Cli

बैजंती माला को क्यों पति खरीदकर करनी पड़ी शादी? जानकर रूह कांप उठेगी।

Uncategorized

हीरोइन जिसके साथ काम करने के लिए हर बड़ा एक्टर लाइन में खड़ा रहता था उड़ी जब दुलपे तेरी एक समय पर उनका जलवा ऐसा था कि राज कपूर उनके प्यार में पागल होकर उनसे संगम बिठा रहे थे। अरे बोल राधा बोल संगम होगा कि नहीं? नहीं वो अलग बात है कि वो राज कपूर से यह कहती थी। मैं का मुझे बुड्ढा मिल गया। ओए होए बुड्ढा मिल गया। और वहीं दिलीप कुमार भी खुद को उनके चिकने चेहरे पर फिसलने से रोक नहीं पाए। हो । तो हम बात कर रहे हैं साउथ से बॉलीवुड में आकर अपना इक्का जमाने वाली पहली हीरोइन बैजंती माला की। हर दिल जो प्यार करेगा वो गाना गाएगा। आखिर कैसे उनकी खूबसूरती ही उनकी दुश्मन बन गई? क्यों बैजंती माला को पति खरीद कर शादी करनी पड़ी? कैसे पहले दिलीप कुमार और फिर राज कपूर ने उनका इस्तेमाल किया और बर्बाद करके छोड़ दिया।

बैजंती माला के नाम ऐसा कौन सा रिकॉर्ड है जिसे आज के जमाने की 10 हीरोइन मिलकर भी नहीं तोड़ सकती। कैसे एक सुपरस्टार हीरोइन को खौफनाक सजा मिली? आज बैजंती माला कहां है और किस हाल में है। जानेंगे और भी बहुत कुछ। तो चलिए शुरू करते हैं। मैं गुड़िया हसीन मेरी मोरली सी चाल है। मैं गुड़िया हसीन। वैजंती माला का जन्म 13 अगस्त 1933 को चेन्नई में हुआ था। उनके पिता का नाम एमडी रमन और मां का नाम वसुंधरा देवी था। वैजंती माला बचपन से ही शास्त्री नृत्य में पारंगत थी और वह केवल 5 साल की थी। तभी से स्टेज पर डांस करने लगी थी और बहुत ही कम समय में एक चर्चित भरनाट्यम डांसर बन गई थी। हम प्यार का सौदा करते हैं एक बार। मात्र 13 साल की उम्र में बैजंती माला को पहली तमिल मूवी भी मिल गई थी।

जिसका नाम था बड़कई और इसके 2 साल बाद ही यानी कि सिर्फ 15 साल की उम्र में उन्हें पहली हिंदी मूवी भी मिल गई। 15 साल की उम्र में बॉलीवुड की हीरोइन बनने वाली वह साउथ की पहली लड़की बनी। इस मूवी का नाम था बहार। यह मूवी भी हिट रही और बजंती माला ने आते ही सबका ध्यान अपनी तरफ खींच लिया। सया दिल में आना रे आके फिर ना जाना रे ओ आके फिर ना जाना रे। इसके बाद बजंती माला लड़की बनी। अरे मतलब मूवी का नाम था लड़की और वो किशोर कुमार की हीरोइन बनी। यह मूवी भी बड़ी हिट हुई और बजंती माला को भी हर किसी ने पसंद किया। सजना आजा दर्श दिखा जा तुझे फिर याद किया मेरे बैजंतीमाला की बॉलीवुड में सफलता के दो कारण थे।

पहला यह कि वो बला की खूबसूरती थी और एक्टिंग भी उनकी लाजवाब थी। कमाल है? पहले तो तारीफों के पुल बांध डाले और बाद में अंगूठा दिखा दिया। और दूसरी लेकिन सबसे जरूरी और खास बात उनमें यह थी कि वह भले ही तमिल और तेलुगु भाषा से हिंदी फिल्मों में काम करने के लिए आई थी लेकिन उन्हें हिंदी बोलना बहुत अच्छे तरीके से आता था तो उनकी आवाज को डब कराने की जरूरत नहीं पड़ती थी।

