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अहमदाबाद भारत की नई राजधानी बन सकती है ?

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यही कहानी है साबरमती के तट पर बसे एक ऐसे शहर की जिसने समय की रफ्तार को कभी अपने से आगे निकलने नहीं दिया। जी हां दोस्तों सन 1411 में सुल्तान अहमद शाह द्वारा बसाया गया अहमदाबाद जिसे कभी अपनी तंग गलियों पोल संस्कृति और कपड़ा मेलों के कारण पूर्व का मैनचेस्टर कहा जाता था। लेकिन 21वीं सदी के शुरुआत के साथ ही इस शहर ने अपनी पुरानी कचुली को उतार फेंका।

आज क्या अहमदाबाद सिर्फ इतिहास की किताबों में दर्ज एक पन्ना नहीं है। आज यह गगनचुंबी इमारतों, बुलेट ट्रेन के सपनों, गिफ्ट सिटी की वैश्विक गूंज और विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचे का एक ऐसा जीवंत क्लॉज़ है जो पूरी दुनिया के सामने शहरी विकास का नया मॉडल पेश करता है। आइए जानते हैं उस पूरी थ्योरी और मास्टर प्लान को जिसने अहमदाबाद को एक पारंपरिक शहर से भारत की सबसे आधुनिक मेगा सिटी में तब्दील कर दिया। इंडिया की राजधानी भी बनाया जा सकता है। जी हां दोस्तों, अहमदाबाद के आधुनिक शहर बनने के पीछे कोई इत्तेफाक नहीं है बल्कि एक सोची समझी अर्बन प्लानिंग थ्योरी है। साल 2000 के बाद जब गुजरात ने विकास की एक नई करवट ली तब अहमदाबाद को इस बदलाव का केंद्र बिंदु बनाया गया। इस थ्योरी के तीन मुख्य स्तंभ थे। पहला सस्टेनेबल इंफ्रास्ट्रक्चर मतलब यानी ऐसा विकास जो पर्यावरण और आधुनिकता में संतुलन बनाए रखे। [हंसी] दूसरा कनेक्टिविटी और मोबिलिटी मतलब शहर के हर कोने को रफ्तार देना। तीसरा ग्लोबल बिज़नेस अब दुनिया भर के निवेशकों को आकर्षित करना अहमदाबाद में। जी हां दोस्तों, अहमदाबाद अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी और एएमसी ने मिलकर शहर की सीमाओं का विस्तार किया।

रिंग रोड्स का जाल बिछाया गया और टाउन प्लानिंग स्कीम्स के तहत जमीन का ऐसा आवंटन किया गया जिससे बिना किसी अफरातफरी के सड़कों, पार्कों और सार्वजनिक सुविधाओं के लिए जगह पहले से ही तय कर दी गई। अगर आपको अहमदाबाद के आधुनिक बदलाव को एक फ्रेम में देखना हो तो साबरमती रिवर फ्रंट पर आकर ठहर जाइए। एक समय था जब साबरमती नदी साल के अधिकांश महीनों में सूखी रहती थी और इसके किनारे झुग्गियों और गंदगी से गिरे रहते थे। लेकिन एक क्रांतिकारी रिवर फ्रंट डेवलपमेंट प्रोजेक्ट के तहत इस पूरी नदी काल कल्प कर दिया गया। साबरमती के दोनों किनारों पर कंक्रीट के मजबूत तटबंध बनाए गए। नदी में सालों भर पानी बनाए रखने की व्यवस्था की गई और नदी के किनारे सुंदर बगीचे, वॉकवे और साकिल टैग विकसित किए गए। आज का अटल ब्रिज जो अपनी अनूठी वस्कोला के लिए दुनिया में मशहूर है। इस रिवर फ्रंट की शान है। रिवर फ्रंट ने ना केवल अहमदाबाद के पर्यावरण को सुधारा बल्कि इसे एक प्रमुख पर्यटन स्थल और सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र बना दिया। यह इस बात का सबूत है कि कैसे एक मृत नदी को शहर की सबसे बड़ी ताकत बनाया जा सकता है। एक आधुनिक शहर की पहचान इस बात से होती है कि वहां का आम नागरिक कितनी आसानी और सम्मान से सफर करता है। अहमदाबाद ने इस मोर्चे पर देश को राह दिखाई। साल 2009 में शुरू हुई जनमार्ग यानी बीआरटीएस ने शहर की परिवहन व्यवस्था को बदल दिया। सड़कों के बीचों-बीच केवल बसों के लिए समर्पित कॉरिडोर बनाकर अहमदाबाद ने साबित किया कि ट्रैफिक की समस्या से कैसे निपटा जाता है। अंतर स्तर पर इस मॉडल को सराहा गया और अब इस कड़ी में जुड़ चुकी है अहमदाबाद मेट्रो। शहर के पूर्व से पश्चिम और उत्तर से दक्षिण को जुड़ने वाली मेट्रो रेल। आज लाखों लोगों के सफर को सुगम प्रदूषण मुक्त और बेहद तेज़ बना रही है। इसके साथ ही भारत की पहली बुलेट ट्रेन मुंबई अहमदाबाद हाई स्पीड रेल जो का केंद्र भी अहमदाबाद का साबरमती स्टेशन ही है जो इस शहर को भविष्य की परिवहन तकनीक से सीधे जोड़ता है। वैश्विक स्तर की तो अहमदाबाद और गांधीनगर के बीच बसा गिफ्ट सिटी। इस आधुनिक थ्योरी का सबसे बड़ा और चमचमाता हुआ रत्न है। यह भारत का पहला अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र है। अिफ सिटी को एक स्मार्ट सिटी के भीतर स्मार्ट सिटी के रूप में डिजाइन किया गया है। यहां की थ्योरी है डिस्ट्रिक्ट कूलिंग सिस्टम, ऑटोमेटेड वेस्ट कलेक्शन और अंडरग्राउंड यूटिलिटी टनल। यानी इस शहर में सड़कों पर कचरा उठाने वाली गाड़ियां नहीं दिखती। नए बिजली और पानी के तारों का कोई जाल दिखाई देता है।

सब कुछ जमीन के नीचे आधुनिक तकनीकों से संचालित होता है। दुनिया के बड़े-बड़े बैंक, टेक कंपनी और यूनिवर्सिटीज आज गिफ्ट सिटी में अपने पैर पसार रहे हैं। यह क्षेत्र अहमदाबाद को दुबई, सिंगापुर और न्यूयॉर्क की टक्कर का एक ग्लोबल फाइनेंसियल हब बना रहा है। बात करें शिक्षा खेल संस्कृति का आधुनिकरण की तो आधुनिकता केवल कंक्रीट की इमारतों से नहीं दोस्तों। युवा इंसानी दिमाग और जीवन स्तर से आती है। अहमदाबाद हमेशा से शिक्षा का गढ़ रहा है। जहां आईएम अहमदाबाद नेशनल इंस्टट्यूट ऑफ डिजाइन एनआईडी और सीईपीटी यूनिवर्सिटी जैसे संस्थान पहले से ही शहर के बौद्धिक स्तर को ऊंचा उठाए हुए थे। वहीं अब यह शहर दुनिया का सबसे बड़ा खेल हब बनने की ओर अग्रसर है। मुटेरा में स्थित नरेंद्र मोदी स्टेडियम जो दुनिया का सबसे बड़ा क्रिकेट स्टेडियम है। आज अहमदाबाद की नई पहचान है। इसके आसपास एक विशाल स्पोर्ट्स एनक्लेव विकसित किया जा रहा है। जिससे यह शहर भविष्य में ओलंपिक जैसे वैश्विक खेलों की मेजबानी के लिए पूरी तरह तैयार हो रहा है। लेकिन इस पूरे आधुनिक बदलाव के बीच अहमदाबाद ने अपनी आत्मा को नहीं खोया है। यह भारत का पहला ऐसा शहर है जिसे यूनेस्को द्वारा वर्ल्ड हेरिटेज सिटी का दर्जा दिया गया है।

यह एक तरफ जहां इसकी पुरानी पोल, पारंपरिक आवासीय बस्तियां, नक्काशीदार मस्जिद और मंदिर, इसके सम मृत अतीत की गवाही देते हैं। तो वहीं दूसरी तरफ इसकी चौड़ी सड़कें, मॉल, आईटी पार्क, मेट्रो, सुनहरे भविष्य का स्वागत करते हैं। व्यापार की समझ यहां के लोगों के खून में है और तकनीक अब उनकी ताकत बन चुकी है। अहमदाबाद की आधुनिक शहर बनने की थ्योरी हमें सिखाती है कि विकास का मतलब अपने अतीत को भूलना नहीं बल्कि अतीत की मजबूत नींव पर भविष्य की एक ऐसी इमारत खड़ी करना है जिसकी चमक पूरी दुनिया देख सके। यह कल का अहमदाबाद था। यह आज के अहमदाबाद है और यही आत्मनिर्भर और आधुनिक बात का सबसे चमचमाता व चेहरा है। जी हां दोस्तों, वीडियो पसंद आई हो तो लाइक करें दोस्तों और चैनल में पहली बार आ रहे हैं तो चैनल को सब्सक्राइब करना ना भूलें दोस्तों क्योंकि यही हमें मोटिवेशन देता है और अच्छी वीडियोस बनाने के लिए। मिलते हैं नेक्स्ट वीडियो में तब तक के लिए जय हिंद दोस्तों।

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