बांग्लादेश के ये हजारों कट्टरपंथी भगवान राम, भगवान शिव और भगवान कृष्ण से लड़ने के लिए निकल पड़े हैं। बांग्लादेश के रंगपुर में खिलाफत मजलिस नाम के एक संगठन ने जिहादी झंडे लहराते हुए नारा-ए-तकबीर और अल्लाहू अकबर के नारे लगाने शुरू कर दिए और भगवान राम, भगवान शिव और भगवान कृष्ण की मूर्तियों को तोड़ने का ऐलान कर दिया। दरअसल बांग्लादेश के गौ बांधा जिले में 82 फीट ऊंची राम प्रतिमा बन रही है। जिसे यह बांग्लादेश के कट्टरपंथी तोड़ना चाहते हैं।
लेकिन अब बांग्लादेश के हिंदू भी मशाल लेकर भगवान राम की मूर्ति को बचाने निकल पड़े हैं। हिंदू भी मशाल के साथ सड़कों पर जुलूस निकाल रहे हैं। आपको बता दें कि 2025 में बांग्लादेश के हिंदुओं ने खुद ही डोनेशन का पैसा जमा किया और भगवान राम की प्रतिमा बनानी शुरू कर दी। यह प्रतिमा किसी अवैध जगह पर नहीं बनाई जा रही थी। इसे एक मंदिर के अंदर बनाया जा रहा था। इस मंदिर परिसर में पहले से ही 100 से ज्यादा देवी देवताओं की मूर्तियां थी।
जिनमें 30 फीट की शिव प्रतिमा और 53 फीट की कृष्ण प्रतिमा भी शामिल थी। ऐसे में बांग्लादेश के हिंदू इसी मंदिर परिसर के अंदर 82 फीट की राम प्रतिमा बनवा रहे थे। अब आप ही सोचिए कि यह तो सड़क पर कहीं भी मजार बना ले। सड़क पर कहीं भी नमाज पढ़नी शुरू कर दें। लेकिन जब एक मंदिर के अंदर मूर्ति बनाई गई तो यह वह मूर्ति तुड़वाना चाहते हैं। बांग्लादेश के कट्टरपंथियों ने कहा है कि इन मूर्तियों की आड़ में भारत हम पर कब्जा करना चाहता है। आप इन जाहिलों के दिमाग की स्थिति के बारे में सोचिए। हैरानी की बात देखिए कि अब अलजीरा बीबीसी और डी डब्ल्यू जैसे भारत विरोधी मीडिया चैनल इस पर कोई रिपोर्ट प्रकाशित नहीं कर रहे हैं। लेकिन जब भारत अवैध बांग्लादेशियों को अपने देश से निकाल रहा है
तो यह सभी विदेशी मीडिया वाले छाती पीट-पीट कर रो रहे हैं। हैरानी की बात देखिए कि कट्टरपंथियों के दबाव में बांग्लादेश की सरकार ने इस राम प्रतिमा के काम को बीच में ही रुकवा दिया है। लेकिन कट्टरपंथी अड़े हुए हैं कि वह इस पूरी मूर्ति को गिराना चाहते हैं। बहरहाल अब खबर है कि इस राम प्रतिमा को बचाने के लिए जगन्नाथ यूनिवर्सिटी के हिंदू छात्र मशाल लेकर सड़कों पर जुलूस निकाल रहे हैं।
इन हिंदू छात्रों का कहना है कि सरकार कट्टरपंथियों के दबाव में भगवान राम की मूर्ति को नहीं रोक सकती, नहीं तोड़ सकती। चिडगोंग में भी हिंदू अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों ने भगवान राम की मूर्ति को बचाने के लिए मार्च निकाला। आपको बता दें कि बांग्लादेश में राम प्रतिमा प्रोजेक्ट से पहले भी 2 साल में हिंदू आस्था से जुड़े दो प्रोजेक्ट्स पर रोक लग चुकी है। 2025 में कट्टरपंथियों के विरोध के बाद ढाका में दुर्गा मंदिर पर रोक लगा दी गई। इसके अलावा 2024 में ढाका के उत्तरा में दुर्गा पूजा मूर्ति स्थापना पर आपत्ति के बाद इस मूर्ति की जगह को बदलना पड़ गया।