Cli

सालों तक चुपचाप भरते रहे गरीबों के अस्पताल के बिल! एक्टर की मौत के बाद खुला राज!

Uncategorized

फारुख शेख हिंदी सिनेमा के उन चुनिंदा अभिनेताओं में गिने जाते हैं जिन्होंने बिना किसी बनावटी अंदाज के आम आदमी के किरदारों को पर्दे पर बेहद स्वाभाविक तरीके से पेश किया। समांतर सिनेमा से लेकर टेलीविजन और रंगमंच तक उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई। उनकी सादगी, संवाद बोलने का अंदाज और अभिनय की सहजता आज भी दर्शकों को याद है। लेकिन आज हम आपको इनके बारे में तो बताएंगे ही साथ ही बताएंगे उनके परिवार के बारे में भी। तो हर बार की तरह अगर आप हमारे चैनल पर नए हैं तो चैनल को सब्सक्राइब जरूर कर लें। फारुख शेख का जन्म 25 मार्च 1948 को अमरोली तत्कालीन बॉम्बे स्टेट में हुआ था। उनके पिता पेशे से वकील थे। फारूक अपने परिवार में सबसे बड़े बच्चों में थे। उनकी प्रारंभिक शिक्षा मुंबई के सेंट मैरी स्कूल में हुई। इसके बाद उन्होंने सेंट जेवियर्स कॉलेज से पढ़ाई की और फिर सिद्धार्थ कॉलेज ऑफ लॉ से कानून की शिक्षा हासिल की। उनके पिता चाहते थे कि फारुख भी कानून के क्षेत्र में अपना करियर बनाएं। लेकिन कॉलेज के दिनों में ही फारुख का झुकाव रंगमंच और अभिनय की ओर बढ़ने लगा। उन्होंने थिएटर में काम करना शुरू किया और धीरे-धीरे उन्हें महसूस हुआ कि अभिनय ही उनका वास्तविक जुनून है। फारुख शेख ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत रंगमंच से की। ।

उन्होंने इब्ता और अन्य थिएटर समूहों के साथ काम किया। थिएटर ने उनके अभिनय को मजबूत आधार दिया और इसी दौरान उनकी मुलाकात कई महत्वपूर्ण रंगकर्मियों और निर्देशकों से हुई। साल 1973 में एमएस सथ्यू की फिल्म गर्म हवा से फारुख शेख ने फिल्मों में महत्वपूर्ण शुरुआत की। फिल्मों में बलराज साहनी जैसे महान अभिनेता के साथ काम करना उनके करियर के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हुआ। इसके बाद उन्होंने ऐसी फिल्मों का चुनाव किया जिनमें कहानी और किरदार को विशेष महत्व दिया जाता था। यही वजह थी कि वह समानांतर सिनेमा के प्रमुख चेहरों में शामिल हो गई। थिएटर में काम करते हुए 1973 में फारुख शेख को फिल्म गर्म हवा से डेब्यू करने का मौका मिला। पहली फिल्म के लिए फारुख को फीस नहीं मिली थी। फिल्म मेकर रमेश सथियों को ऐसे लड़के की जरूरत थी जो बिना फीस के काम करें। फारुख पहले ही थिएटर कर रहे थे तो उन्होंने झट से हां कह दी। 5 साल बाद रमेश सथियों ने फारुख को उनकी मेहनत के लिए ₹750 फीस दी थी। 1981 में रिलीज हुई फिल्म चश्मेबद्दूर फारुख शेख के करियर की सबसे बेहतरीन फिल्मों में शुमार है।

इस फिल्म की शूटिंग के दौरान एक लाइटमैन छत से गिरकर बुरी तरह जख्मी हो गया था। लाइटमैन को अस्पताल पहुंचाने के बाद पूरी यूनिट अपने काम में लग गई थी। कुछ दिनों बाद पता चला कि फारुख शेख रोजाना ना सिर्फ उस लाइटमैन से मिलने जाते थे बल्कि उन्होंने इलाज का पूरा खर्चा भी उठाया था। फारुख शेख ने गमन शतरंज के खिलाड़ी नूरी उमराव जान चश्मेबद्दूर कथा बाजार किसी से ना कहना और फासले जैसी फिल्मों में यादगार भूमिकाएं निभाई। शतरंज के खिलाड़ी में उन्होंने सत्यजीत रे जैसे महान निर्देशक के साथ काम किया। वहीं उमराव जान में रेखा के साथ उनकी जोड़ी को काफी पसंद किया गया। फारुख शेख और दीप्ति नवल की ऑन स्क्रीन जोड़ी भी हिंदी सिनेमा की बेहद लोकप्रिय जोड़ियों में रही। दोनों ने कई फिल्मों में साथ काम किया और उनकी सहज केमिस्ट्री दर्शकों को खूब पसंद आई।

चश्मेबद्दूर में सिद्धार्थ का उनका किरदार उनकी सबसे लोकप्रिय भूमिकाओं में से एक माना जाता है। फिल्म की कॉमेडी और रोमांस में फारुख ने अपने सहज अभिनय से किरदार को यादगार बना दिया। फारुख शेख सिर्फ फिल्मों तक सीमित नहीं रहे। उन्होंने टेलीविजन पर भी काम किया और चमत्कार तथा जी मंत्री जी जैसे कार्यक्रमों में दिखाई दिए। इसके अलावा उन्होंने लोकप्रिय टीवी कार्यक्रम जीना इसी का नाम है कि पहले सीजन की मेजबानी की। अपने सरल और विनम्र अंदाज में मशहूर हस्तियों से बातचीत करने का उनका तरीका दर्शकों को बहुत पसंद आया। रंगमंच पर उनका सबसे चर्चित काम तुम्हारी अमृता रहा। जिसमें उन्होंने शबाना आजमी के साथ अभिनय किया। यह नाटक लंबे समय तक लोकप्रिय रहा और दोनों कलाकारों की प्रस्तुतियों को खूब सराहा गया। इनसे जुड़ा किस्सा भी आपको बताते हैं। मुंबई के ताज होटल में आतंकवादियों के हमले के बाद कई परिवार वालों ने अपनों को खोया था। इस हमले से काम परिवार को भी खूब नुकसान हुआ। राजन काम नाम का एक आदमी ताज होटल में मेंटेनेंस का काम करता था। जो एक गेस्ट को बचाते हुए हमले में मारा गया। उसके पीछे पत्नी श्रुति कांबलेली और दो बच्चे अकेले पड़ गए। जब एक दिन फारुख शेख ने अखबार में यह खबर पढ़ी तो उन्हें बहुत दुख हुआ। उन्होंने सीधे अखबार में कॉल कर उनके परिवार की डिटेल्स ले ली और कहा कि इस बात को राज रखा जाए। फारुख हर महीने श्रुति कांबले के घर पैसे भेजते थे

और हर साल उनके बच्चों की फीस भरते थे। सालों तक श्रुति कांबलेली इस बात से अनजान थी कि उनकी आर्थिक मदद कौन करता है। जब 2013 में फारुख का निधन हुआ तो श्रुति को इस बात की जानकारी मिली कि उनकी मदद इतने बड़े स्टार करते थे। फारुख शेख को हमेशा ही सफेद चिकनकारी कुर्ती में देखा जाता था। यह उनका आइकॉनिक लुक था। यह इतने जमीनी व्यक्ति थे कि इन्होंने 30 सालों तक सिर्फ एक ही जगह से एक ही तरह का कुर्ता खरीदा। फारूक शेख सेवा सेल्फ एंप्लॉयड वुमस एसोसिएशन लखनऊ से ही कुर्ते खरीदते थे जिसे रू बनर्जी चलाती थी। 30 साल में कभी फारुख ने कुर्ते के लिए मोलभाव नहीं किया और असल रकम से हमेशा ₹500 ज्यादा दिए। कहते थे यह ₹500 कारीगर को दे देना। उनके हर कुर्ते की कीमत 2500 से 3000 तक होती थी। ज्यादातर फारुख 7000 से ₹0000 की शॉपिंग करते थे। वहीं कई बार बिल ₹1 लाख के पार हो जाता था। फारुख शेख एक कुर्ते की धुलाई में ही साल में ₹00 खर्च करते थे। 1981 की फिल्म चश्मे बदूर में फारुख शेख और दीप्ति नवल की जोड़ी पहली बार नजर आई। इनकी जोड़ी को खूब पसंद किया गया जो नौ फिल्मों में दिखी।

दोनों ऑन स्क्रीन के अलावा ऑफ स्क्रीन भी अच्छे दोस्त रहे। जब चश्मे बद्दू 2 फिल्म रिलीज हुई तो 2013 कुछ मीडिया कर्मी दीप्ति के घर इंटरव्यू लेने पहुंचे। वहीं फारुख शेख भी मौजूद थे। लगातार दीप्ति के घर लोग आते देख उनकी सोसाइटी के लोग भड़क गए। लोगों ने भीड़ देखकर आपत्ति जताई और कहा कि सोसाइटी में यह नाटक नहीं होगा। अगले ही दिन अखबारों में खबर छपी कि दीप्ति अपने घर में वेश्यावृत्ति करती है और लोगों का आना-जाना लगा रहता है। दीप्ति खबर पढ़कर खूब भड़की। उन्होंने यह खबर छापने वालों के खिलाफ कानूनी कार्यवाही की थी। फारुख शेख ने सेंट जेवियर कॉलेज में पढ़ाई की। उनकी मुलाकात कॉलेज के दिनों में रूपा जैन से हुई और दोनों को एक दूसरे से प्यार हो गया। दोनों करीब 9 सालों तक रिलेशनशिप में रहे। दोनों के दोस्त और परिवार वाले भी इस रिश्ते से वाकिफ थे। फारुख शेख के परिवार को तो रिश्ते से ऐतराज नहीं था लेकिन रूपा के घर वाले फारुख की कमाई को लेकर चिंतित रहते थे। क्योंकि वह उन दिनों सिर्फ थिएटर से ही मामूली कमाई करते थे। रूपा से शादी करने से पहले फारुख ने खुद को बतौर एक्टर स्थापित किया। जिसके बाद दोनों के परिवार वालों ने राजी-खुशी उनकी शादी करवाई। इस शादी से फारुख को दो बेटियां सना और शाहिस्ता है। फारुख शेख और शबाना आजमी कॉलेज के दिनों से दोस्त थे। फिल्मों में आए तभी इनकी दोस्ती बरकरार रही। एक दिन फारुख शबाना के साथ सैर करते हुए उन्हें एक भिखारी मिल गया। फारुख ने जेब से 50 पैसे निकालकर उसे दे दिए। जाते-जाते भिखारी ने दोनों को पति-पत्नी समझते हुए दुआ दी।

खुदा आपकी जोड़ी हमेशा सलामत रखे। फारुख ने यह सुनते ही कहा, अगर ऐसी ही बद्दुआ देनी है तो मेरे पैसे वापस कर दो। खैर, यह तो फारुख के मजाक करने का एक तरीका था क्योंकि दोनों की दोस्ती 45 सालों तक सलामत रही। 28 दिसंबर 2013 को फारुख शेख का हार्ट अटैक से निधन हो गया। फारुख स्वस्थ थे और अपने परिवार के साथ हॉलिडे मनाने गए थे। मौत के बाद उनके शव को मुंबई में लाया गया था। जहां 30 दिसंबर को उनका अंतिम संस्कार हुआ। उनकी कब्र चार बंगला अंधेरी वेस्ट में उनकी मां की कब्र के ठीक बाजू में बनाई गई थी। उनकी मृत्यु हिंदी फिल्म जगत के लिए एक बड़ी क्षति थी। उनके निधन के बाद भी उनकी फिल्में और उनके निभाए गए किरदार लगातार दर्शकों के बीच लोकप्रिय रहे। फारुख शेख की विरासत। फारुख शेख की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि उन्होंने स्टार बनने की बजाय अभिनेता बनने को प्राथमिकता दी। वह पर्दे पर आम इंसान जैसे दिखाई देते थे और उनके अभिनय में बनावटीपन बहुत कम था। उन्होंने समानांतर सिनेमा, व्यवसायिक फिल्मों, टेलीविजन और थिएटर चारों क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा साबित की। उनकी फिल्मों में रिश्ते, प्यार, दोस्ती और आम जिंदगी की परेशानियां अक्सर दिखाई देती थी। यही वजह है कि उनके किरदार आज भी पुराने सिनेमा के प्रशंसकों के दिलों में बसे हुए हैं। गर्म हवा से शुरू हुआ उनका यह सफर चश्मेबद्दूर, उमराव जान, कथा, बाजार और लाहौर जैसी फिल्मों तक पहुंचा। लगभग चार दशक लंबे करियर में उन्होंने संख्या से ज्यादा गुणवत्ता को महत्व दिया। फारुख शेख आज हमारे बीच नहीं है। लेकिन उनकी सादगी भरी मुस्कान, सहज संवाद अदायगी और यादगार किरदार हिंदी सिनेमा की विरासत का हिस्सा है। वो उन कलाकारों में से थे जिन्हें देखकर दर्शक पर्दे पर किसी अभिनेता को नहीं बल्कि अपने आसपास के किसी परिचित इंसान को महसूस करते थे। तो दोस्तों, अभी के लिए बस इतना ही। मिलते हैं अगले वीडियो में। तब तक आप अपना ध्यान रखिए। बाय बाय।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *