Cli

210 साल बाद नेपाल ने की वो गलती जिसके इंतजार में था हर देश!मचा हड़कंप

Uncategorized

नेपाल से बहुत बड़ी गलती हो गई है। नेपाल को यह गलती बहुत महंगी पड़ने वाली है। लेकिन नेपाल की इस गलती ने भारत को बहुत बड़ा फायदा पहुंचा दिया है। नेपाल में जब से बालन शाह प्रधानमंत्री बने हैं, वह तभी से भारत को अकड़ दिखा रहे थे। बालन शाह को अपने पीछे यह नक्शा लगाने का बहुत शौक था।

इस नक्शे में बाले शाह भारत के हिस्सों पर कब्जा कर अखंड नेपाल बनाने की बातें कर रहे थे। लेकिन 210 साल बाद नेपाल से ऐसी गलती हो गई है जिसके इंतजार में था।

दरअसल नेपाल ने अपने देश के सबसे महत्वपूर्ण डॉक्यूमेंट्स खो दिए हैं। नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने बताया है कि हमसे 1816 की सुगोली के ओरिजिनल डॉक्यूमेंट्स गए हैं। आपको बता दें कि सुगोली 4 मार्च 1816 को ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी और नेपाल के राजा के बीच हुई एक शांति थी। उस समय सुगोली संधि ने नेपाल और ब्रिटिश भारत के बीच सीमाओं को तय किया था।

लेकिन अब नेपाल की संसद ने अपने आर्काइव्स, अपने मंत्रालयों, लाइब्रेरीज और म्यूजियम हर जगह की तलाश कर ली। लेकिन उन्हें सुगोली संधि की मूल कॉपी नहीं मिल रही है। बालेशाह लगातार इसी संधि का नाम लेकर उत्तराखंड के तीन हिस्सों लिपुलेख, कालापानी और लिंपिया धुरा को नेपाल का बताते रहे हैं।

हाल ही में नेपाल ने एक तरफ़ा फैसला लेते हुए अपने देश की करेंसी में छपने वाले नक्शे में भी भारत के इन तीनों इलाकों को नेपाल के नक्शे में दिखा दिया। जबकि लिपुलेख, कालापानी और लिंपिया अधूरा भारत के हैं। नेपाल दशकों से चीन और अमेरिका के प्रभाव में भारत पर दबाव डालने के लिए इन तीनों इलाकों को अपना बताता आया है। इस बार भी नेपाल सीमाओं के मुद्दे पर भारत से भिड़ने की तैयारी कर रहा था।

अपने फर्जी दावों को मजबूती देने के लिए नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने सुगौली की ओरिजिनल कॉपी मांगी। उन्होंने कहा कि इस बार हम सुगोली संधि दिखाकर भारत पर दबाव बनाएंगे। लेकिन जब बालन शाह के अधिकारी सुगोली को ढूंढने गए तो वो संधि मिली ही नहीं। यानी भारत तो लगातार यह बोल ही रहा है कि लिपुलेख, काला पानी और लिंपिया अधूरा उसके हैं। लेकिन नेपाल के पास अब कोई ऐसा दस्तावेज नहीं है जिसे लेकर वह यह बताएं कि भारत और नेपाल की सीमा के बीच बंटवारा कैसे हुआ था।

आपको बता दें कि सीमा विवादों में पुराने समझौतों, नक्शों और आधिकारिक अभिलेखों का काफी महत्व होता है। भारत और नेपाल की सीमा के बीच जो विवाद था उसके लिए सुगौली संधि सबसे महत्वपूर्ण डॉक्यूमेंट थी। लेकिन नेपाल ने सुगौली की मूल प्रतियां ही खो दी हैं। बालन शाह अखंड नेपाल के सपने देख रहे थे, लेकिन उनसे कागज खो गए हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *