नमस्कार मेरे दोस्तों मैं आपका अपना आर के खन्ना आज एक बार फिर आपके सामने उपस्थित हूं लेकर हमारा अपना प्रोग्राम यादों का सिलसिला यादों का सिलसिला चलता रहा है चलता रहेगा यादों का सिलसिला यादों यादों का सिलसिला यादों का सिलसिला यादों का सिलसिला यादों का सिलसिला हमारी फिल्म इंडस्ट्री में जिस तरह से राजकुमार बेबाकी से कुछ भी कह देने के लिए मशहूर हैं। उसी तरह एक और शख्स है जिसे इंडस्ट्री का ही मैन कहा जाता है। धर्मेंद्र धर्मेंद्र अपने गुस्से के लिए मशहूर हैं। जी हां। या तो धर्म गर्म होता नहीं और अगर हो जाए तो फिर वो किसी के काबू में आते नहीं। धर्म जी अपने गुस्से के लिए पूरी फिल्म इंडस्ट्री में मशहूर हैं। मेरे दोस्तों आज हम आपको ऐसी घटना से वाकिफ कराएंगे जब धर्मेंद्र ने गुस्से में आके पकड़ लिया था राजकुमार साहब का कॉलर और दोनों में झगड़ा होने ही वाला था। अगर यूनिट के लोग बीच बचाव ना कराते तो हो सकता था उस दिन धर्मेंद्र अपना आपा खो बैठते और राजकुमार उनके हाथों मार खाते पीटना पिटाई दोनों के बीच में मारपीट होती क्या हुआ था आइए हम उस पे चर्चा करते हैं। यादों के उस पुराने सिलसिले को आगे बढ़ाते हैं। यह घटना है पहली बार जब राजकुमार साहब और धर्मेंद्र ने एक फिल्म में काम किया जिस फिल्म का नाम था काजल। जी हां, मीना कुमारी जी उसमें हीरोइन थी।
उस फिल्म की जब शूटिंग शुरू होने वाली थी तो फिल्म के प्रोड्यूसर डायरेक्टर ने राजकुमार जी से धर्मेंद्र को इंट्रोड्यूस करवाया। धर्मेंद्र को राजकुमार जी ने जब ऊपर से नीचे देखा तो टोंट कसा फिल्म के प्रोड्यूसर डायरेक्टर से कहा कि भाई ये तो कहीं से एक्टर नहीं लगता। यह तो पहलवान लगता है। तुम इनसे पहलवानी कराओगे या एक्टिंग? अपने लिए इस तरह का शब्द सुनकर धर्मेंद्र को गुस्सा तो आया लेकिन वो अभी इंडस्ट्री में नए थे और राजकुमार बहुत सीनियर एक्टर थे। इसलिए अपने गुस्से पे काबू रखते हुए धर्मेंद्र ने कुछ रिएक्ट नहीं किया और बात आई ही गई हो गई। उसके बाद धर्मेंद्र और राजकुमार साहब एक बार फिर एक फिल्म के लिए साइन हुए। बी आर चोपड़ा साहब की फिल्म थी। फिल्म का नाम था आदमी और इंसान। धर्मेंद्र को बी आर चोपड़ा साहब साइन कर चुके थे। एक दूसरे रोल के लिए उन्होंने राजकुमार से मुलाकात की। राजकुमार को पूरी कहानी सुनाई। कहानी में जो राजकुमार का रोल उस फिल्म में था वह एक ऐसे अमीर व्यक्ति का था जो अपने एक दोस्त को बचपन से जवानी तक पढ़ाता है, लिखाता है, उसके सारे खर्चे उठाता है। उसे उच्च शिक्षा के लिए विलायत भेजता है। उस पर बहुत से एहसान करता है। और वह जब विदेश से लौट के आता है तो राजकुमार साहब उसके गले में हार पहनाते हैं। उसका स्वागत करते हैं। कहानी यहां तक पहुंची ही थी कि राजकुमार साहब ने कहा ठहरो। हम और अपने से छोटे एक्टर को हार पहनाएं। यह कभी नहीं होगा। धर्म हमारे सामने जूनियर है और हम उसे हार नहीं पहनाएंगे। इस सीन को आप बदलिए। बी आर चोपड़ा साहब ने सुना। कुछ रिएक्ट नहीं किया।
कहानी आगे पहुंची। आगे की कहानी बी आर चोपड़ा साहब ने उन्हें सुनाई। सुनाते-सुनाते एक सीन ऐसा आया जिस सीन में राजकुमार साहब जिस लड़की से प्यार करते हैं, उसी लड़की से प्यार करता है धर्मेंद्र। यानी दोनों हीरो एक हीरोइन से प्यार करते हैं। उस हीरोइन का रोल उस फिल्म में अदा किया था सायरा बानो जी ने। जब राजकुमार को पता चलता है कि जिस लड़की से हम प्यार करते हैं उसी से यह भी प्यार करता है तो राजकुमार साहब अपना आपा खो बैठते हैं और वो धर्मेंद्र को एक घूसा उनके मुंह पे मारते