क्या कुछ कर रहे हैं सीजेपी के चीफ दीपके? दीपके आज पहुंचे एक बड़े वकील से मिलने के लिए। ये तस्वीर आप देख रहे हैं। अभिजीत दीपके पहुंचे हैं कपिल सिब्बल के आवास पर। जी के जाना था। अभिजीत अभिजीत अभिजीत अभिजीत अभिजीत अब देखिए दीपके का आगे का प्लान क्या है? पार्टी उनकी क्या करने वाली है? आंदोलन के बाद सीजेपी अगले प्लान पर काम कर रही है। इसलिए तो शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद अब सीजेपी के फाउंडर कानूनी कारवाही से बचने में लगे हैं।
तभी तो दीपके ने वकील कपिल सिब्बल से मुलाकात की। दिल्ली में अभिजीत दीपके सिब्बल के घर पहुंचे। जहां दोनों के बीच कई मुद्दों पर बातचीत होने का दावा है। कहा यह जा रहा है कि आंदोलन में जिन लोगों पर केस दर्ज हुए उसको लेकर आगे की कानूनी कारवाई पर मंथन हुआ। क्योंकि सीजेपी चाहती है कि सब पर एफआईआर दर्ज जो एफआईआर हुई वो वापस ली जाए। यह मांग उन्होंने सरकार से भी रखी है जिसे माना गया है।
हालांकि केस वापसी का कोई ब्लूप्रिंट सामने नहीं आया है। ऐसे में सीजेपी इस मामले में कपिल सिब्बल से कानूनी सलाह ले रही है। क्योंकि दीपके ने कहा है कि धर्मेंद्र प्रधान तो पहला विकेट है। वो कह रहे हैं उन्होंने दावा किया हम यहीं नहीं रुकेंगे। यह बस शुरुआत है। राजनीति के मोर्चे पर फिलहाल सीजेपी ने बड़ा प्लान नहीं बनाया नहीं बताया अब तक। मगर उनके दावों के मुताबिक वो शिक्षा में सुधार पर काम करेंगे। इसके लिए यूपी, बिहार समेत कई जगह आंदोलन कर सकते हैं। सीजेपी ने यूपी में पेपर लीक के खिलाफ आंदोलन की चेतावनी दी। दीपके खुद कह चुके हैं कि दिल्ली के बाद बिहार भी जाऊंगा। एक और अहम बात यह कि मुझे हीरो मत बनाओ। दीपके कहते हैं एक शख्स को हीरो बनाने से देश को बहुत बड़ा नुकसान हुआ है।
पीएम मोदी पर करते हैं। वह सुनिए जरा दीपके क्या कह रहे हैं। जितने भी लोग जंतरमंतर पर बने रहे फॉर 37 डेज आई वांट टू थैंक ईच एंड एवरीवन ऑफ यू एंड आई वांट टू टेल यू दैट आई आई रियली रियली रियली अप्रिशिएट व्हाट यू डिड फॉर दिस कंट्री। और जिन लोगों ने हम पर डाउट किया, हमें क्रिटिसाइज करा या हमसे सवाल किए कि आप लोग सीरियस नहीं हो। आप लोग प्रोटेस्ट करना नहीं जानते हो। आई वांट टू थैंक देम एज वेल। अगर आप लोग हमें क्रिटिसाइज नहीं करते, अगर आप लोग हमसे सवाल नहीं करते तो हमें शायद से इंप्रूव करने का मौका नहीं मिलता।
दिस इज़ जस्ट अ बिगनिंग। द कॉकरोच जनता पार्टी हैज़ अ लॉन्ग वे टू गो एंड फॉर श्योर वी विल गो लॉन्ग वे। दिस इज़ जस्ट अ बिगनिंग। तो दीपके कह रहे हैं कि अभी कॉकरोच जनता पार्टी को बहुत काम करना है। शिक्षा के क्षेत्र में काम करना है। दूसरी तरफ देखिए उनके घर उनके परिवार से मिलने के लिए आज महाराष्ट्र के एक मंत्री पहुंचे हैं। पहुंचे हैं। संजय और दीपके की माता जी को आप देख रहे हैं और उनके पिताजी को इस पूरे आंदोलन में चार बड़े चेहरे थे जो इस आंदोलन को लीड कर रहे थे। कौन है वो? सबसे पहले अभिजीत दीप के कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक सीजीआई की एक टिप्पणी के बाद पार्टी बनाने का ऐलान किया।
2 महीने में सोशल मीडिया पर 2 करोड़ से ज्यादा फॉलोवर्स हो गए। कॉकरोच जनता पार्टी बनाने वाले अभिजीत पत्रकारिता कर चुके हैं। अमेरिका के बोस्टन यूनिवर्सिटी से पब्लिक रिलेशन की पढ़ाई की है। दीपके के पास राजनीतिक संदेशों को वायरल करने का पुराना अनुभव है। साल 2020 से 2022 के बीच में आम आदमी पार्टी के सोशल मीडिया टीम में थे और पहली बार ऑनलाइन गुस्से को बड़े आंदोलन के रूप में खड़ा किया। महाराज के संभाजीनगर के रहने वाले दीपके का राजनीति से कोई लेना देना नहीं। उनके पिता रिटायर्ड इंजीनियर चाहते हैं कि बेटा समाज सेवा करें, सियासत ना करे। दीपक की माताजी भी चाहती हैं कि बेटा सुरक्षित रहे और राजनीति से दूर रहे। अगला नाम है नेहा बोरा। नेहा बोरा जेएनयू से पीएचडी कर रही हैं। लेफ्ट विंग आयशा की अध्यक्ष हैं। जंतरमंतर में जमीनी स्तर पर छात्रों की आवाज बुलंद किए। आंदोलन से जुड़ी जानकारी लोगों और छात्र संगठनों तक पहुंचाई।
कड़े तेवर, भाषण और 23 दिनों तक अनशन से चर्चा में आ गई। नेहा के साथ जेएनयू के और दूसरे संस्थानों के छात्र भी जुड़ने लगे। एक और नाम सौरभ दास का है। खोजी पत्रकार सौरभ दास ने सीजेपी के मुख्य प्रवक्ता का रोल निभाया। प्रदर्शन की तारीख, मांग और सरकार से संवाद की लाइन स्पष्ट की। , पुलिस, चोटों और आंदोलन में फैली अफवाहों का जवाब दिया। दिल्ली के सौरभ दास ने एमईटी यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की पढ़ाई की है। 18 साल की उम्र में आरटीआई कार्यकर्ता के तौर पर खास पहचान बना ली थी। एक और नाम आशुतोष राका ने छात्र आंदोलन के एजेंडे को संभाला। शिक्षा मंत्री का इस्तीफा मुआवजा और केस वापसी का मुद्दा रखा। राका ने राजनीतिक दलों को आंदोलन पर हावी नहीं होने दिया। जयपुर के रहने वाले आशुतोष आईआईटी कानपुर से इन्होंने पढ़ाई की है और बाद में लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से उच्च शिक्षा हासिल की। लंदन में कंपनी के सलाहकार और कॉर्पोरेट क्षेत्र में काम किया है। भारत लौटने पर पर्यावरण और समाज सेवा से जुड़े कार्यक्रमों में जुटे आइए अब आपको सुनवाता हूं। सुनिए जरा आपको लिए चलता हूं। महाराष्ट्र दीपके के माताजी और पिताजी क्या कह रहे हैं वो सुनिए। वो हड्डी था ना इसलिए वो डिमांड पूरी करने वाला ही था। मुझे मैं उसको नहीं बोली थी मगर वो नहीं बोला मम्मी जब तक राजीनामा नहीं होता जब तक मैं घर पे नहीं आता है।
मुझे वो बोला भी मगर मैंने बोली नहीं कि इसको बोली जान बहुत हट्टी है। बोले नहीं मम्मी पापा हट्ट पूरा सकते हैं। सरकार नहीं हार्ट पूरा सकती। नहीं बोले उनको हार्ट ये करना ही पड़ेगा। बोले बच्चों का हार्ट है ये तो उनको पूरा करना ही पड़ेगा। बोले पहले बहुत बोले तो पहले डर लग रहा था अपना बच्चा अकेला उधर है बच्चों भी है मगर थोड़ा सा डर लगा था अभी अच्छा लग रहा है बहुत अच्छा लग रहा है जो पहला मूवमेंट चालू किया उसके मूवमेंट की पहली जीत है उसके लिए मैं मुझे गर्व है कि मैं अभी जीत का पीता हूं तो उसको सपोर्ट करने वाले जो भी बच्चे थे उसके जैन जी थे उन्होंने भी बहुत रट के रखा उसके साथ नहीं छोड़ा ये बस एक ट्रेलर है पिक्चर अभी बाकी है देश के युवा जग चुके हैं देश के युवा इस देश में जितने समस्याएं हैं उनको हल करेंगे।
हम एज अ पार्टी एज अ मूवमेंट ऑब्वियसली ये खत्म नहीं हो रहा है। अब हम लोग देश भर जाएंगे। युवाओं की बात सुनेंगे। युवाओं के लिए सबसे बेस्ट जो पॉलिसी होगा वो हम लोग लाएंगे। ये युवाओं के लिए बनाया गया प्लेटफार्म है। युवाओं के मुद्दे उठाता रहेगा। हम अपने आप को पूरे देश में लेके जाएंगे। उनको संगठित करेंगे और जिस तरह से शिक्षा के मुद्दे पे हमने बात की है। उसी तरह आगे जाके बाकी मुद्दों पर आपने सुन लिया उन चेहरों को जो इस पूरे आंदोलन को लीड कर रहे थे। वो चेहरे तो चले गए।
अपनेप घर चले गए। अपने दूसरे कामों में व्यस्त हो गए। लेकिन जो प्रदर्शन हुआ उस प्रदर्शन स्थल का हाल देखिए जरा क्या? यह जंतरमंतर की शुरू में मैंने आपको रात की तस्वीर दिखाई। यह सुबह की तस्वीर है। पुलिस जा चुकी है। अभी जगह-जगह गंदगी फैली है। कचरा फैला है। एनडीएमसी उसे हटाने का काम कर रही है। बैरिकेड्स हटाने का काम कर रही है।
सफाई धुलाई चल रही है। जंतरमंतर पर अब आपको लिए चलता हूं। इस दौरान दिल्ली की मेट्रो बंद थी। प्लेस शाम को लगभग बंद होने लगा था। अब देखिए आज की तस्वीर। मेट्रो शुरू हो गई है और कनोट प्लेस में उसी तरह की चहलपहल नजर आने लगी है।