मर्द टांगे वाला मैं हूं मर्द टांगे वाला मुझे दुश्मन क्या मारेगा जब अनू मलिक ने मनमोहन देसाई को यह धुन सुनाई तो स्टूडियो में कई लोग एक दूसरे का चेहरा [संगीत] देखने लगे बेटे केतन देसाई से लेकर कई सीनियर क्रू मेंबर्स समझ नहीं पा रहे थे कि मनमोहन चाहते क्या हैं जिस फिल्म को पहले ही फैंटम कॉमिक्स बताकर कुछ फाइनेंसर पीछे हट गए थे अब उसके गाने भी किसी के गले नहीं उतर रहे थे हम तो तंबू में है तंबू बंबू में देसाई के फेवरेट गीतकार और संगीतकार तो पहले ही करनी काट चुके थे। गीतकार आनंद बक्शी की जगह कोई नहीं मिला तो फिल्म के स्टोरी राइटर प्रयागराज से ही गाने लिखवाए गए सिवाय एक गाने के जो हिंदीवर ने लिखे क्योंकि वही सेंसिबल गाना लग रहा था। तो क्या बाकी गाने नॉनसेंस थे?
जी कुछ ऐसा ही कहा गया था। लेकिन खुद मनमोहन देसाई अड़ गए कि हो तो हो मुझे नॉनसेंस गाने ही चाहिए। संगीतकार लक्ष्मीकांत प्यारेलाल ने खुद कदम पीछे खींचे या देसाई ही कुछ नया करना चाहते थे। इस बारे में तमाम नैरेटिव्स हैं। लेकिन आईएमडीबी ट्रिविया की मानें तो इस फिल्म के लिए जब देसाई लक्ष्मीकांत प्यारेलाल से मिलने उनके होम स्टूडियो गए तो उन्हें काफी इंतजार कराया गया और वह इतने नाराज हुए कि उल्टे पांव लौट आए और शायद यही वजह हो यह जोड़ी हमेशा के लिए वहीं टूट गई। खैर जिस नए संगीतकार अनू मलिक पर मनमोहन देसाई ने दांव लगाया उसने कहानी कैरेक्टर सिचुएशन और पहले से लिखे कुछ गीतों के मुताबिक फंकी धुने तैयार कर दी। लेकिन अब असली चुनौती कि गवाएं किस्से। किशोर कुमार गाने को तैयार ना थे और देसाई अपने फेवरेट रफी साहब की गैर मौजूदगी में जिस अनवर हुसैन को अपना बेस्ट बेट मानकर चल रहे थे। अब वह भी भाव खा रहे थे। कई सिंगर्स को लग रहा था कि फिल्म के गाने इतने बेतुके और वाहियात हैं कि इससे उनके प्रोफाइल पर डेंट लग सकता है। फिर देसाई ने अनु मलिक से कोई नया सिंगर ढूंढने को कहा।
शर्त ये है कि उसकी आवाज मोहम्मद रफी से मेल खाती हो। मनमोह जी ने बोला मैं तुझे पिक्चर भेज रहा हूं। मुझे पहला गाना रिकॉर्ड करना है। रफी साहब की याद चाहिए मुझे। और किसी ने बोला एक बहुत सुधा लड़का है। आया हुआ है कोलकाता से। मैंने बोला कहां रहता है यार? बोला कोई गोरेगांव के तबेले के वहां। गोरेगांव के तबेले के पास रहने वाला यह लड़का अभी नया-नया मुंबई में आया था। उसने ओडिया फिल्मों में कुछ गाने गाए थे और संगीतकार स्वप्न सेन गुप्ता के मारफत ही उन दिनों अंबर फिल्म में एक हिंदी गाना गाया था। लेकिन यहां तक भी उसके ऊपर एक रेस्टोरेंट सिंगर का ही ठप्पा लगा था, जो रफी के गाने गाकर लोगों का मनोरंजन किया करता था। कोलकाता के गाली बृस्तरा में आने वाली कुछ लोकल फिल्मी हस्तियों की नजर जब इस गायक पर पड़ी, तो वहां से उसे छिटपुट काम मिलने शुरू हुए। और अब जब यह मुंबई आ चुका था एक रात अन्नू मलिक के रूप में जब भाग्य खुद उसका दरवाजा खटखटा रहा था तो अनु मलिक की जुबानी ही सुनिए क्या हुआ। मैं बोला मैं अनु मलिक हूं। अरे बाप रे बाप रे बाप रे वो रोने लग गया। कल सुबह आपको फेमस तार देव आना है।
एंड वो सुबह-सुबह 9:00 बजे पहुंच गया था फिल्म और उसको 2 घंटे गाना सिखाया मैंने। और जब उसने गाना गाया हे मर्द टांगे वाला मैं हूं मर्द टांगे वाला [संगीत] मुझे दुश्मन क्या मारेगा। लेकिन कहानी यहां खत्म नहीं होती दोस्तों। यहां से उड़ान भरने वाला डमी रफी ना केवल अगली कई फिल्मों में अमिताभ बच्चन की आवाज बन गया बल्कि 80 और 90 के म्यूजिक ट्रैक पर ऐसा छाया कि मोहम्मद रफी तो नहीं। लेकिन अपनी हाई पिच आवाज से दूसरा रफीक कहलाने लगा। प्यार हमारा अमर रहेगा याद कर पैसे मिला देना सा ना पैमाने। आजकल [संगीत][गाना गाने की आवाज़] याद कुछ और रहता नहीं। मोहम्मद अजीज ने मर्द में दो गाने गाए थे। एक तो यह टाइटल सॉन्ग जिससे बड़े गायक छिटक रहे थे और दूसरा यह गाना जिसे गाने के बाद उसे भी लगने लगा कि कहीं उठान से पहले ही उसका करियर डूब ना जाए। लगाए बैठे हम तो तंबू में बंबू लगाए बैठे। लेकिन दिलचस्प बात यह है कि जिस गाने को दो अर्थ थी अश्लील और ना जाने क्या-क्या कहकर खुद मनमोहन देसाई की आलोचना की गई और अमिताभ बच्चन पर लानतें भेजी गई। वो इतना हिट हुआ कि फिल्म को भी सुपरहिट बनाने में इसका कम योगदान नहीं था। अमिताभ बच्चन पर मोहम्मद अजीज की आवाज कुछ ऐसी फबी कि
आखिरी रास्ता के सारे गाने इसी गायक के नाम रहे। गोरी का साजन की गोरी और शहंशाह से लेकर खुदा गवाह तक मोहम्मद अजीज ने अमिताभ बच्चन के लिए कई हिट गाने गाए। तू मुझे कुबूल मैं तुझे कबूल इस बात [संगीत] का हालांकि मोहम्मद रफी के खाली स्पेस को भरना मुमकिन नहीं था लेकिन उनकी रिप्लेसमेंट की कोशिशों के तौर पर कई दूसरे गायक आते जाते रहे। अनवर से लेकर शब्बीर कुमार तक ने कई बेहतरीन गाने गाए। लेकिन मोहम्मद अजीज ने 80ज के लेटर हाफ और 90ज के रोमांटिक फेज में अपने सुरों को जो ऊंचाई दी उसे उस दौर के लगभग सभी फिल्मकारों और कलाकारों ने बुनाया। सारे शिकवे [संगीत] अमिताभ, धर्मेंद्र, जितेंद्र, राजेश खन्ना, मिथुन चक्रवर्ती, ऋषि कपूर, गोविंदा से लेकर तमाम नए पुराने एक्टर्स के मोहम्मद अजीज ने कई यादगार गीत गाए। तुझे रब ने बनाया [संगीत] किस लिए किस लिए गुलाब का [संगीत] लाखों में हजारों में तुमसे बना मेरा जीवन [संगीत] तो छोड़िए जिस दिलीप कुमार को कभी मोहम्मद रफी ने ट्रेजडी किंग बनाया था वो दशकों बाद इस नई आवाज के दम पर ताल ठोक रहे थे। दिल दिया है जा भी देंगे ऐ सनम इमली का [संगीत] बूटा मेरे का 1990 के आसपास तो एक ऐसा फेज भी था जब एक साल में सबसे ज्यादा फिल्में और गाने मोहम्मद अजीज के नाम रहे। जिस लक्ष्मीकांत प्यारेलाल ने मर्द फिल्म से कन्नी काट ली थी। उसी के सो कॉल्ड चीप गानों से निकला यह गायक अब उसी लक्ष्मीकांत प्यारेलाल का पसंदीदा गायक बन चुका था।
उन्होंने अजीज के साथ करीब 250 गाने रिकॉर्ड किए। तू कल चला जाएगा तो मैं क्या करूंगा। दुनिया में [संगीत] कितना गम है। अमीरों की शान गरीबों के नाम कई संगीतकारों ने मोहम्मद अजीज को रेयर वोकल रेंज में शुमार किया जो सातवें सुर तक बेइंतहा ऊंचाई दे सकता था। मोहम्मद अजीज ने उस दौर की सभी बड़ी गायिकाओं लता मंगेशकर, आशा भोसले, कविता कृष्णमूर्ति, अनुराधा पौडवाल के साथ एक से बढ़कर एक सुपरहिट गाने गाए। इसी आवाज के दम पर गुलशन कुमार ने अपने म्यूजिक एल्बम साम्राज्य की बुनियाद रखी। लाल दुपट्टा मलमल का। अब दवा की जरूरत नहीं। अब दवा फनकार तुझ सा तेरे बाद आया और उस गीत के बिना तो हमारी आज की कहानी अधूरी रहेगी दोस्तों 1990 में आई फिल्म क्रोध में अमिताभ बच्चन के गेस्ट अपीयरेंस के जरिए मोहम्मद रफी को जिस तरह याद किया गया उसने उनके कदरदानों की आंखें तो नमकी लेकिन जिस आवाज में ये श्रद्धांजलि दी गई उसके लिए भी लोगों के मन में श्रद्धा भर गई मोहम्मद रफी तो बहुत याद आया। [संगीत] हालांकि मोहम्मद अजीज का करियर आखिरी वक्त तक अपनी बुलंदी कायम ना रख पाया और नए दौर की चुनौतियां उन पर भी भारी पड़ी। रफी साहब की तरह मोहम्मद अजीज भी बहुत कम उम्र में दुनिया से विदा हो गए। लेकिन अपने पीछे जो गाने छोड़ गए उनकी उम्र इतनी लंबी है कि कई पीढ़ियां भुला नहीं पाएंगी। दिल बहलता है मेरा आपके आ जाने अमर रहेगा याद करेगा जहां इस बात का गवाह खुदा खुदा गवाह तुम मुझसे खफा ना होना कभी [संगीत] मुझसे जुदा ना हो छोड़ेंगे ना हम तेरा ओ साथी मर दम बस आपके याद आने के बाद फनकार तुझ सा तेरे बाद आया