वो वो डाटा नहीं देंगे गवर्नमेंट। अब सर एक दिन भी ऐसा नहीं है कि हम रोए। हम हम रोए नहीं है और हमारे बच्चों को याद नहीं किया कि अब अब जीवन कैसे जाएगा। अहमदाबाद से लंदन जा रही Air इंडिया के Being 787 ड्रीमलाइनर का जून 2025 में हुए भयानक हादसे को एक साल पूरा होने वाला है। लेकिन दुर्घटना की अंतिम जांच रिपोर्ट अब भी सामने नहीं आई है। इंडिया के एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो अब क्रैश के एक साल पूरा होने पर एक अंतरिम रिपोर्ट जारी करने की तैयारी कर रही है।
शुरुआती रिपोर्ट के अनुसार टेक ऑफ के कुछ सेकंड्स बाद दोनों इंजन के फ्यूल कंट्रोल स्विच लगभग एक साथ कट ऑफ स्थिति में चले गए। जिससे इंजन फ्यूल की कमी से बंद हो गए। कॉकपेट वॉइस रिकॉर्डर में पायलट्स के बीच हुई बातचीत भी इसी की ओर इशारा कर रही है। लेकिन सरकार के एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो ने तब कहा था कि निष्कर्ष निकालना भी जल्दबाजी होगी। हां वो सर बहुत दुखद वो बहुत दुखद था। मन में बहुत विचार आते हैं कि क्या कैसे हो गया? कैसे क्यों हादसा हुआ? किसकी भूल है? क्या है? वो तो ठीक है लेकिन हमारे बच्चे तो चले गए तो फिर हमारा जीवन कैसे जाएगा हम भी अभी बुड्ढे हैं कैसा जाएगा वो मन में बहुत बिचारा था अभी उसने जीवन देखा भी नहीं है
अभी उसकी उम्र 37 ईयर थी 37 तो वो जाके हम लोग बहुत हम लोगे और मेरा सबसे तीन बच्चे उसमें सबसे प्यारा बच्चा मेरा था वो वही सोच रहे हैं कि जीवन कैसे रॉजर डेविड क्रिश्चियन और उनकी पत्नी रचना समेत 260 लोगों की जान चली गई। रजर के पिता डेविड क्रिश्चियन ने जांच में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग की है। सुनिए। का प्लेन है एयर इंडिया मेरा देश का। मुझे गर्व है कि हम हमको गर्व होता है। लेकिन सर मैं अभी मैं परदेश मेरे सर के पास जाके आया। मैं नहीं बैठा। ऐसा मैं नहीं हूं सर। मैं नहीं हूं। तो और लोग सब लोग यही सोचते हैं कि भ एयर इंडिया में फ्लाइट नहीं करना है। ऐसा स्वयं मैं तो मैं मैं कभी मैं जिंदा रहूंगा तब तब तक नहीं बैठूंगा। वो वो डाटा नहीं देंगे गवर्नमेंट।
वहां तक को किसी को भी पता नहीं। हम यही आशा रखते हैं कि भाई तुम आप सरकार से प्रशासन से हमको न्याय मिलना चाहिए हमें और सब परिवार को। सर उस वक्त उन्होंने हमने एक फोटो भी नहीं लिया। तभी मन में रह गया मेरा कि जब मेरे बच्चे गए तो उसके साथ एक फैमिली फोटो भी नहीं लिया। हर वक्त लेते थे। बस उस समय ही नहीं लिया कि उसकी जब याद बस उसने पापा ने जब वो वहां जाते थे जो लाइन में खड़े थे तो एक ही फोटो खींचा था। दूर से खींचा था। वो याद रह गई हमारी। तो मैं याद करती थी। क्यों ऐसा कि मन में सुझाव ही नहीं आया कि हम फैमिली फोटो खींच वो जा रहे हैं तो खींचे। वो याद ही नहीं आया। अभी वो बहुत दुख हो रहा है उस बाबत में। तो सब काम हो जाएगा।
इंटेरिम रिपोर्ट प्राथमिक कारणों और कंट्रीब्यूटिंग फैक्टर्स पर एक रोशनी डाल सकते हैं। लेकिन पूरी कहानी तभी सामने आएगी जब अंतिम रिपोर्ट सामने आएगी। यह एक कॉम्प्लिकेटेड जांच प्रोसेस है। इसलिए सरकार का कहना है समय लग रहा है। वहीं इस हादसे के 1 साल बाद भी पीड़ित परिवार सरकार से न्याय की गुहार लगा रहे हैं। दुर्घटना को एक साल होने जा रहा है और हमारे लिए और मुझे यकीन है कि बाकी परिवारों के लिए भी एक कभी यह खत्म ना हो ऐसा एक एक इरिवर्सिबल लॉस है। पर कैसे हम हमारे स्वजनों की जो सकारात्मक यादें हैं, एक मेमोरीज, एनर्जी हैं, उनके विचार आदर्श मूल्य हैं वो कैसे पॉजिटिव वे में चैनलाइज करके समाज के लिए, सेवा के लिए और गरीबों के और वंचितों के उत्थान के लिए इस्तेमाल करें। वो वही बस हमारा उद्देश्य रहना चाहिए और
यह करने से ही वो दिवंगत आत्माओं को स्वर्ग में शांति मिलेगी और वो दिवंगत आत्माएं हमारे ऊपर अपना प्रेम और आशीर्वाद हमेशा दे रही हैं और पापा की तरफ से ही हमें शक्ति मिल रही है। वैसा मेरा स्पष्ट रूप से मानना है। वैसे गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूणी की बेटी राधिका मिश्रा ने कहा है कि एयर इंडिया पिछले साल अहमदाबाद प्लेन क्रेस्ट के पीड़ितों को परिवार को कैश सेटलमेंट का ऑफर तभी दे रही है कि जब एयरलाइन और उसके मैन्युफैक्चरिंग के खिलाफ लीगल केस करने के अधिकार छोड़ दिए तो इसके बारे में क्या तो यह विषय मेरे संज्ञान में ऑनेस्टली नहीं है। जो मैं फिर से कहना चाहूंगा कि भारत सरकार एआईबी डीजीसीए मिनिस्ट्री ऑफ सिविल सिविल एिएशन और बाकी जो सारी तपास एजेंसीज हैं जो इन्वेस्टिगेशन कर रही हैं उनके ऊपर हमें संपूर्ण रूप से भरोसा है और मैं बाकी सारे परिवारों से भी यह विनती करना चाहूंगा कि जो प्रोसेस है हम उनको फॉलो करें और हम सिस्टम के ऊपर भरोसा रखें। इन्वेस्टिगेशन चल रही है अभी तो उसके ऊपर कोई मेरी टिप्पणी या कमेंट नहीं है।