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कोकरोच पार्टी पर बौखलाई कंगना, फिर कह दी चौंकाने वाली बात मचा बवाल!

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तो मेरा भी लाइफ का पहला तीज का यह फंक्शन है और यहां पर जो हमारी माननीय मुख्यमंत्री दिल्ली सीएम रेखा दीदी ये सब उत्सव रख रही हैं सब महिलाओं के लिए और आई एम लुकिंग फॉरवर्ड टू इट। आज जैसे कि नीट का मुद्दा लगातार विपक्ष उठाता रहा है। आज अमित शाह जी ने कहा कि मैं लगातार आता रहा हूं। अपने चेंबर में भी बैठ के इंतजार किया।

लेकिन अपोजिशन ने जिस तरह से बोला है और अमित शाह जी ने ये भी बात बोली कि मैं बहस के लिए तैयार हूं।

उन्होंने साथ में स्पीकर को लेटर भी लिखा है और कहा है कि मैं अभी भी तैयार हूं। चल का समय है और लेकिन राहुल जी की तरफ से जो बयान आया है उस पर क्या कहेंगे? मैं सोच रही हूं कि यह जो है देश का उपहास वो कर रहे हैं। कहीं ना कहीं चाहे आलू उगाने की उनकी बात हो, चाहे जलेबी अमेरिका में भी हो, हमेशा देश का उपहास करते हैं। और उनके लिए हर हर कुछ जो है एक जोक है। पहली बार मैं देख रही हूं कि एक पार्लियामेंट में का जो है इतना मजाक वो बना, एक ही सांस में कह रहे हैं कि हमें अमित शाह जी से जवाब चाहिए। अह एक सांस में कह रहे हमें अमित शाह जी से जवाब चाहिए कि ऐसा-ऐसा स्टूडेंट्स के साथ उन्होंने किया कि नहीं किया। हम यहां उनकी बात सुनने के लिए नहीं है।

फिर फिर कह रहे हैं कि हमें जवाब चाहिए। कि किस तरह का मजाक ये देश के साथ हो रहा है। मतलब उन्हें कोई लाज कोई शर्म नहीं रही है और पूरी दुनिया देख रही है और ये सोच रही है ये किस तरह का पर्सन है जो एक ही सांस में कह रहा है कि अमित शाह मुझे तुम अमित शाह मुझे तुमसे जवाब चाहिए कि क्या जो भी उनके क्वेश्चंस हैं कि गोली चली थी क्या आंखें फूटी थी या जो भी है लेकिन मैं यहां तुम्हारी बकवास सुनने के लिए नहीं हूं। व्हाई शुड आई लिसन टू यू? अरे, आप जवाब मांग रहे हैं। फिर आप कह रहे हो, व्हाई शुड आई लिसन टू यू? एक ही सांस में आप यह ऐसी दो गली बातें कैसे कर रहे हैं? हाउ डस दिस इवन वर्क? व्हाट इज ही थिंकिंग? ही इज़ टेकिंग पीपल फॉर ग्रांटेड। और फिर एक अह बात में वो कहते हैं कि अगर उन्होंने गोली चलाने को कहा था तो ही इज़ मतलब वो उस बात के दोषी हुए। और अगर उन्होंने नहीं कहा था तो वो जो है इनकेबल है।

मतलब चलाने के इनकेबल है वो। तो कुछ जर्नलिस्ट ने यह भी कहा कि आप ये क्या कह रहे हैं कि इनकंपटेंट है गोली चलाने के वो। तो क्या गोली चलनी चाहिए थी बच्चों पे? तो उस पे वो जो है वो भड़क पड़े और उन्होंने जो है जर्नलिस्ट को कितना भला बुरा कहा कि तुम चूहे हो, तुम ये हो। इस तरह से जो वो अपनी भड़ास निकाल रहे हैं और इस तरह से जो वो पार्लियामेंट का अपमान कर रहे हैं। पूरे देश का अपमान कर रहे हैं।

