कंगना रनौत जी को अब उनके पार्टी वाले ही ज्यादा नहीं पूछते हैं। ज्यादा सीरियसली नहीं लेते हैं उनको। तो हम लोग भी क्यों सीरियसली ले? मुझे नहीं लगता जैन जी में या जैन अल्फा में या कोई भी यंगर जनरेशन में उनको सीरियसली कोई लेता है या उनकी बात सुनता है। अ वो पॉलिटिशियन है, नेता बन गई है।
उनके तो कुछ वीडियोस भी थे जहां पे वो हिमाचल में जब अपने सीट में उन्होंने विजिट किया था तो उन्होंने बोला था कि मैं तो मैंने सोचा था कि थोड़ा बहुत ही काम करना पड़ेगा। यहां पे तो इतना ज्यादा काम करना पड़ता है एमपी बनके। तो ये उनका सीरियसनेस दिखाता है।
वो हमें अनसीरियस जनरेशन बोल रही है। लेकिन उनका सीरियसनेस उन्होंने ही खुद को एक्सपोज कर दिया था। इस पे ज्यादा मैं कुछ बोलूंगा नहीं।
शब्दावली सही नहीं है। शब्दावली संभाल लेना चाहिए नेताओं को। अपने पद का गरिमा भी बना के रखना चाहिए। आपसे कई गुना ज्यादा जेजी ने इस देश के लिए किया है, कर रहे हैं। [नाक से की जाने वाली आवाज़] अ इस देश के लोकतंत्र में भरोसा फिर से जगाने का काम जे ने किया है। आपने नहीं किया है। तो यह आप जरूर याद रखिए।