Cli

PM मोदी के 10 वफादार लोग जिनके बिना बीजेपी में पत्ता नहीं हिलता! कौन है नंबर 1?

Uncategorized

नरेंद्र मोदी जी के 10 सबसे वफादार नेता जिनके बिना बीजेपी में पत्ता भी नहीं हिलता है। नंबर 10 हेमंत विश्व शर्मा जी। शुरुआत करते हैं नॉर्थ ईस्ट के उस सुल्तान से जिन्होंने कांग्रेस का हाथ ऐसा मरोड़ा कि बेचारों का हाथ आज तक सीधा ही नहीं हो पाया। जी हां, हम बात कर रहे हैं असम के मुख्यमंत्री हेमंता विश्वा शर्मा जी की। एक जमाना था जब ये राहुल जी के कुत्ते पीडू को बिस्किट खाते देखते रह गए थे। और आज जमाना यह है कि इन्होंने पूरी की पूरी अपोजिशन को दिन में तारे दिखा दिए हैं। हेमंता विश्वा शर्मा जी ने जब से बीजेपी का दमन थामा है तब से पूर्वोत्तर में कमल ऐसे खिल रहा है जैसे बारिश के मौसम में तालाब में कई जमती है। दिल्ली में बड़े-बड़े सियासी सुरमा जब तक नॉर्थ ईस्ट की पॉलिटिक्स को समझने के लिए Google मैप खोलते हैं तब तक हेमंत विश्व शर्मा जी वहां दो राज्यों की सरकारें पलटकर आराम से असम की कड़क चाय पी रहे होते हैं। अब थोड़ा सीरियस होकर इनके पावर लेवल को समझो। यह कोई आम नेता तो है नहीं। पूर्वोत्तर के राज्यों में राज्यों में जहां बीजेपी का नाम कोई नहीं था। वहां आज भगवा परचम लहरा रहा है। तो उसके पीछे इसी एक शख्स का दिमाग है। अमित शाह जी की चुनावी प्लानिंग को जमीन पर 100% सटीक उतारने की कला इन्होंने बखूबी सीखी है। इनका सीधा फंडा है बहती गंगा में सिर्फ हाथ नहीं धोना है बल्कि पूरे की पूरी गंगा का रुख ही बीजेपी के दफ्तर की तरफ मोड़ देना है। पीएम मोदी जी इन पर आंख बंद करके भरोसा करते हैं क्योंकि यह वह नेता हैं जो चुनाव जीतने के लिए घाट-घाट का पानी पी चुके हैं और अब विपक्ष को वही पानी पिला पिलाकर थका रहे हैं। राजनीति के इस माहिर खिलाड़ी के बिना बीजेपी के लिए पूर्वोत्तर [संगीत] का किला फतह करना लोहे के चने चबाने जैसा है। लेकिन भाई पूर्वोत्तर का किला तो फतह हो गया। पर नंबर नौ पर जो शख्स आ रहा है उनके एक इशारे पर देश के सबसे तेज ट्रेनें भी रुक जाती हैं और उनके पास इतने मंत्रालय हैं कि संभालते संभालते खुद Google भी थक जाएगा। कौन है यह हाईटेक मंत्री?

