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हिंदू से मुसलमान क्यों बना जिन्ना का परिवार ?जानकर होश उड़ जाएंगे।

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अक्सर ये सवाल उठता है कि मोहम्मद अली जिन्ना के रूट्स कहां से हैं? और क्या मोहम्मद अली जिन्ना के पूर्वज हिंदू थे? मोहम्मद अली जिन्ना के भाई-बहन, मोहम्मद अली जिन्ना के माता-पिता और मोहम्मद अली जिन्ना के दादा। इनसे जुड़ी क्या जानकारी है? और आज भी मोहम्मद अली जिन्ना के खानदान से जुड़े लोग कहां हैं? मतलब मोहम्मद अली जिन्ना का अपना परिवार फर्स्ट ब्लड लाइन और उसके पहले उनके पूर्वजों से जुड़े हुए लोग हैं कहां? क्या वो भारत में हैं? क्या वो पाकिस्तान में हैं? अगर मोहम्मद अली जिन्ना की बात शुरू करें और मोहम्मद अली जिन्ना के खानदान के हिंदू से मुसलमान होने की बात करें तो एक बात बहुत साफ नजर आती है।

जब इतिहास के पन्ने खंगाले जाते हैं और मोहम्मद अली जिन्ना के परिवार के पीछे की हिस्ट्री देखी जाती है तो ये बात सामने निकल कर आती है कि हां मोहम्मद अली जिन्ना के पूर्वजों के रूट्स यानी उनकी जड़े हिंदू थी और मोहम्मद अली जिन्ना के पिता ने बाद में पूरी तरह से इस्लाम को फॉलो किया। यानी दो बातें यहां बहुत साफ है। एक कि पूर्वज हिंदू थे और दूसरा कि मोहम्मद अली जिन्ना के पिता प्रैक्टिसिंग मुस्लिम हो गए थे। वैज्ञ यानी कि पूर्ण रूप से वो [संगीत] कुरान की तालीम करते थे। अपने बच्चों को कुरान पढ़ाते थे। इस्लाम कुबूल किया था और उनकी जो पत्नी थी यानी मोहम्मद अली जिन्ना की माता उनकी मदर वो भी इस्लाम को फॉलो करती थी। चलिए इस कहानी की शुरुआत करते हैं और समझने की कोशिश करते हैं कि ये कहानी कहां से शुरू होती है।

मेघजी पूंजा। मेघ जी पूंजा गुजरात के लोहाना समुदाय से आते थे और वो एक व्यापारी थे। मेघ जी पूंजा कौन? तो मेघ जी पूजा हैं मोहम्मद अली जिन्ना के दादा और मोहम्मद अली जिन्ना के दादा जो थे जो दस्तावेज हैं जो प्रमाण हैं वो ये बताते हैं कि मोहम्मद अली जिन्ना के दादा एक हिंदू की तरह ही जीवन यापन करते थे लेकिन समय के बदलने के साथ ही उनका झुकाव इस्लाम की तरफ आता है और जब उनके बेटे की बात आती है यानी कि जिन्ना भाई पूजा वो पूरी तरह से मुस्लिम प्रैक्टिस करने लगते हैं।

वो इस्लाम कबूल कर लेते हैं। यह कहानी कैसे आती है यह भी हम आपको बताते हैं। कुछ जो प्रचलित कथाएं हैं उसमें मछली के व्यापार को अपनाने की वजह से लोहाना समुदाय देखिए लोहाना समुदाय गुजरात का रहने वाला था और एक एक वक्त के बाद इनका परिवार यानी कि मोहम्मद अली जिन्ना के दादा ने मछली का व्यापार शुरू किया तो ये अफवाहें अक्सर आती हैं किककि उन्होंने मछली का धंधा शुरू किया तो हिंदू समाज ने उनका बहिष्कार किया और उन्होंने फिर इस्लाम कबूल कर लिया जिसकी प्रामाणिकता सवालों में है ये कथा कहीं से भी खासतौर से सामने नहीं आती है। लेकिन जब उनके बेटे की बात आती है अ जिन्ना भाई पूजा तो जिन्ना भाई पूंजा पूरी तरह से मुस्लिम रूप में जीवन बिताते थे और अपने बच्चों के यानी कि जो सात भाई बहन थे जिन्ना के अलावा उन सबको कुरान की तालीम देते थे। तो इस तरीके से यह बात बहुत साफ हो जाती है कि दादा तक हिंदू रीति रिवाज हिंदू नाम ये सब चलते थे। लेकिन पिता के बाद से पूरी तरीके से यह परिवार इस्लाम की तरफ चला आया। कुछ अहम जानकारी जो हम रिसर्च करके आपके लिए लाए हैं।

उसमें यह बात आती है कि जो दादा थे उनकी पृष्ठभूमि हिंदू बताई जाती है। यानी कि पूंजा मेघ जी मेघ जी पूजा या पूंजा मेघ जी और पूंजा मेघ जी दादा और मोहम्मद जिन्ना भाई पूंजा उनके पिता जिन्नाबाई पूंजा का जन्म 1850 में हुआ था और उनकी 1902 के करीब हो गई थी कराची में पाकिस्तान में क्योंकि बाद में वो पूरी तरीके से पाकिस्तान में जो आज का पाकिस्तान है यानी उस समय का कराची वहां शिफ्ट हो गए थे और वहां उन्होंने एक कंपनी भी शुरू की थी और अपने कारोबार को आगे बढ़ाया था।

उनकी जो शादी है यानी कि जिन्ना की जो मदर है मीठी बाई मीथी बाई से उनकी शादी हुई थी और इस तरीके से यह परिवार गुजरात से निकल कर चला गया कराची तो ये तो रूट्स की बात हो गई जो हमने आपको बताया कुछ लेकिन इसमें जो सारी बातें आती है कि भाई कई बार यह कहा जाता है कि यह लोहाना कैसे मुस्लिम बन गया। तो जो लोहाना समुदाय है गुजरात का वो खोजा खोजा समुदाय में कन्वर्ट हो गया और खोजागुजरात के मुस्लिम ही कहलाते हैं।कि जिन्ना का संबंध एक तरीके से खोजा मुस्लिम के रूप में है तो इस यहां से वो लाइन आ जाती यानी कि दादा और पिता के बाद से ये लाइन स्पष्ट हो जाती है कि कैसे धर्म बदलता है या कैसे इस्लाम की तरफ ये परिवार आगे बढ़ जाता है।

लेकिन इस बात का कोई सबूत पक्का इतिहास में नहीं दिखाई देता है कि मतलब कि परिस्थितियां क्या थी या क्या कारण थे? क्या मछली वाली जो कहानी है वो सही है। लेकिन कई लोग इसी बात का दावा करते हैं।

लेकिन ये अभी तक बहुत साफ नहीं हो पाया है जो इतिहासकार मानते हैं कि यही वजह थी। इतना जरूर है कि एक लंबे समय में एक लोहाना समुदाय जो है उसने अपने आप को [संगीत] खोजा समुदाय के रूप में कन्वर्ट किया और दादा तक यानी कि मेघ जी पूंजा या पूंजा मेघ जी तक हिंदू रीति रिवाज चलते थे जिन्ना के परिवार में। अब जरा ये भी देख लेते हैं कि क्या जिन्ना के खानदान से जुड़े हुए कुछ लोग अभी भी गुजरात में हैं। तो कुछ बड़ी दिलचस्प जानकारी है और वो मैं आपको बताने जा रहा हूं।

मैं उसके आपके लिए पढ़ के बताता हूं। देखिए डीएन पाणी ग्रही जो है उन्होंने अपनी पुस्तक इंडियास पार्टीशन द स्टोरी ऑफ़ इंपेरलिज्म इन रिट्रीट में ये लिखा है कि जो दादा थे पूजा मेघ जी उन्होंने अपने बच्चों को हिंदू नाम दिए हिंदू धार्मिक रस्में निभाई छठी और ऐसी जैसी परंपराएं भी करते थे इसका मतलब तो साफ है अगर इस रेफरेंस को माने अब एक दूसरा जो है दिलीप कर्नात दिलीप कर्नात भी ये बात बोलते हैं कि जिन्ना के दादा जो है हिंदू रीति रिवाजों को मानते थे और वो कैरी भी उन्होंने किया.

लेकिन बेटे से आकर ही ये खोजा मुस्लिम बन गए और इस तरीके से इस्लाम की तरफ वो बढ़ गए। अब एक छोटा सा सवाल यहां पर ये आता है कि जो दादा थे उनके भाई-बहन अगर गुजरात में हैं यानी कि मेघजी पुजा या पूजा मेघ जी के अगर उनके भाई-बहन थे तो क्या आज भी वह हिंदू हैं? मतलब जिन्ना के दादा के रूट से बचे हुए लोग क्या आज भी गुजरात में हिंदू हैं?

तो ये भी सवाल बड़ा दिलचस्प है और कुछ जो हाल फिलहाल में जो शोध हुआ जो जानकारियां सामने आई उसमें ये बात आई भी कि हां ऐसा हो [संगीत] सकता है क्योंकि जो दो शाखाएं निकलती हैं एक शाखा मुस्लिम धर्म की तरफ और दादा जी से दूसरी शाखा यानी कि जिन्ना के दादा से वो हिंदू शाखा उसके परिवार के लोग आज भी हो सकते हैं और लोग कहते हैं कि भाई जो जिन्ना के दूसरे जो जिन्ना के दादा के दूसरे भाई थे उनका परिवार परिवार हिंदू ही रहा और मैं आपको बता रहा हूं कि एक छोटी सी जानकारी सामने आई है। वो मैं आपको पढ़ के बता देता हूं कि क्या जानकारी है वो और किस तरीके से यह बात कही जाती है। रिपोर्ट में एक छोटी सी रिपोर्ट आई थी और उसमें ये कहा गया कि गुजरात में जिन्ना के कई हिंदू रिश्तेदार आज भी रहते हैं। और उसमें जो लोग रहते हैं वो उनके दादा के रिश्तेदार थे।

