हिंदी सिनेमा के सदाबहार अभिनेता देवानंद का नाम भारतीय फिल्म इतिहास में हमेशा सम्मान के साथ लिया जाता है। अपनी अनोखी मुस्कान, स्टाइल और शानदार अभिनय से उन्होंने करोड़ों लोगों का दिल जीता। लेकिन उनके निधन और अंतिम संस्कार को लेकर आज भी लोगों के मन में कई सवाल उठते हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि उनका अंतिम संस्कार भारत की बजाय लंदन में क्यों हुआ? ऐसे कई सारे सवाल सामने आ रहे हैं और ऐसा इसलिए भी क्योंकि देव साहब के बेटे सुनील आनंद का भी निधन हो गया है।
जी हां, वही सुनील आनंद जिन्होंने अपने पिता को कंधा दिया। लेकिन आज सुनील आनंद अपनी मां को अकेला छोड़कर इस दुनिया से चले गए हैं। सुनील आनंद के निधन से उनका पूरा परिवार टूट गया है। 4 दिसंबर 2011 को देव आनंद का निधन लंदन में हुआ। वह अपनी फिल्म से जुड़े काम के सिलसिले में ब्रिटेन गए हुए थे। अचानक दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया। उस समय उनकी उम्र 88 वर्ष थी। यह खबर सामने आते ही भारत सहित पूरी दुनिया में उनके प्रशंसकों के बीच शोक की लहर दौड़ गई। देवानंद का परिवार उस समय लंदन में मौजूद था। परिवार ने विचार विमर्श के बाद यह निर्णय लिया कि उनका अंतिम संस्कार लंदन में ही किया जाएगा। इस फैसले के पीछे मुख्य कारण यह था कि पार्थिव शरीर को भारत में लाने में काफी समय लगता और कानूनी औपचारिकताएं भी पूरी करनी पड़ती। परिवार चाहता था कि अंतिम संस्कार बिना अधिक देरी के पूरे सम्मान के साथ किया जाए।
इसके बाद लंदन के एक श्मशान ग्रह में हिंदू रीति रिवाजों के अनुसार उनका अंतिम संस्कार किया गया। उनके बेटे सुनील आनंद और परिवार के अन्य सदस्यों ने अंतिम संस्कार की सभी रस्में निभाई। बाद में भारत में भी उनके सम्मान में श्रद्धांजलि सभाओं का आयोजन किया गया। जिनमें फिल्म जगत की अनेक बड़ी हस्तियां शामिल हुई। उनके बेटे सुनील आनंद ने बताया था कि देव आनंद को लंदन से बहुत लगाव था और उनकी इच्छा थी कि यदि उनका निधन वहां हो तो उनका अंतिम संस्कार भी वहीं किया जाए। अंतिम संस्कार से पहले लंदन के भारतीय विद्या भवन में एक शोक व प्रार्थना सभा आयोजित की गई। इस विदाई समारोह में परिवार के सदस्यों के अलावा ब्रिटेन में भारत के उच्चायुक्त और उनके चुनिंदा करीबी प्रशंसक शामिल हुए थे। अस्थियां बाद में परिवार द्वारा उनकी अस्थियों को भारत लाया गया
और गोदावरी नदी में विसर्जित किया गया। देववानंद ने अपने जीवन में 100 से अधिक फिल्मों में अभिनय किया और नवकेतन फिल्म्स के माध्यम से कई नई प्रतिभाओं को अवसर दिया। उनकी फिल्मों और उनके व्यक्तित्व ने भारतीय सिनेमा को नई पहचान दी। यही कारण है कि आज भी उन्हें सदाबहार अभिनेता कहा जाता है। देवानंद भले ही आज हमारे बीच नहीं है लेकिन उनकी फिल्में, उनके गीत और उनका सदाबहार व्यक्तित्व हमेशा लोगों के दिलों में जीवित रहेंगे। यही किसी महान कलाकार की सबसे बड़ी पहचान होती है। वहीं आपको बताते चले कि बेटे सुनील आनंद का 70 साल की उम्र में निधन हो गया है। इस दुखद खबर की पुष्टि परिवार ने मंगलवार 28 जुलाई को की। देवानंद की भतीजीना नारंग ने एक भावुक बयान जारी करते हुए कहा कि पूरा परिवार इस मुश्किल समय से गुजर रहा है। उनके सभी लोगों का दुआओं और प्यार के लिए धन्यवाद किया और प्राइवेसी का सम्मान करने की अपील भी की। सुनील आनंद का निधन फिल्म इंडस्ट्री के लिए एक बड़ी क्षति माना जा रहा है।
उनके जाने की खबर सामने आते ही कई लोग उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं और सोशल मीडिया पर उन्हें याद कर रहे हैं। सुनील आनंद ने अपने फिल्मी सफर की शुरुआत 1984 में फिल्म आनंद और आनंद से की थी। जिसे उनके पिता देव आनंद ने डायरेक्ट किया था। इस फिल्म में राखी और स्मिता पाटिल भी नजर आई थी। हालांकि फिल्म बॉक्स ऑफिस पर खास कमाल नहीं दिखा सकी। इसके बाद वो कार थी और मैं तेरे लिए जैसी फिल्मों में भी दिखाई दिए। लेकिन उन्हें वह सफलता नहीं मिली जिसकी उन्हें उम्मीद थी। बाद में उन्होंने निर्देशन में भी हाथ आजमाया और फिल्म मास्टर बनाई। लेकिन वहां भी उन्हें बड़ी कामयाबी नहीं मिल सकी। तो दोस्तों अभी के लिए बस इतना ही। मिलते हैं अगले वीडियो में। तब तक आप अपना ध्यान रखिए।