब इस दुनिया में नहीं रही। यह सुनते ही बोनी कपूर सन्न रह गए। जिस इंसान को कुछ ही मिनट पहले उन्होंने हंसते मुस्कुराते देखा था, वह अब हमेशा के लिए खामोश हो चुकी थी। डॉक्टर ने प्राथमिक जांच के आधार पर बताया कि मौत का कारण कार्डियाक अरेस्ट था। लेकिन जैसे ही यह खबर बाहर आई मामला और भी संवेदनशील हो गया। रात के करीब 10:00 बजे दुबई पुलिस और फॉरेंसिक टीम होटल पहुंच गई क्योंकि यह एक हाई प्रोफाइल केस था [संगीत] इसीलिए जांच तुरंत शुरू कर दी गई। श्रीदेवी जी के पार्थिव शरीर को पास के एक अस्पताल ले जाया गया जहां उन्हें मर्चरी में रखा गया। इधर बोनी कपूर को समझ नहीं आ रहा था कि वह यह खबर अपनी बेटियों और परिवार को कैसे दें? आखिरकार उन्होंने हिम्मत जुटाई और परिवार को फोन कर पूरी घटना बताई।
जैसे ही यह खबर मीडिया में आई, पूरे भारत में शोक की लहर दौड़ गई। अगले ही दिन श्रीदेवी के देवर संजय कपूर ने ट्वीट कर यह जानकारी साझा की कि उनका निधन कार्डियाक अरेस्ट की वजह से हुआ है। लेकिन अभी पोस्टमार्टम की रिपोर्ट आई भी नहीं थी और इसी बीच तमाम तरह की अटकलें लगाई जाने लगी। सोशल मीडिया और न्यूज़ चैनलों पर अलग-अलग थ्योरी सामने आने लगी। कुछ लोगों का कहना था कि श्रीदेवी जी की मौत उनकी प्लास्टिक सर्जरी के साइड इफेक्ट की वजह से हुई क्योंकि उन्होंने अपने करियर के दौरान कई बार कॉस्मेटिक सर्जरी कराई थी। हालांकि यह बॉलीवुड में आम बात थी, लेकिन कुछ लोग इसे उनकी मौत से जोड़कर देख रहे थे। दूसरी तरफ एक और सनसनीखेज थ्योरी सामने आई। क्या यह वास्तव में कार्डियाक अरेस्ट था या फिर कुछ और? क्या श्रीदेवी जी की मौत प्राकृतिक थी या फिर इसमें कोई साजिश थी। मीडिया, फैंस और दुनिया भर के लोग बेसब्री से पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रहे थे ताकि सच्चाई सामने आ सके। लेकिन तब तक सवालों की बारिश जारी थी और हर कोई अपने-अपने तर्क लेकर इस घटना को किसी ना किसी साजिश से जोड़ने में लगा हुआ था। आपका इस पर क्या विचार है? क्या आपको भी लगता है कि इसमें कुछ और भी था या यह सिर्फ एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना थी?
अपनी राय हमें कमेंट में जरूर बताएं। 24 फरवरी शनिवार की रात जब श्रीदेवी के निधन की खबर आई तो हर कोई सक्त में था। अगले दिन रविवार था और दुबई में सभी सरकारी विभाग बंद रहते हैं। इसका मतलब था कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में देरी होना तय था। यह देरी सिर्फ एक दिन की थी। लेकिन भारत में मीडिया और जनता के बीच चर्चाओं का तूफान खड़ा हो गया। हर तरफ [संगीत] अलग-अलग थ्योरी बनने लगी। अफवाहों का बाजार गर्म हो गया और सच्चाई की तलाश में सवालों की झड़ी लग गई। रविवार जैसे तैसे गुजरा और फिर आया सोमवार 26 फरवरी। जिस रिपोर्ट का सभी को इंतजार था वो आखिरकार सामने आई। लेकिन जो खुलासा हुआ उसने सब कुछ चौंका दिया। रिपोर्ट के मुताबिक श्रीदेवी की मौत कार्डियाक अरेस्ट से नहीं बल्कि बाथरूम में डूबने से हुई थी और सिर्फ इतना ही नहीं उनके शरीर में अल्कोहल के अंश भी पाए गए। इसका सीधा मतलब यह निकाला गया कि वह नशे की हालत में थी, होश में नहीं थी और इसी वजह से पानी में डूब गई। अब मामला पूरी तरह पलट चुका था। पहले डॉक्टर ने होटल में बताया था कि मौत का कारण कार्डियाक अरेस्ट है। लेकिन अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कुछ और ही सामने आ रहा था। सवाल उठने लगे। पहले डॉक्टर ने जो कहा था वह गलत था या फिर बाद में कुछ बदला गया। तीन दिन बीत चुके थे। लेकिन हालात अब भी साफ नहीं थे। जांच आगे बढ़ी और यह केस दुबई पुलिस से दुबई पब्लिक प्रोसीकटर डीपीपी के पास ट्रांसफर कर दिया गया। यह एक महत्वपूर्ण कदम था क्योंकि डीपीपी यूएई की न्यायिक प्रणाली का एक प्रमुख हिस्सा है
जो गंभीर मामलों की गहराई से जांच करता है। बिल्कुल वैसे ही जैसे भारत में क्राइम ब्रांच काम करती है लेकिन मामला इतना सीधा नहीं था। डीपीपी ने जांच पूरी होने तक श्रीदेवी का पार्थिव शरीर भारत भेजने से साफ इंकार कर दिया। उन्होंने कहा जब तक पूरी जांच खत्म नहीं हो जाती हम बॉडी को नहीं छोड़ सकते। यह फैसला भावनात्मक रूप से कठिन था। लेकिन जरूरी भी दुबई प्रशासन यह सुनिश्चित करना चाहता था कि कहीं यह मामला किसी साजिश का हिस्सा तो नहीं। क्या कोई फाउल प्ले हुआ? क्या मौत का असली कारण कुछ और था जिसे छिपाया जा रहा था। अब दबाव और बढ़ गया था। भारत की जनता बेसब्री से इंतजार कर रही थी। मीडिया में तमाम अटकलें लगाई जा रही थी और इस बीच दुबई पुलिस को भी जवाब देना था। सबसे पहला सवाल डॉक्टरों से किया गया। आपने तुरंत यह कैसे तय कर लिया कि मौत कार्डियाक अरेस्ट से हुई थी। क्या यह एक साधारण दुर्घटना थी या फिर इसमें कोई गहरी साजिश थी? सच्चाई क्या थी? जांच जारी थी और पूरा भारत जवाबों का इंतजार कर रहा था। जब बोनी कपूर ने पुलिस को जो स्टेटमेंट दिया वह वही था जो उन्होंने पहले अपने दोस्तों को बताया था। लेकिन सवाल यह था कि जब उन्होंने श्रीदेवी को बाथरूम में बेहोश पाया तो उन्होंने सबसे पहले अपने दोस्त को कॉल क्यों किया? पुलिस को क्यों नहीं? डॉक्टर को तुरंत क्यों नहीं बुलाया?
कुछ लोगों ने तो यहां तक कह दिया [संगीत] कि यही बात शक पैदा करती है। क्या वो इस घटना को दबाने की कोशिश कर रहे थे? क्या उन्हें किसी चीज का डर था या फिर वह खुद इस हादसे में शामिल थे? यह सिर्फ थ्योरीज थी, लेकिन इनका असर इतना ज्यादा था कि मीडिया और जनता इस मामले को और गहराई से देखने लगी। लोगों ने कयास लगाने शुरू कर दिए कि क्या यह एक प्लान मर्डर था? बहरहाल 27 फरवरी को दुबई अथॉरिटीज ने ऑफिशियल अनाउंस कर दिया कि श्रीदेवी की मौत एक हादसा थी। उन्होंने साफ कहा कि एक्सीडेंटल ड्राउनिंग की वजह से ही उनकी जान गई। पर यह ऐलान करने से पहले उन्होंने एक और बात क्लियर की। इस केस में कोई साजिश नहीं है। अब यह लाइन भी सोचने वाली थी। आखिर उन्हें ऐसा कहने की जरूरत क्यों पड़ी? वजह साफ थी। भारत में इस केस को लेकर इतनी सारी थ्योरीज बन चुकी थी कि उन्हें पब्लिकली इस बात को क्लियर करना पड़ा कि इसमें कोई साजिश नहीं थी। अब बात करते हैं दो थ्योरी की जो इस पूरे केस में उभरी। पहली यह कि श्रीदेवी ने मौत से पहले काफी मात्रा में अल्कोहल कंज्यूम किया गया और वह पूरी तरह नशे में थी।
इसी हालत में जब वह बाथ में गई तो खुद को संभाल नहीं पाई और डूब गई। दूसरी थ्योरी यह थी कि वह बाद में सो गई थी और इसी दौरान पानी में डूबने की वजह से उनकी मौत हो गई। पर इस दूसरी थ्योरी में एक बड़ा सवाल था। अगर कोई सोते हुए पानी में डूबेगा तो क्या वह अचानक नहीं जागेगा? आमतौर पर जब नाक में पानी जाता है तो इंसान घबरा कर उठ जाता है। पर श्रीदेवी के मामले में ऐसा कुछ नहीं हुआ। और जो चीज सबसे ज्यादा अजीब थी वो यह कि जब इन्वेस्टिगेशन टीम ने बाथरूम देखा तो वहां बाथ टब के बाहर एक भी पानी की बूंद नहीं थी। अब सोचने वाली बात यह थी कि अगर कोई डूब कर स्ट्रगल करता है तो पानी इधर-उधर जरूर बिखरेगा। लेकिन यहां ऐसा कुछ नहीं मिला। तो फिर यह कैसे हुआ? इन सभी सवालों के बावजूद दुबई पुलिस ने 27 फरवरी को अपने आधिकारिक श्रीदेवी की बॉडी को भारत भेजने में अभी और देरी हो रही थी क्योंकि कागजी कार्यवाही पूरी नहीं हुई थी। हर बीतते घंटे के साथ उनकी फैमिली की बेचैनी बढ़ रही थी।
एक तरफ वो अपने दुख से उभर नहीं पा रहे थे तो दूसरी तरफ यह लगातार खींचती जांच उन्हें और परेशान कर रही थी। पर एक सवाल अब भी हवा में था। क्या यह वाकई एक हादसा था? या फिर कुछ और? समय बीत चुका था लेकिन अब एक नई उम्मीद दिखी। इसी बीच बोनी कपूर की मुलाकात अशरफ से हुई। अशरफ जो केरल के रहने वाले थे, पिछले कई सालों से दुबई में बस चुके थे। जब वो लगभग 15 साल पहले यूएई आए थे, तो उन्होंने एक अहम चीज नोटिस की। अगर कोई भारतीय मजदूर या नागरिक यूएई में निधन हो जाए तो उसकी बॉडी को भारत वापस लाने में कई मुश्किलें आती थी। भारी-भरकम डॉक्यूमेंटेशन, लंबी कागजी कार्यवाही और कई तरह की सरकारी प्रक्रियाएं इस काम को बेहद जटिल बना देती थी। यही वजह थी कि अशरफ ने इसे अपना मिशन बना लिया। शुरू में उन्होंने भारतीय नागरिकों की मदद करनी शुरू की, लेकिन वक्त के साथ यह उनकी जिंदगी का मकसद बन गया।
इतने सालों में उन्होंने करीब 5,000 शवों को 30 38 देशों तक पहुंचाया। जब श्रीदेवी की फैमिली को यह पता चला तो उन्होंने भी अशरफ से मदद मांगी। 27 फरवरी की रात आखिरकार वह घड़ी आ गई जब श्रीदेवी की बॉडी को दुबई से मुंबई लाया गया। जैसे ही उनकी पार्थिव देह [संगीत] भारत पहुंची पूरा परिवार इकट्ठा हो गया। उनके करीबी दोस्त इंडस्ट्री के साथी और चाहने वाले भी वहां मौजूद थे। लेकिन इस सबके बावजूद लोगों के मन में सवाल अभी भी जिंदा थे। कई लोगों ने मांग की कि श्रीदेवी की बॉडी का भारत में दोबारा पोस्टमार्टम और विस्तृत जांच की जाए। पर ऐसा कभी नहीं हुआ। 28 फरवरी को श्रीदेवी के अंतिम संस्कार की रस्में पूरी की गई। यह सिर्फ एक अभिनेत्री का विदाई समारोह नहीं था बल्कि एक युग के अंत जैसा था। बॉलीवुड के बड़े सितारे, उनके करीबी दोस्त और हजारों की संख्या में फैंस सिर्फ श्रीदेवी की एक आखिरी झलक पाने के लिए वहां पहुंचे थे। यहां तक कि दुबई पब्लिक प्रॉसिकर डीपीपी के ऑफिशियल बयान के बाद भी कई लोग इस केस के नतीजे से संतुष्ट नहीं थे। खासकर भारत में इस मामले क