चलिए अंग देखते हैं। नंबर नौ अश्विनी वैष्णव जी। अब बात करते हैं देश के रियल लाइफ रील्स मंत्री यानी अश्विनी वैष्णव जी की। यह दो भूतपूर्व आईएएस अधिकारी हैं। जिन्हें देखकर देश के बाकी ब्यूरोक्रेट्स के पेट पेट में मरोड़ उठने लगती है। अश्विनी वैष्णव जी के पास इतने सारे मंत्रालय हैं कि अगर वह अपनी विजिटिंग कार्ड पर सबके नाम लिखवाने जाएं तो कार्ड छोटा पड़ जाएगा और मंत्रालय का। रेलवे से लेकर आईटी और टेलीकॉम से लेकर सूचना प्रसारण तक सब कुछ इन्हीं के जेब में है। सोशल मीडिया पर इनकी वंदे भारत ट्रेनों की रील्स इतनी तेज दौड़ती हैं जितनी पटरी पर खुद ट्रेन नहीं दौड़ पाती। जब भी देश में बुलेट ट्रेन की बात होती है, अश्विनी वैष्णव जी तुरंत अपनी जेब से एक नया चमचमाता पीपीटी प्रेजेंटेशन निकाल लेते हैं। जरा सोचिए एक तरफ जहां बाकी नेता सिर्फ भाषण भाजी में उलझे रहते हैं। वहीं अश्विनी वैष्णव जी सीधे डाटा कोडिंग [संगीत] और इंफ्रास्ट्रक्चर की भाषा में बात करते हैं। पीएम मोदी जी को इनका यह कॉर्पोरेट स्टाइल और काम करने का तरीका बेहद पसंद है। क्योंकि मोदी जी के डिजिटल इंडिया वाले सपने की असली चाबी इन्हीं के पास है। में से रेल चाहे 2 घंटे लेट हो जाए लेकिन अश्विनी वैष्णव जी की 5G स्पीड वाली रील एकदम टाइम पर अपलोड होनी चाहिए। इनका काम करने का तरीका ऐसा है कि यह दिन रात एक कर देते हैं। भले ही बाद में विपक्ष इनके काम में मीन रेख निकालता रहे। मोदी जी के डिजिटल इंडिया और हाईटेक इंफ्रास्ट्रक्चर के सपने को अगर कोई हकीकत में बदल रहा है तो वह अश्विनी वैष्णव जी ही हैं। इनके बिना सरकार की हाईटेक विकास वाली गाड़ी 1 इंच भी आगे नहीं खिसक सकती। मगर रुकिए रुकिए अगर आप मिडिल क्लास हैं तो जरा दिल पर हाथ रख लीजिए क्योंकि नंबर आठ पर जो आ रही हैं उन उनसे आपका पाला हर साल बढ़ता है और वो अपने टैक्स काटने में जरा भी रहम नहीं खाती। नंबर आठ निर्मिला सीतारमण जी। लिस्ट में अगला नंबर आता है उस लेडी सिंघम का जिनके बजट भाषण को सुनकर अच्छे-अच्छे अर्थशास्त्रियों के सिर का दही हो जाता है। जी हां, हमारी वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण जी देश की अर्थव्यवस्था की कमान संभालने वाली निर्मला जी का मिजाज ऐसा है कि संसद में जब बोलना शुरू करती हैं तो विपक्ष के बड़े-बड़े धुरंधरों के पसीने छूट जाते हैं। आपको बाजार में प्याज की बढ़ती कीमतें पसंद हो या ना हो। लेकिन निर्मला जी को आपका टैक्स काटना बेहद पसंद है। देश का मिडिल क्लास हर साल बजट के दिन टीवी के सामने ऐसे बैठता है जैसे उसकी कोई बंपर लॉटरी का रिजल्ट आने वाला हो। और निर्मला जी हर बार संसद में मुस्कुराकर कहती हैं थैंक यू फॉर योर कंट्रीब्यूशन।