जैसा कि दूसरी कई साउथ की हीरोइन के साथ होता था और यही कारण रहा कि बजंती माला अपने डायलॉग खुद अपनी आवाज में बोलती थी। 1954 में बजंती माला नागिन बनी। मतलब मूवी का नाम था नागिन और इस मूवी ने बैजंती माला को वह पहचान दिलाई कि वह रातोंरात देश भर की चहेती बन गई। मन डोले मेरा तन डोले मेरे दिल का गया। नागिन मूवी ब्लॉकबस्टर साबित हुई और इस मूवी के गाने ऐसे हिट हुए कि आज भी सुनकर भरोसा नहीं होता कि यह गाने 70 साल से भी ज्यादा पुराने हो चुके हैं। कौन बजाएगा और खासकर मूवी का यह गाना ऐसा था कि आज भी इस पर रिमेक्स बनते हैं और फिर उस पर 15 सेकंड की रील बनाकर लोग रातोंरात वायरस मतलब वायरल हो जाते हैं।

इसके बाद बजंती माला की मूवी आई पहली झलक और सच में मूवी में बैजंतीमाला को देखकर ऐसे लगता है कि उनसे खूबसूरत शायद ही कोई दूसरी हीरोइन उस समय पर होगी। ब्लैक एंड वाइट मूवी में भी बैजंती माला की खूबसूरती ने ऐसी झलक दिखाई कि लोग उनके कायल होते चले गए। इसके बाद मिसमाला, यासमीन, सितारा, जश्न जैसी कई फिल्में आई। 1955 में दिलीप कुमार देवदास बने। कौन कमबख्त है जो बर्दाश्त करने के लिए पीता है? और इस मूवी ने हर कैरेक्टर को अमर कर दिया। बजंती माला ने इस मूवी में चंद्रमुखी का किरदार निभाया था। के जिसको हर कोई मसल के और जब शाहरुख खान देवदास बने थे तो बैजंती माला का वही किरदार माधुरी दीक्षित ने निभाया था।

देवदास में भी वैजंती महाराज ने ऐसी एक्टिंग की कि आज भी उन्हें बॉलीवुड की पहली और असली चंद्रमुखी कहा जाता है। मैंने जिंदगी में प्रेम का कारोबार बहुत दिनों तक किया ही देखा जाए। 1956 में बजंती माला की एक और बेहतरीन मूवी आई अनजान और इस मूवी की भी क्या ही तारीफ की जाए। मूवी में बजंती माला ने अलग ही जलवा बिखेरा। यह मूवी इतनी बेहतरीन थी कि आज भी इसे बॉलीवुड की सबसे बेहतरीन क्लासिकल फिल्मों में से एक माना जाता है। मीम कहां छोड़ के चला है तू ये फूलों भरी राहे मेरे देश की हवा और मूवी के गाने भी लाजवाब थे। और जॉनी बोकर ने जब प्यार के लिए यह कहा सबसे महंगी चीज मोहब्बत दुनिया के बाजार में अच्छा है जो रहे गवारा क्या रखा है प्यार में। तो हर किसी ने कहा बात में दम तो है। इसके बाद भी उनकी कई बेहतरीन मूवीज आई। 1957 में बजंती माला एक बार फिर से दिलीप कुमार की हीरोइन बनी और ऐसी बनी कि पर्दे पर आग लग गई। मूवी का नाम था नया दौर और अगर किसी ने यह मूवी ना भी देखी हो तो इसके गाने तो सुने ही होंगे। ये देश है वीर जवानों का, अलबेलों का, मस्तानों का, इस देश का यारों और यह गाना सुनकर आज भी 15 अगस्त को स्कूल के बच्चे पक्के वाले देशभक्त बन जाते हैं।

इस देश का यारों क्या कहना, यह देश है दुनिया का कहना। और जहां बैजंती माला दिलीप कुमार की तारीफ करके यह कह रही थी, कूड़े जब जुल्फे तेरी सवारियों का दिल मच। तो वहीं दिलीप कुमार ने भी कहा ओ जब ऐसे चिकने चेहरे तो कैसे ना नजर फिसले मूवी का यह गाना इतना बड़ा हिट हुआ कि आज भी सच्चा आशिक अपनी प्रेमिका को छत पर इसी बहाने बुलाता है। ओ तुझे जान के बहाने देखूं तू छत पर आजा गोरी इस मूवी का हर गाना लाजवाब था। इसके बाद कठपुतली, एक झलक, आशा, सितारों से आगे, साधना जैसी कई बेहतरीन मूवीज आई। 1958 में बजंती माला मधुमती बनी और यह मूवी भी लाजवाब थी। दिल धड़कधड़क के दे रहा है यह सदा तुम्हारी हो चुकी हूं मैं।

