30 से 26 अपने शिष्य रसिक दुलारी की संदिग्ध के बाद संत प्रेमानंद जी महाराज ने नाराजगी जाहिर करते हुए कई कड़े फैसले ले लिए। आश्रम से जुड़े होने का दावा करने वाले लोगों द्वारा साझा किए जा रहे सूचना पत्रों और वीडियो में दीक्षा उपस्थिति दर्शन व्यवस्था और शिष्यों की वेशभूषा को लेकर नए निर्देशों की बात कही गई है।
हालांकि इन सोशल मीडिया सूचनाओं की आश्रम की ओर से स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। सोशल मीडिया पर प्रसारित जानकारी के मुताबिक केलीकुंज में अब हर शिष्य को सफेद या पीला अचला पहनने की अनुमति नहीं होगी। यह दावा किया जा रहा है कि जो शिष्य गृहस्थ है या किसी व्यवसाय से जुड़े हैं जैसे दुकान, ठेला या अन्य काम करते हैं उन्हें सामान्य कपड़े या कुर्ता, पजामा पहनना होगा।
वहीं सफेद वस्त्र पहनने की अनुमति केवल उन विरक्त शिष्यों को दिए जाने की बात कही गई है जो प्रेमानंद महाराज की प्रत्यक्ष सेवा या केली कुंज की व्यवस्था में लगे हुए हैं। यानी गृहस्थ शिष्यों और व्यवसाय से जुड़े शिष्यों के लिए सफेद या पीला अचला पहनने की व्यवस्था में बदलाव का दावा किया जा रहा है। इसी बीच प्रेमानंद महाराज की दीक्षा उपस्थिति को भी अनिश्चित काल के लिए बंद किए जाने की जानकारी सामने आई है।
आश्रम के बाहर से जारी एक वीडियो में एक साधक श्रद्धालुओं को इसकी जानकारी देता भी दिखाई दे रहा है। इसमें भक्तों से आश्रम के बाहर भीड़ नहीं लगाने और फिलहाल दीक्षा उपस्थिति के लिए नहीं आने की अपील की गई है। यहां पर खड़े हो दीक्षा की उपस्थिति अनिश्चित काल के लिए बंद कर दी गई है। आप लोग अपनीप दिनचर्या में जा सकते हैं।
राधा वल्लभ में दीक्षा की उपस्थिति अनिश्चित काल के लिए बंद हो गई है। राधा आपसे यहां मैं खड़ा हूं। आगे बढ़ जाइए। राधा जानकारी के मुताबिक सुबह से दीक्षा उपस्थिति के लिए पहुंचे कई श्रद्धालुओं को वापस लौटना पड़ा है। बताया गया कि आश्रम की व्यवस्था संभाल रहे शिष्य परिकर की बैठक होने के बाद सुबह करीब 8:00 बजे दीक्षा उपस्थिति बंद रखने की स्थिति स्पष्ट हुई। सोशल मीडिया पर जारी एक नोट के अनुसार फाइनल दीक्षा की नई तारीख फिलहाल नहीं दी जा रही है। जिन लोगों को पहले से किसी बैठक की तारीख दी जा चुकी है।
उनके संबंध में अलग व्यवस्था होने की बात कही गई है। इसके साथ ही महाराज जी के टोकन के माध्यम से होने वाले दर्शन भी फिलहाल बंद बताए जा रहे हैं। इन्हें दोबारा कब शुरू किया जाएगा इसकी कोई निश्चित तारीख सामने नहीं आई है। सोशल मीडिया पर इन बदलाव को प्रेमानंद महाराज के शिष्य रहे रसिक दुलारी शरण उर्फ दीपक लोधी की संदिग्ध मौत के बाद उठाए गए संभावित कदमों से जोड़कर चर्चा की जा रही है। बता दें कि वृंदावन में संत प्रेमानंद महाराज के शिष्य रसिक दुलारी की 25 सितंबर की सुबह संदिग्ध मौत हो गई थी। पुलिस की शुरुआती जांच और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर इसे गलत कदम माना जा रहा था। हालांकि परिवार की ओर से लगाए गए आरोप और रिपोर्ट में सामने आई चोटों के बाद मामले की जांच को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। पुलिस के मुताबिक घटना वाले दिन सुबह करीब 10:25 पर रसिक दुलारी अपने कमरे से बाहर निकले।
वह सीसीटीवी में भी दिखाई दिए। पुलिस के मुताबिक उनके कपड़ों पर खून लगा हुआ था। नीचे गिरने के बाद उन्हें गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया। दीपक को सर्वोदय अस्पताल पहुंचाया गया था। जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया था। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई और जांच शुरू हुई। घटना वृंदावन के बराहाघाट मार्ग स्थित गुरु कृपा कुंज अपार्टमेंट की है। पुलिस कमरे से लेकर छत और फिर अस्पताल तक के पूरे घटनाक्रम को सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों के जरिए जोड़ने की कोशिश कर रही है। 29 सितंबर को सामने आई पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की मुख्य वजह अत्याधिक खून बहने से लगा शॉक बताई गई। रिपोर्ट में सिर पर गंभीर चोट का उल्लेख है। जिस पर 14 टांके लगाए गए थे। रिपोर्ट के मुताबिक टकने की हड्डी में फ्रैक्चर था। वहीं शरीर के निजी अंग के जड़ वाले हिस्से पर पांच टांके लगाए जाने की बात भी सामने आई है। अंदरूनी जांच में खोपड़ी के पीछे हेयर लाइन, फ्रैक्चर और
अब पुलिस इन सभी चोटों को घटना के पूरे क्रम और उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज के साथ जोड़कर जांच कर रही है। रसिक दुलारी की मौत के बाद उनके परिवार ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। परिवार की ओर से सीबीआई जांच की मांग की गई है। वहीं संत समाज के कुछ लोगों की ओर से या उच्च स्तरीय जांच की मांग किए जाने की भी जानकारी सामने आ रही है। परिवार की ओर से मौत की परिस्थितियों और शरीर पर मिली चोटों को लेकर सवाल उठाए गए हैं। दूसरी तरफ पुलिस की शुरुआती जांच में सीसीटीवी फुटेज के आधार पर इससे गलत कदम उठाना ही माना जा रहा है।
ऐसे में अब जांच का फोकस इस बात पर है कि घटना से पहले दीपक के साथ क्या हुआ और सीसीटीवी में दर्ज घटनाक्रम में पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आई चोटों की कड़ियां किस तरह जुड़ती है। रसिक दुलारी शरण का वास्तविक नाम दीपक लोधी था और वह मध्य प्रदेश के जबलपुर का रहने वाला था। परिवार के मुताबिक नर्मदा परिक्रमा के बाद वे वृंदावन पहुंचा और संत प्रेमानंद महाराज के आश्रम से जुड़ गया था। परिवार के मुताबिक साल 2024 से वे वृंदावन में रह रहा था और उसे प्रेमानंद महाराज का शिष्य बताया जाता था। परिवार का कहना है कि वृंदावन में रहने के बाद धीरे-धीरे दीपक का संपर्क घर वालों से कम होता गया। वे एक बार वृंदावन से जबलपुर वापस भी गया था।
लेकिन करीब 2 साल पहले दोबारा वृंदावन आने के बाद वे घर कभी नहीं लौटा। इसके बाद परिवार के लिए उससे मिलना भी मुश्किल हो गया था। यह घर वालों का दावा है। फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी है। इधर घटना के बाद अब आश्रम के कई नियमों में बदलाव किया गया है। आप तक यह खबर पहुंचाई है मथुरा से मदन शर्मा ने।