नीट पेपर लीक आंदोलन के बाद देश भर में चर्चा में आए कोकुर जनता पार्टी यानी सीजेपी केlफाउंडर अभिजीत दीपक अब एक नए विवाद में घिरते नजर आ रहे हैं। इस बार मामला किसी बयान या प्रदर्शन का नहीं बल्कि उनकी पढ़ाई, परिवार की आर्थिक स्थिति और पार्टी को मिलने वाले फंड को लेकर उठे सवालों का है।
गुजरात के सूरत से एक आरटीआई कार्यकर्ता ने चुनाव आयोग और दूसरी केंद्रीय एजेंसियों से इस पूरे मामले की जांच की मांग की है। आखिर सवाल क्या उठाए गए हैं? अभिजीत दीपक का जवाब क्या है? और पूरा विवाद कहां से शुरू हुआ? चलिए जानते हैं।
नीट पेपर लीग के खिलाफ हुए आंदोलन के बाद अभिजीत दीपक का नाम पूरे देश में चर्चा में आया। लेकिन अब गुजरात के सूरत के आरटीआई कार्यकर्ता अमित तिवारी ने उनकी आर्थिक पृष्ठभूमि और कॉकरोच जनता पार्टी की वैधानिक स्थिति को लेकर कई सवाल उठाए हैं। अमित तिवारी ने भारत निर्वाचन आयोग यानी ईसीआई और केंद्रीय जीएसटी विभाग को पत्र लिखकर पूरे मामले की जांच कीमांग की है।
साथ ही इस संबंध में आरटीआई भी दाखिल की गई है। सबसे बड़ा सवाल अभिजीत दीपक की पढ़ाई को लेकर उठाया गया। अमित तिवारी का कहना है कि अभिजीत के पिता भगवान राव दीपक महाराष्ट्र सरकार के एक रिटायर्ड कर्मचारी रहे हैं। ऐसे में सवाल यह है कि एक सरकारी कर्मचारी ने अपने बेटे के अमेरिका में पढ़ाई का खर्च कैसे उठाया? उन्होंने केंद्रीय एजेंसियों से मांग की है कि परिवार की आर्थिक स्थिति और विदेश में पढ़ाई के लिए इस्तेमाल हुए पैसों के स्रोत की जांच की जाए।
हालांकि मिली जानकारी के मुताबिक अभिजीत दीपक के परिवार का कहना है कि उनकी विदेश में पढ़ाई एजुकेशन लोन के जरिए पूरी हुई थी। बताया जाता है कि अभिजीत ने महाराष्ट्र में शुरुआती पढ़ाई करने के बाद पुणे के तिलक महाराष्ट्र विद्यापीठ से पत्रकारिता में स्नातक किया और फिर अमेरिका के बोस्टन यूनिवर्सिटी से पब्लिक रिलेशंस मेंमास्टर्स की डिग्री हासिल की। उनके पिता भगवान राव दीपक महाराष्ट्र सरकार से सेवानिवृत्त कर्मचारी हैं।
जबकि उनकी मां अनीता दीपक हैं। परिवार आज भी छत्रपति संभाजी नगर में रहता है। इस पूरे विवाद का दूसरा बड़ा पहलू कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी की कानूनी स्थिति को लेकर है। अमित तिवारी का कहना है कि यह संगठन खुद को राजनीतिक पार्टी की तरह पेश करता है। लेकिन क्या यह जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 29 ए के तहत चुनाव आयोग में विधिवत पंजीकृत है या नहीं? यह साफ होना चाहिए। उन्होंने चुनाव आयोग से इस पर स्पष्ट जवाब मांगा है। दरअसल यह विवाद उस वक्त और बढ़ गया जब वरिष्ठ वकील और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने मीट पेपर लीक आंदोलन के दौरान गिरफ्तार सीजेपी से जुड़े प्रदर्शनकारियों को कानूनी मदद देने के लिए ₹1 करोड़ के फंड का ऐलान किया।
इसके बाद सवाल उठने लगे कि अगर किसी संगठन को इतनी बड़ी आर्थिक मदद दी जा रही है तो उसकी कानूनी स्थिति और फंडिंग की पारदर्शिता भी साफ होनी चाहिए। अब आरटीआई कार्यकर्ता की शिकायत के बाद सभी की नजर चुनाव आयोग और दूसरी एजेंसियों के अगले कदम पर है। इस बीच अभिजीत दीपक की सेहत को लेकर भी जानकारी सामने आई। वो पिछले कुछ दिनों से बीमार हैं। जंतरमंतर पर प्रदर्शन के दौरान उन्होंने खुद बताया था कि उन्हें टाइफाइड हो गया है और उनका इलाज चल रहा है। शनिवार को महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजी नगर स्थित उनके घर पर डॉक्टर ने उनका स्वास्थ्य परीक्षण किया और फिलहाल उन्हें पूरी तरह आराम करने की सलाह दी गई है।
इसी वजह से वह इन दिनों सार्वजनिक कार्यक्रमों से भी दूर हैं। फिलहाल इस पूरे मामले में जांच की मांग जरूर उठी है। लेकिन अभी तक किसी भी एजेंसी ने अभिजीत दीपक या उनके परिवार के खिलाफ किसी तरह की अनियमितता की पुष्टि नहीं की है।
वहीं अब यह देखना अहम होगा कि चुनाव आयोग और दूसरी संबंधित एजेंसियां आरटीआई में उठाए गए सवालों पर क्या जवाब देती हैं और आगे इस मामले क्या कार्यवाही होती है।