अब जरा इनके असली रुतबे की बात करते हैं। मजाक अपनी जगह है। लेकिन जब पूरी दुनिया मंदी के दौर से गुजर रही थी तब भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूती से थामे रखना कोई बच्चों का खेल नहीं था। मुश्किल से मुश्किल आर्थिक सुधारों को लागू करना हो या ग्लोबल मंदी के थपड़ों से देश को बचाना हो। पीएम मोदी जी हमेशा निर्मला जी की सूझबूझ पर ही दांव लगाते हैं। आर्थिक मोर्चे पर जब भी देश में कोई बड़ी उथल-पुथल होती है या विपक्ष सरकार को घेरने की कोशिश करता है। निर्मला जी फ्रंट फुट पर आकर ऐसी तगड़ी बैटिंग करती हैं कि सामने वाली टीम के होश उड़ जाते हैं। पूरी सरकार की तिजोरी की चाबी इनके पास है। इसीलिए पीएम मोदी जी भी इनकी बात को कभी टालते नहीं है। इनके बिना मोदी सरकार की आर्थिक गाड़ी का पहिया घूमना पूरी तरह से नामुमकिन है। में से तिजोरी की बात तो हो गई लेकिन नंबर सात पर जो शख्स हैं वह कोई मंत्री नहीं है। वह कभी टीवी पर नहीं आता। लेकिन पूरी बीजेपी के नेताओं के टिकट काटना या जोड़ना उसी के हाथ में है। चलिए जानते हैं उस रहस्यमई पावर हाउस को। नंबर सात बीएल संतोष जी अब मिलिए उस शख्स से जो कभी टीवी चैनलों पर डिबेट करता नहीं दिखता। अखबारों के फ्रंट पेज पर जिसकी फोटो ढूंढने से भी नहीं मिलती। लेकिन बीजेपी के अंदर इनका सिक्का ऐसा चलता है कि बड़े-बड़े मुख्यमंत्री भी इन्हें देखकर सावधान की मुद्रा में खड़े हो जाते हैं। हम बात कर रहे हैं राष्ट्रीय महासचिव संगठन बीएल संतोष जी की। यह बीजेपी और आरएसएस के बीच काबू मजबूत और फेविकोल का जोड़ है जिसे कोई राजनीतिक पानी नहीं छुड़ा सकता। पैदे के पीछे रहकर सरकार और संगठन की चूलें कसना इनके बाएं हाथ का खेल है। चुनाव में किस बड़े नेता का पत्ता कटेगा और किस और किसकी किस्मत का तारा चमकेगा यह ऐसा बीएल संतोष जी की सीक्रेट डायरी में पहले से तय होता है। अरे भाई आप सोच रहे होंगे कि जो नेता टीवी पर नहीं आता वो ताकतवर कैसे हुआ? तो सुनो असली ताकत वो नहीं होती जो कैमरे के सामने चिल्लाए। असली ताकत वो होती है जो कैमरे के पीछे बैठकर पूरी फिल्म की स्क्रिप्ट लिखे। जब बड़े-बड़े नेता अपनी जीत के जश्न में डूबे होते हैं, तब संतोष जी अगले 5 साल बाद होने वाले चुनाव की बिसात बिछा रहे होते हैं। इनका पावर लेवल ऐसा है कि यह पूरी पार्टी को बिना कोई शोर किए अपनी उंगलियों पर नचाने का दम रखते हैं। पीएम मोदी जी के संगठन विजन को जमीन पर अक्षर शाह उतारने का पूरा जिम्मा इन्हीं का है। इसलिए कहते हैं कि बीजेपी में अगर संगठन का पत्ता भी हिलना हो तो पहले संतोष जी की इजाजत की पर्ची कटवानी पड़ती है। लेकिन अगर संगठन के ऐसे खिलाड़ी से थोड़ा आगे बढ़ें तो नंबर छह पर एक ऐसा शख्स बैठा है जिसका चश्मा उतारते ही पूरी दुनिया के बड़े-बड़े गोरे साहबों को अपनी नानी याद आ जाती है। नंबर छह एस जयशंकर जी। नंबर छह पर हैं इंटरनेट के सबसे बड़े सिग्मा मेल और हमारे विदेश मंत्री एस जयशंकर जी। जब वे अपना चश्मा थोड़ा सा नीचे उतार कर विदेशी पत्रकारों की तरफ ठंडी निगाहों से देखते हैं तो सामने वाले को बिना मौसम के ही अपने घर की याद आ जाती है। एक जमाना था जब भारत की विदेश नीति पर दुनिया के छोटे-छोटे देश भी उंगली उठा देते थे और आज जमाना यह है कि जयशंकर जी अपनी एक उंगली के इशारे से यूरोप और अमेरिका के बड़े-बड़े कूटनीतिज्ञों के दांत इकट्ठे कर देते हैं।