हैं। बदले में धर्मेंद्र भी पलट के उन्हें उनके चेहरे पर घूसा मारता है। यह सीन उस फिल्म में था। राजकुमार साहब ने कहा कि ठहरो फिल्म में वो हमारे एहसानों तले दबा हुआ है। हम उस पर हाथ उठाएं यह ठीक है। लेकिन बदले में वो हम पर हाथ उठाए यह ठीक नहीं है। हम अपने से छोटे एक्टर से मार नहीं खाएंगे। आपको यह सीन भी बदलना होगा। इस तरह से फिल्म की पूरी कहानी सुनने के बाद राजकुमार साहब ने बी आर चोपड़ा के सामने दो शर्तें रखी। नंबर एक फिल्म में हमें जो धर्मेंद्र को हार पहनाना है वो सीन बदलिए। हम यह सीन नहीं करेंगे। और हम जो उस पे हाथ उठाते हैं तो बदले में वह भी हम पे हाथ उठाए। यह हमें मंजूर नहीं। आपको यह सीन भी बदलना होगा। अगर आप यह दोनों सीन बदलते हैं तब तो हम इस फिल्म में काम करेंगे। वरना हम इस फिल्म में काम नहीं करेंगे। मेरे दोस्तों बी आर चोपड़ा साहब उन फिल्म मेकर्स में रहे हैं जो कभी भी अपने स्क्रिप्ट के साथ छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं करते। उन्होंने अपनी स्क्रिप्ट में कोई बदलाव नहीं किया और राजकुमार की जगह साइन कर लिया फिरोज़ खान को।
जी। अब राजकुमार जो रोल वो राजकुमार को ऑफर कर रहे थे अब वही रोल अदा किया फिरोज खान ने और जो भी सीन उसमें थे धर्मेंद्र को हार पहनाने का वो फिरोज खान ने अदा किया धर्मेंद्र पे हाथ उठा के धर्मेंद्र से मार खाने का वो सीन भी फिरोज खान पे एज इट इज़ बी आर चोपड़ा साहब ने पिक्चराइज किया। राजकुमार साहब का अपना अंदाज अलग ही था। उन्हें अगर कोई चीज पसंद ना आए वो कोई कहानी हो कोई एक्टर हो या कोई दृश्य सीन कोई सिचुएशन अगर उन्हें कुछ पसंद नहीं आता था तो वो उस फिल्म में काम नहीं करते थे और यही कारण रहा कि उन्होंने बी आर चोपड़ा के साथ जिनके साथ वो हमराज और वक्त जैसी सुपरहिट फिल्में कर चुके थे उन्होंने आदमी और इंसान फिल्म में काम नहीं किया। अब इसके बाद धर्मेंद्र और राजकुमार ने एक बार फिर काफी सालों के बाद एक बार फिर से एक फिल्म में साथ में काम किया। फिल्म का नाम था राज तिलक। जी राज तिलक। ये राजकुमार कोहली साहब ने बनाई थी। इसमें कमल हसन, सुनील दत्त, धर्मेंद्र, राजकुमार, रीना राय, अजीत, प्राण और भी बहुत से कलाकार थे। मल्टीस्टारर फिल्म थी ये और अपने समय पे जब रिलीज हुई तो काफी सफल भी रही। इसी फिल्म की शूटिंग के दरमियान अक्सर राजकुमार साहब धर्मेंद्र को जितेंद्र कह कर बुलाते थे। जी हां जितेंद्र एक बार जब एक बार जब धर्म जी ने राजकुमार साहब को रोका
और उन्हें याद दिलाया कि सर शायद आपको मेरा नाम याद नहीं रहता। मेरा नाम है धर्मेंद्र। आप मुझे बार-बार जितेंद्र कहकर ना बुलाएं। तो राजकुमार साहब ने जवाब दिया कि धर्मेंद्र हो, जितेंद्र हो या कोई बंदर हमारे लिए सब बराबर है। अपने लिए यह बंदर शब्द सुनकर धर्मेंद्र अपना आपा खो बैठे और उन्होंने सेट पर ही राजकुमार साहब का कॉलर पकड़ लिया और इससे पहले कि वो गुस्से में उन पर हाथ उठा बैठते वहां मौजूद सभी लोगों ने बीच बचाव करा के दोनों को अलग-अलग करवाया। तब जाके काफी देर के बाद यह मामला शांत हुआ। उसके बाद कभी भी धर्मेंद्र ने राजकुमार के साथ किसी भी फिल्म में काम नहीं किया। मेरे दोस्तों धर्म जी और राजकुमार साहब से जुड़ी कुछ घटनाओं को हमने आपके सामने रखा। अगले किसी एपिसोड में और कुछ लोगों से जुड़ी कुछ यादों को फिर आपके सामने रखेंगे। तब तक के लिए दीजिए इजाजत। हमारे चैनल को अगर आपने अब तक सब्सक्राइब नहीं किया है तो कर लीजिए ताकि हम जब भी कोई नया वीडियो डालें तो आपको नोटिफिकेशन मिल सके।