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मनमोहन सिंह को सुप्रीम कोर्ट से मिली क्लीन चिट, इस घोटाले में फंसे थे पूर्व PM।

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कोयला घोटाले में बड़ा अपडेट। मनमोहन सिंह को मिली बड़ी राहत। सुप्रीम कोर्ट ने मनमोहन को दी क्लीन चिट। निधन के 2 साल बाद पूर्व पीएम को मिला न्याय। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को कोयला ब्लॉक आवंटन मामले में सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने विशेष अदालत की उस आदेश को रद्द कर दिया।

जिसमें उन्हें इस मामले में आरोपी बनाकर तलब किया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट भी स्वीकार कर ली। इसका मतलब है कि इस मामले में अब उनके खिलाफ कोई कानूनी कारवाई नहीं होगी। यह मामला करीब 11 साल पहले शुरू हुआ था।

जब विशेष अदालत ने मनमोहन सिंह को आरोपी के तौर पर समन जारी किया था। अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद उन्हें इस मामले में पूरी तरह कानूनी राहत मिल गई है। यह फैसला उनके निधन के करीब 2 साल बाद आया है। सीबीआई ने जांच पूरी करने के बाद इस मामले में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी जिसे अब सुप्रीम कोर्ट ने मंजूरी दे दी। डॉ. मनमोहन सिंह साल 2004 से 2014 तक भारत के प्रधानमंत्री रहे। उनके कार्यकाल के दौरान कोयला ब्लॉक आवंटन को लेकर कई मामलों की जांच हुई थी। साल 2015 में डॉ. मनमोहन सिंह ने विशेष सीबीआई अदालत द्वारा जारी समन को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। पहली ही सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें राहत देते हुए समन पर रोक लगा दी थी।

इसके बाद यह मामला कई वर्षों तक सुप्रीम कोर्ट में लंबित रहा और समन की वैधता पर अंतिम फैसला नहीं आ सका। डॉक्टर सिंह का 26 सितंबर 204 को 92 साल की उम्र में निधन हो गया था। अब सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार करते हुए इस मामले को समाप्त कर दिया। सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को खारिज करने या डॉ. मनमोहन सिंह के खिलाफ आगे कारवाई करने की कोई ठोस वजह नहीं थी।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि कोर्ट ने दोनों पक्षों के वरिष्ठ वकीलों की दलीलें सुनी और सीबीआई की दोनों क्लोज़र रिपोर्ट का भी सावधानी से अध्ययन किया। कोर्ट ने कहा कि जांच रिपोर्ट को स्वीकार या खारिज करने के तय कानूनी नियमों के आधार पर यह साफ है कि सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को रद्द करने या मामले में दोबारा संज्ञान लेने का कोई मजबूत आधार नहीं बनता है। पूर्व प्रधानमंत्री की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल और एएम सिंघवी ने दलील दी कि सीबीआई ने 27 अगस्त 2014 और 21 अक्टूबर 2014 को ट्रायल कोर्ट में क्लोज़र रिपोर्ट दाखिल की थी।हालांकि स्पेशल जज ने रिपोर्ट को ठुकरा दिया था। 11 मार्च 2015 को पूर्व प्रधानमंत्री को समन जारी किया गया था। सिब्बल ने यह भी कहा कि ट्रायल कोर्ट ने सरकारी मंजूरी का इंतजार किए बिना ही मामला दर्ज कर लिया था। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि स्पेशल जज के पास सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को ठुकराने का कोई ठोस कारण नहीं था।

कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को रद्द करते हुए मामले को मेरिट के आधार पर बंद कर दिया। यह मामला 2005 में उड़ीसा के तालाबीर कोर ब्लॉक आवंटन में भ्रष्टाचार के आरोपों से जुड़ा था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सीबीआई ने जांच के बाद दो बार क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की और मनमोहन सिंह को निर्दोष बताया। इसके बावजूद विशेष जज ने स्थापित कानूनी सिद्धांतों की अनदेखी की। उन्होंने मामले पर संज्ञान लिया और समन जारी कर दिया। इसलिए उस आदेश को निरस्त किया जा रहा है।

सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद मनमोहन के खिलाफ कारवाई आधिकारिक तौर पर खत्म हो गई है। हालांकि सीजीआई ने साफ तौर पर कहा कि इससे अन्य मामलों पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

सुनवाई के दौरान जब एक वकील ने पूछा कि क्या इस फैसले का असर उसी मामले से जुड़े अन्य आरोपियों की लंबित अपीलों पर पड़ेगा। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह फैसला केवल पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह की आधिकारिक भूमिका तक सीमित है। अन्य आरोपियों से जुड़े मामले पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

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