देशवासियों का अपमान कर रहे हैं। मुझे लगता है कि उनका जो है ये एज अ अपोजिशन लीडर आई एम 100% श्योर कि उनकी ये लास्ट टर्म है। उन्होंने ये भी कहा कि अमित शाह जी को इस्तीफा दे देना चाहिए। वो तो प्राइम मिनिस्टर का इस्तीफा मांग रहे हैं। वह जो है इस देश के डेमोक्रेटिकली इेड प्राइम मिनिस्टर का इस्तीफा मांग रहे हैं। जिन्हें जो है इतना बड़े मैंडेट जो भी तीसरी बार मिला है तो वो वो तो हर एक का इस्तीफा मांग रहे हैं। उनको तो लगता है कि उनके सिवाय इस देश में कोई एक्सिस्ट ही नहीं करना चाहिए और फिर बाकी जो उनकी करतूत है चाहे वो सोरोस के साथ मिलकर चाहे वो इंटरनेशनल शक्तियों के साथ मिलकर इस देश के टुकड़े कर देना इस देश को कहीं का नहीं छोड़ना।

उनका तो सीधा-सीधा यही है जो मैंने हमेशा पहले से ही कहा है कि राख हो जाए लेकिन मैं राख पर ही शासन करूंगा लेकिन उनको और कुछ नहीं पड़ी है तो वो किसका इस्तीफा मांगते हैं वो क्या चाहते हैं उससे क्या फर्क पड़ता है जब जनता ने जनता को वो मैटर ही नहीं करते हैं। यह तो उनकी माताजी हैं इटालियन माताजी जो जैसे तैसे करके दे अपोजिशन को जो है ठूस रही हैं कि इसी को ही अपोजिशन लीडर बनाना है। नहीं तो जनता तो उनको बिल्कुल भी 100 इलेक्शन वो हार गए हैं। वो कौन होते हैं? उनको किसका इस्तीफा चाहिए? उससे क्या फर्क पड़ता है?

वैसे तो सड़क पे चले हुए अगर उनकी माता इटालियन माताजी ने यह नहीं कहा होता कि भई इनको अपोजिशन लीडर बनाओ तो उनके क्या वजूद है? कल एक और चीज है जिससे को लेकर जिस बात को लेकर सुबह से आप सुर्खियों में है वो है नसीरुद्दीन शाह को लेकर आपने एक टिप्पणी की है उनको लौंगड़ी शब्द का इस्तेमाल किया क्या कहेंगे आप ये ये अब की बात नहीं है ये फिल्म इंडस्ट्री का ये रवैया हमेशा रहा है। आपने देखा है कि जंतरमंतर पर जब पार्लियामेंट पर जो यह अटैक हो रहा था, जब मेरे कितने पार्लियामेंटेरियन फ्रेंड हैं जिनकी गाड़ियों पे लोग चढ़ गए थे, उनके शीशे जो है तोड़ दिए थे। आप सब जानते हैं यह किसी से छुपा नहीं है।

मेरे घर के बाहर जो है गेट तक लोग चढ़ गए थे। कम से कम नहीं तो यहां पे 25 हजार लोग मेरे गेट के बाहर था और यहां पे इतनी पुलिस फ़ोर्स बुलानी पड़ी कि रात को तो हम सो नहीं पाए। तो इस तरह की जो स्थिति जब बनी हुई थी तो ये सब जो है वो घड़ियाली आंसू रो रहे थे। लेकिन अब जब झारखंड में इस तरह का बच्चों पे जो है जुल्म हो रहे हैं तो क्या वो ज़ी नहीं है जो देश के खिलाफ जो हो जाए या जो जी को दे जी के घर तक ये पहुंच गए और वहां पर इन लोगों ने जो है क्या करने की इनकी नियत थी तो जो देश को दे जो जी को दे जो इस देश के टुकड़े करने का क्या वही ज़हनजी है और कोई ज़हनजी नहीं है हम हम खुद युवा हैं हम खुद नारी हैं हमें जो है युवा विरोधी बना दिया है। हम क्यों युवा विरोधी बनेंगे?

हम तो खुद युवा हैं। खुद वर्किंग वूमेन है। खुद करियर वूमन है। खुद एक ऐसे छोटे मुकाम से उठकर ऊपर आए हैं। हम क्यों बने हमें हमें बना दिया है युवा विरोधी। ऐसा नहीं होता है। ये दोगलापन फिल्म इंडस्ट्री का भी नहीं चलेगा। फिल्म इंडस्ट्री के लोग जो घड़ियाली आंसू जंतरमंतर के लिए बहा रहे थे। वो सेम आंसू इनको अब ये बच्चों के लिए भी झारखंड में भी बहाने चाहिए। उनकी भी तो दुविधा है। तो मैंने उनको इसीलिए कहा क्योंकि उन्होंने इतना गंदा एक वीडियो बनाया था जिसमें जो है वो इस तरह की धमकियां दे रहे थे। इस तरह की जो बातें जो है जो सर्वोच्च हमारे जो रिप्रेजेंटेटिव हैं पूरे दुनिया से जिनको जी को इतने बड़े-बड़े अवार्ड्स मिलते हैं। और नहीं तो उन्हें उतनी तो डेमोक्रेसी की गरिमा रखनी चाहिए कि एक इलेक्टेड वो हमारे वो संविधान के हिसाब से हमें उनका सम्मान करना चाहिए। जैसे हमारे राष्ट्रपति प्रथम नागरिक होते हैं। उसके प्रधानमंत्री जी जो हैं हमारे लीडर होते हैं पूरे देश के। तो क्या इतनी कोई भी उठकर जो है इतनी गंदी गंदी इतनी भद्दी भद्दी बातें और देश से निकल जाओ तुम्हें जला देंगे तुम्हें देंगे। ये क्या कोई आपको लगता है क्या ये सभ्य बातें हैं? और जब देखो जो चाहे उनकी फिल्में हो चाहे उनकी बातें हो चाहे उनके इंटरव्यूज हो ये पाकिस्तान की प्रेम कथा कब खत्म होगी?

जब देखो पाकिस्तान के प्रेम में यह मरे रहते हैं। आई आई वांट टू नो कि अब पार्टीशन को भी इतने साल हो गए हैं। तो यह लव स्टोरी खत्म क्यों नहीं हो रही है? जब इतने ज्यादा चाहे वो हो, चाहे वो हमने किया हो। देश कहीं और जा रहा है। सेनाएं कहीं और जा रही है। नागरिकों का कहीं कुछ और जो है संघर्ष है। पड़ोसी देशों को लेकर। ये बॉलीवुड की लव स्टोरी पाकिस्तान के साथ खत्म कब होगी? तो दे आर आंसरेबल फॉर दिस। साथ में कंगना पिछली बार आपने एक शब्द का इस्तेमाल किया था जेम्स के लिए कट शब्द का लेकिन बाद में आपने यू टर्न लिया और उनको कहा कि वो देश की स्ट्रेंथ है। जी देखिए जो लोग खुद को कॉकरोच बोलते हैं तो अगर हम कहें कि कॉकरोच तो गटर से निकलता है तो इसमें क्या बुराई है? ।

तो मैं ये कहना चाहती हूं कि जो लोग खुद को कॉकरोच कहते हैं तो हम तो साधारण यही कह रहे हैं कि भ गटर आपका घर है। तो अब आपको इससे क्यों दुख हो रहा है? लेकिन जो लोग खुद कॉकरोच खुद को कॉकरोच नहीं कहते हैं और उनको कॉकरोच से कुछ लेना देना मैं तो नहीं मानती कि मैं कॉकरोच हूं। मैं नहीं मानती मैं कॉकरोच हूं। जो लोग नहीं मानते मुझे कोई कहेगा कि मैं गटर में रहती हूं तो मैं ना मना करूंगी नहीं। लेकिन जो कहते हैं कि मैं कॉकरोच हूं तो वो गटर में ही रहेगा और क्या? तो उस तरह की उनकी मानसिकता होगी। लेकिन ये कह देना कि जी मैंने सबको कहा। सब युवाओं को कहा। ऐसा नहीं होता है।

सब अगर कुछ युवा ड्रग्स करते हैं और हम ये कहे कि नहीं कुछ युवाओं ने जो है वो आजकल जो है ये एक एक इस तरह से एक रीत चली हुई है कि ड्रग्स की या या किसी और तरीके की बैटिंग की जुआ की या किसी और तरह की ऑनलाइन के जो एडिक्शन हो जाती है ब्लैक वेब की अगर हम किसी युवा वर्ग को संबोधित करें तो इसका मतलब यह थोड़ी ना है कि सब बताइए मेरा ऐसा कहा मैंने लिखा है कि सब युवा गटर हैं। मैंने स्पेसिफिकली सम पीपल या सम वमेन यह मैंने स्पेसिफिकली लिखा हुआ है।

