साल 1973 बॉलीवुड का वो सुपरस्टार जिनकी एक मुस्कान पर करोड़ों दिल धड़कते थे। जिन्हें फिल्म इंडस्ट्री का पहला भगवान कहा गया। यानी हमारे प्यारे काका राजेश खन्ना। लेकिन फिर अचानक ऐसा क्या हुआ कि कामयाबी के सातवें आसमान पर बैठा यह शहंशाह रातोंरात अर्श से फर्श पर आ गया। लोग कहते हैं कि राजेश खन्ना का करियर किसी वक्त की मार से नहीं बल्कि बॉलीवुड के तीन सबसे बड़े महायोद्धाओं ने मिलकर बर्बाद किया। जी हां, उंगलियां उठती है सुरों के बेताज बादशाह मोहम्मद रफी पर, मेलोडी किंग किशोर कुमार पर और इंडस्ट्री के सबसे सीधे और दमदार ही मैन यानी धर्मेंद्र पर। इस पूरी गुफ्ती को समझने के लिए हमें सबसे पहले वक्त के पहिए को थोड़ा पीछे घुमाना होगा। हमें चलना होगा साल 1969 से 1972 के उस सुनहरे दौर में जब भारतीय सिनेमा ने एक ऐसा पागलपन देखा जो ना तो उससे पहले कभी देखा गया था और ना ही शायद आने वाले 100 सालों में दोबारा देखा जाएगा। जैसे ही सिनेमाघरों में फिल्म आराधना रिलीज हुई पूरे देश में एक ऐसा तूफान आया जिसने हर युवा को अपना दीवाना बना लिया।
राजेश खन्ना का वह खास अंदाज, पलकें झपकाने की वह जादुई अदा और उनका मशहूर गुरु कुर्ता रातोंरात पूरे देश का सबसे बड़ा फैशन स्टेटमेंट बन गया। राजेश खन्ना ने उस दौर में लगातार 15 सोलो सुपरहिट फिल्में दी। याद रखिए सोलो, यानी बिना किसी दूसरे बड़े हीरो के, अकेले दम पर। यह एक ऐसा अटूट और ऐतिहासिक रिकॉर्ड है, जिसे आज तक बॉलीवुड का कोई भी बड़ा से बड़ा खान या कपूर नहीं तोड़ पाया। अब बात करते हैं उस सबसे बड़े आरोप की जो अक्सर किशोर कुमार पर लगाया जाता है। इंटरनेट की कुछ थ्यरीज कहती है कि किशोर दा ने काका को धोखा दिया। लेकिन चलिए इस दावे की हवा निकालते हैं और सच को देखते हैं। सच तो यह है कि राजेश खन्ना को सुपरस्टार बनाने वाले महल की आधी से ज्यादा दीवारें खुद किशोर कुमार की आवाज पर टिकी थी। फिल्म आराधना से पहले किशोर कुमार को इंडस्ट्री में मुख्य रूप से एक कॉमेडियन या एक ऐसे सिंगर के रूप में देखा जाता था जो सिर्फ अपने ऊपर फिल्माए जाने वाले गानों के लिए गाते थे। लेकिन संगीत की दुनिया के जादूगर आर डी बर्मन यानी पंचमदा और उनके पिता एसडी बर्मन ने किशोर कुमार की उस मस्तमौला आवाज को राजेश खन्ना के रोमांटिक चेहरे के साथ ऐसा जोड़ा कि इतिहास बन गया। जब थिएटर्स में गाने गूंजे तो दर्शकों पर ऐसा जादू हुआ कि लोग केवल गाने सुनने और पर्दे पर काका को झूमते देखने के लिए बार-बार टिकटें खरीदने लगे।
किशोर दा की वो गहरी और दर्द भरी आवाज राजेश खन्ना के चेहरे पर इस कदर फिट बैठती थी कि जब स्क्रीन पर काका होठ हिलाते तो लगता ही नहीं था कि यह आवाज किसी और की है। इसीलिए यह कहना कि किशोर कुमार ने उनके करियर को खत्म किया। इतिहास का सबसे बड़ा झूठ है। किशोर कुमार तो वह मजबूत खंभा थे जिन्होंने काका के स्टडम को संभाला था। लेकिन हां इन दोनों के बीच बाद में एक ऐसा मोड़ आया जिसने सब कुछ बदल दिया जिसके बारे में हम आगे बात करेंगे। अब आइए उस महान आत्मा के नाम पर जिसे इस मनगढ़ंत कहानी का विलन बनाने की कोशिश की जाती है। यानी हमारे पूजनीय मोहम्मद रफी साहब। दोस्तों 60 के दशक तक रफी साहब बॉलीवुड की सबसे बुलंद, सबसे महंगी और सबसे लोकप्रिय आवाज थी। दिलीप कुमार से लेकर शम्मी कपूर और राजेंद्र कुमार तक हर बड़े स्टार की कामयाबी के पीछे रफी साहब के गीतों का बहुत बड़ा हाथ था। लेकिन साल 1969 में जब आराधना आई, तो संगीत का पूरा का पूरा ट्रेंड ही बदल गया। दर्शकों को अब शास्त्री और थोड़ा भारी गायकी की जगह किशोर कुमार का वह नया मॉडर्न और यडलिंग वाला रोमांटिक अंदाज ज्यादा भाने लगा।
इस बदलाव की वजह से कुछ सालों के लिए रफी साहब के पास गानों की संख्या थोड़ी कम जरूर हो गई थी। उस दौर की कुछ गसिप पत्रिकाओं ने मिर्च मसाला लगाकर खबरें छापी कि किशोर कुमार और रफी साहब के बीच गहरी दुश्मनी हो गई और रफी साहब राजेश खन्ना से नाराज हैं। लेकिन जो लोग रफी साहब के स्वभाव को जानते हैं वह इस बात पर सिर्फ हंस सकते हैं। रफी साहब इतने सीधे, शांत और खुदा से डरने वाले इंसान थे कि उन्होंने कभी अपनी जिंदगी में किसी का बुरा नहीं सोचा। वह तो किशोर कुमार को अपने छोटे भाई की तरह मानते थे। खुद रफी साहब ने राजेश खन्ना के लिए कई सदाबहार गाने गाए। ऐसे में यह सोचना भी एक बहुत बड़ा पाप होगा कि रफी साहब जैसा फरिश्ता इंसान राजेश खन्ना के खिलाफ कोई गुटबाजी या साजिश रच सकता है। उनका काका के पतन से दूर-दूर तक कोई नाता नहीं था। इस पूरी कहानी में तीसरा नाम घसीदा जाता है पंजाब के पुत्र और बॉलीवुड के ही मैन धर्मेंद्र का। अब सच क्या है वह जानिए। धर्मेंद्र और राजेश खन्ना एक ही दौर में काम कर रहे थे। यह सच है कि जब राजेश खन्ना सफलता की बुलंदियों पर थे तब धर्मपाजी भी इंडस्ट्री में अपनी एक बहुत ही मजबूत और अलग पहचान बना चुके थे। फूल और पत्थर सत्य काम और सीता और गीता जैसी फिल्मों ने धर्मेंद्र को एक बहुत बड़ा स्टार बना दिया था। लेकिन इन दोनों के काम करने का तरीका और उनकी इमेज एक दूसरे से बिल्कुल अलग थी। जहां राजेश खन्ना पूरी तरह से एक सॉफ्ट, चार्मिंग और रोमांटिक हीरो थे। वहीं धर्मेंद्र को लोग उनकी तगड़ी कद काठी, एक्शन और ह्यूमन लुक के लिए पसंद करते थे। धर्मेंद्र अपने बेहद मिलनसार स्वभाव, जमीन से जुड़े रहने की आदत और हर छोटे-बड़े कलाकार के साथ अच्छे व्यवहार करने के लिए जाने जाते थे। धर्मेंद्र जी ने कभी भी किसी दूसरे स्टार की कामयाबी से जलन नहीं की और ना ही कभी वह किसी गुटबाजी या राजनीति का हिस्सा बने। वह बहुत ही समझदार थे। इसलिए उन्होंने खुद को सिर्फ रोमांस तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने एक्शन से लेकर चुपके-चुपके जैसी कालजे कॉमेडी फिल्मों में भी काम किया। यही वजह थी कि जब आगे चलकर सिनेमा का मिजाज बदला तब भी धर्मेंद्र मजबूती से टिके रहे। उन्होंने अपनी मेहनत से अपना मुकाम बनाया। उन्होंने कभी राजेश खन्ना के रास्ते में कोई कांटा नहीं बोया। तो अब असली सवाल पर आते हैं। अगर किशोर कुमार, मोहम्मद रफी और धर्मेंद्र में से किसी ने राजेश खन्ना को बर्बाद नहीं किया तो फिर आखिर वह कौन सी अदृश्य ताकत थी जिसने इतने बड़े सुपरस्टार के सिंहासन को हिला कर रख दिया? दोस्तों, इसका सबसे बड़ा और पहला कारण था
