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मिथुन दा की असली संघर्ष कहानी जिसके सामने फिल्मी भी छोटी लगेगी!

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मिथुन दा के संघर्ष की कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं। करियर की शुरुआत में उन्होंने दुलाल गोहा की फिल्म दो अनजाने में केवल एक शॉट का रोल निभाया था। उस वक्त उनकी स्थिति ऐसी थी कि जब निर्माता ने उनसे मेहताने के बारे में पूछा तो मिथुन दा ने पैसे के बजाय सिर्फ कोलकाता जाने की हवाई टिकट मांगी। वह बस किसी तरह कोलकाता पहुंचकर दिग्गज निर्देशक मृणाल सेन से मिलना चाहते थे। जब वह मृणाल दास से मिले तो उन्होंने कहा कि उन्हें मिथुन दा की तस्वीरें पसंद आई है

और वह जैसा चेहरा ढूंढ रहे थे मिथुन दा वैसे ही दिखते हैं। लेकिन फिलहाल उन्होंने फिल्म बनाने का विचार छोड़ दिया है। इस शुरुआती निराशा के करीब दो-ती महीने बाद मिथुन दा को फिर से बुलावा आया। मृणाल सेन ने उनसे मुलाकात की और घोषणा की कि वह फिल्म बना रहे हैं

और मिथुन को मुख्य भूमिका के लिए चुन लिया गया है। उस ऐतिहासिक क्षण पर उन्हें साइनिंग अमाउंट के तौर पर मात्र ₹500 दिए गए। फिल्म की शूटिंग बंगाल और बिहार की सीमा पर होनी थी। लोकेशन पर पहुंचने के बाद मृणाल दा ने मिथुन दास से कहा कि उन्हें किरदार के लिए बाल कटवाने होंगे। रोचक बात यह है कि शूटिंग शुरू करने से पहले मृणाल दा ने दो-ती दिनों तक मिथुन को सिर्फ स्थानीय लोगों के साथ रहने और उनके व्यवहार को समझने के लिए छोड़ दिया।

जहां मिथुन उनके एक सहायक की तरह साथ रहे। फिल्म रुगिया में मिथुन दा का प्रदर्शन इतना प्रभावशाली था कि स्क्रीनिंग के बाद लोग उनकी अभिनय कला के कायल हो गए। हालांकि फिल्म में उन्हें ज्यादातर बिना कमीज के दिखाया गया था। जिसके कारण कुछ लोगों ने मजाक में यह भी कहा कि वह कपड़ों में कैसे दिखते हैं यह देखना बाकी है।

इस फिल्म के बाद उन्हें अक्सर ऐसे ही रोल ऑफर हुए लेकिन उन्होंने साफ कर दिया कि वह बिना जरूरत के ऐसा नहीं करेंगे। जब नेशनल अवार्ड की बात आई तो मिथुन दा को शुरुआत में उम्मीद नहीं थी। लेकिन जब उन्होंने नामांकित फिल्मों की सूची देखी तो उन्हें एहसास हुआ कि उनका मुकाबला महान अभिनेता संजीव कुमार की फिल्म अर्जुन पंडित से है। अंततः मिथुन दा ने अपनी पहली ही फिल्म के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय पुरस्कार जीतकर इतिहास रच दिया।

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