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ना हेमा ना प्रकाश कौर ये लड़की थी धर्मेंद्र का पहला प्यार,अधूरी प्रेमकहानी जानकर रो पड़ेंगे।

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धर्मेंद्र और हेमा मालिनी के बारे में तो हम सब जानते हैं धर्मेंद्र कैसे हेमा मालिनी को इंप्रेस किया और कैसे उन्होंने हेमा मालिनी के लिए प्रकाश कौर को छोड़ दिया यह किस सारे सोशल मीडिया पर चर्चित है लेकिन क्या आप जानते हो कि प्रकाश को और और हेमा मालिनी के अलावा धर्मेंद्र का पहला प्यार कोई और था।

जी हां ना हेमा मालिनी ना प्रकाश कौर धर्मेंद्र का प्यार कोई और था जिन्हें वह कभी अपने मन की बात का ही नहीं पाए और बाद में वह प्यार उनसे बिछड़ गया।

यह किस्सा उन्होंने खुद सलमान खान के शो ‘दस का दम’ में अपने बेटे बॉबी देओल के सामने सुनाया था. यह प्यार तब हुआ जब सिनेमा की चकाचौंध दूर थी, जब वह पंजाब के एक छोटे से गांव ‘साहनेवाल’ में स्कूल जाते थे. उस मासूम उम्र में, जब धर्मेंद्र छठी कक्षा में थे, उनका दिल स्कूल टीचर की बेटी हमीदा पर आ गया था, जो उनसे दो साल बड़ी थीं और आठवीं में पढ़ती थीं.यह सिर्फ एक क्रश नहीं था, यह पहली मासूम लगन थी जिसकी याद उन्हें ताउम्र टीस देती रही. दस का दम शो पर धर्मेंद्र कहते हैं, “वो क्या थी पता नहीं, पास जाने को जिसके, साथ बैठने को जिसके जी चाहता था. वो यूं ही मुस्कुरा देती, मैं पास चला जाता. वो खामोश रहती, मैं सिर झुका लेता.”

धर्मेंद्र बताते हैं कि वह अपनी ‘मन ही मन की’ बातें कभी हमीदा को बता नहीं पाए, बस ‘ठंडी आहें भरते रहते थे’. हमीदा उनकी पढ़ाई में मदद करती थीं, उनकी कॉपी लेकर सवाल हल कर देती थीं. यह एक ऐसा रिश्ता था जो बिना नाम लिए, बिना इज़हार किए, चुपचाप पनप रहा था. यह कहानी अगर सिर्फ स्कूल के दिनों की होती, तो शायद एक मीठी याद बनकर रह जाती.

लेकिन इस मासूम प्रेम कहानी का अंत भारतीय इतिहास के सबसे दर्दनाक चैप्टर ने किया: 1947 का भारत-पाकिस्तान विभाजन.जब देश दो हिस्सों में बंटा, तो लाखों परिवार विस्थापित हुए. हमीदा का परिवार भी उन्हीं में से एक था. 1947 में, हमीदा और उनका परिवार हमेशा के लिए पाकिस्तान चला गया. धर्मेंद्र ने अपनी एक कविता में इस दर्द को पिरोया: “वो ओझल हो जाती, मैं सोचता रहता, सवाल क्या है यार?

“धर्मेंद्र और हमीदा दोबारा कभी नहीं मिले. एक मासूम प्रेम कहानी, जो अभी शुरू भी नहीं हुई थी, इतिहास के पन्नों में अधूरी रह गई. ‘ही-मैन’ ने आगे चलकर प्रकाश कौर से शादी की, फिर हेमा मालिनी को अपना जीवनसाथी बनाया, लेकिन उनके दिल में हमीदा की याद एक ऐसी ‘मीठी चुभन’ बनकर रह गई जिसे वह आखिरी दम तक नहीं भूले.

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