पश्चिमी देशों को उन्हीं की भाषा में ईंट का जवाब पत्थर से देना जयशंकर जी से बेहतर कोई नहीं जानता। सोशल मीडिया पर इनके कड़क और तीखे बयानों के पीछे बैकग्राउंड म्यूजिक लगाकर लोग धड़ाधड़ धड़ाधड़ रील्स बनाते हैं। अब जरा कूटनीति के इस खेल को गहराई से समझिए। यूक्रेन युद्ध के समय जब पूरी दुनिया भारत पर दबाव बना रही थी कि रूस से तेल मत खरीदो। तब जयशंकर जी ने अकेले दम पर यूरोप को आईना दिखा दिया था। पीएम मोदी जी को दुनिया के सामने भारत की छाती चौड़ी करके दिखाने वाले इस कूटनीति के चाणक्य पर अटूष्ट विश्वास है। जयशंकर जी का सीधा नियम है अगर तुम हमारे आंतरिक मामलों में टांग अड़ाने की कोशिश करोगे तो हम तुम्हारी वैश्विक कूटनीति की टांग तोड़ देंगे। ग्लोबल स्टेज पर मोदी जी के विज़न को अगर किसी ने एक इंटरनेशनल ब्रांड बनाया है तो वह जयशंकर जी ही हैं। जिनके बिना भारत की विदेशी नीति की कल्पना भी नहीं की जा सकती। दोस्तों अब हम वीडियो के बिल्कुल बीच में आ चुके हैं और टॉप पांच की शुरुआत होने वाली है। नंबर एक पर जो नाम है उसने पूरी अपोजिशन की रातों की नींद उड़ा रखी है। लेकिन नंबर एक तक पहुंचने से पहले बात करते हैं नंबर पांच की जो भारत का रियल लाइफ जेम्स बोंड है। नंबर पांच अजीत डोभाल जी। अब बात करते हैं भारत के रियल लाइफ जेम्स बोंड यानी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल जी की। वैसे तो यह कोई पारंपरिक नेता नहीं है और ना ही इन्होंने अपनी जिंदगी में कभी कोई चुनाव लड़ा है। लेकिन पीएम मोदी जी की कोटी में इनका ओहदा और रुतबा किसी भी बड़े कैबिनेट मंत्री से कहीं ज्यादा ऊंचा है। दिल्ली के गलियारों में तो यह भी कहा जाता है कि जब अजीत डोभाल जी पाकिस्तान की तरफ गुस्से से देखभाल लेते हैं तो वहां रातोंरात बिजली गुल की जाती है और लोग मोमबत्तियां ढूंढने लगते हैं। सर्जिकल स्ट्राइक से लेकर एयर स्ट्राइक तक और कश्मीर की अंदरूनी नीति से लेकर चीन सीमा के विवाद तक देश की सुरक्षा का हर खुफिया और अचूक प्लान इसी एक दिमाग की उपज होती है। जरा सोचिए जब देश पर कोई भी बड़ा सुरक्षा संकट आता है तो पीएम मोदी जी किसी नेता से सलाह नहीं लेते। वह सीधे डोभाल जी को फोन लगाते हैं। डोभाल जी ने अपनी जिंदगी का एक लंबा हिस्सा अंडर कवर एजेंट के तौर पर बिताया है। इसलिए वह दुश्मनों की नसन से वाकिफ हैं। विपक्ष भले ही सरकार की नीतियों पर कितने भी सवाल उठाएं लेकिन डोभाल जी का काम करने का तरीका ऐसा है कि दुश्मन के रोंगटे खड़े हो जाते हैं। पीएम मोदी जी देश की आंतरिक और बाहरी सुरक्षा से जुड़े हर संवेदनशील मामले में सबसे पहले डोभाल जी की राय लेते हैं। संकट के समय सरकार के सबसे बड़े और भरोसेमंद क्राइसिस मैनेजर यही हैं। इनके बिना देश की सुरक्षा रणनीति का एक पन्ना भी आगे नहीं बढ़ सकता। लेकिन भाई देश की सुरक्षा तो डोभाल जी संभाल लेते हैं। पर जब सरकार के अंदर ही कोई राजनीतिक संकट आ जाए या सहयोगियों को संभालना हो तब एंट्री होती है नंबर चार के उस नेता की जो कड़ी निंदा करने में माहिर हैं।

