Cli

मंगल पर जाकर मर जाएंगी ये लड़की?सच जानकर रोंगटे खड़े हो जाएंगे।

Uncategorized

सोशल मीडिया की दुनिया में एक नाम पिछले कुछ सालों से काफी वायरल हो रहा है और यह नाम है एलिसा कारसन का। हर जगह यही कहा जा रहा है कि एक 20 साल की लड़की जो मंगल ग्रह पर जाने वाली पहली इंसान बनने जा रही है। मगर वह कभी वापस पृथ्वी पर नहीं लौटेगी। जी हां, एलिसा कारसन की यह ट्रिप वन साइडेड होने वाली है।

यानी कि वह मंगल पर तो जाएगी, लेकिन वापस कभी धरती पर नहीं आ सकेगी और वहीं पर उसकी डेथ हो जाएगी। यह बात सुनने में कितनी थ्रिलिंग और एक्साइटिंग लगती है ना। लेकिन सच हमेशा उतना सिंपल नहीं होता। जितना वायरल पोस्ट्स दिखाते हैं। तो आखिर क्या है एलिसा कार्सन का सच?

चलिए जानते हैं आज की साल था 2001 तारीख थी 10 मार्च जगह लुईसियाना अमेरिका। यहीं जन्मी एक लड़की जिसका नाम रखा गया एलिसा कारसन। वैसे तो एलिसा बिल्कुल नॉर्मल चाइल्ड ही थी।

इस लड़की में कुछ खास नहीं था। लेकिन इसके सपने हद से ज्यादा स्पेशल थे। उसके पिता बर्ड कार्सन को शायद तब नहीं पता था कि उनकी इकलौती बेटी इतिहास रचने के लिए पैदा हुई है। और इतिहास भी ऐसा जो शायद किसी ने सोचा भी नहीं होगा। दुनिया से विदा होना लेकिन धरती पर नहीं मंगल ग्रह पर। जब बच्चे खिलौनों से खेलते हैं तब एलिसा प्लनेट्स की डायरेक्शन समझने की कोशिश करती थी। सिर्फ 7 साल की उम्र में उसने एक ऐसा कदम उठाया जो शायद बड़े-बड़े साइंटिस्ट भी नहीं उठा पाए।

दरअसल एलिसा पहुंच गई हर्ट सिविल अलवामा जहां स्पेस कैंप का इवेंट हो रहा था और यहीं से शुरू हुआ उसका असली सफर एक ऐसा सफर जिसकी मंजिल मंगल थी। एलिसा ने सिर्फ अमेरिका ही नहीं बल्कि तुर्की और कनाडा तक के स्पेस कैंप्स में हिस्सा लिया और इसके साथ ही वह ऐसा करने वाली दुनिया की पहली और इकलौती लड़की बनी जिसने नासा के हर स्पेस कैंप में भाग लिया। आप एलिसा का जज्बा तो देखो कम उम्र लेकिन काबिलियत बेमिसाल।

एलिसा के मन में हमेशा इस बात की एक्साइटमेंट रहती थी कि वह कब बड़ी हो, अपनी एजुकेशन कंप्लीट करें और कब उसे मंगल ग्रह पर जाने का मौका मिले। इस जुनून ने एलिसा के अंदर एक अलग ही मोटिवेशन भर रखा था। जब लोग कॉलेज का नाम भी नहीं जानते तब एलिसा ने 16 साल की उम्र में एक एडवांस प्रोजेक्ट में हिस्सा लिया। और इस प्रोजेक्ट का नाम था बोल्डर सबऑर्बिटल साइंस इन अपर मेसोस्फीयर।

एलिसा के स्पेस से जुड़े इस अचीवमेंट के चर्चे अब दूर-दूर तक होने लगे थे। उसके टैलेंट को देखते हुए अमेरिका की स्पेस एजेंसी ने भी उसे कंसीडर करना शुरू कर दिया था। नासा जैसे इंस्टट्यूट के साइंटिस्ट ने उसके जुनून को देखा। उसकी समझदारी और साइंटिफिक अप्रोच को समझा और उसे उस प्रोजेक्ट का हिस्सा बना लिया और फिर आया वो लम्हा जिसने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया। सिर्फ 18 साल की उम्र में एलिसा ने पायलट का लाइसेंस हासिल कर लिया।