तो क्या अब हम उनको कैसे संबोधित करें? अगर हमें किसी को दिखाना हो कि कुछ युवा जो है तो हम यही कहेंगे सम यूथ आर दीज़ डेज। इसी तरह से हम उस वाक्यात को शुरू करेंगे। तो इस तरह से दिखाना कि जी हमने सारे ही युवाओं को उसमें इंक्लूड सारे तो कहीं भी कुछ किसी भी चीज के लिए इंक्लूड नहीं हो सकते हैं। ना अच्छाई में ना बुराई में। इतनी तो कॉमन सेंस सभी को होती है। लेकिन खैर विपक्ष को तो कॉमन सेंस भी नहीं है। नहीं तो एक ही सांस में कोई कैसे कह सकता है कि आई डोंट आई डोंट हैव टाइम टू लिसन टू यू अमित शाह बट आई वांट आंसर्स ऑफ दीज़ थिंग्स फ्रॉम यू। हां तो भाई आइए अंदर पार्लियामेंट में ये सब प्रश्न अपने रखिए। जो आप पूछ रहे हैं।

वह सब प्रश्न पार्लियामेंट में रखिए। आप क्या चाहते हैं कि अमीषा जी आपको पार्लियामेंट के आंगन में आकर वन टू वन जवाब दें क्या? क्या मतलब? तो जिन लोगों का इतना आईक्यू लो हो उनसे आप क्या उम्मीद कर सकते हैं? कंगना एक और नया एक अपडेट आया सेस को लेकर। हिमाचल में जो ऑर्थोडोस के नाम पर 60 पैसे का सेस लगाया जा रहा है। उस पर क्या कहेंगे आप? हिमाचल की जो दुर्दशा है वह किसी से नहीं छुपी है। हिमाचल में जो है बहुत बुरा हाल है और आए दिन हर एक तरह के टैक्स जो है वहां पर लगा के जो लोगों की जो है दुर्गति कर रहे हैं और अगर उन्हें विडोज़ का हेल्प करना है और अनाथ बच्चों की आड़ में जो करप्शन वो कर रहे हैं कांग्रेस वाले वो किसी से नहीं छुपी है और और अबकी बार ऐसी हिमाचल के लोगों की आंखें खुली है कि मुझे नहीं लगता अब अगली बार तो छोड़िए कभी भी कांग्रेस सत्ता में आएगी क्योंकि हिमाचल ने ऐसा गंदा रूप और ऐसा कभी भी नहीं देखा था।

बहुत तरह के टैक्सेस उन्होंने लगाए। यहां तक कि सुखू की सरकार जो है वो देवदार के सारे पेड़ बेचकर भी खा जाना चाहते थे। तो इस तरह से भी उनके कई करतूतें जो है कई तरह के लोग स्तब्ध रह गए। कई जगह पे उनको रोका भी गया। अब यह टैक्स उन्होंने विधवाओं और लाचारों के नाम पर डाल तो दिया है।

लेकिन यह इसके पैसे जाएंगे कहां वो हम सबको पता है कि ये भ्रष्टाचार की एक और पैंथरा उन्होंने आजमाया है। तो मैं यही कह सकती हूं कि जितनी जल्दी ये कपटी सरकार वहां से निकले और भारतीय जनता पार्टी की डबल इंजन सरकार वहां पे पहुंचे और यही आई थिंक सब हिमाचली भी इसी का ही वेट कर रहे हैं। तो लास्ट मोमेंट तक किसी को भी पता नहीं होता है। लेकिन आई एम श्योर के कोई ना कोई स्ट्रांग लीडरशिप हमें वहां पे चाहिए। एंड हिमाचल प्रदेश इस लैगिंग बिहाइंड बहुत ज्यादा कर्जे में जो है वो डूब चुका है जो भी है ऑफ द चले तमाम

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