माही मंदिर मा ही पूजा मा आज ये दास्ता है एक ऐसी जादुई और बेरहम दुनिया की जिसे हम और आप बॉलीवुड कहते हैं। महेंद्र बाहुबली को जीना होगा। एक ऐसी चमचमाती दुनिया जहां पर्दे पर दिखने वाली मुस्कान अक्सर हकीकत की तनहाइयों को छुपाने का महज एक जरिया होती है। तेरा बिना फट नहीं गया। ये देखकर कि तेरी बनाई इस दुनिया में एक मां इतनी मजबूर है कि उसका बेटा उसके सामने भूख से तड़प रहा है। हम जिन अभिनेत्रियों को पर्दे पर मां, पत्नी या प्रेमिका के किरदारों में देखकर आंसू बहाते हैं। जिनकी एक अदा पर लाखों दिल धड़कते हैं। असल जिंदगी में वह लोग उस मुकम्मल जिंदगी के आसपास भी नहीं होते। मोहब्बत की झूठी कहानी में रोए। फिल्मी कैमरे के सामने जो खुशियां और जो भरा पूरा परिवार हमें दिखाया जाता है, वो असल जिंदगी में अक्सर सिर्फ एक छलावा होता है और उस छलावे के पीछे छुपे होते हैं, वो दुख दर्द जिनको दुनिया कभी देख भी नहीं पाती। इस घर की इस घर की एक एक चीज मैंने अपने हाथों से सजाई है। ये मेरा घर है, मेरे पति का घर है। ये ये हमारे प्यार का मंदिर है। ये हमारे खुशियों का स्वर्ग है। इस घर पर मैं किसी को कब्जा नहीं करने दूंगी। इस घर को मैं ढीला नहीं होने दूंगी। ढीला नहीं होने दूंगी। आज ये कहानी है उस अधूरेपन की जो इस ग्लैमर की दुनिया में कदम रखने वाली कई बड़ी मलिकाओं को अपनी किस्मत के साथ भुगतना पड़ा। और बिना शादी के किसी के साथ रहने वाली लड़की उल्टा कहलाती है, रखेल कहलाती है। यह बाप है। कैमरे के सामने जलने वाली लाइटें जब किसी चेहरे को चमकाती है तो वो सबसे पहले उस इंसान के अकेलेपन को धुंधला कर देती है। भूल गए। जरा सोचिए उस औरत पर क्या गुजरती होगी जिसे पूरी दुनिया देवी की तरह पूजती हो। लेकिन जब वो रात को अपने आलीशान घर के दरवाजे बंद करती हो, तो वहां बच्चों की किलकारियों की जगह सिर्फ एक गहरा सन्नाटा उसका स्वागत करता हो। अब मैं किसी की निगाहों का सामना नहीं कर सकती। मुझे इस हुजरे में बंद रहने दो। दुनिया को अपनी कला से सब कुछ देने वाली ये अभिनेत्रियां ता उम्र एक मां पुकारे जाने वाले लफ्ज के लिए तरसती रह गई। जो कुछ उनके पास है
वो मेरे पास वो सब क्या दे सके तुम मुझे? मुझे मुझे मुझे मां कह कर पुकारने वाले। आज बात उस सूेपन की जिसने सिनेमा के बड़े-बड़े दौर की सबसे खूबसूरत और रसूखदार अभिनेत्रियों को भी घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया। हम भूल जाते हैं कि जिस स्टारडम के पीछे करोड़ों की भीड़ दीवानी है वो स्टारडम किसी औरत की गोद को नहीं भर सकता। हाय जिंदड़ी बे यारों हाय जिंदड़ी कैसे-कैसे रंग ये दिखाए जिंदड़ी हाय कैमरे के सामने की वो चकाचौंध कई बार अपनी ही जिंदगी की सबसे बड़ी खुशी यानी मातृत्व की बलि मांग लेती है और पीछे छूट जाती है एक ऐसी औरत जो अपनी ही कोख के सूनेपन को ता उम्र अपनी किस्मत मानकर जीती रहती है। हमें तुमसे प्यार प्यार कितना आज के इस बेहद खास और संजीदा एपिसोड में हम बॉलीवुड के उस चमकते हुए पर्दे को थोड़ा सा हटाकर देखेंगे। आज हम बात करेंगे उन मशहूर और दिग्गज अभिनेत्रियों की जो कैमरे के सामने तो एक बेहद जादुई और मुकम्मल जिंदगी के साथ दिखाई दी। लेकिन अपनी असल जिंदगी में अपने वजूद के पन्नों में वो ता उम्र बेऔलाद रही। मां बनने के सुख से महरूम रही और दुनिया उनको हमेशा बांझ और बंजर जमीन कहकर पल-पल जलाती रही। ये बांझ है। भगवान ने इतनी बदसुनी की है। ये दूसरों की गोदुनी करना चाहती है। हां। अरे मैं क्यों जाऊं? जाना है तो ये जाए। तूने मेरा दूध पिया है तू बिलकुल मेरे जैसा। नमस्कार आप सभी का स्वागत है बॉलीवुड नॉवेल के इस एपिसोड में। मां ओ मेरी मां दुनिया। नमस्कार, आदाब और आभार आप सभी दोस्तों का। आप देख रहे हैं बॉलीवुड नवेल। आइए शुरू करते हैं इन अधूरे ख्वाबों और तनहाइयों और उजड़ी जिंदगी के इस भावुक सफर को। मैं कभी नहीं रोऊंगी। तुम्हारी इन आंखों में कभी आजमाने नहीं दूंगी। कभी नहीं देती। दोस्तों किसी भी महिला की जिंदगी में जो सबसे बड़ा सुख होता है, वह होता है मां बनने के एहसास से।
लेकिन इस धरती पर अनेकों ऐसी बदनसीब हस्तियां भी हैं जिसके पास दुनिया जहां की दौलत रही लेकिन किस्मत ने कभी भी उनको मां बनने का सुख नहीं दिया और इसी फहरिस्त में सबसे पहला नाम उस महान और खूबसूरत सितारे का है जिसे भारतीय सिनेमा का द ट्रेजडी क्वीन कहा जाता है मीना कुमारी रुक जा रात ठहर जा रे चंदा बीते ना मीना कैमरे के सामने मीना जी का वो ठहराव, उनकी आंखों की वो खामोशी और संवाद बोलने का वो दर्द भरा जादुई अंदाज सीधे दर्शकों की रूह में उतर जाता था। वो सवाल आप जरूर पूछिए। मेरे जवाब से अगर आपको जरा भी शांति मिल जाए तो मैं समझूंगी। मैंने जो नाइंसाफी आपके साथ की है उसके प्रायश्चित का मुझे मौका मिल गया। साहिब बीवी और गुलाम की छोटी बहू की वो बेबसी हो या पाकीजा की साहिबा का दर्द। उन्होंने कैमरे के सामने जो भी किरदार निभाया उसमें अपने आंसुओं का एक हिस्सा फूंक दिया। ऐसी औरतों का जिनकी रूहें मर जाती हैं और जिस्म जिंदा रहते हैं। ये हमारे बालाखाने और कोठे। हमारी मकबरे हैं। लेकिन कैमरे की लाइट्स जब ऑफ होती थी तब पर्दे के पीछे से निकल कर आती थी एक तन्हा औरत की असली कहानी। मीना कुमारी ने मशहूर निर्देशक कमाल अमरोही से निकाह तो कर लिया। लेकिन उनका यह रिश्ता हमेशा उतार-चढ़ाव और बंदिशों से घिरा रहा। कमाल अमरोही पहले से शादीशुदा थे, और उनके बच्चे भी थे। लेकिन मीना कुमारी की अपनी कोख हमेशा सोनी रही। कमाल अमरोही नहीं चाहते थे कि मीना कुमारी उनके बच्चे की मां बने और इस पारिवारिक तनाव और अकेलेपन ने मीना कुमारी को इस कदर तोड़ दिया कि वो शराब के नशे में डूब गई। दिखता है आपको नशे की लत लग चुकी है। मुझे नशे की लत नहीं लगी रे। पूरी दुनिया को अपनी अदाकारी से रुलाने वाली यह अजीम अदाकारा ता उम्र एक बच्चे के लिए एक मां बनने के एहसास के लिए तरसती रही। वो सब क्या दे सके तुम मुझे? मुझे मुझे मुझे मां कहकर पुकारने वाली। और महज 38 साल की उम्र में इस दुनिया को अलविदा कह गई। ऐसी ही खुली हुई कब्र की एक बेसबर लाश हूं जिसे बार-बार जिंदगी बरगला कर भागा ले जाती है। मीना कुमारी जहां अपने हालातों के आगे घुटने टेक कर तनहा रह गई। वहीं किस्मत का यह क्रूर खेल हुस्न की उस मल्लिका के साथ भी खेला गया।
जिनकी एक मुस्कान पर उस दौर का हर शख्स अपनी जान छिड़कने को तैयार था। मेहरबान हम बात कर रहे हैं सिनेमा के इतिहास का सबसे खूबसूरत पन्ना कही जाने वाली मधुबाला की। हाल कैसा है जनाब का क्या ख्याल है आपका। कैमरे के ऑन होते ही उनकी वो मासूमियत, वो चुलबुलापन और उनकी आंखों का वो कातिलाना नूर देखकर ऐसा लगता था जैसे खुदा ने फुर्सत में उन्हें सिर्फ और सिर्फ सीधे खुशियां बांटने के लिए तराशा है। लेकिन कैमरे की इस बेमिसाल चकाचौंध के पीछे इस मासूम चेहरे की जो कड़वी हकीकत थी वो किसी के भी दिल को तार-तार कर दे। मधुबाला ने बॉलीवुड के दिग्गज गायक किशोर कुमार से शादी की। लेकिन शादी के बाद भी वह कभी मां बनने का सुख हासिल नहीं कर सकी। दरअसल मधुबाला के दिल में एक जन्मजात छेद था जिसकी वजह से वो गंभीर रूप से बीमार रहती थी। डॉक्टर्स ने उन्हें साफ कह दिया था कि इस बीमारी की हालत में मां बनना उनकी जान के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। पर्दे पर करोड़ों दिलों को धड़काने वाली मधुबाला का अपना दिल धीरे-धीरे उनका साथ छोड़ रहा था और इसी बीमारी और अकेलेपन की वजह से वो कभी मां नहीं बन पाई। महज 36 साल की उम्र में वह अपनी सुनी गोद और अधूरे ख्वाबों के साथ इस दुनिया से रुखसत हो गई। तुम्हारी दुनिया से जाए। बीमारी और मजबूरियों के इस साए से आगे बढ़े तो हमारी लिस्ट में अगला नाम आता है उस जोड़ी का जिसकी मोहब्बत की मिसाल आज भी पूरी फिल्म इंडस्ट्री में दी जाती है। उनसे मिली नजर के मेरे होश उड़ गए। अभिनय के शहंशाह दिलीप कुमार और हुस्न की मलिका सायरा बानो। सायरा जी जब महज 12 साल की थी तभी से वो दिलीप साहब की दीवानी थी। साल 1966 में जब इन दोनों की शादी हुई तो लगा जैसे किसी परी की मन्नत पूरी हो गई हो। दोनों की जिंदगी में बेशुमार दौलत, शहरत और एक दूसरे के लिए बेइंतहा प्यार था। लेकिन कुदरत को तो कुछ और ही मंजूर था। शादी के कुछ सालों बाद साल 1972 में सायरा बानो पहली बार गर्भवती हुई। पूरा घर इस होने वाले बच्चे की खुशी में झूम उठा था। दिलीप साहब अपने आने वाले अंश का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। लेकिन प्रेगनेंसी के आठवें महीने में सायरा जी को हाई ब्लड प्रेशर की गंभीर शिकायत हो गई। इस बीमारी की वजह से गर्भ में पल रहे बच्चे का दम घुट गया और वह दुनिया में आने से पहले ही शांत हो गया। नहीं शीतल नहीं मेरे साथ ऐसा नहीं करना।
मेरे साथ ऐसे नहीं करना शुरू कर। डॉक्टर्स को सायरा की जान बचाने के लिए वो बच्चा निकालना पड़ा और साथ ही एक कड़वी खबर भी देनी पड़ी कि अब वो दोबारा कभी मां नहीं बन पाएंगी। यह सदमा दिलीप साहब और सायरा जी के लिए किसी पहाड़ के टूटने जैसा था। इस घटना के बाद दिलीप साहब के दिल में एक वारिस की चाहत इस कदर जागी कि उन्होंने साल 1981 में अस्मा रहमान नाम की महिला से दूसरी शादी भी कर ली जिसने सायरा जी को पूरी तरह से तोड़ दिया था। हालांकि वो शादी सिर्फ 2 साल चली और दिलीप साहब अपनी गलती मानकर वापस सायरा जी के पास लौट आए। मांगी थी एक दुआ जो कबूल हो गई। सायरा जी ने ता उम्र दिलीप साहब की एक बच्चे की तरह सेवा की और अपनी सुनी गोद के दर्द को अपनी अटूट मोहब्बत के पीछे छुपा लिया। हाय जिंदड़ी बे यारो हाय जिंदड़ी कैसे-कैसे रंग ये दिखाए जिंदड़ी हाय दिलीप साहब और सायरा बानू की इस दर्द भरी दास्तान के बाद हमारी लिस्ट में अगला नाम आता है 70 के दशक की उस सादगी पसंद और वर्सटाइल अभिनेत्री का जिन्होंने अपने मध्यवर्गीय किरदारों से हर किसी का दिल जीत लिया विद्या सिन्हा रजनी गंधा फूल तुम्हारी रजनीगंधा और छोटी सी बात जैसी फिल्मों में एक साधारण लेकिन बेहद प्रभावशाली लड़की का किरदार निभाने वाली विद्या सिन्हा की स्क्रीन पर मासूमियत देखते ही बनती थी। लेकिन विद्या सिन्हा की असल जिंदगी इन फिल्मों की तरह इतनी सरल नहीं थी। उन्होंने वेंकटेश्वरन अय्यर से शादी की थी। लेकिन शादी के कई सालों बाद भी जब उनकी कोई संतान नहीं हुई तो मां बनने की तड़प ने उन्हें एक बड़ा फैसला लेने पर मजबूर कर दिया। विद्या सिन्हा ने इस खालीपन को भरने के लिए एक बेटी को गोद लिया जिसका नाम उन्होंने जानवी रखा। भले ही उनकी अपनी कोई सगी औलाद नहीं थी, लेकिन उन्होंने अपनी गोद ली हुई बेटी को अपनी सगी बेटी से भी ज्यादा प्यार दिया। हालांकि बाद में उनके पति की बीमारी के कारण मौत हो गई और उनकी जिंदगी का सफर फिर से संघर्षों से घिर गया। लेकिन मां बनने के उस जज्बे को उन्होंने गोद लेकर पूरा किया। पल समय तू जल्दी जल्दी विद्या सिन्हा की इस कहानी के बाद इस फहरिस्त में अगला नाम आता है उस दौर की सबसे बड़ी फैशन आइकॉन और स्टाइल डीवा का जिनकी जुल्फों के स्टाइल की दीवानी पूरी दुनिया थी साधना जी तेरा मेरा प्यार फिर क्यों वो कौन थी और मेरा साया जैसी सस्पेंस थ्रिलर फिल्मों में अपनी जादुई आंखों से राज करने वाली साधना का स्टारडम 70 के दशक में सातवें आसमान पर था। लग जा गले के फिर हसीना उन्होंने निर्देशक आर के अय्यर से प्रेम विवाह किया था। साधना और उनके पति की जिंदगी में बेशुमार दौलत और शहरत थी। लेकिन उनके घर के आंगन में कभी किसी बच्चे की किलकारी नहीं गूंजी।
साधना ता उम्र बेऔलाद रही। शादी के बाद साधना को थायराइड की एक गंभीर बीमारी हो गई जिसकी वजह से उनकी आंखों में भी दिक्कत आने लगी और उनका फिल्मी करियर धीरे-धीरे खत्म हो गया। करियर छूटने के बाद पति का साथ तो था लेकिन संतान ना होने का एक गहरा सन्नाटा उनके आलीशान बंगले में हमेशा पसरा रहा। हो जाएंगे सारी खुदाई। जीवन के आखिरी दिनों में जब उनके पति का भी साया उठ गया तो साधना बिल्कुल अकेली हो गई और उनकी आर्थिक स्थिति बेहद खराब होती चली गई। उन्होंने अपने अंतिम दिन मुंबई के एक अपार्टमेंट में गुमनामी, तन्हाई और दुख दर्द के साथ गुजारे और साधना जी की मौत बेहद तकलीफ और लाचारी के साथ खत्म हुई थी। नए आंसू रुके तो देखे फिर साधना जी की इस तनहाई से आगे बढ़े तो बॉलीवुड की एक और ऐसी अदाकारा हमारे सामने आती हैं जिन्होंने अपनी कॉमिक टाइमिंग और डांस से 80 और 90 के दशक के सिनेमा को एक अलग ही रंग दिया अरुणा ईरानी चढ़ती जवानी मेरे चाल मस्त तूने कदर बॉम्बे टू गोवा से लेकर बेटा फिल्म की कड़क सौतेली मां तक अरुणा ईरानी ने स्क्रीन पर जो भी किरदार निभाया उसे अमर कर दिया। शाबाश बेटा अच्छा किया। बहुत अच्छा सिला दिया आपने मां के दूध का। लेकिन इसमें तेरा कोई कसूर नहीं है रमेश। अरे यह तो भगवान की लाठी है जो आज थप्पड़ बनकर मेरे गाल पर पड़ी है। उन्होंने साल 1990 में मशहूर निर्देशक कुकू कोहली से शादी की। लेकिन अरुणा ईरानी के मां ना बनने के पीछे की कहानी किसी मजबूरी या बीमारी की नहीं बल्कि एक बेहद संजीदा और व्यवहारिक समझौते की कहानी है। दरअसल कुकू कोहली पहले से शादीशुदा थे और उनकी बेटियां भी थी। अरुणा ईरानी ने एक इंटरव्यू में खुद इस बात का खुलासा किया था कि उन्होंने शादी के बाद जानबूझकर कभी अपनी औलाद पैदा ना करने का फैसला किया। मैंने हमारी शादी के बारे में किसी को नहीं बताया क्योंकि वो शादीशुदा थे। इसी तरह हमारी शादी भी हमारे लिए बच्चे ना पैदा करने का फैसला सही नहीं था। उनका मानना था कि अगर उनका अपना बच्चा होता तो घर में पहले से मौजूद बच्चों और नए बच्चे के बीच मतभेद या फिर दूरियां आ सकती थी। उन्होंने अपने पति के पहले परिवार के सुकून और बच्चों के भविष्य के लिए अपनी कोख को खाली रखने का एक बड़ा और कड़ा फैसला लिया। यह एक औरत का वो त्याग था जो पर्दे के पीछे हमेशा छुपा रहा और अरुणा हमेशा इस त्याग और दर्द को अपने सीने में लेकर जीती रही है। मगर जी नहीं सकते तुम्हारे बिना। और दोस्तों ये फहरिस्त यहीं पर खत्म नहीं होती। अगर हम बॉलीवुड के इतिहास को और खंगा लें, तो ऐसी ही कुछ और कहानियां भी हमारे सामने आती हैं।
जैसे दिग्गज अदाकारा शवाना आजमी और जावेद अख्तर का रिश्ता जिन्होंने मेडिकल वजहों से संतान ना होने के बावजूद एक दूसरे का हाथ थामकर जिंदगी का सफर पूरा किया। वहीं गुजरे जमाने की मशहूर डांसर और एक्ट्रेस हेलन की भी अपनी कोई सगी औलाद नहीं थी। जिसके बाद उन्होंने खान परिवार का हिस्सा बनकर सलमान खान की बहन अर्पिता को गोद लिया और मां का सुख पाया। तो दोस्तों आज हमने जिन बड़ी मल्लिकाओं की दास्तान सुनी चाहे वह कमाल अमरोही के बर्ताव और बंदिशों के आगे टूटी मीना कुमारी हो। दिल की बीमारी की वजह से मां ना बन पाने वाली मधुबाला हो। बेटी को गोद लेकर मां का फर्ज निभाने वाली विद्या सिन्हा हो। बीमारी और तनहाई के साए में जीने वाली साधना जी हो या फिर एक परिवार को बचाने के लिए जानबूझकर मां ना बनने का कड़ा फैसला लेने वाली अरुणा ईरानी हो। यह सब इस बात की जीती जाती गवाही है कि कैमरे के सामने की यह चकाचौंध हर कलाकार से उसकी सबसे कीमती चीज मांग सकती है। यह वो फिल्मी दुनिया है दोस्तों जहां एक औरत स्क्रीन पर तो पूरी दुनिया की मां या आदर्श पत्नी बनकर वाहवाही लूटती है।
लेकिन कैमरे के पीछे वो अपनी सुनी गोद को देखकर सिसकती रहती है। यह सितारे हर रोज सुबह उठकर दुनिया को हंसाने का मुखौटा पहनते हैं। लेकिन अपनी निजी जिंदगी के इस अधूरेपन के दर्द को कभी इस रुपहैले पर्दे पर जाहिर नहीं होने देते। तो मेरे नसीब में ये दुख क्यों? आज तक किसी दूसरी औरत ने इतना बड़ा बलिदान दिया है भला। तो दोस्तों अब सवाल आपसे स्टारडम के इस सोने के पिंजरे और मातृत्व के सुख से महरूम रहने के इस कड़वे सच ने आपको कितना झकझोर कर रख दिया? और आज के इस खास एपिसोड में इन सभी सुपरस्टार अभिनेत्रियों में से किस अदाकारा की दास्तान और उनका त्याग जानकर आपको सबसे ज्यादा दुख या फिर हैरानी हुई। हमें नीचे कमेंट बॉक्स में अपनी राय जरूर दीजिएगा। अगर इन अभिनेत्रियों के जीवन का यह संजीदा सफर आपके दिल को छू गया हो, तो वीडियो को लाइक, सब्सक्राइब और अपने दोस्तों के साथ शेयर करना बिल्कुल ना भूलें। ये पर्दा हटा दो, जरा मुखड़ा दिखा दो हम प्यार करने वाले। आप देख रहे थे बॉलीवुड नवेल। मिलते हैं अगले एपिसोड में एक और ऐसी ही अनकही, अनसुनी और बेहद संजीदा दास्तान के साथ। तब तक अपना और अपने परिवार का आप बहुत ख्याल रखें और सुरक्षित रहें। धन्यवाद।