दिस इज अ न्यू बिगिनिंग। अ न्यू एरा ऑफ अ रियल सेकुलर सोशल जस्टिस स्टार्ट्स नाउ। तमिलनाडु में टीवी की सरकार को आए डेढ़ महीने हुए हैं। सीएम विजय के कामकाज को लेकर कुछ रिपोर्ट्स आने लगी।
इन रिपोर्ट्स में है तारीफ। कहा जा रहा है कि यह सीएम विजय मॉडल है। अगर सफल हुआ तो देश के लिए मिसाल बनेगा। सरकार बनते ही सीएम विजय ने वादा किया था। वादा यह कि वह राज्य की आर्थिक स्थिति का पूरा कच्चा चिट्ठा जनता के सामने रखेंगे। मसलन कितना कर्ज लिया गया है? माली हालत क्या है राज्य की? जैसी तमाम चीजें। कामकाज के फैसले सीक्रेटली नहीं लिए जाएंगे। सरकारी ठेकों के लिए खुली बोली लगेगी।
यह कुछ ऐसे वादे थे जो सीएम विजय ने जनता से किए। माने किसी तरह की नहीं सब कुछ क्लियर होगा। ऐसे तमाम वादे कामकाज शुरू होने से पहले जनता को बताया गया कि राज्य पर ₹1 लाख करोड़ का कर्ज है। सबसे पहले उन टेंडर्स को बंद कराया गया जो पहले से फिक्स होते थे या कुछ खास ठेकेदारों को ही दिए जाते थे। नियम बनाया गया कि शहर के विकास से जुड़े सभी सरकारी ठेकों की ओपन बिडिंग होगी। माने खुली तरह से बोली लगाई जाएगी। सबको बराबर का मौका। डेढ़ महीने के बाद क्या तस्वीर है? इंडिया टुडे से जुड़े अविनाश कटेल की रिपोर्ट के मुताबिक विजय का यह वादा लोक निर्माण विभाग में दिखने भी लगा है। द टाइम्स ऑफ इंडिया की 28 जून की रिपोर्ट है।
इस पर नजर डालिए। चेन्नई नगर निगम जीसीसी के सड़क मरम्मत के ठेकों में हिस्सा लेने वाले ठेकेदारों ने सरकारी अनुमान से 25 से 30% कम कीमत पर काम करने की बोली लगाई है। यह पहले के मुकाबले बहुत बड़ा बदलाव है क्योंकि पहले के समय में ठेके अक्सर तय की गई सरकारी लागत से ज्यादा दाम पर दिए जाते थे। अंबतूर इलाके में सड़क सुधार का एक काम था जिसकी सरकारी लागत ₹25 लाख तय की गई थी। इस काम को पाने के लिए नौ ठेकेदार सामने आए।
इनमें से सिर्फ एक ने सरकारी लागत से ज्यादा दाम मांगा। जबकि बाकी आठ ठेकेदारों ने कम दाम में काम करने को यह राजी हो गए। जीतने वाले ठेकेदार ने सरकारी अनुमान से 25.9% कम दाम पर काम करने का ऑफर दिया। इससे इस प्रोजेक्ट का खर्च घटकर करीब ₹17 लाख ही रह गया। इस तरह सिर्फ एक टेंडर से ही नगर निगम के लगभग ₹9 लाख बच गए। अब बात कर लेते हैं टोंडियार पेट की। यहां ₹ लाख से ज्यादा के एक प्रोजेक्ट के लिए ठेकेदारों ने सरकारी अनुमान से करीब 25% कम दाम की बोली लगाई। शोलिंगनान लूर में तो बोलियां सरकारी लागत से 36% तक कम हो गई। इतनी कम कीमत देखकर अधिकारियों को अब यह सोचना पड़ रहा है कि क्या इतने पैसों में काम की क्वालिटी अच्छी रह पाएगी या नहीं? उससे कुछ कॉम्प्रोमाइज तो नहीं किया जाएगा। ग्रेटर चेन्नई कॉन्ट्रैक्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष राम राव ने बताया कि पहले ठेके तय सरकारी लागत से 10% ज्यादा दाम पर दिए जाते थे। जबकि आज वही काम बहुत कम पैसों में हो रहा है। अगर ₹25 लाख का टेंडर होता था तो ठेकेदार उसे लमसम ₹27 लाख में करते थे।
अब वही काम ₹16 लाख में हो रहा है। सवाल उठाए जाने चाहिए कि पहले बजट को 25 से 40% तक बढ़ाने की इजाजत कैसे मिली अधिकारियों को? तमिलनाडु के लोक निर्माण और खेल विकास मंत्री आधव अर्जुना ने भी आरोप लगाए कि पिछली सरकारों में ठेके देने में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार नियमों का उल्लंघन और रिश्वतखोरी हुई थी। कई मामलों में तो पैसे ले लिए गए लेकिन काम नहीं दिया गया। जिससे कई ठेकेदारों के साथ धोखाधड़ी हुई। उन्होंने कहा मौजूदा सरकार में ठेकेदारों से कोई कमीशन या रिश्वत नहीं मांगी जाएगी और हाईवे के सभी ठेके पूरी ईमानदारी के साथ दिए जाएंगे। कुल मिलाकर सरकार का कहना है कि ट्रांसपेरेंसी रहेगी, ओपन बीडिंग होगी, ओपन तौर पर जो बोली लगाई जाएगी टेंडर्स की वो सबके सामने होगी और सबको बराबर का मौका मिलेगा। इससे क्या होगा कि में कमी आएगी। आर्थिक मामलों के जानकार वेंकटेश्वर राव पटाकोटा ने एक्स पर लिखा कि विजय बहुत शानदार काम कर रहे हैं। पहले जहां 40% रिश्वत चलती थी अब वो 0% हो गई है। अगर विजय सफल होते हैं तो पूरा भारत सफल होगा क्योंकि दूसरे राज्यों को भी बदलने पर मजबूर होना पड़ेगा अपना सिस्टम। तमिलनाडु खुशकिस्मत है कि जनता ने बिना पैसे लिए विजय को वोट दिए और अब उन्हें इसका फायदा मिल रहा है। वहीं फाइनेंसियल प्लानर मृतकृष्णन दंडपानी ने लिखा कि ठेकेदार अब 25 से 30% कम दाम इसलिए बता रहे हैं क्योंकि अब उन्हें किसी की निजी जेब में पैसे नहीं भरने पड़ रहे हैं।