दुबई अपने तेल के खजाने और शानदार पर्यटन के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। लेकिन बहुत कम लोगों को पता है कि इस शहर को असल में गोल्डन [संगीत] सिटी कहा जाता है। यकीन मानिए या नहीं दुबई में लोग सोना ग्राम में नहीं बल्कि किलों में खरीदते [संगीत] हैं। यहां की अमीरी इतनी जबरदस्त है कि कई होटल्स और रिसोर्ट्स की दीवारों पर असली सोने की परत चढ़ाई गई हैं।
और सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यहां सड़कों पर सोने से मढ़ी हुई कारें आम नजारा हैं। सोचिए जो देश दुनिया [संगीत] में सोने के निर्यात में 29वें स्थान पर है। उसके लिए सोने की घड़ी या कार बनाना तो बहुत मामूली बात है।
लेकिन असली सवाल यह है दुबई को इतना सारा सोना आखिर मिलता कहां से है और वहां सोना बाकी दुनिया की तुलना में इतना सस्ता क्यों है? तो चलिए आज की इस वीडियो में हम इस सुनहरे रहस्य का जवाब जानने की कोशिश करते हैं। यूएई का शहर दुबई दुनिया के बाकीशहरों से बिल्कुल अलग और अनोखा है। यह दुनिया का सबसे आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर है।
मजबूत इकॉनमी है और यह दुनिया के सबसे बड़े टूरिस्ट हब्स में से एक है। लेकिन [संगीत] इन सब चीजों के अलावा दुबई की एक ऐसी पहचान भी है [संगीत] जो इसे औरों से अलग बनाती है। सोने के साथ इसका पुराना और अनोखा रिश्ता। आपने अक्सर सुना होगा कि दुबई तेल बेचकर अमीर बना। लेकिन बहुत कम लोगों को पता है कि दुबई की इकॉनमी का एक बड़ा हिस्सा गोल्ड एक्सपोर्ट से आता है। जो भी टूरिस्ट दुबई जाते हैं वे वहां से सोना खरीदे बिना लौट ही नहीं सकते। क्योंकि जब इतनी कम कीमत में शुद्ध सोना मिले तो कौन इसे छोड़ सकता है? दुबई की एक और बड़ी बात यह है कि यहां इंटरनेशनल मार्केट में बिकनेlवाले हर सोने पर सरकार की सीधी निगरानी होती है। मतलब यहां बेचा जाने वाला हर सोना सरकार द्वारा प्रमाणित गोल्ड प्योरिटी हॉलमार्क के साथ आता है।
सरकार यह सुनिश्चित करती हैं कि सोने की क्वालिटी में जरा भी [संगीत] खामी ना रहे। हॉलमार्क पर सिर्फ कैरेट ही नहीं बल्कि सोने का वजन और मेकिंग चार्ज भी साफ-साफ लिखा होता है। यही वजह है कि आज दुबई का सोना दुनिया भर में एक मान्यता प्राप्त ब्रांड बन गया है। पर एक पल रुक कर सोचिए इतना सारा सोना और इतनी शुद्धता असल में किस स्रोत से आती है। यूएई की ज्यादातर जमीन मरुस्थल है।
वहां स्वाभाविक [संगीत] रूप से सोना या चांदी जैसे खनिज आसानी से नहीं पाए जाते। यह बातहमेशा ध्यान में रखें। इसी कारण से यूएई ने रणनीतिक रूप से अफ्रीका के कई देशों की ओर रुख किया है। हालांकि दुबई विश्वस्तरीय सोने के बाजार के रूप में जाना जाता है। बड़ी मात्रा में सोना अवैध रास्तों से खासकर अफ्रीका सेआता रहता है। सिर्फ अफ्रीका नहीं दक्षिण अमेरिका भी एक बड़ा स्रोत है। वहां से भी कच्चा सोना अवैध तरीकों से यहां पहुंचता है। संक्षेप में कहा जाए तो यूएई की धन संपदा का एक बड़ा हिस्सा स्थानीय नहीं है। यह अंतरराष्ट्रीय जाल और तस्करी मार्गों का परिणाम है। वास्तव में यूएई कुछ देशों से वैध सरकारी परमिशन के साथ सोना आयात करता है।