लेकिन संकट सुलझाने में उनके जैसा कोई दूसरा नहीं। नंबर चार राजनाथ सेन जी। नंबर चार पर आते हैं बीजेपी के सबसे अनुभवी, सबसे गंभीर और राजनीति के कड़ी निंदा ब्रांड के असली जनक यानी हमारे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह जी। जब भी देश की सीमा पर कोई हलचल होती है तो राजनाथ सिंह जी की कड़ी निंदा दुश्मनों के कलेजे को दहलाने के लिए काफी होती है। लेकिन मजाक से हटकर बात करें तो राजनाथ सिंह जी बीजेपी के वह विशाल वृक्ष हैं जिनकी छांव में पार्टी के बड़े से बड़े आंतरिक और आपसी विवाद चुटकियों में सुलझ जाते हैं। जब भी सरकार के सहयोगी दल अपने नखरे दिखाने लगते हैं या फिर सरकार के अंदर कोई बड़ी राजनीतिक आग सुलगने लगती है तो राजनाथ सिंह जी तुरंत अपने शांत स्वभाव के साथ मध्यस्थता करने पहुंच जाते हैं और मामला शांत करा देते हैं। अब जरा इनके राजनीतिक वजन को महसूस कीजिए। जब बीजेपी में मोदी युग की शुरुआत हो रही थी और 2014 में पीएम पद के उम्मीदवार के नाम पर मंथन चल रहा था। तब राजनाथ सिंह जी ही पार्टी के अध्यक्ष थे और उन्होंने ही मोदी जी के नाम पर मुर लगाई थी। पीएम मोदी जी इनका दिल से बेहद सम्मान करते हैं क्योंकि यह वह नेता हैं जो कभी किसी गुटबाजी का हिस्सा नहीं बनते और हमेशा पार्टी के अनुशासन के प्रति पूरी तरह वफादार रहते हैं। रक्षा मंत्रालय संभालते हुए इन्होंने भारतीय सेना को

आत्मनिर्भर बनाने के लिए देर रात एक कर दिया है। राजनाथ सिंह जी के बिना मोदी सरकार का राजनीतिक संतुलन बनाए रखना वैसा ही है जैसे बिना हैंडल के साइकिल चलाना। लेकिन अब दिल थाम लीजिए क्योंकि नंबर तीन पर जो नाम आ रहा है उसका नाम सुनते ही बड़े-बड़े अपराधियों के घुटने कांपने लगते हैं और गैराज में खड़े बुलडोजर अपने आप स्टार्ट हो जाते हैं। नंबर तीन योगी आदित्यनाथ जी। अब आते हैं उस नाम पर जिसका नाम सुनते ही अपराधियों के पैरों के नीचे से जमीन खिसक जाती है। जी हां, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी पूरे देश में पीएम मोदी जी के बाद अगर किसी नेता की रैलियों में सबसे ज्यादा और बेकाबू भीड़ उमड़ती है तो वह योगी जी ही हैं। उनका राजनीति और प्रशासन चलाने का सीधा सिद्धांत है। अपराधी चाहे पाताल में भी जाकर छुपा हो उसे ढूंढ निकाला जाएगा और उसका घर मिट्टी में मिला दिया जाएगा। यूपी में कानून व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए इन्होंने अपराधियों के ऐसे छुड़ाए हैं कि अब वहां के नामीगिरामी गुंडे भी जेल जाने के लिए खुद थाने के सामने तख्ती लटका कर लाइन में खड़े रहते हैं। सुनिए अगर आप सोच रहे हैं कि योगी जी सिर्फ एक राज्य के मुख्यमंत्री हैं तो आप बहुत बड़ी मुगालती में हैं। योगी जी बीजेपी का वह चेहरा हैं जिनकी डिमांड केरल से लेकर कश्मीर तक हर चुनाव में होती है। हिंदुत्व की धार और आक्रामक विकास के इस घातक कॉम्बिनेशन को पीएम मोदी जी का पूरा और खुला समर्थन हासिल है। पार्टी के अंदर योगी जी की राजनीतिक धाक इतनी मजबूत है कि उनके किसी भी फैसले को चुनौती देने की हिम्मत दिल्ली का कोई बड़ा नेता भी नहीं कर पाता है। बीजेपी की कोर पॉलिटिक्स और पार्टी के भविष्य की कमान काफी हद तक योगी योगी जी के मजबूत कंधों पर ही टिकी हुई है। लेकिन क्या आप जानते हैं? जहां एक तरफ योगी जी का यह आक्रामक अंदाज है, वहीं नंबर दो पर एक ऐसा शख्स बैठा है जो हर तूफान में भी मुस्कुराता रहता है और मोदी जी की हर बात पर आंख बंद करके हां कहता है। कौन है वह चलिए जानते हैं। नंबर दो जेपी नड्डा जी। नंबर दो पर विराजमान है वफादारी, धैर्य और संगठन के अनुशासन की साक्षात मूरत यानी जेपी नड्डा जी। नड्डा जी की सबसे बड़ी और बेजुड़ खासियत यह है कि यह हर मौसम में एक जैसी प्यारी सी मुस्कान बिखेर सकते हैं। चाहे पार्टी के अंदर या बाहर राजनीतिक तूफान कितना भी भयंकर क्यों ना चल रहा हो। अमित शाह जी के बाद जब इन्होंने बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष की कमान संभाली तो इन्होंने पार्टी के संगठन को एक नए मुकाम पर पहुंचाया और अब कैबिनेट मंत्री के रूप में सरकार में आकर भी अपनी वफादारी का लोहा मनवा रहे हैं। नड्डा जी का काम करने का तरीका बेहद सीधा और स्पष्ट है। मोदी जी और शाह जी की जोड़ी जो भी रणनीति तैयार करेगी नड्डा जी उसे बिना किसी सवाल या मीन मेक के पूरे देश के कार्यकर्ताओं में लागू करवा देंगे। अगर मोदी जी रात के 12:00 बजे भी यह कह दें कि नड्डा जी आज धूप बहुत तेज निकली है तो नड्डा जी तुरंत आंखों पर काला चश्मा चढ़ाएंगे और कहेंगे हां मोदी जी आज तो सचमुच गर्मी ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। ऐसी ही अटूट वफादारी और अनुशासन प्रियता की वजह से वह पीएम मोदी जी के सबसे भरोसेमंद सहयोगियों की लिस्ट में शीर्ष पर बने हुए हैं।

इनके बिना बीजेपी का आंतरिक तालमेल ताश के पत्तों की तरह बिखर सकता है। अब बात अब वक्त आ चुका है नंबर एक का। आप सोच रहे होंगे कि नंबर एक पर तो अमित शाह जी ही होंगे। इसमें पूछने वाली क्या बात है? लेकिन क्या वाकई शाह जी अकेले नंबर एक हैं या इस सत्ता के शिकार पर कोई ऐसा सीक्रेट गेम भी है जो आपको हैरान कर देगा। चलिए इस महा सस्पेंस से फायदा उठाते हैं। नंबर एक अमित शाह जी। तो भाइयों और बहनों इस पूरे क्रोनोलॉजी को समझने के बाद नंबर एक पर कोई और नहीं बल्कि आधुनिक भारतीय राजनीति के असली चाणक्य और देश के गृह मंत्री अमित शाह जी ही हैं। लेकिन ट्विस्ट यह है कि यह सिर्फ नंबर एक नहीं है। यह पीएम मोदी जी का दूसरा रूप है। अमित शाह जी और पीएम मोदी जी की जोड़ी भारतीय राजनीति की वो जयवीरू की जोड़ी है जो गब्बर को सिर्फ पकड़ती नहीं है बल्कि गब्बर की पूरी की पूरी राजनीति ही हमेशा के लिए खत्म कर देती है। गुजरात के दिनों से लेकर दिल्ली के तख्त तक अमित शाह जी हमेशा मोदी जी की परछाई और उनके सबसे बड़े ढाल बनकर रहे हैं। मोदी जी अगर पार्टी का चमकता हुआ चेहरा और बड़ा विजन है तो अमित शाह जी उस विजन को धरातल पर सच करने वाले असली चाणक्य हैं। विपक्षी दल रात को चैन की नींद सोते हुए सरकार बनाने के हसीन सपने देखते हैं और सुबह जब आंख खुलती है तो पता चलता है कि अमित शाह जी ने रात ही रात में पूरी बाजी पलट दी और उनके आधे विधायक बीजेपी मुख्यालय में आराम से बैठकर पोहा जलेबी खा रहे है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *