तो यह तो रही दो जेलों की कहानी। अब बात तीसरी जेल की। हालांकि इस जेल से कोई कैदी भागा नहीं। उल्टे यहां तो दो कैदी उम्र भर के लिए एक दूसरे को गिरफ्तार कर लेते हैं शादी करके। दरअसल जोधपुर के मंडोर जेल में एक बारात निकलती है और बाराती बने थे कैदी, पुलिस और वकील।
जबकि दूल्हा दुल्हन थे। उम्र कैद की सजा पाए दो कैदी। बारातें तो आपने बहुत देखी होंगी। शादी घर, बैंकवेट हॉल, मैरिज हॉल,गांव, शहर, घर में होने वाली शादियां, आजकल वाली डेस्टिनेशन मैरिज भी। जाहिर है बैंड बाजा, बाराती भी देखे होंगे। लेकिन आज जिस बारात का मैं आपको बाराती बनाने जा रही हूं। शर्तिया ऐसी बारात ना आपने देखी होगी ना ऐसी बारात का कभी हिस्सा बने होंगे। बाकी छोड़िए एक छोटी सी झलक से शुरुआत करती हूं। यह एक इशारा होगा आपको पकड़ने ] के लिए कि यह बारात कैसी और किसकी है।
दूल्हे के साथ-साथ यह शख्स बैंड बाजा नहीं बल्कि कुछ और बजा रहा है। अब गौर से देखिए इसके हाथ में एक थाली है और एक चम्मच। अब इस दूल्हे को देखिए। बारातियों में शामिल पुलिस वाले भी हैं।वकील भी और सरकारी अफसर भी। ऐसा नहीं है कि पुलिस या वकीलों का शादियों में जाना कोई अजीब बात है। आखिर वह भी खाकी और काले कोट के पीछे है तो हमारे और आपके जैसे इंसान ही। अलबत्ता शादियों में वर्दी की जगह पुलिस वाले भी शादियों वाले कपड़े में ही आते हैं। पर यह शादी बहुत खास है।
इतनी खास कि इन्हें शादी में शिरकत भी करनी थी और वर्दी भी पहननी थी। क्योंकि ये इस वक्त यहां एक साथ दो-दो फर्ज निभा रहे हैं। अब चलिए दूल्हा दुल्हन से मिलते हैं। मंत्रोचार के बीच बाकायदा शादी की सारी रस्में निभाई जा रही हैं। सात फेरे लिए जा रहे हैं। गिनकर दूल्हा दुल्हन की तरफ से कुल 21 रिश्तेदार भी इस शादी का गवाह बनने के लिए इस वक्त यहां मौजूद हैं। अब गिनकर कुल 21 ही रिश्तेदार क्यों?
यह आगे आप समझ जाएंगे। शादी संपन्न हुई। अब दूल्हा और बाराती लौट रहे हैं। लौट कर वहीं वापस जा रहे हैं जहां से ये आए थे। अब जब सब कुछ देख ही लिया तो चलिए शादी के मंडप के बाहर निकल कर शादी की पूरी जगह भी देख लीजिए। देख लीजिए कि आखिर यह शादी हो कहां रही थी।
अमूमन मैरिज हॉल में जहां शादियां होती [संगीत] है, वहां उस मैरिज हॉल या रिसोर्ट के बड़े-बड़े नाम लिखे होते हैं। अभी-अभी जहां शादी हुई, इस शादी की जगह पर भी इस जगह के नाम का एक बोर्ड है। यह रहा वो बोर्ड। पढ़ा? खुला बंदी शिविर। अंग्रेजी में इसे ओपन जेल कहते हैं। हिंदी अंग्रेजी दोनों मिला दें तो आम बोलचालमें इसे जेल ही कहते हैं। अब चौके ना आप। जाने अनजाने आज आप भी एक जेल में होने वाली शादी का हिस्सा बन चुके हैं।
अब आप सोच रहे होंगे जेल तो सजा के लिए है। जेल में तो खूंखार कैदी होते हैं। जेल में तो यह होता है वो होता है। तो क्या जेल में शादी भी होती है? तो अब शुरू से शुरू करते हुए पूरी कहानी आपको सुनाऊं। उससे पहले बस एक लाइन में दूल्हा दुल्हन का परिचयकरा दूं। दूल्हे का नाम मूलाराम है और दुल्हन का सीमा। अब जाहिर है शौक में बाहर आकर डेस्टिनेशन मैरिज के तौर पर शादी के लिए दोनों जेल तो चुनेंगे नहीं। चुन भी ले तो जेल इन्हें अपने यहां शादी की इजाजत देने से तो रही। तो मतलब साफ है कि ये दोनों इसी जेल के कैदी हैं। अब कैदी हैं तो कुछ जुर्म भी किया होगा।
तो इत्तेफाक यह है कि दूल्हा दुल्हन बने मूाराम और सीमा दोनों एक ही जुर्म में इस जेल में आए। दोनों ने कत्ल किए। मूाराम ने अपने पड़ोसी का और सीमा ने अपने पति का। और इसी कत्ल के इल्जाम में यह भी इत्तेफाक देखिए कि दोनों को उम्र कैद की ही सजा मिली। यानी यह दूल्हा दुल्हन कायदे से इस जेल में उम्र कैद की सजा काटने आए हैं। लेकिन उम्र कैद की सजा काटते-काटते
इसी जेल में अब दोनों उम्र भर के लिए एक दूसरे के हो गए। साथ फेरी लेकर। राजस्थान के जोधपुर में मौजूद यह मंडोर ओपन जेल है यानी खुला बंदी शिविर। जिन्हें नहीं पता उन्हें बता दूं कि हमारे देश में दो तरह की जेलें होती हैं। एक तिहाड़ जैसी वो जेल जिसके बारे में आप सब जानते हैं और दूसरी ओपन जेल। अब आप कहेंगे इन दोनों जेलों में फर्क क्या है? तो उस फर्क को जानने से पहले यह समझ लीजिए कि मुजरिमों को जेल भेजने का मकसद क्या है? पुलिस मुजरिमों को पकड़ती है और अदालत उन्हें सजा के तौर पर जेल भेजती है ताकि जेल जाकर वह सुधर सके।
इसी का एक्सटेंशन है ओपन जेल। जो कैदी या मुजरिम जेल में अच्छा बर्ताव करते हैं उनका चाल चलन अच्छा होता है और जो एक खास मुद्दत जेल में काट चुके होते हैं उन्हें उनके बर्ताव के हिसाब से ओपन जेल में शिफ्ट कर दिया जाता है। ओपन जेल होती तो जेल है लेकिन जेल जैसी नहीं। ओपन जेल में आप एक तरह से आजाद होते हैं। आप यहां अपने परिवार के साथ रह सकते हैं। यहां रहते हुए आप सुबह सेशाम तक बाहर निकलकर नौकरी कर सकते हैं।
शादी कर सकते हैं। हर त्यौहार परिवार के साथ मना सकते हैं। पर शर्त इतनी है कि सुबह सूरज निकलने के बाद काम पर जाकर सूरज डूबने से पहले यहां लौट आना होता है। इस जेल में आप अपनी कमाई [संगीत] की गाड़ी भी खरीद सकते हैं। मोबाइल भी चला सकते हैं। जैसे बंदी जिसका आचरण बढ़िया होता है उसको ओपन कैंप पे भेजा जाता है। वो बंदी है मूाराम और सीमा महिला। यह मंडोर की वही ओपन जेल है। यह जो छोटे-छोटे कमरे क्वार्टर जैसे दिख रहे हैं, असल में यह कैदियों के घर हैं।
इस जेल के चारों तरफ खेती की जमीन है। इस जेल में रहने वाले ज्यादातर कैदी इसी जमीन पर खेती का काम करते हैं। यह जमीन दरअसल जोधपुर कृषि विश्वविद्यालय के हिस्से में आती है और उसी में एक हिस्सा इस ओपन जेल का आता है। अब वापस शादी में चलते हैं और दूल्हा और दुल्हन से आपका पूरा परिचय कराते हैं। यह जो दूल्हा है मूाराम इसके हाथों करीब 14 साल पहले जमीन के झगड़े में अपने ही पड़ोसी का कत्ल हो गया था.
जनवरी 2017 में अदालत ने मूलाराम को उस के लिए उम्र कैद की सजा सुनाई। सजा सुनाए जाने के बाद मूाराम को अजमेर जेल भेज दिया गया। जेल में उसका चाल चलन अच्छा था। उसके इसी अच्छे बर्ताव को देखते हुए 2 साल पहले ही उसे अजमेर जेल से इस मंडोर ओपन जेल में भेज दिया गया। यहां आने के बाद वह इसी जेल परिसर के अंदर खेती कर पैसे कमाने लगा। यहां सर सारा काम सीख गया।
खेतीबाड़ी का ट्रैक्टर चलाना सारा काम सीख गया। अच्छे आचरण से हम रह रहे हैं यहां और हमारा जीवन यापन कर रहे हैं और छूट जाएंगे। एक दो साल बाद छूट जाएंगे यहां से। जो मुलजिम है मुलाराम यह नागौर जिले का अरसिंघा गांव का है और इसको एक मर्डर के केस में सजा हुई थी और वहां से अजमेर जेल में इसको शिफ्ट किया गया था। अजमेर से फिर इसका आचरण को अच्छा देखते हुए इसको जोधपुर मंडोर ओपन एयर कैंप में भेज दिया गया था और यह पिछले दो साल से ओपन एयर कैंप में अपनी सजा भुगत रहा था।
इस दौरान यह अजमेर से यहां आने के बाद में ओपन एयर कैंप में अपना आचरण अच्छा था और ओपनर कैंप की जो व्यवस्थाएं हैं वहां पे एक बंदिया का पंचायत होती है। उस पंचायत का इसको सरपंच बनाया हुआ है। पंच बनाया होता है। तो ये उस पूरे कैंप का मैनेजमेंट देखता है और ये अपना कार्य करता है खेती का और सारा कार्य। उधर लगभग उसी दौर में सीमा के हाथों उसके पति का कत्ल हो गया। सीमा को भी अदालत ने इसके लिए उम्र कैद की सजा सुनाई।
एक महिला बंदी जो होती है सीमा जो महाराष्ट्र की होती है और उसको उसकी बेटी मतलब उसकी मां का द्वारा उसका विवाह आज जोधपुर में कर दिया जाता है। घंटाघर में एक कौशल राज अरोड़ा के साथ में। उस विवाह के कुछ दिनों बाद जब उसको उस विवाह से नाराजगी रहती है क्योंकि उसकी वो पसंद से शादी होती नहीं है तो अल्टीमेटली उसका वो रात को मर्डर कर देती है और उसको उस मर्डर के अंदर जोधपुर सेशन कोर्ट में उसको आजीवन सजावा दे देते हैं।
तब सीमा को जोधपुर जेल में रखा गया। जेल में सीमा का बर्ताव भी काफी अच्छा था। जेल के जेलर और बाकी कमेटी मेंबर की सिफारिश परl2024 में सीमा को भी मंडोर के इसी ओपन जेल में भेज दिया गया। यहां आने के बाद सीमा भी जेल परिसर के अंदर खेती का काम करने लगी। इसी जेल में [संगीत] एक लव स्टोरी जन्म लेती है। लव स्टोरी मूलाराम और सीमा की। एक साथ खेत में [संगीत] काम करते-करते दोनों में प्यार हो जाता है। ओपन जेल इनके प्यार को और [संगीत] आगे बढ़ाता है। फिर एक वक्त ऐसा आता है जब दोनों अपने इसी प्यार को एक नाम l देने का फैसला करते हैं। इसी के बाद शादी करने के लिए दोनों राजस्थान हाईकोर्ट में अर्ज़ लगा देते हैं।
यह दोनों मूलाराम और सीमा का आपस में मुलाकात होती है और यह वही अपना कार्य करते हैं खेती का और इन दोनों के बीच में कुछ अच्छे संबंध बनते हैं और इन्होंने यह डिसाइड करते हैं कि अपन शादी करेंगे। लेकिन इनकी शादी में एक सबसे बड़ी बाधा आती है कि इस ओपन ईयर कैंप में सिर्फ मैरिज के अलावा बंदी ही रह सकता है और दूसरे बंदी जो भी रहेंगे वह अपने-अपने क्वार्टर्स में रहेंगे। तो इनके लिए एक बड़ी विडंबना थी कि यह दोनों शादी करना चाहते थे। लेकिन कानून में इसकी कोई प्रावधान नहीं था कि वह शादी कैसे करें। राजस्थान हाई कोर्ट के लिए भी यह पहला मामला था।
जब उम्र कैद की सजा पाए दो कैदी [संगीत] ओपन जेल के अंदर शादी की मंजूरी मांग रहे थे। कोर्ट में मूाराम [संगीत] और सीमा के वकील पहुंचे तो दूसरी तरफ सरकार के वकील खड़े थे। तमाम दलील और बहस के बाद हुआ [संगीत] यह कि खुद सरकारी वकील ने भी इन दोनों की शादी पर कोई आपत्ति नहीं की। फिर क्या था? राजस्थान हाईकोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला देते हुए दोनों की शादी को मंजूरी दी थी।
जी 15 जुलाई को राजस्थान उच्च न्यायालय द्वारा मुलाराम और सीमा के शादी के लिए ओपन एयर कैंप में शादी के लिए निर्देश दिए गए। मुलाराम और सीमा हत्या के आरोप में अंदर है। मुलाराम सीमा के एक ओपन एयर कैंप में रहते हुए भी आपस में प्यार हो गया और इसके चलते यह हमारे पास आए थे और हमने कोर्ट के अंदर याचिका लगाई थी जिसके तहत कोर्ट ने ये डायरेक्शन दिए थे और इसकी पैरवी की थी एडवोकेट कालूराम भाटी जी ने और मेस में स्वप्न चौहान ने और यह कहीं ना कहीं संविधान की खूबसूरती को दिखाता है। कहीं ना कहीं जो हमारी क्रिमिनल जस्टिस थ्योरी है रिहैबिलिटेशन रिफेटिव थ्योरी उसका एक अच्छा उदाहरण है। जो सुधारात्मक सिद्धांत है उसका एक अच्छा उदाहरण राजस्थान उच्च न्यायालय द्वारा पेश किया गया।
इस तरह का एक अनोखा और एक मानवीय आधार को ध्यान में रखते हुए माननीय न्यायाधीपति उच्च न्यायालय ने जो यह निर्णय दिया था यह महिला बंदी के लिए एक पुनः समाज में स्थापित होने के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण नजीर के रूप में स्थापित हुई है। शादी की [संगीत] तारीख खुद अदालत ने तय की 22 जुलाई। अबकि शादी ओपन जेल में होनी थी तो कोर्ट ने बारातियों की गिनती भी खुद की। दूल्हा दुल्हन की तरफ से कुल 21 मेहमानों को इस अनोखी शादी में शामिल [संगीत] होने की इजाजत दी गई।
साथ ही कोर्ट के नुमाइंदे और पुलिस को भी इस शादी का गवाह बन शादी संपन्न हो जाने की रिपोर्ट कोर्ट को सौंपने का हुकुम दिया। ये बिल्कुल खुशी है सब शादी की तो। मतलब हम ऊपर से तो जोड़ी बनाते नहीं है लेकिन हम यहां नीचे आकर बनाई है जोड़ी बिल्कुल यहां बनाई है जोड़ी परिवार परिवार वाले करा रहे हैं शादी हम तो करवा रहे नहीं है शादी परिवार वाले करवा रहे हैं 21 आदमी आएंगे घर से तो कराएंगे शादी शादी के होगा क्या शादी के बाद तो अच्छा चौका सुधर जाता है मेरी तो औकात ही क्या है शादी हो रही है और ये दोनों ही आजीवन सजा के वो भक्ति हैं और इनमें दोनों में मेल हो गया तो तो इनके घर वालों ने खुशी होकर के यह शादी की है। कोर्ट से इजाजत ली है इसके लिए और यह बात है। आपने यहां क्या धर्म निभाया आज?
मैंने तो मेरे तो एक बच्चे की तरह है ये। मैं भी इसके साथ रहा हूं। कोई जमाना था। अच्छा इसी ओपन जी कैंप में मैं था। आज मैं फ्री हूं। आज आप बारात में बाराती बन [गला साफ़ करने की आवाज़] मैं बाराती बन के आया हूं। आज स्वतंत्र हूं मैं। 22 जुलाई को दिन में बाकायदा ओपन जेल [संगीत] के अंदर ही मंडप सजा। जेल के अंदर ही रिश्तेदारों और जेल में मौजूद कैदी बाराती बने। इकलौते ही सही बाराती नाचा भी। एक ने बैंड बाजे की कमी जेल में खाने के लिए मिलने वाली इस चम्मच और थाली को बजाकर ही कसर पूरी करने की कोशिश की। पंडित बाहर से आए। मंत्रोचार के बीच सात फेरे के साथ शादी संपन्न।
साक्षी सूर्य देव समस्त परिवारस्य वंदना जगह चेंज कर दीज भाई राजस्थान हाई कोर्ट की डबल बेंच ने एक मानवीय निर्णय देते हुए नागौर निवासी मूळाराम और मुंबई के निवासी सीमा जो है आज है जो इस खुली जेल है जोधपुर के मंडोर स्थित खुली जेल में आज परिणय सूत्र में बंध रहे हैं और इस समय इनकी हिंदू रीति रिवाज से शादी हो रही है। आपको बता दें कि देखिए राजस्थान हाई कोर्ट ने तकरीबन 21 लोगों को अनुमति दी है। जो 21 लोग हैं वो है इस शादी में शरीक होंगे। आप देख सकते हैं पंडित भी है। लेकिन जो सीमा की है जिन्होंने गोद ले रखा है सीमा के जो पिता हैं राधा कृष्णन जी वो आज कन्यादान कर रहे हैं।
आप देखिए जिस तरीके से शादी हो रही है और ये देखिए दूल्हा दुल्हन बैठे हैं और कन्यादान किया जा रहा है। लेकिन ये एक इतना राजस्थान हाईकोर्ट का मानवीय फैसला है जिसके चलते है पहली बार जोधपुर की जो मंडोर स्थित खुली जेल है जिस जेल के अंदर ये शादी हो रही है। प्रतिमा और मुाराम की शादी है। वह शादी मतलब कंप्लीट हो चुकी है। अभी और आप और उन उन दोनों को हार्दिक शुभकामनाएं देते हैं। भगवान उनको अच्छी तरह से आप भी यहां पे इनके बाराती हैं? जी हम बाराती भी है और बंदी भी हैं।
हां। कैसा है आचरण इन दोनों का? ठीक है साहब। तभी तो अच्छा था। तभी तो ऐसे जेल के यहां ओपन फार्म मिला। फिर यहां भी काफी समय से एक साथ रह रहे हैं। तो शादी भी उनकी बात हुई है। उन लड़की के परिवार वाले भी हैं। हमारे लड़के भी परिवार वाले हैं। दोनों सहमत है। ऐसे कुछ नहीं। आपने हिंदी हेतु हिंदू रीति रिवाज के हिसाब से शादी करवा दी। ठीक है सर। शादी संपन्न होने के बाद लिफाफा देने की भी रस्म अदा की गई। शगुन का लिफाफा देने वालों में वकील और पुलिस वाले भी थे। ओम विष्णु स्वाहा।
न्यायालय के आदेश अनुसार न्यायालय की परिक अनुसार यह बंदी मूलाराम निवासी नागौर का रहने वाला है और महिला सीमा यह बंबई की रहने वाली है। दो स्टेट के अलग-अलग बंदी दूल्हा और दुल्हन जिसकी आज शादी हुई है और न्यायालय आदेश अनुसार न्यायालय की पालना के अनुसार उसकी शादी हुई है और उसकी उज्जवल भविष्य की कामना करते हैं।