उदाहरण के तौर पर सूडान और पूर्व मध्य अफ्रीका के कुछ हिस्से फिर भी यह मत समझिए कि सब कुछ वैध है। कई देशों से बड़ी मात्रा में सोना अवैध रूप से भी आ रहा है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि अफ्रीका में सोना खनन करते समय मजदूरों का व्यापक रूप से शोषण किया जाता है।
कई मामलों में तो छोटे बच्चों को भी खदानों में काम करने के लिए मजबूर किया जाता है। जो एक बेहद गंभीर और दर्दनाक हकीकत है। आखिरकार यह निकाला गया सोना बिना किसी कानूनी रिकॉर्ड के दुबई के मार्केट में पहुंच जाता है। कभी-कभी तो पूरी तरह से चोरी या तस्करी के रास्ते से दुनिया भर की खानों से निकले सोने का लगभग 80% हिस्सा आखिरकार दुबई के बाजारों में ही पहुंचता है।
आज दुबई उस स्तर पर पहुंच चुका है जहां यहां की कई ज्वेलरी असल में चोरी या अवैध सोने से तैयार की जाती हैं। दुबई की आधुनिक रिफाइनरियों और तिजोरियों [संगीत] में कच्चे सोने को इतनी परफेक्शन से प्रोसेस किया जाता है कि वह शुद्ध प्रीमियम [संगीत] क्वालिटी के सोने में बदल जाता है। इस बेमिसाल नतीजे के पीछे हैं दुबई के हुनरमंद कारीगर जो खराब गुणवत्ता वाले सोने को भी चमकदार कलाकृति में बदलना जानते हैं। सिर्फ सोचिए साल 2017 में दुबई में करीब 12.2 मेट्रिक टन सोने की ट्रेडिंग हुई थी। जो अपने आप में एक चौंकाने वाली संख्या है।
इससे साफ जाहिर होता है कि दुनिया भर के लोग सोना खरीदने के लिए दुबई की ओर खींचे चले आते हैं। इसकी इतनी ज्यादा लोकप्रियता का सबसे बड़ा कारण है यहां का [संगीत] सोना बाकी देशों के मुकाबले सस्ता मिलना। सबसे दिलचस्प बात यह है कि इतनी आधुनिक तकनीक और प्रीमियम प्रोसेस के बावजूद दुबई में सोना आज भी सस्ता है। इसका मुख्य कारण यह है कि दुबई ने बाकी देशों की तरह सोने पर भारी भरकम टैक्स [संगीत] नहीं लगाए हैं और यही वजह है कि दुबई आज सोने के शौकीनों के लिए एक गोल्डन पैराडाइज बन गया है। दुबई में अगर आप सोना खरीदते हैं तो आपको सिर्फ उसकी असली कीमत चुकानी होती है और उस पर केवल 5% वट देना पड़ता है। लेकिन भारत में जीएसटी, वेट और एक्सरसाइज ड्यूटी जैसे तीन बड़े टैक्स के कारण सोना काफी महंगा हो जाता है।
इसी वजह से आम आदमी के लिए सोना खरीदना एक महंगा सपना बन जाता है। सबसे रोचक बात यह है कि दुबई [संगीत] में वट साल 2018 के बाद लागू हुआ। उससे पहले तो वहां सोना और भी सस्ते दामों पर मिलता था। इसके अलावा दुबई में हर ज्वेलरी शॉप पर सोने की कीमत एक जैसी रहती है। दुबई में सोने का रेट इंटरनेशनल मार्केट के हिसाब से तय होता है। इसलिए आप मोलभाव करके दाम घटा नहीं सकते। यानी ग्राहक चाहे किसी भी शॉप से सोना खरीदे उसे वही दाम देना पड़ेगा। जब इंटरनेशनल मार्केट में गोल्ड का रेट गिरता है तो दुबई में भी उसी वक्त सोने की कीमत घट जाती है और उस दिन खरीदारों को सोना सस्ते में मिल जाता है। इसके अलावा दुबई के ज्वेलर्स के साथ मेकिंग चार्ज यानी सोना बनाने की लागत पर भी मोलभाव किया जा सकता है।
अगर आपको मोलभाव करने की कला आती है तो आप मार्केट प्राइस से भी सस्ता सोना ले सकते हैं। दुबई में आने वाले टूरिस्ट्स सोना खरीदने के लिए सबसे ज्यादा उत्साहित [संगीत] रहते हैं और इसकी सबसे बड़ी वजह है एक मशहूर पारंपरिक मार्केट जिसे कहते हैं गोल्ड सूख। इस विशाल गोल्ड मार्केट मेंहजार से ज्यादा शॉप्स हैं। जहां हर दिन लाखों लोग सोने की खरीद बिक्री करते हैं। इस मार्केट में कदम रखते ही आपको नजर आएंगे ऐसे डिज़ाइन औरस्टाइल जिन्हें देखकर आप दंग रह जाएंगे।
