आर डी वर्मन आशा भोसले जी से छ साल छोटे थे। लेकिन दोनों को प्यार ऐसा था जैसे दोनों एक दूसरे को सात जन्मों से जानते हो। दोनों का म्यूजिक कनेक्शन भी सॉलिड था और दोनों की जोड़ी ने मिलकर हमारी फिल्म इंडस्ट्री को शानदार गाने दिए। जैसे पिया तू अब तो आजा दम मारो दम। चुरा लिया है तुमने। ने ओ मेरे सोनारे दो लफ्जों की है। लिस्ट एंडलेस है। इन दोनों ने मिलकर मल्टीपल लैंग्वेज में 840 से ज्यादा गानों पर साथ में काम किया था। और आज के इस एपिसोड में हम पंचम दा के साथ आशा जी की प्रेम कहानी के बारे में ही बात करेंगे। कब अपने से छ साल छोटे आर डी बर्मन से प्यार हुआ आशा भोसले जी को। क्यों आर डी बर्मन की जब डेथ हुई तो आशा भोसले ने उनका चेहरा देखने से मना कर दिया। और कैसे आर डी बर्मन की डेथ के बाद आशा भोसले पर इल्जाम लगा कि उन्होंने अपनी सास को ओल्ड एज होम में भेज दिया। [संगीत] आशा भोसले से पंचमदा की मुलाकात पहली बार ईयर 1956 में एक रिकॉर्डिंग स्टूडियो में हुई थी। आशा भोसले काम कर रही थी और थोड़ा बहुत नाम उनका फिल्म इंडस्ट्री में हो गया था।
पंचमदा 17 साल के ही थे और अपने पिता एसडी बर्मन के साथ वो म्यूजिक स्टूडियोज में घूमते थे। इसी दौरान जब उन्हें एक बार आशा भोसले रिकॉर्डिंग करते दिखी तो उन्होंने मौका नहीं छोड़ा और उनसे ऑटोग्राफ ले लिया एक फैन के तौर पर। तब उन्हें नहीं पता था कि आगे चलकर वो आशा भोसले के और भी बड़े फैन होंगे। आर डी बर्मन आशा भोसले के फैन से उनके लवर बने ईयर 1966 की फिल्म तीसरी मंजिल के गानों की रिकॉर्डिंग के दौरान जो गाने उन्होंने रिकॉर्ड किए थे उस दौरान आजा आजा मैं हूं प्यार तेरा ओ हसीना जुल्फो वाली। यह गाने थे तो फिल्म के लिए लेकिन यहीं से इन दोनों की प्रेम कहानी भी शुरू हुई और इसके बाद आर डी बर्मन ने आशा भोसले के साथ बहुत सारे गाने बनाए। दोनों का म्यूजिक टेस्ट बहुत मिलताजुलता था और शानदार म्यूजिक यह दोनों मिलकर क्रिएट कर रहे थे। आशा भोसले बड़ी सिंगर थी। आरडी बर्मन अपने पिता के अंडर काम कर रहे थे। आशा भोसले को वो पसंद करते थे लेकिन अपनी दिल की बात कहने से घबराते थे। यही वजह है कि दिल की बात वो बुके भेजकर कहने की कोशिश करते थे। आशा भोसले जिस भी स्टूडियो में रिकॉर्डिंग करती वहां पर वो एक बुके भिजवा देते बिना नाम का। आशा भोसले को इनिशियली तो लगा कि कोई पागल फैन है जो इस तरह से बुके भेज रहा है। लेकिन जब यह बुके बहुत बार आने लगे तो वो टेंशन में आ गई कि आखिर ऐसा फैन कौन है कि जिसे पता है
मैं किस स्टूडियो में किस टाइम रिकॉर्ड कर रही हूं कि यह उसी टाइम बुकके भेज देता है। फिर एक बार ऐसा हुआ कि आशा भोसले एक रिकॉर्डिंग कर रही थी और उस दिन भी एक बुके आया। मजरू सुल्तानपुरी के साथ म्यूजिक सेशन चल रहा था और सेशन के बीच में ही जब बुके आया तो आशा भोसले को बड़ा गुस्सा आ गया कि आखिर यह शख्स कौन है जो मुझे हर बार बुके भिजवा रहा है। तब मजरू सुल्तान पुरी ने आशा भोसले को रिवील किया और बताया कि यह बुकेज़ आर डी बर्मन भेजते हैं। आशा भोसले जी के लिए यह बात बहुत शॉकिंग थी और इधर आर डी बर्मन डर गए थे क्योंकि वह वैसे ही अपने दिल की बात कहने से डर रहे थे और बुके भिजवा रहे थे छुप-छुप कर। अब जब आशा भोसले को पता चल गया था कि आर डी बर्मन ही यह काम कर रहे हैं तो उन्हें डर था कि आशा भोसले का रिएक्शन क्या होगा। लेकिन आशा भोसले जो उस वक्त जिंदगी के टफ दौर से गुजर रही थी वो सिंगल थी। तीन बच्चों को पाल रही थी। म्यूजिक करियर अच्छा चल रहा था। लेकिन जिंदगी में एक प्यार करने वाले शख्स की कमी थी। वो शख्स जब उन्हें ऐसा क्रेजी लवर मिला तो वह भी अपने आप को रोक नहीं पाई और उन्होंने पंचमदा के इस प्रपोजल को एक्सेप्ट कर लिया। लेकिन वो प्यार ही किया जिसकी कोई कहानी ना हो। या फिर वो लव स्टोरी ही क्या जिसमें मुश्किलें ना हो। आर डी बर्मन और आशा भोसले की प्रेम कहानी में भी बहुत मुश्किलें थी। इन्हें अपना प्यार ऑफिशियल करने में बहुत मुश्किलों का सामना करना पड़ा। आर डी बर्मन ऑलरेडी मैरिड थे। हां, 1971 में उन्होंने डिवोर्स ले लिया था। लेकिन इसके बावजूद उनकी मुश्किलें आसान नहीं हुई थी। क्योंकि उनके पेरेंट्स कभी भी ऐसी लड़की को बहू के रूप में एक्सेप्ट नहीं करते जो ऑलरेडी मैरिड हो और तीन बच्चों की मां हो। इधर आशा भोसले की बात करें तो उन्होंने जब पहली शादी की थी 16 साल की उम्र में अपने से 20 साल बड़े आदमी से तभी उन्होंने अपने परिवार को नाराज कर दिया था। उसके बाद उनकी वो शादी जब फेल हुई और वो अपने तीनों बच्चों को लेकर मायके आई तब सोसाइटी में भी आशा भोसले को लेकर बहुत बातें हुई थी। हालांकि आशा भोसले ने उन बातों को बंद कर दिया
अपनी सक्सेस से। लेकिन अब एक बार फिर से आर डी बर्मन के साथ उनके चर्चे शुरू हो गए थे और आशा भोसले जो ऑलरेडी अपनी पर्सनल लाइफ में एक अब्यूसिव मैरिज देख चुकी थी और परिवार वाले भी उनके रिश्ते को लेकर काफी टेंशन में थे कि फिर से कहीं शादी में उनके साथ इस तरह की कोई गलत चीज ना हो जाए। यही वजह है कि परिवार भी एकाएक रिश्ते के लिए तैयार नहीं होता। हां, आरडी बर्मन और उनकी फैमिली बहुत ही रेपुटेड फैमिली थी। लेकिन आशा भोसले के पास्ट को देखकर परिवार हमेशा डरता रहा और बच्चों की भी चिंता थी कि शादी के बाद तीन बच्चों का क्या होगा। इसी बीच 1975 में आर डी बर्मन के पिता लेजेंड्री एसडी बर्मन साहब गुजर जाते हैं। आर डी बर्मन अकेले हो जाते हैं और उनके ऊपर अपनी मां मीरा की जिम्मेदारी आ जाती है। हालांकि उनकी मदर बहुत एक्सपर्ट थी। वो म्यूजिक की बहुत बड़ी जानकार थी और डांसर भी थी। जो काम आर डी बर्मन के पिता अधूरा छोड़कर गए थे मिली और अभिमान फिल्म का उसे पूरा करने में उनकी मदर ने ही उन्हें बहुत सपोर्ट किया। काम में तो मदर का सपोर्ट था लेकिन पर्सनल लाइफ में पिता की वजह से जो वॉइड हुआ था और वो इमोशनली जो ब्रेकडाउन हो गए थे उसे उस वक्त नर्चर किया आशा भोसले जी ने और यह वो टाइम था जब आशा भोसले और आरडी बर्मन का रिश्ता और ज्यादा स्ट्रांग हो गया। हालांकि आरडी बर्मन की मदर मीरा कभी भी आशा भोसले को पसंद नहीं करती थी एक बहू के रूप में क्योंकि वह नहीं चाहती थी कि उनका बेटा अपने से छ साल उम्र में बड़ी सिंगल तीन बच्चों की मदद से शादी करें। यही वजह है कि आशा भोसले आरडी बर्मन से उनकी म्यूजिक रिकॉर्डिंग
में तो मिलती थी लेकिन उनके घर पर जाना आशा भोसले को अलाउड नहीं था। हां, कभी कबभार अगर मदर घर पर नहीं होती तो आशा भोसले उन्हें जरूर घर पर विजिट करती। वरना मदर के सामने आशा भोसले कम ही जाया करती थी। ईयर 1980 में फाइनली मदर की इच्छाओं के खिलाफ जाकर आर डी बर्मन ने आशा भोसले के साथ शादी कर ली। यह शादी एक इंटिमेट अफेयर था। ज्यादा तामझाम नहीं हुआ। ना ही ज्यादा लोगों को बुलाया गया इस शादी में। चुपचाप तरीके से यह शादी कर ली गई। एक इंटरव्यू में आशा भोसले ने बताया था कि उनकी दूसरी शादी पर बहन लता ने कुछ भी रिएक्ट नहीं किया। वह चुप रही और चुपचाप देखती रही। आशा भोसले ने इस चुप्पी को एक्सेप्टेंस ही माना और उन्होंने मन में यह मान लिया कि दीदी इस रिश्ते से खुश है। अब बातें गानों की होती और बातें गानों के जरिए होती। कुछ इस तरह से म्यूजिक लव स्टोरी की शुरुआत हो गई और म्यूजिक भी बहुत अच्छा बनने लगा। इनफैक्ट आर डी बर्मन जिनकी पकड़ बंगाली फिल्म्स में भी थी उन्होंने आशा भोसले जी से कई बंगाली गाने भी गवाए और हिंदी गानों की तरह वो गाने भी उतनी ही सक्सेसफुल हुए। फिल्म इंडस्ट्री को एक कपल के रूप में बहुत शानदार म्यूजिक जोड़ी मिल गई थी। लेकिन इस जोड़ी को किसी की नजर लग गई। यही वजह है कि आशा भोसले ज्यादा वक्त पंचमदा के साथ नहीं बिता पाई। यह 1994 में जनवरी के महीने में जिस वक्त पंचमदा की उम्र 54 साल थी, उनकी अचानक से हार्ट अटैक की वजह से डेथ हो गई। इस खबर ने आशा भोसले को अंदर तक तोड़ के रख दिया।
क्योंकि उनकी जिंदगी में बड़ी मुश्किलों के बाद उन्हें प्यार मिला था और प्यार ऐसा कि जो खुद म्यूजिक को पसंद करता हो। आशा भोसले पंचमदा को मरा हुआ सोच ही नहीं सकती थी। यही वजह है कि जब पंचमदा का आखिरी समय आया और उनके पार्थिव शरीर को अंतिम संस्कार के लिए ले जाया जा रहा था तब आशा भोसले ने पंचमदा के आखिरी दर्शन करने से मना कर दिया। उन्होंने कहा कि मैं आर डी बर्मन को मरा हुआ नहीं देख सकती। मेरे लिए वह जिंदा ही था और जिंदा ही रहेगा। मैं उनको मरा हुआ कैसे मान लूं। मैं नहीं देख सकती। कहते हैं कि उस वक्त गुलजार साहब ने आशा भोसले को बहुत संभाला और वह बुरी तरह टूट गई थी। आर डी बर्मन तो चले गए लेकिन आर डी बर्मन की याद में आर डी बर्मन का जो बंगलो था सा क्रूज में वहां पर उनका एक म्यूजिक रूम था। उस म्यूजिक रूम को आशा भोसले जी ने वैसा का वैसा रखा। उसमें से कुछ भी चीज नहीं हिलाई। उसी घर में पंचमदा की मदद भी रहा करती थी। मीरा देवी। आशा भोसले को बहू के रूप में मीरा देवी ने कुछ खास एक्सेप्ट नहीं किया था। लेकिन मीरा देवी खुद भी बहुत बुरी तरह टूट गई थी। पहले अपने पति एसडी बर्मन को खोया और बेटे को 54 की उम्र में ही अपने सामने जाते देखा। उनकी तबीयत खराब रहने लगी और अब वो बेड रिडन हो गई। हालत कमजोर थी। मुश्किल से बैठ पाती थी। चलना तो दूर की बात। कहते हैं कि उस दौरान आशा भोसले ने अपनी सास को बहुत संभाला। हां आशा भोसले काफी बिजी रहा करती थी। उनके कॉन्सर्ट्स हुआ करते थे। उन्हें ट्रैवल करना पड़ता था। महीनों तक वो अब्रॉड में रहा करती थी। लेकिन उन्होंने पूरी व्यवस्था की हुई थी। उनके परिवार वाले आरडी बर्मन की मदद की देखरेख करते और इसके अलावा उन्होंने नर्सिंग स्टाफ भी रखा हुआ था जो 24 घंटे मीरा देवी का ख्याल रखता था। लेकिन 2007 में एक बहुत ही शॉकिंग खबर आई। यह खबर तब आई जब त्रिपुरा जहां की रॉयल फैमिली से बर्मन फैमिली बिलोंग करती है। वहां की गवर्नमेंट ने डिसाइड किया कि एसडी बर्मन साहब की 101वीं बर्थ एनिवर्सरी पर हम उनकी वाइफ मीरा देवी से एसडी बर्मन साहब की एक बुक ल्च कराएंगे।
उन्हें फैलेसिटेट करेंगे उन्हें फंक्शन में इनवाइट करके। तो त्रिपुरा की गवर्नमेंट ने मीरा देवी को कांटेक्ट करना शुरू किया। तो पता चलता है कि मीरा देवी तो उनके बंगलों पर है ही नहीं। वह तो कहीं और ही शिफ्ट कर दी गई है। फिर और जानकारी निकाली गई कि आखिर जो मीरा देवी चल नहीं सकती है। बिस्तर से उठ नहीं सकती है। वो अपने बंगलों को छोड़कर कहां चली गई? तो पता चला कि मीरा देवी को तो मुंबई के वाशी के शरण ओल्ड एज होम में शिफ्ट कर दिया गया है और पिछले कई महीनों से वो उसी ओल्ड एज होम में रह रही थी। यह खबर मीडिया में आते देर नहीं लगी और यह खबर आग की तरह फैल गई। कई लोगों ने सवाल खड़े किए कि मीरा देवी का अपना बंगलो है जहां पर वह अपने पति के साथ रहा करती थी। उस बंगलो से उन्हें ओल्ड एज होम में शिफ्ट करने की कहां जरूरत पड़ी? उंगलियां आशा भोसले पर भी उठी कि आर डी बर्मन के बाद आशा भोसले ने कहीं उनके बंगलों पर कब्जा करने के लिए तो उनकी मां को उस बंगलो से नहीं निकाला। जब मीडिया में सभी तरफ बहुत ज्यादा बातें होने लगी तो आशा भोसले के बेटे ने मीडिया में स्टेटमेंट दिया और बताया कि मीरा देवी को हमने जिस ओल्ड एज होम में डाला है पहली बात तो वहां पर भी वो नर्सिंग स्टाफ की निगरानी में है और वह फाइव स्टार जैसा ओल्ड एज होम है और उन्हें वहां पर इसलिए भेजा गया क्योंकि मेरी मदर डेढ़ महीने के लिए यूएस टूर पर गई है और घर पर उनकी देखरेख कौन करता यही वजह है
कि उन्हें ओल्ड एज होम में डाला गया। इधर मीडिया वाले जब ओल्ड एज होम पहुंचे पूछताछ करने तो कई सारी बातों का खुलासा हुआ। पहली चीज तो झूठी यह निकली कि भोसले फैमिली ने क्लेम किया था कि वह 45 दिनों से ही ओल्ड एज होम में हैं। तो ओल्ड एज होम से पता लगा कि पिछले 9 महीनों से उन्हें तो वहीं पर रखा गया है। और उनके साथ जो वहां पर रहने वाले दूसरे लोग थे उनका कहना था कि मीरा देवी बहुत वीक थी। ज्यादा सेंस में भी नहीं रहती थी। लेकिन इतना जरूर था कि वह यहां पर खुश नहीं थी। वो अपने घर जाना चाहती थी लेकिन वह किसी को निराश नहीं करना चाहती थी। इसीलिए उन्होंने कभी घर जाने की बात नहीं की। हालांकि जैसे ही मीडिया में यह बात आई तो एक दिन अचानक बिना किसी को बताए ओल्ड एज होम से मीरा देवी को फिर से उनके बंगलों में शिफ्ट कर दिया गया। लेकिन उस बंगलों में वो ज्यादा दिन नहीं रही। यह बात होगी सितेंंबर 2007 की और अक्टूबर 2007 में तो मीरा देवी की डेथ ही हो गई। पंचमदा का गुजर जाना और मीरा देवी का ओल्ड एज होम में पाया जाना इन दो बातों की वजह से आशा भोसले जी पर हमेशा सवाल खड़े किए गए। कई लोगों ने कहा कि पंचमदा से शादी होते हुए भी आशा भोसले अपनी अलग लाइफस्टाइल की वजह से उनसे अलग ही रहा करती थी। हां, दोनों का रिश्ता था। लेकिन जब पंचमदा की डेथ हो गई तो उसके तुरंत बाद आशा भोसले ने पंचमदा की हर एक प्रॉपर्टी को अपने कब्जे में लेने की कोशिश की।
जिसमें से एक लॉकर भी था पंचमदा का। इस लॉकर के लिए पंचमदा के मैनेजर ने दावा किया था कि पंचमदा ने विल में कहा है कि मेरा लॉकर मेरे मैनेजर की प्रेजेंस में ही खोला जाए। लेकिन पंचमदा की डेथ के कुछ समय बाद ही उस मैनेजर के पिता की भी डेथ हो गई। यही वजह है कि वो यह लॉकर खोल नहीं पाया। इस बीच अकॉर्डिंग टू मैनेजर आशा भोसले का मैनेजर पंचमदा के घर गया। उसने वहां से कई सारे डॉक्यूमेंट्स लिए। हालांकि मैनेजर को उसने बताया कि मैंने किताबें और कुछ पेपर्स ही लिए हैं। लेकिन वो डॉक्यूमेंट्स पंचमदा के पर्सनल डॉक्यूमेंट्स थे जिन्हें आशा भोसले ने कोर्ट में लगाया और कोर्ट से परमिशन ले ली पंचमदा के लॉकर को एक्सेस करने की। ऐसा दावा पंचमदा के मैनेजर ने किया। पंचमदा के मैनेजर ने उस दौरान कहा था कि मेरे पिता की डेथ के बाद जब मैं फिर से काम पर लौटा और पंचमदा के बैंक लॉकर को खंगालने गया तो अंदर सिर्फ ₹5 का सिक्का मिला।
मैं शॉक्ड हूं। मुझे शक है कि यह काम आशा भोसले का ही है। हालांकि भोसले परिवार ने कभी भी इन दावों पर रिएक्ट नहीं किया। दूसरी चीज जहां तक बात है मीरा देवी को ओल्ड एज होम में शिफ्ट करने की तो इसके पीछे भी मीडिया में कई दावे यह किए गए कि आशा भोसले के बेटे आनंद आर डी बर्मन के बंगलो में शिफ्ट होना चाहते थे क्योंकि वह अपने बेटे का एडमिशन उसी एरिया में करवा रहे थे और बंगलो में मीरा देवी के साथ उन्हें रहना गवारा नहीं था। यही वजह है कि बंगलों से मीरा देवी को ओल्ड एज होम में शिफ्ट किया गया। आशा भोसले का परिवार फिर उस बंगलो को यूज करने लगा। हालांकि आशा भोसले के परिवार ने तब कहा था कि मीरा देवी को रिहब में भेजा था। उनका अच्छा ट्रीटमेंट हो सके और वह फिर से ठीक हो सके इसके लिए हमने ओल्ड एज होम में भेजा था। आशा भोसले की लाइफ ऐसी ही रही है।