आखिरकार उज्जैन प्रशासन को हनुमान भक्तों के सामने झुकना पड़ा। जय श्री राम। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि बगैर आम सहमति के खड़े हनुमान जी की मूर्ति नहीं जाएगी। खड़े हनुमान जी से संबंधित विषय में प्रशासन सभी श्रद्धालुओं एवं नागरिकों की भावनाओं और आस्था का पूर्ण सम्मान करता है। सभी संबंधित पक्षों की भावनाओं और को ध्यान में रखे बिना प्रशासन कोई भी निर्णय अथवा कदम नहीं उठाएगा।
प्रशासन का यह ऐसा फैसला है जिससे खड़े हनुमान जी के लाखों भक्तों को राहत मिली है। क्योंकि उज्जैन का हर एक चाहता है कि खड़े हनुमान जी वहीं रहेंगे और उन्हें वहां से ना हटाया जाए।
खड़े हनुमान जी को साक्षात बजरंगबली मानकर भक्त उज्जैन पहुंच रहे हैं। लेकिन मंदिर को देखकर भक्त दुखी हैं। प्रयागराज महाकुंभ से चर्चा में आई साध्वी हर्षारिया ने भी खड़े हनुमान जी के दर्शन किए। लेकिन बजरंगबली को टूटे मंदिर में देखकर वह दुखी हो गई। पे चार प्रयास हो चुके हैं
अब हम चाहते हैं कि और प्रयास ना हो और पूरा शहर जो है आप चौड़ा करवाइए। उसका निर्माण करवाइए। उसमें व्यवस्थाएं करवाइए। इस मंदिर को अभी हम छोड़ देते हैं और इस मंदिर को अच्छा सा रूप देके इसका फिर से निर्माण करते हैं।
देश के कोनेकोने से जो श्रद्धालु उज्जैन पहुंच रहे हैं, वह अब बजरंगबली से प्रार्थना कर रहे हैं कि हनुमान और दें। आज क्या मांगेंगे आप? हनुमान जी से क्या मांगना है? सुख और शांति और य खड़े रह। य खड़े रहे। अच्छा अपनी मनोकामना से ज्यादा बजरंगबली को य खड़े रहने की कामना कर तो य रहेंगे ना आशीर्वाद देंगे सभी को। हनुमान दादा के भक्तों की भीड़ को देखते हुए अब मंदिर के पास