इतने सारे ऑप्शंस शायद दुनिया में और कहीं नहीं मिलते। दुबई में दास जोया लुकास जैसे मशहूर ब्रांड्स के ज्वेलरी शोरूम्स भी हैं। हर ज्वेलरी शॉप अपने ग्राहकों को गारंटी देती है [संगीत] कि वह जो गोल्ड बेच रहे हैं वह पूरी तरह असली और खरा है। अगर कोई सोने की क्वालिटी में चीटिंग करता है या बिना हॉलमार्क वाला सोना बेचता है तो दुबई का कानून उसे कड़ी सजा देता है। ऐसे अपराधों में दोषी पाए जानेपर ₹ करोड़ रुपए तक का जुर्माना और 2 साल तक की जेल की सजा हो सकती है।
इन्हीं सख्त नियमों की वजह से दुबई में गोल्ड फ्रॉड के मामले बेहद कम होते हैं। सोने की शुद्धता और भरोसे की वजह से सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि कई दूसरे देशों के लोग भी दुबई से गोल्ड खरीदना पसंद करते हैं। पाकिस्तान, ओमान,ब्रिटेन, सऊदी अरब और कनाडा जैसे देशों के खरीदार भी दुबई को गोल्ड खरीदने का ग्लोबल हब मानते हैं।
खासकर भारतीय लोगों में दुबई से सोना खरीदने की परंपरा बहुत मजबूत है। क्योंकि भारत में शादियों और त्योहारों में सोने को संपन्नता और शुभता का प्रतीक माना जाता है। अगर आप दुबई से सोना लाने का प्लान बना रहे हैं तो आपको यह जानना जरूरी है कि इसके लिए कुछ सख्त नियम और सीमाएं तय की [संगीत] गई हैं। इसके साथ ही जब आप सोना भारत लेकर आते हैं तो उस पर कुछ शुल्क या टैक्स भी देना पड़ता है। नियम के अनुसार अगर आप भारतीय पुरुष हैं और दुबई में 1 साल से रह रहे हैं तो आपको 20 ग्राम तक सोना खरीद कर भारत लाने की अनुमति है।
मतलब तय सीमा के अनुसार उस सोने की अधिकतम कीमत ₹ लाख तक हो सकती है। महिलाओं के लिए अलग नियम है। वे 40 ग्राम तक सोना ला सकती हैं। लेकिन अगर उसकी बाजार कीमत ₹1 लाख से ज्यादा हुई तो उस पर टैक्स में छूट नहीं मिलेगी। यानी अगर आप तय सीमा से ज्यादा सोना लाते हैं तो आपको कस्टम ड्यूटी शुल्क देना होगा और यह बातकानून में साफ तौर पर दर्ज है।
यानी किसी व्यक्ति की यात्रा कितनी लंबी है और वह कितना सोना ला रहा है। इन दोनों बातों के आधार पर ही ड्यूटी और छूट तय होती हैं। यानी अगर कोई व्यक्ति 6 महीने का रेजिडेंस कंडीशन पूरा करता है तो वह 1 किलो तक गोल्ड कॉइन ला सकता है।
मगर उस पर 12.5% कस्टम ड्यूटी देनी पड़ेगी। अगर सोने का वजन 1 किलो से ज्यादा हुआ तो उस पर 36% टैक्स लागू होता है। यह नियम सिर्फ लंबे समय रहने वालों पर नहीं बल्कि कुछ दिनों के लिए दुबई जाने वाले टूरिस्ट्स पर भी लागू होता है। एक बात तो बिल्कुल साफ है जैसे पेट्रोल की दुनिया में दुबई का दबदबा है। वैसे ही गोल्ड मार्केट में भी उसकी रफ्तार हैरान करने वाली है। सोने के व्यापार ने यूएई की अर्थव्यवस्था को बेहद मजबूत और तेजीसे आगे बढ़ाया है। इस वक्त दुबई के गोल्ड इंडस्ट्री में लगभग 4086 कंपनियां सक्रिय रूप से काम कर रही हैं। साल 2024में संयुक्त अरब अमीरात के पास लगभग 74.4 टन सोने का रिजर्व था। भले ही पिछले साल यह मात्रा थोड़ी कम थी, लेकिन अब वे गोल्ड मार्केट को तूफानी रफ्तार से आगे ले जा रहे हैं। दोस्तों, दुबई के गोल्ड मार्केट और उसकी हैरान कर देने वाली कमाई के बारे में आप क्या सोचते हैं? अपनी राय नीचे कमेंट में जरूर बताइए।