इसमें एक बार फिर से वो दिलीप कुमार की हीरोइन बनी। मधुमती में भी बजंती माला के काम और खूबसूरती ने हर किसी को अपना दीवाना बना दिया था। ओ दया रे दया रे चढ़ गयो पापी बिछुआ ओ दया रे दया रे चढ़ गयो पापी बिछुआ जाने कैसे ये बात पड़ी संग आंख लड़ी रे और दिलीप कुमार ने भी गजब का काम किया दिल तड़प तड़प के कह रहा है आ भी जा तू हमसे आंख ना चुरा मूवी के गाने भी बड़े हिट हुए इसके बाद बजंती माला देवांद की हीरोइन बनी मूवी आई अमरदीप और यह मूवी भी बड़ी हिट हुई। 1959 में दिलीप कुमार और राजकुमार पहली और आखिरी बार किसी मूवी में एक साथ आए थे।

मूवी का नाम था पैगाम और इस मूवी में भी बैजंती माला दिलीप कुमार की हीरोइन बनी थी। यह मूवी अपनी सफलता से ज्यादा दो दिग्गजों के टकराव के लिए चर्चित रही। यह वो समय था जब दिलीप कुमार अपने करियर के पीक पर थे और वहीं राजकुमार भी वो थे जो किसी की बात सुनना तक पसंद नहीं करते थे। हम गलत अल्फाज़ पसंद नहीं करते। हम तुम नहीं आप हैं। मूवी में दिलीप कुमार ने राजकुमार के छोटे भाई का किरदार निभाया था। एक सीन में राजकुमार को दिलीप कुमार को थप्पड़ मारना था और जब राजकुमार ने वह थप्पड़ मारा तो ऐसे मारा कि दिलीप कुमार को लगा कि मानो राजकुमार ने जानबूझकर उन्हें ऐसे थप्पड़ मारा है।

बस फिर क्या था? यही मूवी दोनों की पहली और आखिरी मूवी बन गई और दोनों में दुश्मनी इतनी बड़ी कि लगभग 32 साल तक दोनों ने एक दूसरे की शक्ल तक नहीं देखी और किसी भी मूवी में काम नहीं किया और 1991 में आई मूवी सौदागर में जाकर यह दुश्मनी खत्म हुई थी। इस जंगल में हम दो चल घर चलते। पैगाम उस साल की बड़ी ब्लॉकबस्टर मूवी बनी और बैजंती माला भी अब बॉलीवुड की जानीमानी हीरोइन बन चुकी थी। इसके बाद बैजंती माला शम्मी कपूर के साथ कॉलेज गर्ल बनी और यह मूवी भी बड़ी हिट रही। 1961 में दिलीप कुमार गंगा जमुना लाए और बजंती माला फिर से उनकी हीरोइन बनी। तुम ही सब उल्टी पट्टी पढ़ाई के हमरे मर्द का एकदम खराब कर दिए हो और अब जो सुधरे का टाइम आवा है तो कहत हो मत जाओ गंगा। बैजंती माला जबजब दिलीप कुमार के साथ आई तो मूवी बेहतरीन ही बनी। दोनों की जोड़ी पर्दे पर खूब जमी और यह मूवी भी उस साल की सुपरडुपर हिट फिल्म बनी थी।

दो हंसों का जोड़ा बिछड़ गयो रे गजब भयो रे। इसके गाने भी लोगों ने खूब पसंद किए और खासकर मूवी का यह गाना इंसाफ की नगर पे बच्चों दिखाओ चल के। उस समय पर हर स्कूल टीचर ने बच्चों पर चेपा था। यह देश है तुम्हारा नेता तुम ही हो कल के। इसके बाद राजेंद्र कुमार आज का पंछी बने और राजेंद्र कुमार की मूवी तो ऐसी होती थी कि अगर थिएटर में लग गई तो हफ्तों चलती थी। इस मूवी के गाने बड़े हिट हुए और कुछ गाने तो ऐसे थे कि आज भी उन्हें सुनकर लगता है कि ओल्ड इज गोल्ड शब्द इन्हीं गानों के लिए बना है। तुम रूठी रहो मैं मनाता रहूं के इन अदाओं पे और प्यार आता है। इसके बाद रंगोली, झूला, डॉक्टर विद्या जैसी कई बेहतरीन मूवीज आई। इसके बाद बजंती माला फिर से दो हीरो की हीरोइन बनी। एक तरफ थे राजेंद्र कुमार और आज सामने पाया हाय कुर्बान जा और वहीं दूसरी तरफ थे राजकुमार मूवी का नाम था जिंदगी और सच में यह मूवी लाजवाब थी। इसके गाने भी बड़े हिट हुए।

फिर चाहे लव सॉन्ग हो, सदाबहार गाने हो या फिर सैड सॉन्ग और जिंदगी से भी बैजंती माला ने जिंदगी भर के लिए एवरग्रीन यादें दी। हम प्यार का सौदा करते हैं एक बार। इसके बाद राजकुमार की एक ऐसी मूवी आई जिसने बजंती माला की पॉपुलरिटी में चार चांद लगा दिए। मूवी का नाम था संगम। हर दिल जो प्यार करेगा वो गाना गाएगा हर दिल। इसमें भी बजंती माला राज कपूर और राजेंद्र कुमार दोनों की हीरोइन बनी। लव ट्रायंगल पर बनी यह उस समय की सबसे बेहतरीन मूवी थी और जहां एक तरफ राज कपूर उनके नहाते हुए कपड़े लेकर यह कह रहे थे मेरे मन की गंगा और तेरे मन की जमुना का बोल राधा बोल तो वहीं राजेंद्र कुमार भी उनसे यह कह रहे थे ये मेरा प्रेम पत्र पढ़कर के तुम नाराज ना हो इस मूवी से भी कई किस्से जुड़े हुए थे जैसे कि मूवी मूवी में एक गाना था दोस्त दोस्त ना रहा प्यार प्यार ना यह गाना राजेंद्र कुमार ने फिल्म से हटाने के लिए कह दिया था। उनका मानना था कि एक दोस्त अपने प्यार का बलिदान दे रहा है और अपनी दोस्ती निभा रहा है। लेकिन फिर भी यह गाना एक दोस्त को गलत साबित कर रहा है तो इसकी जरूरत नहीं है।

लेकिन राज कपूर ने उनकी बात नहीं मानी और यह गाना जबरदस्ती इस मूवी में रखा गया। इसी तरह मूवी के कई सीन ऐसे थे जो राज कपूर ने सिर्फ नरगिस की याद में शूट किए थे। इस मूवी से भी बजंती माला को खूब फायदा हुआ लेकिन इस मूवी में काम करके उन्हें नुकसान भी बहुत हुआ और दिलीप कुमार से उनका रिश्ता हमेशा के लिए खत्म हो गया। मेरे सनम दो जिस्म मगर एक जान है हम जिसकी चर्चा हम आगे करेंगे। इसके बाद दिलीप कुमार लीडर बने और इस मूवी में भी बैजंती माला के काम की हर किसी ने तारीफ की। इस मूवी के गाने भी बड़े हिट हुए और दिलीप कुमार के साथ बजंती माला की यह मूवी भी एक यादगार मूवी बनी। इसके बाद भी इशारा, नया कानून, दो दिलों की दास्तान जैसी फिल्में आई, जो कुछ खास नहीं चली।

1966 में बैजंतीमाला की एक ऐसी मूवी आई, जिसने बैजंतीमाला को हमेशा के लिए लोगों की फेवरेट बना दिया। मूवी का नाम था आम्रपाली और सच में अगर किसी ने बैजंती माला की यह मूवी नहीं देखी तो समझो वो ओल्ड इज गोल्ड का व्यूअर ही नहीं [संगीत] है। यह एक ऐसी मूवी थी जिसमें बजंती माला की खूबसूरती, उनका डांस और उनकी एक्टिंग हर बात में जादू था। आम्रपाली एक इतिहास की सच्ची कहानी पर बनी हुई मूवी थी। कहा जाता है कि आम्रपाली इतनी खूबसूरत थी कि उनके लिए पूरा नगर मरमटने को तैयार था।

इसलिए उसे वैशाली की नगरवधू बना दिया गया था और यह मूवी उसी कहानी पर बनी हुई थी और सच में बजंती माला को देखकर ऐसा लगता है कि नगर क्या उसकी खूबसूरती पर तो देश के देश भड़ जाए। कैसे बताए क्यों तुझको चाहे यारा बता ना पाए। इसके बाद राजेंद्र कुमार फिर से एक ब्लॉकबस्टर मूवी लेकर आए सूरज और बैजंतीमाला उनकी हीरोइन बनी। इसमें भी बजंती माला की खूबसूरती का वो आलम था कि लोग सिर्फ उनकी एक झलक देखने के लिए थिएटर में मर मिटने को तैयार थे। कैसे समझाऊं बड़े ना समझ लो। और राजेंद्र कुमार ने जब यह कहा बहारों फूल बरसाओ मेरा महबूब तो हर कोई वैजंती माला की खूबसूरती का कायल हो गया।

इस मूवी के गाने भी बड़े हिट हुए और आज के समय पर 15 सेकंड की रील में जो गाने वायरल होते रहते हैं और [संगीत] बहुत कम लोग यह जानते होंगे कि इसका ओरिजिनल 1966 में इसी मूवी में आया था। निकली थोड़ी छोड़ जली स्कूल ने कहा आजा मेरे पास निकली बोली बदमाश बदमाश बदमाश इसके बाद उन्होंने उत्तम कुमार के साथ छोटी सी मुलाकात की मतलब मूवी का नाम था छोटी सी मुलाकात और यह मूवी भी बड़ी हिट हुई। इसके बाद देवांद ज्वेल थीफ बने और बजंती माला ने इस मूवी में देवानंद की हीरोइन का किरदार निभाया और लोगों का दिल जीता। होठों में ऐसी बात मैं दबाके चली आई खुल जाए वही बात 1968 में दिलीप कुमार की मूवी आई संघर्ष और इस मूवी में भी बैजंती माला ने एक गंभीर और सादगी भरा किरदार निभाया जिसका दुख देखकर दर्शक भी दुखी हो गए। इस मूवी के गाने भी बड़े हिट हुए। इसके बाद राजेंद्र कुमार की एक और ब्लॉकबस्टर मूवी आई साथी और इस मूवी में उनकी दो हीरोइन थी। बैजंती माला का काम इस मूवी में भी हर किसी को पसंद आया। मेरा प्यार भी तू है यह बहार भी तू है। तू ही नजरों में इसके बाद दुनिया और प्यार ही प्यार जैसी फिल्में भी आई।

1969 में शम्मी कपूर प्रिंस बनी और इस मूवी में भी बैजंतीमाला ने खूब धमाल मचाया। यह वह समय था जब बैजंतीमाला जैसी डांसर हीरोइन कोई दूसरी नहीं थी। हर फिल्म मेकर उन्हें अपनी मूवी में लेने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हो जाता था। प्रिंस भी हिट रही और इसके इस गाने के लिए बदन पे सितारे लपेटे हुए तो जाने तमन्ना आज भी बजंती माला को याद किया जाता है। 1970 में राजेंद्र कुमार गवार बने। मतलब मूवी का नाम था गवार और इस मूवी में भी बजंती माला की हर किसी ने तारीफ की। ऐ फूलों की दाल ये राही पूछे एक सवाल तुम्हारा नाम क्या है? बजंती माला अपने करियर के पीक पर चल रही थी। उनके सामने फिल्मों की लाइन लगी थी और हर कोई उनके साथ काम करना चाहता था। लेकिन फिर भी गवार बजंतीमाला की आखिरी मूवी बनी और उन्होंने अचानक से फिल्मों में काम करना बंद कर दिया और पूरी तरह से बॉलीवुड से दूरी बना ली।

उनके इस फैसले से हर कोई हैरान रह गया। हालांकि उनकी पर्सनल लाइफ में क्या चल रहा था वो कोई नहीं जानता था। तो अब हम बात करेंगे वैजंती माला की पर्सनल लाइफ की और साथ ही जानेंगे उनसे जुड़े कुछ अनसुने किस्से। मैं तो जहां हूं वहां से हट नहीं सकती। लेकिन तुम जा सकते हो शंकर। बजंती माला एक दक्षिण भारतीय हीरोइन थी। लेकिन इसके बावजूद भी उनकी हिंदी पर पकड़ कमाल की थी। जब वो डायलॉग बोलती थी तो ऐसा लगता ही नहीं था कि वो साउथ की हीरोइन हैं और उनकी परवरिश तमिल और तेलुगु भाषा में हुई है। गंगा जमुना मूवी में उन्होंने एक ऐसी लड़की का किरदार निभाया था जो यूपी बिहार की रहने वाली थी और जब उन्होंने भोजपुरी में डायलॉग बोले तो लोग उन्हें देखते ही रह गए। अरे इंस्पेक्टर हो है वो तुम्हारे लिए। हमरा तो छटका देवर है और हम है उनके भोजाई।

जानत हो। लोगों को भरोसा ही नहीं हो रहा था कि अयो रामा और मुु स्वामी जैसे डायलॉग बोलने वाली बजंती माला इतनी अच्छी भोजपुरी कैसे बोल रही हैं और जिस भाषा से उनका कोई लेना देना भी नहीं है और शायद इसीलिए कहा जाने लगा था कि कोई दूसरी वैजंती माला नहीं हो सकती। वैजंती माला ने सबसे ज्यादा दिलीप कुमार के साथ काम किया। दोनों ने एक साथ कई बेहतरीन मूवीज दी और धीरे-धीरे दोनों की नजदीकियां भी बढ़ने लगी थी। मांग के साथ तुम्हारा मैंने मांग लिया संसार जब दिलीप कुमार ने बजंतीमाला के साथ काम करना शुरू किया था तो उस समय वह मधुबाला के प्यार में डुबकी लगा रहे थे लेकिन इसी बीच दोनों के बीच अनबन होने लगी और दिलीप कुमार ने बजंती माला से नजदीकियां बढ़ाना शुरू कर दिया जब नया दौर मूवी बन रही थी तो इसमें पहले दिलीप कुमार और मधुबाला को ही लिया गया था लेकिन फिर मधुबाला ने यह मूवी छोड़ दी। दिलीप कुमार ने भी समय बर्बाद नहीं किया और बैजंती माला को नया दौर की हीरोइन बनवा दिया।

इसके बाद तो दोनों की जोड़ी जमने लगी। बैजंती माला भी दिलीप कुमार से दिलो जान से प्यार करती थी। उस गांव के सवर सज के जहां मेरा यार बसता। दोनों प्यार के समुंदर में गोते लगा रहे थे। लेकिन इसी समय बजंतीमाला को राज कपूर की संगम मूवी का ऑफर आया। बैजंतीमाला का राज कपूर के साथ काम करने का सपना था और जब उन्होंने खुद ऑफर दिया तो बैजंतीमाला ने तुरंत हां कर दिया। लेकिन दिलीप कुमार नहीं चाहते थे कि वैजंतीमाला राज कपूर की मूवी में काम करें। उन्होंने साफ मना कर दिया कि तुम राज कपूर के साथ काम नहीं करोगी।

बैजंतीमाला फिर भी नहीं मानी और मूवी साइन कर ली। जिससे दिलीप कुमार का दिल टूट गया। और वहीं जब राम और श्याम मूवी में दिलीप कुमार के साथ बजंती माला को साइन किया गया था तो मूवी के सेट पर बैजंती माला की डायरेक्टर से कुछ बहस हो गई और डायरेक्टर ने उन्हें मूवी से निकाल दिया। बैजंती माला ने दिलीप कुमार से कहा कि या तो मुझे मूवी में वापस लिया जाए या तुम भी यह मूवी छोड़ दो। बैजंतीमाला को भरोसा था कि दिलीप कुमार उन्हें सपोर्ट जरूर करेंगे और उन्हें मूवी से इस तरह से नहीं निकाला जाएगा। लेकिन दिलीप कुमार ने उनकी मदद करने से साफ मना कर दिया और इससे बजंती माला का भी दिल टूट गया और फिर धीरे-धीरे दोनों में दूरियां बढ़ती चली गई। मेरे पास आओ नजर तो मिलाओ। बजंती माला के दिलीप कुमार से दूरियां बढ़ी तो राज कपूर उनके लिए कंधा बन गए और तुरंत उनका सहारा बन गए। दोनों ने एक साथ पर्दे पर खूब रोमांस किया और पर्दे का रोमांस कब असलियत में होने लगा किसी को पता भी नहीं चला। बिगड़ती क्यों हो? और क्या मेरी पसंद तुम्हें कभी पसंद नहीं आएगी? नहीं नहीं बहुत अच्छा है। बहुत फर्स्ट क्लास है ये। राज कपूर के साथ भी बजंती माला ने प्यार की लंबी पतंग उड़ाई। राज कपूर पहले से ना सिर्फ शादीशुदा थे बल्कि उनके बच्चे भी थे और उन्हें देखकर हर हीरोइन यही कहती थी।