जिसमें कि कुछ नाम भी सामने आए थे। ऐतिहासिक स्रोत यह बताते हैं कि उनके भाई जैसे वजी भाई, नाथू भाई और मान भाई इनका उल्लेख सामने आता है और बताया जाता है कि इनकी संताने आज भी गुजरात में आज भी वो हिंदू हैं। तो ये एक फैमिली स्ट्रक्चर दिखाई देता है जहां से दो धाराएं निकलती हैं जिन्ना की। आपको बता दें कि जिन्ना की अपनी बेटी अपनी बेटी ने पारसी परिवार में शादी की थी और वो भारत में रह गई और दीना वाडिया जिनका नाम था वो भारत में ही रही। तो जिन्ना के अपने ही खानदान से आप देखें तो दो नहीं तीन धाराएं निकलती हैं।

एक दादाजी के रिश्तेदारों से जो धारा निकलती है वो गुजरात काठियावाड़ होते हुए वहां पर वो हिंदू रह जाते हैं। एक धारा जो उनके बेटे के साथ निकलती है यानी कि जिन्ना भाई पूंजा जो मेघ जी पूंजा के अह बेटे थे अपने वो कराची चले जाते हैं और वो खोजा मुस्लिम बन जाते हैं और उनसे जिन्ना और फातिमा और बाकी जो बच्चे हैं वो होते हैं यानी कि सात बच्चे होते हैं और जिन्ना की अपनी बेटी यानी कि जिन्ना की जो फर्स्ट ब्लड लाइन है.

वो पारसी समुदाय के हो जाते हैं क्योंकि वो भारत में रहते हैं। उनकी शादी पारसी में होती है। तो जिन्ना के फैमिली की हिस्ट्री यह कहती है कि हां जिन्ना के पूर्वज हिंदू थे।

लोहाना समुदाय से उनका ताल्लुक था। गुजरात के काठियावाड़ से उनका संबंध था। लंबे समय तक वो व्यापार करते रहे। मछली के व्यापार की कहानी भी सामने आती है। और जिन्ना के दादाजी हिंदू थे। हिंदू रीति-रिवाज का पालन करते थे। वो छठी जैसी रस्में भी निभाते थे। नाम बच्चों के वो हिंदू ही रखते थे। लेकिन जिन्ना के पिता ने पूरी तरीके से इस्लाम अपना लिया और अपने आप को अपनी कंपनी स्थापित की कराची में और जिन्ना का पिता कराची चला गया और इस तरीके से जिन्ना के पिता से इस्लाम का की शुरुआत होती है जिन्ना के खानदान में जो कि जिन्ना पर आकर ही खत्म हो जाती है।

ये बहुत ही दिलचस्प बात है क्योंकि जिन्ना की बेटी ने पारसी धर्म को कंटिन्यू किया। जिन्ना के दादा से जुड़े हुए जो भी लोग गुजरात में रह गए वो अभी भी हिंदू हैं। ये भी बातें सामने आती हैं। और जिन्ना के अपने जो भाई बहन थे पाकिस्तान में जो दस्तावेज हैं जो आर्काइव्स हैं उनके बारे में कोई ठोस जानकारी सार्वजनिक तौर पर उपलब्ध नहीं है। जिन्ना की अपनी बहन ने शादी नहीं की। फातिमा जो जिन्ना के साथ पाकिस्तान गई और जिन्ना की के बाद वो पाकिस्तान में ही रही और बाद में वहीं पर उनकी भी हुई।

तो इस तरीके से जिन्ना के परिवार में जो लोग बचे हैं या तो वह पारसी हैं या तो उनके दादा के खानदान से अभी भी बचे हुए लोग हिंदू हैं। इस्लामिक लाइन जो है उसके बारे में ठोस जानकारी अभी भी नहीं है। हो सकता है पाकिस्तान में कुछ छूटे भटके लोग हो लेकिन सार्वजनिक तौर पर कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है। तो जिन्ना को लेकर ये बड़ी दिलचस्प स्टोरी है। जिस जिन्ना ने पाकिस्तान का निर्माण किया। मुसलमानों के लिए अलग देश मांगा।

मुसलमानों को कहा कि तुम अलग हो। उसी जिन्ना की ब्लड लाइन में इस्लाम को कैरी करने वाले लोग आज की तारीख में दिखाई नहीं देते हैं। इस्लाम को फॉलो करते हुए उनका परिवार दिखाई नहीं देता है।

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