मेरे दोस्त बॉलीवुड के हीमैन कहे जाने वाले अभिनेता धर्मेंद्र एक ऐसे कलाकार हैं जिन्होंने अपनी दमदार एक्टिंग के दम पर बॉलीवुड इंडस्ट्री में एक अलग पहचान बनाई हैं और वह पहले रोमांटिक एक्शन हीरो के रूप में भी जाने जाते हैं।
धर्मेंद्र का परिवार काफी बड़ा है उनके परिवार में दो पत्नियां है दो बेटे हैं और चार बेटियां शामिल है तो बातें बॉलीवुड के बेहतरीन आपसे धर्मेंद्र का जन्म पंजाब के कपूरथला जिले में आज दिसंबर 1945 को हुआ था धर्मेंद्र के पिता का नाम केवल कृष्ण देओल था और वह पेशे से एक सरकारी शिक्षक थे ।
वैसे धर्मेंद्र का असल गांव सोने वालों है धर्मेंद्र का असली नाम धर्म सिंह देओल है पहलवानी के शौकीन धर्मेंद्र को शुरू से ही सुनने देखने का काफी शौक रहा था लेकिन आंकड़े ने फिल्म दिल्लगी के दौरान काटा जहां मशहूर अदाकारा सुरैया के धर्मेंद्र इस कदर दीवाने हुए इस फिल्म को उन्होंने 40 बार देख डाला तालिबान की हद तो तब हो गई जब इस अनमोल जाने के लिए मीलों पैदल का सफर तय करके जाया करते थे ।
फिल्मों में आने से पहले धर्मेंद्र रेलवे मिक्स लकवा करते थे और तब उन्हें सवा सौ रुपए तनख्वाह मिला करती थी।
तब उन्हें पता चला कि सिर्फ नाम की पत्रकार एक नई प्रतिभाओं को जरुर बढ़ेगी और धर्मेंद्र इस मौके को गंवाना नहीं चाहते थे और तब उन्होंने फटाफट फॉर्म भरकर भेज दिया और वह दिन भी आ गया जब प्रतियोगिता शुरू हुई और धर्मेंद्र कभी भी को एक्टिंग की ट्रेनिंग नहीं ली थी इसके बावजूद भी उन्होंने इस टैलेंट हंट में बाजी मार ली सभी को बचाते हुए वह इस टैलेंट हंट के विजेता बने टैलेंट हंट को जीतने के बाद धर्मेंद्र को लगा कि आप तो हीरो बनने की राह आसान हो गई है ।
कामयाबी और उनके बीच अब कोई दूरियां नहीं लेकिन उनका असली संघर्ष तो अब शुरू हुआ था फिल्मों में काम पाने के लिए वे फिल्म निर्माताओं के घरों के चक्कर काटने लगे उन्हें दर-दर की ठोकरें खानी पड़ी कई बार तो चने खाकर बेंच पर रात गुजारा करते है कई बार क्वेश्चन ने भी उन्हें नसीब नहीं होती थी पैसे बचाने के लिए धर्मेंद्र मीलों पैदल चला करते थे संघर्ष के दिनों में धर्मेंद्र जुहू के एक छोटे से कमरे में अपने एक दोस्त के साथ रहा करते थे ऐसे ही एक बार जब उनके पास खाना खाने के पैसे नहीं थे तो वे थके हारे अपने कमरे पर पहुंचे जहां जरूर बार डिनर की टेबल पर सब बोल का पकड़ रखा था और अपनी भूख को शांत करने के लिए धर्मेंद्र ने पूरा का पूरा इसबगोल खा लिया था और सुबह तक उनकी हालत खराब हो गई ।
उनका दोस्तों उन्हें डाक्टर के पास ले गया डॉक्टर ने सारा माजरा जानने के बाद कहा सिर्फ दवाइयों से काम नहीं चलेगा दवाइयों के साथ-साथ इन खाने की भी जरूरत है वहीं धर्मेंद्र के स्ट्रगलिंग एक्टिंग करियर की गाड़ी को स्पीड दी अर्जुन हिंगोरानी ने हिंगोरानी के उस एहसान को धर्मेंद्र आज भी नहीं भूल पाए आपको बता दे हिंगोरानी ने इस साल 1960 की फिल्म दिल भी तेरा हम भी तेरे में धर्मेंद्र को साइन किया था।
इस फिल्म में उनकी नायिका कुमकुम थी और धर्मेंद्र को तब साइन गिफ्ट के रूप में बहस 51रुपए मिला था इस फिल्म से उन्हें ज्यादा पहचान तो नहीं मिली लेकिन कई बार उन्हें कई निर्माता निर्देशक यह कहकर अपने ऑफिस से उन्हें यह कहकर निकाल देते कि वह पहलवानी कर सकते हैं आप चिंता चैनल जरा भी नहीं लेकिन तभी उनकी जिंदगी में देव आनंद साहब की एंट्री हुई और देव आनंद की वजह से धर्मेंद्र की किस्मत बदल गई।
आज के दौर में कंप्यूटर इतना है कि को वेक्टर्स आपस में हल्दी कंपटीशन की वजह दुश्मनी जैसा कंपटीशन करते हैं लेकिन उस दौर में ऐसा बिल्कुल भी नहीं था देखा जाए तो उस दौर में देवानंद ने धर्मेंद्र की जिंदगी बनाती और आज धर्मेंद्र जो भी है देवानंद की वजह से ही है धर्मेंद्र को फिल्म इंडस्ट्री में पहचान दिलाने का मौका देवानंद साहब ने ही दिया था साठ के दशक में देवानंद बहुत बड़े स्टार थे और उस समय धर्मेंद्र अपने एक्टिंग करियर मिर्च स्ट्रगल कर रहे थे धर्मेंद्र को पहली फिल्म आए पूरे एक साल हो चुके थे और धर्मेंद्र जगह-जगह ऑडिशन देते रहते थे 1968 में फल बन रही थी।
शोला और शबनम और यह फिल्म रमेश सहगल बना रहे थे हैं और इसमें वे देवानंद को लीड ऐक्टर के तौर पर लेना चाहते थे इस फिल्म के लिए ऑडिशन देने के लिए धर्मेंद्र भी देवतारा स्टूडियो पहुंचे और दर्शन के लिए लाइन में लगे हुए थे तभी देवानंद साहब उसी स्टूडियो में पहुंचे तो उन्होंने लाइन में धर्मेंद्र को खड़ा देखा आपने कटे धर्मेंद्र उसने भी कुछ ऐसी ही थी कि देवानंद उनकी ओर आकर्षित हो गए और देवानंद स्टूडियो में जाते-जाते रोका धर्मेंद्र से बातें करने लगे धर्मेंद्र की पर्सनल कि नहीं देवानंद को काफी इंप्रेस कर लिया था धर्मेंद्र देव आनंद को अपना भगवान मानते हैं और उनको सामने खड़ा देख धर्मेंद्र को पसीने छूट गए थे ।
लेकिन देवानंद ने उन्हें पानी पिलाया और उसे बाध्य करते रहे हैं और जाते समय उनसे कहा कि चिंता मत करो आने वाला कल तुम्हारा ही है और जब देवानंद स्टूडियो के अंदर गए तो उन्होंने फिल्म की कहानी सुनी लेकिन उन्हें कहानी पसंद नहीं आई तो देवानंद ने धर्मेंद्र को अंदर बुलाया और सहगल साहब से कहा कि साइकिल्स आप यह लड़का आप कि फिल्म के लिए बेहद बेस्ट रहेगा देवानंद ने धर्मेंद्र को जो रिक्रूटमेंट है और सहगल साहब ने भी धर्मेंद्र को इस फिल्म में कास्ट कर लिया और इसी तनु धर्मेंद्र की किस्मत भी बदल गई।
यह फिल्म सुपर-डुपर हिट रही और इसी ने धर्मेंद्र को फिल्मी दुनिया में पहचान दिलाने का बेहतरीन काम किया शोला और शबनम धर्मेंद्र की जिंदगी की सबसे पहली हिट कंधे और इसी से धर्मेंद्र की बॉलीवुड इंडस्ट्री में एक अलग पहचान भी बन गई