भारतीय सिनेमा के विषय का बदलना और बॉलीवुड के क्षितिज पर एंग्री यंग मैन का उदय। साल 1973 के आसपास भारत का सामाजिक और राजनीतिक माहौल बहुत तेजी से बदल रहा था। देश में बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और महंगाई को लेकर युवाओं के अंदर एक गहरा आक्रोश था। अब देश के युवा दर्शकों को स्क्रीन पर एक ऐसा हीरो नहीं चाहिए था जो सिर्फ वादियों में जाकर रोमांस करें, गाने गाए या पेड़ के पीछे छिपकर फूल पत्तियां तोड़े। जनता को अब एक ऐसा मसीहा चाहिए था जो उनके अंदर के गुस्से को पर्दे पर जी सके। जो भ्रष्ट सिस्टम, बेईमान पुलिस वालों और समाज के गुंडों से सीधे छाती तानकर लड़ सके। ठीक इसी नाजुक वक्त पर रिलीज हुई फिल्म जंजीर और इसी के साथ अमिताभ बच्चन नाम का एक नया सूरज बॉलीवुड के आसमान पर चमका। अमिताभ बच्चन की लंबी कद काठी, उनकी वो गहरी दमदार आवाज और उनकी आंखों का वो खौफनाक गुस्सा सीधे दर्शकों के दिलों में उतर गया। इसके बाद दीवार, शोले और त्रिशूल जैसी फिल्मों ने अमिताभ बच्चन को नया महानायक बना दिया। पूरी जनता की पसंद बदल चुकी थी। लेकिन अफसोस राजेश खन्ना इस बदलते हुए वक्त के मिजाज को समय रहते भाप नहीं पाए। वह लगातार वही पुरानी जीसी पीटी रोमांटिक और रोनेधोने वाली फिल्में करते रहे जो अब नई पीढ़ी के दर्शकों को बोरिंग और उबाऊ लगने लगी थी। जब तक काका ने संभलने की कोशिश की और एक्शन फिल्में चुनी तब तक बहुत देर हो चुकी। अमिताभ बच्चन उस समय तक सफलता के उस सिंहासन पर अपनी जड़े इतनी मजबूत कर चुके थे कि उन्हें वहां से हिलाना नामुमकिन था। और दोस्तों राजेश खन्ना के डूबते हुए करियर की कश्ती में आखिरी खेल तब ठुकी जब उनकी अपनी फिल्म अलग-अलग के दौरान उनके सबसे बड़े मददगार किशोर कुमार के साथ पैसों को लेकर एक बहुत बड़ा विवाद हुआ। यह कोई बाहरी साजिश नहीं थी बल्कि एक विशुद्ध व्यवसायिक और ईगो का टकराव था। लेकिन सिर्फ बदलता हुआ वक्त या अमिताभ बच्चन का आना ही राजेश खन्ना की हार की इकलौती वजह नहीं थी। एक बहुत ही कड़वा सच यह भी था कि राजेश खन्ना के पतन में उनके अपने स्वभाव और उनके बेकाबू हो चुके अहंकार का बहुत बड़ा हाथ था। बात इस हद तक बिगड़ गई कि अपने उसूलों के पक्के किशोर दा ने हमेशा के लिए राजेश खन्ना को अपनी आवाज देने से साफ मना कर दिया। सोचिए जिस आवाज के दम पर काका का आधा स्टारम टिका था।
जब वही आवाज उनके चेहरे से छीन ली तो काका बिल्कुल अकेले पड़ गए। यह किसी और की रची हुई साजिश नहीं बल्कि खुद के अहंकार का टकराव था। जिसका सबसे भारी नुकसान खुद राजेश खन्ना को भुगतना पड़ा। तो दोस्तों, आज के इस पूरे सफर से यह बात बिल्कुल साफ हो जाती है कि राजेश खन्ना भारतीय सिनेमा के पहले और इकलौते असली सुपरस्टार थे। जिनके जैसा क्रेज शायद दोबारा कभी पैदा नहीं होगा। लेकिन उनका ढलना किसी धर्मेंद्र, मोहम्मद रफी या किशोर कुमार की साजिश का नतीजा नहीं था। उनके पतन का असली कारण था बदलता हुआ समय, सिनेमा की नई मांगे और खुद उनका अपना स्वभाव और अहंकार। इतिहास गवाह है कि वक्त कभी किसी के लिए नहीं रुकता। चाहे वह कितना भी बड़ा राजा क्यों ना हो। तो इंटरनेट पर उड़ने वाली इन मनगढ़ंत और झूठी कहानियों पर बिल्कुल भरोसा ना करें। हमारे यह सभी कलाकार कला के सच्चे पुजारी थे और एक दूसरे का बेहद सम्मान करते थे। अगर आपको बॉलीवुड के इतिहास का यह सच्चा सटीक और अनसुना किस्सा पसंद आया हो तो इस वीडियो को एक लाइक जरूर कर दें और अपने दोस्तों के साथ इसे शेयर करना ना भूलें। आपको राजेश खन्ना की कौन सी फिल्म सबसे ज्यादा पसंद है? हमें नीचे कमेंट बॉक्स में लिखकर जरूर बताइए। सिनेमा की ऐसी ही और भी रोचक और सच्ची कहानियां जानने के लिए हमारे चैनल को आज ही सब्सक्राइब करें और बेल आइकॉन दबाना ना भूलें। मिलते हैं अगले वीडियो में। धन्यवाद।