सोचिए एक टीनएजर जो आम बच्चों की तरह कॉलेज का फॉर्म भर रही होती वो अब स्पेसक्राफ्ट उड़ाने की ट्रेनिंग ले रही थी। एक तरफ एलिसा अपने सपनों की उड़ान भर रही है। दूसरी तरफ अपनी एजुकेशन पर भी पूरा फोकस जमा कर बैठी है। 2023 में एलिसा ने फ्लोरिडा इंस्टट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से एस्ट्रोनॉमी में ग्रेजुएशन किया और अब वह कर रही है स्पेस और साइंस में पीएचडी। अपने मिशन के लिए एलिसा ने वह हर ट्रेनिंग ली जो किसी अंतरिक्ष यात्री को जरूरत होती है। चाहे वह पानी में जिंदा रहने की कला हो, जी फोर्स के दबाव को सहना हो, जीरो ग्रेविटी में उड़ने का एक्सपीरियंस हो, स्कूबा ड्राइविंग का सर्टिफिकेट हासिल करना हो या फिर जैसे इमरजेंसी हालात से निपटना। इतना ही नहीं उन्होंने अमेरिका की मशहूर एम्ब्रिडल एरोनॉटिकल यूनिवर्सिटी से स्पेस फिजियोलॉजी यानी अंतरिक्ष में शरीर कैसे काम करता है इस पर बेस्ड स्पेसिफिक क्लासेस भी पूरी की।

एलिसा अपने रेड प्लनेट पर जाने के सपने को पूरा करने के लिए एक-एक स्टेप बहुत ही पेशेंस के साथ आगे बढ़ रही थी। एलिसा की उम्र आज लगभग 24 साल है। लेकिन उसने ऐसे कारनामे किए हैं जिन पर यकीन करना भी मुश्किल है। यह तो हुई एलिसा की नॉर्मल लाइफ की बात जिसके बारे में शायद आपने कभी ना कभी सुना ही होगा। अब हम एलिसा की लाइफ से जुड़े कुछ ऐसे इवेंट्स के बारे में बताने वाले हैं जो प्रूफ करते हैं कि एलिसा कारसन सिर्फ एक सपना देखने वाली लड़की नहीं थी। बल्कि वह हर कदम पर इतिहास रचने वाली शख्सियत है। साल 2013 जब दुनिया की ज्यादातर 12 साल की बच्चियां स्कूल प्रोजेक्ट्स और कार्टून में बिजी होती हैं। एलिसा कार्सन ने कुछ ऐसा कर दिखाया जो नासा के इतिहास में भी पहली बार हुआ था।

उन्होंने नौ अलग-अलग यूएस स्टेट्स में मौजूद नासा के 14 विजिटर सेंटर्स को विजिट करके नासा पासपोर्ट प्रोग्राम पूरा किया और वह बन गई इस अचीवमेंट को हासिल करने वाली पहली इंसान।

जी हां, ना कोई साइंटिस्ट, ना कोई एस्ट्रोनॉट। इस प्रोजेक्ट में सबसे पहले नाम एलिसा कार्सन का आया। एलिसा कार्सन को स्मिथ सोनियन नेशनल एयर एंड स्पेस म्यूजियम वाशिंगटन डीसी में आयोजित मार्स एक्सप्लोरेशन रोअर यानी एमईआर 10थ एनिवर्सरी पैनल में पैनलिस्ट के तौर पर बुलाया गया था। एलिसा की लाइफ में ऐसा पहली बार हुआ था। जब उसने मंगल के बारे में ऑफिशियली कुछ भी जानने या किसी ऐसे मिशन में पार्टिसिपेट किया था जो मंगल ग्रह से जुड़ा हो। एलिसा अब एक ऐसी टीनएजर बन गई थी जो साइंटिफिक डिस्कशन का हिस्सा रही थी। हर फील्ड में कामयाबी हासिल करने वाली यह लड़की अब सोशल मीडिया की नजरों में भी आ गई थी। मार्स एक्सप्लोरेशन रोअ में पैनलिस्ट के तौर पर पार्टिसिपेट करने के बाद हर कोई एलिसा को जाने लगा था।

यहां तक कि स्टीव हार्विक के टॉक शो में एलिसा को इनविटेशन मिला। इस शो में उन्हें सबसे कम उम्र की महिला ग्राउंड ब्रेकर का खिताब दिया गया। अब तक दुनिया बस देख रही थी और यह लड़की खामोशी से आगे बढ़ रही थी। लेकिन 2017 में कुछ ऐसा हुआ जिसने पूरी दुनिया को चौंका दिया। दरअसल साल 2017 जब Netflix पर द मार्स जनरेशन एक डॉक्यूमेंट्री आई जिसमें एलिसा कार्सन को यूथ मार्स ट्रैवल एक्सपर्ट की तरह फीचर किया गया। इसका मतलब यह है कि इस डॉक्यूमेंट्री में एलिसा कारसन को ऐसे यंग एक्सपर्ट के तौर पर दिखाया गया जो फ्यूचर में मंगल ग्रह की यात्रा करने का सपना देख रही है।

वो उस डॉक्यूमेंट्री का सबसे खास और इंस्पायरिंग फेस बनकर सामने आई। इस डॉक्यूमेंट्री के बाद हर तरफ कारसन के चर्चे होने लगे। लोगों के बीच यह बात जोरों से फैल गई कि एक 20 साल की लड़की मंगल ग्रह पर जाने वाली है और यह एक वन साइड ट्रिप होगी। यानी कि वह मंगल ग्रह पर जाएगी जरूर मगर कभी वापस नहीं लौटेगी। इस बात को लोगों के बीच कंफर्मेशन तब मिली जब कार्सन ने अपने जुनून को शब्दों में बदला और खुद की किताब पब्लिश की। इस बुक का टाइटल था सो यू वांट टू बी एन एस्ट्रोनॉट। इस किताब में उन्होंने खुलकर बताया कि स्पेस में जाने का सपना कैसे देखा जाता है और कैसे जिया जाता है। इतना ही नहीं द इंडिपेंडेंट जैसे इंटरनेशनल मीडिया प्लेटफार्म के लिए भी उन्होंने राइटिंग वर्क किया जिसमें उन्होंने स्पेस फ्लाइट्स के पीछे की तैयारी और सोच को डिटेल से समझाया।

इसके बाद एलिसा कारसन 2019 में बच्चों के पॉपुलर शो रायंस मिस्ट्री प्ले डेट के एक एपिसोड में नजर आई। जहां उन्होंने अपने बचपन के उस मंगल मिशन कैसे एक सपना एक मिशन बन सकता है वाले सपने के बारे में बच्चों को बताया। स्पेस के फील्ड में कार्सन को एक सेलिब्रिटी की तरह पॉपुलैरिटी मिली।

उन्हें कई स्पेस प्रोडक्ट ब्रांड्स जैसे कि हॉररजन स्टूडियोज के स्पेस गियर कलेक्शन का चेहरा बनाया गया। और इससे भी इंटरेस्टिंग बात यह है कि कारसन फाइनल फ्रंटियर डिजाइन स्पेस शूट टेस्टिंग प्रोग्राम का हिस्सा बन गई हैं। जहां उन्होंने कनाडा की स्पेस एजेंसी के लिए स्पेस शूट टेस्टिंग में पार्टिसिपेट किया था। कारसन को लेकर यह कुछ ऐसी घटनाएं थी जिन्होंने कंफर्म कर दिया कि मंगल ग्रह पर कदम रखने वाली यह पहली सबसे कम उम्र की फीमेल एस्ट्रोनॉट बनने वाली हैं। Netflix की डॉक्यूमेंट्री के बाद यह खबर चारों तरफ फैल गई थी। लेकिन इंटरेस्टिंग बात पता है क्या है? किसी ने भी यह जानने की कोशिश नहीं की कि आखिर यह खबर सच है भी या नहीं क्योंकि 2017 से आज 2025 हो गया है। कारसन आज भी पृथ्वी पर ही हैं। वह किसी भी तरह के मंगल मिशन में इनवॉल्व नहीं है और ना ही वह एक यंग फीमेल एस्ट्रोनॉट की तरह मंगल पर अब तक गई हैं।

हालांकि 2017 में एलिसा कारसन को लुईसियाना के टॉप नाइन यंग हीरोज़ में चुना गया। इसके 2 साल बाद 2019 में एलएसयू वुमस सेंटर ने उन्हें एस्पिरेट डीफेम अवार्ड दिया। इसे पाकर उन्होंने इतिहास बना दिया क्योंकि इसे पाने वाली वे सबसे कम उम्र की विनर थी। फिर 2020 में लुइसियाना लाइफ मैगजीन ने उन्हें साइंस कैटेगरी में लुईसियाना ऑफ द ईयर घोषित कर दिया था। जिससे एक आम लड़की अब हर टेलीविजन स्क्रीन पर दिख रही थी। लेकिन असली सवाल तब भी वही था। क्या यह सच में मार्स की ओर जाने वाली पहली इंसान बनने जा रही है? या यह सब एक ब्यूटीफुल इल्लुजन है। ऐसा क्योंकि 2017 से पहले कार्सन के बारे में इतनी सारी खबर थी।

तो फिर वह अभी तक मंगल ग्रह पर क्यों नहीं गई? आखिर इसके पीछे क्या वजह हो सकती है? क्या कार्सन को फीमेल एस्ट्रोनॉट के तौर पर सिलेलेक्ट नहीं किया गया है? कहीं उसके मंगल ग्रह पर जाने वाली खबर अब अफवाह तो नहीं? जी हां, यह कुछ ऐसे सवाल थे जो इस डॉक्यूमेंट्री के बाद उठे। लेकिन रियलिटी क्या है? चलिए कुछ रिसोर्सेज की हेल्प से समझने की कोशिश करते हैं। जब कार्सन वाली बात सोशल मीडिया के जरिए पूरी दुनिया में फैल गई तो इसकी जानकारी नासा को भी मिली। नासा यानी अमेरिकन स्पेस एजेंसी पूरी दुनिया में एक वेल रेपुटेड स्पेस एजेंसी है। आखिरकार कोई इसका नाम लेकर लोगों को पागल कैसे बना सकता है? यह बात नासा को बिल्कुल पसंद नहीं आई। तभी तो दुनिया भर की रिलायबल न्यूज़ एजेंसियों को इसके बारे में इन्वेस्टिगेशन करने के लिए कहा गया।

राइटर्स जो कि एक भरोसेमंद इंटरनेशनल न्यूज़ एजेंसी है। इसने इस पूरे दावे की जांच पड़ताल की और जो सच्चाई सामने आई उसने इंटरनेट पर उड़ती इस अफवाह की हवा निकाल दी। राइटर्स ने साफ कहा एलिसा कारसन को नासा के किसी भी मंगल मिशन के लिए अब तक नहीं चुना गया है। यह दावा पूरी तरह से एक अफवाह है जो सोशल मीडिया पर तेजी से फैलाई गई है। लेकिन सवाल यह है कि जब यह अफवाह है तो आखिर सच्चाई क्या है? हां, यह बात सच है कि एलिसा कारसन बचपन से स्पेस की एडिक्ट रही हैं। उन्होंने नासा के कई ट्रेनिंग प्रोग्राम्स में हिस्सा लिया है और हां, उनका सपना है कि वह भविष्य में मंगल पर कदम रखें।

लेकिन उन्हें अभी तक नासा के किसी आधिकारिक मंगल मिशन में शामिल नहीं किया गया है। ना ही उनकी अपॉइंटमेंट बतौर नासा एस्ट्रोनॉट हुई है। और सबसे इंपॉर्टेंट बात मंगल मिशन की टीम यानी क्रू मेंबर्स की अनाउंसमेंट अब तक नहीं हुई है। तो आप खुद सोचिए जब नासा ने ऑफिशियली अब तक मार्स मिशन के लिए क्रू मेंबर को लेकर कोई अनाउंसमेंट नहीं की है तो कार्सन मंगल ग्रह पर जाएगी या नहीं? इसमें कितनी सच्चाई हो सकती है? केवल इतना ही नहीं क्या एलिसा के पास नासा एस्ट्रोनॉट बनने की एबिलिटी है यह भी कोई नहीं जानता क्योंकि नासा के एस्ट्रोनॉट बनने के लिए कुछ बहुत स्ट्रिक्ट नॉर्म्स होते हैं।

जैसे कि वह शख्स जो एस्ट्रोनॉट बनना चाहता है उसके पास किसी रिकॉग्नाइज्ड इंस्टीटश से इंजीनियरिंग, बायोलॉजिकल साइंसेस, फिजिकल साइंसेस, कंप्यूटर साइंस और मैथमेटिक्स जैसे सब्जेक्ट्स में मास्टर्स डिग्री होनी चाहिए। जबकि एलिसा कार्सन के पास इनमें से किसी भी सब्जेक्ट में मास्टर्स डिग्री नहीं है। हालांकि यह भी सच है कि वह एस्ट्रोनॉमी की पढ़ाई कर रही हैं और फ्यूचर में हो सकता है कि वह एबिलिटी प्राप्त करें। लेकिन फिलहाल वो नासा की ऑफिशियल एस्ट्रोनॉट सिलेक्शन लिस्ट में नहीं है। हालांकि यह बात भी सच है कि नासा का एस्ट्रोनॉट बनने के लिए उम्र की कोई लिमिट नहीं होती। लेकिन सिलेक्शन बहुत मुश्किल होता है। जिसका अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि हर 2 साल में नासा को करीब 12,000 प्लस एप्लीकेशन मिलते हैं। जिनमें से केवल 10 से 12 लोग चुने जाते हैं। क्या? जी हां, आपने सही सुना। इसमें सिलेक्शन रेट होता है सिर्फ 0.1% के करीब यानी यूपीएससी से भी ज्यादा टफ। वहीं अगर बात की जाए नासा के मार्स पर भेजे जाने वाले पहले क्रू मिशन की तो ऐसी उम्मीद है कि यह 2030 के मिड में जा सकता है। असल में नासा का आर्टेमस प्रोग्राम पहले चंद्रमा पर परमानेंट प्रेजेंस बनाने पर फोकस कर रहा है। मार्स मिशन उसके बाद की योजना है।

यानी कि यह क्लियर हो चुका है कि कुछ सालों में कोई भी इंसान मार्स पर जाने वाला नहीं है। कम से कम अब तक की जानकारी के अनुसार नहीं। हमें पता है अब आपके जेहन में भी सवाल उठ रहा होगा कि आखिर मार्स पर भेजे जाने वाला मिशन इतना डिले क्यों हो रहा है? क्या नासा के पास में ऐसी कोई टेक्नोलॉजी नहीं है या फिर कोई ऐसी अड़चन है जो मार्स पर पहुंचने से नासा जैसी एजेंसी को भी रोक रही है? वेल मार्स पर जाने वाले मिशन के लिए सबसे बड़ी बाधा है रेडिएशन। एक्चुअल में पृथ्वी की मैग्नेटिक फील्ड हमें कॉस्मिक रेडिएशन से बचाती है। लेकिन मंगल पर ऐसा कोई सुरक्षा कवच नहीं है।

इसीलिए लॉन्ग टर्म स्टे वहां कैंसर जैसी बीमारियों का खतरा बहुत बढ़ा सकता है। इसी कारण वनवे ट्रिप जैसे आइडिया पर सिर्फ रिसर्च हो रही है। मिशन नहीं। तभी तो नासा हर एस्ट्रोनॉट से 2020 विज़न, परफेक्ट फिजिकल हेल्थ और कई सर्वाइवल टेस्ट्स की डिमांड करता है। यही नहीं इनफैक्ट किसी को मार्स भेजने से पहले उसे स्पेस वॉक्स, अंडर वाटर ट्रेनिंग, आइसोलेशन एक्सपेरिमेंट्स और मानसिक स्थिरता के टेस्ट से गुजरना होता है। जिसमें अभी तक कार्सन को शामिल नहीं किया गया है। हालांकि एलिसा कारसन ने पोsम एकेडमी से स्पेस फ्लाइट बेसिक्स की ट्रेनिंग ली है।

स्पेस फ्लाइट बेसिक्स की बात करें तो यह एक प्राइवेट स्पेस एजुकेशन प्रोग्राम है जो रिस्चरर्स को सब ऑर्बिटल फ्लाइट सिमुलेशन सिखाता है। हालांकि यह नासा का हिस्सा नहीं है लेकिन इससे कार्सन को पब्लिसिटी जरूर मिली है। वैसे एलॉन मस्क की कंपनी spcex भी 2030 के बाद के लिए मार्स कॉलोनाइजेशन की बात करती है। लेकिन वहां भी कोई कंफर्म्ड क्रू नहीं है और कार्सन का स्पेस एक्स से कोई डायरेक्ट कनेक्शन नहीं है। अब जैसा कि कुछ लोगों ने दावा किया है कि कार्सन ने अपने एक्स और Instagram हैंडल में नासा को यूज किया है। मगर नासा का एलिसा से कोई फॉर्मल रिलेशन नहीं है। इसके अलावा यह भी क्लियर किया गया है कि नासा का एलिसा कार्सन के साथ इस समय कोई ऑफिशियल और फॉर्मल कांटेक्ट नहीं है। वे ना तो नासा की एंप्लई हैं और ना ही उन्हें किसी मिशन में शामिल किया गया है। जरा सोचिए जब वर्ल्ड फेमस और रिलायबल न्यूज़ एजेंसी और साथ ही अमेरिकन स्पेस एजेंसी भी कारसन को लेकर किए गए सब दावे रिजेक्ट कर रहे हैं कि वह किसी भी तरह से मार्स मिशन में इंक्लूड नहीं है और ना ही वह मार्स पर जाएगी तो फिर लोग क्यों मानते हैं कि वह मंगल पर जा रही है।

असल में एलिसा कार्सन की कहानी इंस्पाइरेशनल है। उन्होंने छोटी उम्र में जो ट्रेनिंग की वो काबिले तारीफ है। उनका स्पेस के प्रति जुनून, पब्लिक स्पीकिंग, डॉक्यूमेंट्रीज, किताबें सब ने उन्हें सोशल मीडिया का पोस्टर आइकॉन बना दिया और यहीं से शुरुआत हुई अफवाहों की। लोगों ने मान लिया कि वह मंगल मिशन का हिस्सा है और यह दावा बिना कंफर्मेशन के इंटरनेट पर फैल गया। भले ही कारसन का मंगल पर जाने वाला यह मिशन एक अफवाह हो, मगर एलिसा कारसन आज भी एक यूथ आइकॉन है।

वो अपने सपनों के पीछे दौड़ रही हैं और इसमें कोई शक नहीं है कि वह एक दिन कुछ बड़ा हासिल करेंगी। लेकिन मंगल पर जाने का दावा फिलहाल सिर्फ एक अफवाह है ना कि कोई ऑफिशियल ट्रुथ। अगर फ्यूचर में ऐसा होता है तो हम सबको गर्व होगा। लेकिन जब तक नासा खुद उनकी अपॉइंटमेंट की अनाउंसमेंट नहीं करता तब तक यह बातें महज आईडिया है ना कि फैक्ट। आई होप अब आपको समझ आ गया होगा कि कार्सन को लेकर यह अफवाह कैसे बनी और यह मंगल पर जाएगी या नहीं। कहानी जितनी वायरल है, सच्चाई उतनी ही स्लो चल रही है। यह बात सच है कि मार्स आज भी लाखों एस्ट्रोनॉट का एक सपना है।

लेकिन सपनों से पहले आती है तैयारी और उस तैयारी की मंजिल तक अभी कोई भी नहीं पहुंचा है। नासा ना कार्सन। वेल, हम यह आप पर छोड़ते हैं। अब आप बताओ आपका इसके बारे में क्या ख्याल है? क्या

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *