83 की उम्र में भी अमिताभ बच्चन के भीतर एक अजीब सी बेचैनी कायम है, जिसने नींद और सुकून दोनों को उनसे दूर कर दिया है. सफलता के शिखर पर खड़े होकर भी उनके मन में एक अनजाना सवाल लगातार गूंजता रहता है. उस सवाल का जवाब उनके पास होने के बावजूद अधूरा लगता है. यह बेचैनी ही उन्हें बार-बार रातों में जगाए रखती है और सोच में डुबो देती है. क्या है वो बेचैनी? इसका खुलासा खुद अमिताभ बच्चन ने किया है.
शोहरत, सम्मान, दौलत और सफलता… जिंदगी में शायद ही कोई ऐसा मुकाम हो, जिसे अमिताभ बच्चन ने हासिल न किया हो. करोड़ों दिलों पर राज करने वाले इस महानायक के नाम आज भी सफलता की नई इबारतें लिखी जाती हैं. लेकिन हैरानी की बात यह है कि 83 साल की उम्र में भी एक सवाल ऐसा है, जो उन्हें चैन से बैठने नहीं देता. यह सवाल इतना गहरा है कि कभी-कभी उनकी रातों की नींद तक छीन लेता है. हाल ही में अमिताभ बच्चन ने अपने दिल की ऐसी बात साझा की, जिसने उनके फैंस को भी सोचने पर मजबूर कर दिया. उम्र और अनुभव के इस पड़ाव पर भी वह खुद से संतुष्ट नहीं हैं और लगातार किसी बेहतर जवाब की तलाश में जुटे हैं. आखिर वह कौन-सी बेचैनी है, जो महानायक को रातभर जगाए रखती है? यही खुलासा अब चर्चा का विषय बना हुआ है
अमिताभ बच्चन 83 साल की उम्र में भी अपने काम को लेकर उतने ही गंभीर और समर्पित हैं, जितने अपने करियर के शुरुआती दिनों में थे. दशकों तक इंडस्ट्री पर राज करने और अनगिनत यादगार किरदार निभाने के बावजूद बिग बी आज भी अपने काम का सबसे सख्त मूल्यांकन खुद करते हैं
हाल ही में उन्होंने अपने ब्लॉग में खुलासा किया कि एक काम पूरा करने के बाद उन्हें लगा कि वह इसे और बेहतर कर सकते थे. यही सोच उन्हें पूरी रात सोने नहीं दे सकी अमिताभ बच्चन ने शुक्रवार सुबह अपने ब्लॉग पर लिखा कि काम पूरा होने के बाद उन्हें महसूस हुआ कि काम पूरा करने के बाद उन्हें लगता है कि ये और बेहतर हो सकता था. उन्होंने दोबारा काम करने की परमिशन ली और फिर उसे दोहराया. हालांकि, इसके बाद भी वह इस बात को लेकर आश्वस्त नहीं हो सके कि दूसरी कोशिश पहले से बेहतर थी या नहीं. उन्होंने लिखा कि अब इसका फैसला केवल दर्शक ही कर पाएंगे.
महानायक ने स्वीकार किया कि इसी उधेड़बुन में उनकी पूरी रात गुजर गई और उन्हें नींद नहीं आई. सोचते-सोचते कब सुबह हो गई, उन्हें पता ही नहीं चला. अपने ब्लॉग के आखिर में उन्होंने अपने फैंस को शुभकामनाएं और प्यार भी दिया.