हाय मैं का मुझे बुड्ढा मिल गया। फिर भी वो वैजंती माला के प्यार में डुबकी लगाने लगे। लेकिन जब यह खबर राज कपूर की पत्नी तक पहुंची, तो उसने हंगामा खड़ा कर दिया। उसने राज कपूर का घर छोड़ दिया और वह एक होटल में रहने लगी। राज कपूर बजंतीमाला के सिर्फ मजे ले रहे थे और जब उन्हें अपनी शादी खतरे में लगी तो उन्होंने एक झटके में बजंतीमाला को खुद से अलग कर दिया और तब बजतीमाला को समझ में आया कि राज कपूर ने सिर्फ उनका इस्तेमाल किया है। बड़े और नामी एक्टर के लिए सिर्फ उनका खूबसूरत होना मायने रखता था और सिर्फ उनकी खूबसूरती को भोगने के लिए ही दिलीप कुमार और राजकुमार ने उनका इस्तेमाल किया और काम निकल जाने के बाद उन्हें चाय की मक्खी की तरह अपनी जिंदगी से निकाल दिया। मेरा प्यार भी तू है। ये बहार भी तू है।

अब बजंती माला बुरी तरह से टूट गई थी और इसी समय उन्होंने कुछ ऐसा किया कि उन पर जिंदगी भर के लिए एक दाग लग गया। हुआ यह कि एक मूवी की शूटिंग के दौरान बजंती माला की तबीयत खराब हो गई। उन्हें निमोनिया हो गया और उस समय पर राज कपूर के फैमिली डॉक्टर थे चमन बाली। उन्होंने बजंती माला का इलाज किया और इलाज इतना लंबा चला कि बीमारी ठीक करते-करते दोनों प्यार के मरीज हो गए। बजंती माला का दिल पहले से ही घायल था और डॉक्टर ने उस पर चिकनी चुपड़ी बातों का मरहम लगाया और वह डॉक्टर के ही प्यार में पड़ गई। चमन बाली पहले से शादीशुदा थे। लेकिन ना तो इस बात से उन्हें कोई फर्क पड़ता था और ना ही बजंती माला को पड़ा। दोनों अब हर हाल में शादी करना चाहते थे। लेकिन यहां सीन अनिल कपूर की जुदाई मूवी वाला हुआ।

डॉक्टर की पत्नी ने डॉक्टर से अलग होने के लिए बहुत सारे पैसों की डिमांड की और कहा कि मैं तलाक तो दे दूंगी लेकिन मुझे एललीमनी के तौर पर बहुत सारा मोटा पैसा चाहिए। डॉक्टर के पास तो इतने पैसे नहीं थे तो उन्होंने हाथ खड़े कर दिए। डॉक्टर की पत्नी यह जानती थी कि उनके पास ज्यादा पैसे नहीं है। इसलिए उसने इतने पैसे मांगे कि डॉक्टर वह दे ना पाए और उनका तलाक भी ना हो। लेकिन जब डॉक्टर ने यह बात बैजंती माला को बताई तो वैजंती माला कितने भी पैसे देने के लिए तैयार हो गई। उन्होंने कह दिया कि तुम्हारी पत्नी को जितने भी एलीमनी चाहिए वो मैं दूंगी लेकिन मैं तुम्हें अपना बनाकर रहूंगी। कि अजय छोड़िए इन गली सड़ी बातों का जमाना चला गया। प्रेम के प्यारे-प्यारे गीत गाने वाला मुंह बंद क्यों हो गया?

बजंती माला ने सारे पैसे दिए और पत्नी को मुंह मांगा पैसा देकर उसके पति को अपना बना लिया। हर न्यूज़ पेपर और मैगजीन में यह छापा गया कि बजंती माला ने दूसरे के पति को खरीद कर अपना बना लिया है। उसने पैसों के घमंड में एक औरत का घर तोड़ दिया है और दूसरे के पति की कीमत लगाकर उसे खरीद लिया है। मैं तो प्यार से तेरे पिया मांग सजाऊंगी। बैजंती माला यहीं नहीं रुकी और 1968 में उन्होंने चमन लाल से शादी की और यह शादी इतने धूमधाम से की गई कि मानो बैजंतीमाला ने पानी की तरह पैसा बहाया। इस शादी में छोटे बड़े सभी कलाकारों को बुलाया गया था। सिर्फ राज कपूर को नहीं बुलाया गया। लोगों ने कहा कि बजंतीमाला ने सिर्फ शादी दिखावे और राज कपूर को जलाने के लिए की है। क्योंकि राज कपूर ने बजंतीमाला का दिल यह कहकर तोड़ा था कि वह शादीशुदा हैं तो उनसे शादी नहीं कर सकती। इसलिए बजंती माला ने राज कपूर के ही फैमिली डॉक्टर से शादी कर ली क्योंकि यह भी शादीशुदा थे। मतलब यह शादी नहीं बल्कि राज कपूर से एक तरह से बदला था।

कुछ हद तक लोगों ने भी इस बात को ठीक मान लिया क्योंकि बजंती माला ने एक शादीशुदा डॉक्टर से शादी कर ली जो किसी भी तरीके से उनके लायक नहीं था। फिर अचानक से उन्होंने फिल्मों में काम करना भी बंद कर दिया। जबकि उस समय पर बैजंतीमाला जवान थी। उन्हें फिल्में भी मिल रही थी और उनका करियर भी अच्छा चल रहा था। लेकिन सिर्फ प्यार में धोखा मिलने से उन्होंने अपनी जिंदगी को जानबूझकर खुद ही बर्बाद कर लिया और पूरी तरह से फिल्मी दुनिया से दूरी बना ली। बाद में उन्होंने एक बेटे को जन्म भी दिया जिसका नाम सुचिंद्रा बाली रखा गया। वो पहली हीरोइन बनी जिसने जवानी में ही फिल्मों में काम करना छोड़ दिया था और कभी भी किसी मूवी में सपोर्टिंग किरदार नहीं निभाया। हमेशा हीरोइन बनकर ही पर्दे पर आई। बजंतीमाला को चार बार बेस्ट एक्ट्रेस का फिल्मफेयर अवार्ड मिला। 1996 में उन्हें लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड भी मिला। बजंती माला की राजनीति में भी अच्छी पकड़ रही और उन्होंने राजनेताओं वाले दांव भी खेली और वह चेन्नई की सबसे दमदार नेताओं में से एक बनी। इंदिरा गांधी के साथ भी वैजंती माला के अच्छे संबंध थे और गांधी परिवार के वह बहुत करीब थी। वह राजनीति में भी सक्रिय रहीं।

वैजंतीमाला आज भी भारत नाट्यम और डांस से लोगों का मनोरंजन करती हैं। उनकी उम्र हो गई लेकिन उनके अंदर का डांसर आज भी जिंदा है। अर्थशास्त्री संगीत को आप ही फिल्मों में लेकर के आए। हां हां। सर वैजंती माला भरनाट्यम में इतनी पारंगत थी कि उन्होंने कई देशों के सामने अपने भरनाट्यम की प्रस्तुति दी थी और वो भारत की एकमात्र ऐसी हीरोइन थी जिसने विदेश में जाकर कई देशों के लीडरों के सामने भरनाट्यम की प्रस्तुति दी थी और उनके नृत्य को देखकर एक साथ 22 देशों के लोगों ने खड़े होकर तालियां बजाई थी।

यह एक ऐसा रिकॉर्ड है जो केवल बजंती माला के नाम ही रहा और उनके इस रिकॉर्ड को आज तक कोई नहीं तोड़ पाया। बजंती माला अब लगभग 90 साल की हो चुकी हैं और अपने परिवार के साथ चेन्नई में ही रहती हैं। तो यह थी बॉलीवुड की सबसे खूबसूरत हीरोइन रही बजंती माला की कहानी। [संगीत]

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *