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90s के खोए सितारों की दुखद कहानी! अचानक कहाँ गायब हो गए

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जब बाग में कोई फूल खिला तो सांवरे ने कहा 90 के दशक में हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में जैसे एक्टर्स की बाढ़ सी आ गई थी जिनमें से कुछ ने अपना बेहतरीन करियर बना लिया तो कुछ आगे चलकर बिल्कुल गायब हो गए। आजा मैं बता दूं तुझे प्यार कैसे [गाना गाने की आवाज़] हो। इनमें से कुछ ऐसे बदनसीब एक्टर्स रहे जिनकी शुरुआती फिल्में तो हिट रही और वह टैलेंटेड भी माने गए लेकिन फिर भी खुद को इंडस्ट्री में इस्टैब्लिश नहीं कर पाए और धीरे-धीरे बड़े पर्दे से गायब हो गए। जीने की तमन्ना हो तुम मेरी जरूरत [संगीत] हो। मगर आज तुझे इंसाफ करना ही होगा। दुनिया जिस विश्वास से तुझे पूजती है अगर तू वही भगवान है। वहीं इनमें से कुछ एक्टर्स ऐसे भी रहे जो अपनी पहली दूसरी फिल्मों के बाद लीड रोल ना मिलने पर कैरेक्टर आर्टिस्ट बनकर रह गए या साइड रोल करने लगे।

जब ना माना दिल दीवाना कलम उठा के। तो आज के अपने इस स्पेशल शो में हम बात करेंगे उन्हीं कुछ गुमशुदा एक्टर्स की जिन्होंने शुरुआत तो धमाकेदार की लेकिन बाद में अपनी उस शानदार जर्नी को कंटिन्यू नहीं रख पाए और ऑडियंस ने भी उन्हें भुला दिया। दिल चीर [संगीत] के देख तेरा ही नाम होगा। नमस्कार दोस्तों, मैं हूं श्वेता जया और आप देख रहे हैं फिल्मी बातें। दोस्तों, हमारी इस लिस्ट में सबसे पहले नाम आता है पृथ्वी का। गा रहा हूं इस महफिल में आपकी [संगीत] मोहब्बत है। दोस्तों, यह वही पृथ्वी है जिन्होंने दिव्या भारती स्टारर फिल्म दिल का क्या कसूर से बॉलीवुड में डेब्यू किया था। मिलने [संगीत] की तुम कोशिश करना, वादा कभी ना करना। इस फिल्म में पृथ्वी और दिव्या भारती की जोड़ी को बेहद पसंद किया गया। फिल्म सुपरहिट रही और पृथ्वी रातोंरात स्टार बन गए।

[संगीत] मेरी नजर क्या है मैं तुझे जान भी दे दूं। साल 1992 में आई इस फिल्म के बाद पृथ्वी को ढेरों फिल्मों के ऑफर मिले। कई बड़े प्रोजेक्ट्स पृथ्वी के पास थे। लेकिन इसके बावजूद पृथ्वी बॉलीवुड के बड़े एक्टर नहीं बन पाई। किसी को चाहते [संगीत] रहना कोई। यह फिल्मों में छोटे-मोटे किरदारों में ही सिमट कर रह गए और फिर फिल्मों से गायब हो गए। पृथ्वी का जन्म 24th मार्च 1968 को दिल्ली में हुआ था। एक्टिंग में कोई खास दिलचस्पी नहीं थी। लेकिन जब इनकी मुलाकात मशहूर प्रोड्यूसर मुकेश दुग्गल से हुई जिन्होंने इनके चॉकलेटी लुक्स और पर्सनालिटी से इंप्रेस होकर अपनी फिल्म दिल का क्या कसूर से फिल्म ऑफर कर दी तो यह इंकार नहीं कर पाए। साल 1992 में आई यह फिल्म एक बहुत बड़ी हिट साबित हुई और इस फिल्म के एक्टर पृथ्वी रातोंरात स्टार बन गए।

मैं एक आर्टिस्ट हूं। मेरी आवाज ही मेरे जज्बात का आईना है और आईने [संगीत] से झूठ नहीं बोला जाता। पृथ्वी बताते हैं कि तब सैकड़ों लड़कियां इनकी गाड़ी के पीछे भागती ऑटोग्राफ दे देकर यह थक जाते थे और यकीन ही नहीं होता कि इतनी जल्दी इनके इतने फैंस बन गए हैं। वो वो दौर तो बस एक ऐसा दौर था कि लगता था कि मैं सपना देख रहा हूं। लड़कियां मतलब मैं जिस गाड़ी से जाता था उस गाड़ी के सामने लेट जाती आप जब तक उतर के हमें ऑटोग्राफ नहीं देंगे हमें हमारे साथ तस्वीर नहीं खएंगे हम आपको जाने नहीं देंगे पृथ्वी के मुताबिक दिल का क्या कसूर के बाद मेकर्स ने इनकी और दिव्या भारती की जोड़ी को कई फिल्में ऑफर की लेकिन मुकेश दुग्गल के साथ कॉन्ट्रैक्ट होने के चलते यह किसी भी फिल्म में लीड रोल नहीं कर पा रहे थे क्योंकि कॉन्ट्रैक्ट में साफ लिखा था कि आप हमारे अलावा किसी और के फिल्म में बतौर लीड एक्टर काम नहीं करेंगे। फिर क्या था चाहते हुए भी दीवाना और बाजीगर जैसी फिल्में यह कॉन्ट्रैक्ट में बंधे होने के चलते साइन नहीं कर पाए जो कि बहुत बड़ी हिट साबित हुई और इन्हीं फिल्मों ने शाहरुख खान को हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में स्थापित कर दिया। तब मजबूरी में इन्होंने इस बीच साइड हीरो या कैरेक्टर आर्टिस्ट के तौर पर कुछ फिल्मों में काम किया। जैसे प्लेटफार्म, मेरी आन, दिल वाले कभी ना हारे, होगी प्यार की जीत आदि। शाबाश राजू। शाबाश। तुमने हमारी भतीजी की जान बचाई। इसलिए हम हम तुम्हें ये ये ₹000 बखशीश के तौर पर देना चाहते हैं।

मुकेश दुग्गल के साथ कॉन्ट्रैक्ट खत्म होने के बाद पृथ्वी ने एक बार फिर से लीड रोल के तौर पर फिल्मों में काम तलाश की। लेकिन अब कोई भी फिल्म निर्माता इन्हें लीड हीरो काम देने को तैयार ही नहीं था। इस वजह से इनका करियर छोटे-मोटे रोल तक ही सीमित रह गया और लोगों ने इन्हें भुला दिया। अगर मैं तेरा कुछ नहीं लगता तो आज [संगीत] मेरी जान की खातिर तूने अपनी जान की बाजी क्यों लगा दी? दोस्तों हमारी इस लिस्ट में अगला नाम है एक्टर अविनाश वादवान का। बांसुरिया अब यही पुकारे। अविनाश का जन्म साल 1968 में मुंबई में हुआ था। फिल्मों में आने से पहले इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और बाद में एमबीए भी किया। हालांकि इन्हें बचपन से ही एक्टिंग करने का बहुत शौक था। इसीलिए पढ़ाई के बाद अविनाश फिल्मों में आ गए। अच्छी खासी जॉब को लात मारने के बाद अविनाश को अपनी पहली फिल्म पाने के लिए काफी कुछ झेलना पड़ा। जब यह किसी स्टूडियो में काम मांगने जाते तो एक आउटसाइडर होने के नाते जल्दी कोई काम नहीं देता। फिर किसी तरह एक फिल्म मिली और करियर की शुरुआत हुई।

साल 1987 में इंसाफ की पुकार फिल्म में एक छोटे से रोल से अविनाश ने आगाज किया। आज तक पुलिस ने, अदालत ने, जज ने किसी ने मेरी बात पर विश्वास नहीं किया। मैं चिल्ला-चिल्ला कर कहता रहा कि मैं बेगुनाह हूं। मैंने खून नहीं किया है। इसके बाद अविनाश ने साल 1990 में आई फिल्म आवाज दे कहा है फिल्म से बतौर सोलो एक्टर डेब्यू किया। ओ भोलेभाले से [संगीत] कुछ मतवाले से नैन तेरे इस फिल्म के रिलीज के बाद अविनाश दर्शकों के बीच पॉपुलर हो गए और चॉकलेटी हीरो के तौर पर बॉलीवुड में पहचाने जाने लगे। इस फिल्म के बाद इन्होंने आई मिलन की रात फिल्म की जो कि बॉक्स ऑफिस पर सफल रही और इनको दर्शकों ने पसंद भी किया। सावन का महीना आया है कटा से। इस फिल्म के बाद अविनाश ने महेश भट्ट, केसी बोकाडिया जैसे डायरेक्टर्स की फिल्मों में काम किया। बेहद कम समय में इन्होंने 90ज के कई सुपरस्टार संग काम किया। अगर किसी लड़की की मुसीबत में मदद करना गुनाह है तो मैं गुनहगार हूं। और अगर गुंडों से किसी लड़की को बचाना जुर्म है तो मैं सजा का हकदार हूं। आवाज दे कहा है कि बाद लोगों को लगा कि बॉलीवुड को एक नया और पढ़ा लिखा सुपरस्टार मिल गया है। हालांकि ऐसा हुआ नहीं। अविनाश ने इसके बाद मीरा का मोहन जुनून प्यार हो गया। रुपए 10 करोड़ पुलिस और मुजरिम गीत दिल की बाजी धनवान परवान बलमा आजाओ सनम जैसी कई फिल्मों में काम किया ये मौसम भी गया वो मौसम भी गया आपको यहां बता दें कि अविनाश ने

अक्षय कुमार के साथ दिल की बाजी राहुल रॉय के साथ जुनून करिश्मा कपूर के साथ पापी गुड़िया दिव्या भारती के साथ फिल्म गीत अजय देवगन के साथ बलवान फिल्म में शानदार एक्टिंग करके के खूब वाहवाही बटोरी मिलते मिलते हंसी वादियों में [संगीत] लेकिन अब आप सोच रहे होंगे कि ऐसी क्या वजह रही कि इतनी सारी हिट फिल्में देने के बाद भी अविनाश ऐसे बॉलीवुड से गुमनाम हो गए। तो आपको बता दें कि एक्टर के गुमनाम होने की सबसे बड़ी वजह इनकी पर्सनल लाइफ रही। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अविनाश का करियर बुलंदी छू रहा था और यह एक साथ 40-50 फिल्में साइन कर चुके थे। लेकिन इनकी 10 से 15 फिल्में ही रिलीज़ हो पाई। ऐसे में बॉलीवुड में इनकी एक गलत इमेज बन गई। वह दौर तब का है जब इनकी पर्सनल लाइफ में भी काफी बवाल मचा हुआ था। यह फिल्मों की शूटिंग पर कम ध्यान दे पा रहे थे। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो अविनाश ने अपना करियर अच्छा चलता देख साल 1992 में छाया नाम की एक महिला से शादी कर ली थी। 6 महीने के बाद दोनों के बीच झगड़े शुरू हो गए और इतने बढ़े कि अविनाश डिस्टर्ब रहने लगे और अपने काम पर फोकस ही नहीं कर पा रहे थे। गैरों से बात करके बदलो [संगीत] ना रंग। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो छाया जब तक इनकी जिंदगी में रही इनका करियर तबाह ही रहा। फिर यह इंडिया में कम और विदेश में ज्यादा रहने लगे और विदेश में रहने की वजह से इनका करियर काफी प्रभावित हुआ। बाद में इन्होंने अपनी वाइफ से अलग होकर फिर से इंडस्ट्री में वापसी करने की कोशिश की। हालांकि तब तक काफी देर हो चुकी थी।

रिमेंबर वन थिंग एवरीथिंग [संगीत] चेंजेस चेंज इज अ पार्ट ऑफ लाइफ। चेंज अकर्स नॉट ओनली इन ह्यूमन बीइंग्स बट इन एव्री सफेयर ऑफ़ लाइफ। बिकॉज़ चेंज इज अ लॉ ऑफ नेचर। और अब इन्हें सोलो रोल की जगह मल्टीस्टारर फिल्में मिल रही थी या कैरेक्टर रोल्स ही मिल रहे थे। क्या बकवास कर रही हो तुम? रात के 2 बजे घर आने को अगर तुम आजादी कहती हो तो यह आजादी तुम्हें हरगिज़ नहीं मिलेगी। हमारे खानदान की अपनी एक मान मर्यादा है। तुम्हें उसकी हद में रहना होगा। इसके बाद इन्होंने छोटे पर्दे पर काम करना शुरू किया और एहसास सीआईडी शोभा सोमनाथ की और बालिका वधू जैसे टीवी सीरियल्स में काम किया। पहली वाइफ से तलाक लेने के बाद इन्होंने फिर साल 2003 में लौमे मॉडल नताशा से शादी की। जिससे इन्हें एक बेटा सम्राट वादवान है। हमारे इस लिस्ट में अगले एक्टर हैं 90ज के एक बदनसीब शख्स जिनके बर्थडे पर ही इनके पापा ने इन्हें एक ऐसा गिफ्ट दिया कि यह ता उम्र इसे भुला नहीं पाए। इनका नाम है कमल सदाना। तुझे ना देखूं तो चैन मुझे आता नहीं है एक तेरे सिवा। कमल का जन्म 21 अक्टूबर 1970 को मुंबई में हुआ था। इनके पिता का नाम मृद सदाना था। जिन्होंने 60 और 70 के दशक में कई फिल्में बनाई थी। इनमें से कुछ फिल्में थी विक्टोरिया नंबर 203 चोरी मेरा काम। यह रात फिर ना आएगी और प्रोफेसर प्यारेलाल। इनकी मां का नाम सैयदा खान था जो एक अभिनेत्री थी और कई फिल्मों में बतौर लीड एक्ट्रेस काम किया था। कमल की एक बहन भी थी जिनका नाम नम्रता था। कमल ने अपने फिल्मी सफर की शुरुआत साल 1992 में आई फिल्म बेखदी से की। इसमें इनके अपोजिट काजोल ने भी डेब्यू किया। जब ना माना दिल दीवाना कलम उठाके इसके बाद साल 1993 में दिव्या भारती के साथ आई इनके फिल्म रंग ने बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचा दिया और इस फिल्म के गानों ने पॉपुलैरिटी के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए। दिल चीर [संगीत] के देख तेरा ही नाम होगा। जी इस फिल्म से लोग इन्हें पहचानने लगे और इसके बाद इन्होंने 90ज के दौर में बाली उम्र को सलाम। हम सब चोर हैं। रॉक डांसर जैसी कई फिल्मों में काम किया। तू दिलवाली [संगीत] मैं दिलवाला तूने दिल पे डाका डाला। [संगीत] हालांकि आगे बहुत अच्छा करियर नहीं चल पाया और इन्होंने दूसरे फिल्म में काम शुरू कर दिया।

तो चलिए अब बात करते हैं उस घटना की जिसके बारे में जानकर वाकई आपको बेहद हैरानी होगी। यह घटना है 21 अक्टूबर 1990 की। यह कमल सदाना का 20वां बर्थडे था। अचानक हर रोज की तरह उस दिन भी फिर इनके मम्मी पापा के बीच झगड़े शुरू हो गए। रात में जब कमल अपने कुछ दोस्तों के साथ अपने फर्स्ट फ्लोर के कमरे में बैठे कुछ खा पी रहे थे। तभी कमल को सीढ़ियों की तरफ से दो गोलियां चलने की आवाज आई। गोलियों की आवाज सुनते ही यह अपने दोस्त हैरी और रिवी के साथ नीचे की तरफ दौड़े तो देखते हैं कि इनकी मम्मी और बहन दोनों खून में लथपथ जमीन पर पड़ी हुई हैं। सामने इनके पापा खड़े थे जिनके हाथ में रिवाल्वर था और वह पूरी तरह से शराब के नशे में धुत थे। कमल सदाना को देखते ही इनके पापा ने एक गोली इनके ऊपर भी चला दी। जिससे कमल सदाना बेहोश होकर जमीन पर गिर गए। लेकिन गोली इन्हें छूकर निकली थी। इसके बाद इनके दोस्त इनको लेकर अस्पताल गए जहां इनका इलाज हुआ। होश आने पर इन्हें पता चला कि इनकी मां और बहन की मौत हो चुकी है और इनके पापा बृज सदाना ने भी अपने आप को गोली मार ली है जिससे उनकी भी डेथ हो चुकी थी। अब फैमिली में बस कमल ही बच गए थे। लेकिन एक ही रात में अपना सब कुछ खो दिया था और अब इनका इस दुनिया में कोई नहीं था। इस हादसे ने कमल सदाना के दिमाग पर एक गहरा असर छोड़ा। कुछ समय तक तो यह बुरी तरह से सदमे में रहे। लेकिन फिर दोस्तों ने इन्हें समझा-बुझाकर उस हादसे को भुलाने की कोशिश की। बताते हैं कि फिर इन्होंने धीरे-धीरे खुद को संभाला और अपने करियर पर ध्यान देने की कोशिश करने लगे। लेकिन हीरो के तौर पर जब वहां भी करियर ज्यादा दिनों तक ठीक नहीं चल सका तो इन्होंने कर्कश और विक्टोरिया नंबर 203 जैसी फिल्मों का प्रोडक्शन और डायरेक्शन भी किया। खैर वक्त बीता और 30 साल बाद यह एक बार फिर से साल 2022 में आई फिल्म सलाम वेनके में काजोल के साथ काम करते नजर आए। दोस्तों हमारी इस लिस्ट में अगला नाम है एक्टर सुमित सहगल का। काली तेरी [संगीत] चोटी है परा तेरा लाल। काली तेरी चोटी है परा तेरा लाल। सुमित का जन्म 18th फरवरी 1966 को मुंबई में हुआ था। और इन्होंने साल 1987 में आई फिल्म इंसानियत के दुश्मन से अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की। बस थोड़ा प्यार दे दे हाय चाहे मेरी इसके बाद यह इसी साल दो और फिल्मों ईमानदार और परम धर्म में भी नजर आई। आई ना जग से इतना जोर से ना किया। इसके बाद सुमित सहगल ने साल 1995 तक लश्कर,

बाहर आने तक पतिप और तवायफ, नागमणि और गुनाह जैसी कई फिल्मों में काम किया। किसका खत पढ़ रही हो इतने प्यार से? मम्मी का। मैंने उन्हें लिखा था कि मुझे तुमसे तुमसे क्या? मोहब्बत है। तो? उसका जवाब आया है। क्या लिखा है? हम अरे बताओ तो सही क्या लिखा है? साल 1995 में आई फिल्म साजन की बाहों में इसमें सुमित आखिरी बार नजर आए। और इसके बाद इन्होंने एक्टिंग छोड़ दी। फिल्मों को अलविदा कहने के बाद इन्होंने प्रोडक्शन में हाथ आजमाया और हैरानी की बात है कि इनकी पूरी किस्मत ही बदल गई। इन्होंने सुमित आर्ट्स नाम की एक कंपनी बनाई जो दूसरी भाषाओं की फिल्मों को हिंदी में डब करने का काम करती थी। सुमित सहगल की इस कंपनी ने इन्हें कुछ ही सालों में कामयाबी की बुलंदियों पर पहुंचा दिया। साल 1990 में सुमित ने सायरा बानो की भतीजी शाहीन बानो से शादी की। इस शादी से इन दोनों को साल 1997 में एक बेटी शायशा भी पैदा हुई। इसी बीच इनकी नजदीकियां एक्ट्रेस फराह नाज़ के साथ बढ़ने लगी और जब यह बात इनकी पत्नी को पता चली तो शाहीन ने साल 2003 में इन्हें डिवोर्स दे दिया। इसके बाद सुमित ने फराह नाज से शादी कर ली। इसके बाद सुमित ने बॉलीवुड फिल्मों में भी पैसा लगाना शुरू कर दिया। जिसमें इन्हें सफलता भी मिली और इन दिनों सुमित अपनी दूसरी पत्नी फराह के साथ करोड़ों की कंपनी संभाल रहे हैं। तो सुमित फिल्मी पर्दे से तो गायब हो गए लेकिन फिल्म इंडस्ट्री में आज भी अपनी कंपनी के साथ एक्टिव हैं। दोस्तों इस लिस्ट में जो नेक्स्ट एक्टर हैं, इनकी पहचान भी 90ज में चॉकलेटी हीरो की बन गई थी। नाम है विवेक मुशरान। जब बाग [संगीत] में कोई फूल खिला तो बांवरे ने कहा [संगीत] फिल्म सौदागर का यह गाना मनीषा कोयराला और विवेक मुशरान पर फिल्माया गया था। साल 1991 में आई इस फिल्म से विवेक ने अपने एक्टिंग करियर की शुरुआत की थी और रातोंरात देश भर में चर्चा में आ गए। मंदारी काका ठीक कहते हैं। ये करने से तो बेहतर होगी और कम से कम दुनिया को हमारी प्रेम की सच्चाई का तो पता चलेगा।

इस फिल्म के बाद विवेक मुशरान की जिंदगी में ऐसा वक्त आया जब इन्हें अक्षय कुमार से भी बड़ा स्टार माना जाने लगा। सुभाष घई के इस हीरो पर हर किसी की नजरें ठहर गई। लेकिन विवेक मुशरान का स्टारडम लंबे वक्त तक नहीं रह पाया और यह फिल्मों और टीवी शोज़ में सपोर्टिंग रोल तक ही सीमित होकर रह गए। विवेक मुशरान का जन्म 9th अगस्त 1969 को उत्तर प्रदेश के रेनूक कूट में हुआ था। शेरवुड कॉलेज नैनीताल से पास आउट होने के बाद यह मुंबई आकर फिल्मों में ट्राई करने लगे और इसी बीच इन्हें अपने करियर की पहली फिल्म सौदागर मिली। [संगीत] ने बेवफा से वफा, दिल है बेताब और राम जाने जैसी कई फिल्मों में नजर आई। हम जैसा कहीं आपको दिलबर ना मिले। लेकिन फिल्मों का रॉन्ग सिलेक्शन कहें, एक्टिंग में डायवर्सिटी की कमी या फिर बुरी किस्मत इनका सिक्का नहीं चल सका। 2005 में यह फिल्म किस्सना में नजर आए। लेकिन उसके बाद 10 साल का गैप लिया और फिर साल 2015 में आई फिल्म तमाशा में सीधे दिखे। यू आर डिसेंट बॉय, पोलाइट, नाइस, एवरीवन लाइक यू। एंड यू आर डूइंग लाइक दिस और फॉर दैट वन गर्ल? इसके बाद विवेक साल 2017 में बेगम जान और 2018 में वीरे दी वेडिंग जैसी फिल्मों में नजर आए। फिक्र तो बहुत पहले से थी। जाहिर करने का मौका नहीं मिल रहा था। अब मिला है। एक नए सिरे से जिंदगी शुरू करने का मौका। लेकिन अफसोस यह कभी अपनी पहली फिल्म सौदागर वाली सफलता दोहरा नहीं पाए। और एक कैरेक्टर आर्टिस्ट बनकर रह गए। हालांकि फिल्मों के बाद इन्होंने टीवी पर भी कुछ शोज़ किए और आखिरी बार इन्हें साल 2024 में आई वेब सीरीज मामला लीगल है में देखा गया। यह आंखें उसी रात [गाना गाने की आवाज़] हो जाए अंधी। दोस्तों, यह गाना अपने दौर में सुपरडुपर हिट हुआ था। जबकि इसमें एक्ट कर रहे एक्टर्स को शायद आप ना पहचानते हो क्योंकि इनके बारे में ज्यादा जानकारी पब्लिक डोमेन में मौजूद ही नहीं है। जो तेरे सिवा [गाना गाने की आवाज़] देखे सपना किसी का। तो हमारी इस लिस्ट में अगला नाम इन्हीं का है जो है एक्टर अरबाज अली खान। अरबाज अली खान को भले ही लोग सिर्फ इस गाने से जाने लेकिन इनके पापा को आज भी लोग लायन के नाम से जानते हैं। सारा शहर मुझे लायन के नाम से जानता है और इस शहर में मेरी हैसियत वही है जो जंगल में शेर की होती है। जी हां दोस्तों अरबाज अली दिग्गज एक्टर अजीत के बेटे हैं और इन्होंने फिल्मों में अपना डेब्यू बतौर लीड एक्टर साल 1990 में आई फिल्म 1617 से की थी। यार विशाल आज मेरे साथ एक बहुत बड़ी ट्रेजरी हो गई। क्या हुआ? जिंदगी में पहली बार आज किसी लड़की ने मेरा हाथ झटक दिया। खबर तो बहुत दुखदायक है यार। वो तो है ही। हालांकि वो फिल्म कब आई और कब चली गई लोगों को पता भी नहीं चल सका। लेकिन इसी साल मल्टीस्टारर फिल्म पुलिस पब्लिक में यह शिखर स्वरूप के अपोजिट कास्ट किए गए। मास्टर जी पुलिस का नहीं पब्लिक का राज है। सारा गांव जानता है कि पुलिस खरीदी गई है। हम पब्लिक को जगाएंगे। उन्हें सड़कों पर लाएंगे, जुलूस निकालेंगे और बताएंगे कि आज पुलिस का नहीं पब्लिक का राज है। फिल्म में इनका किरदार तो बहुत ही छोटा था लेकिन इन दोनों पर फिल्माया गया गाना मैं जिस दिन भुला दूं जबरदस्त हिट रहा। ये आंखें उसी रात हो जाए [गाना गाने की आवाज़] अंधी।

हालांकि इसके बाद यह कुछ और फिल्मों में काम करते नजर आए। लेकिन बतौर कैरेक्टर आर्टिस्ट जिनमें मृत्युदाता एक था दिल एक थी धड़कन। यह मोहब्बत है। तलाश द हंट बिगेन जैसी फिल्में शामिल रही। भैया अपना कोई प्रॉब्लम है ही नहीं। हां। वो क्या है कि हम अपनी भाभी को प्यार से मनाएंगे और वह मान जाएगी। भला कोई जानकी अपने भरत से नाराज रह सकती है? रह सकती नहीं भरत है। कोई बात नहीं मानते हमारी खुशी के लिए। अरे हमारी भाभी की खुशी के लिए तो हम अपनी जान भी जा सकते हैं। साल 2005 में आई हिस्टोरिकल ड्रामा फिल्म ताजमहल में भी इन्होंने जहांगीर का रोल प्ले किया था। साथ ही कुछ और फेमस हिंदी फिल्मों का यह हिस्सा रहे जैसे ब्लैक फ्राइडे, पहली नजर का प्यार और सब्रजीत आदि। लेकिन यह कभी अपनी पहली फिल्म वाली पॉपुलैरिटी नहीं दोहरा पाए और दर्शकों के लिए एक अजनबी बनकर रह गए। इस लिस्ट में जो अगला नाम है इनका पहले आप यह पॉपुलर गाना सुनिए। इश्क में हम तुम्हें क्या बताएं। किस कदर चोट खाएं। 90ज के टूटे दिल आशिक का इंटेंस कैरेक्टर प्ले कर रहे इस हीरो का नाम है किशन कुमार जो तब के म्यूजिक इंडस्ट्री के टकून रहे गुलशन कुमार के छोटे भाई थे और उन्होंने ही अपने भाई किशन को फिल्मों में ल्च किया था। ओ दिल तोड़ [संगीत] के हंसती हो मेरा [गाना गाने की आवाज़] वफाएं मेरी याद कर। हालांकि किशन कुमार ने साल 1993 में आई फिल्म आजा मेरी जान से हिंदी फिल्मों में डेब्यू किया था। पर अफसोस वो फिल्म कुछ खास कमाल नहीं दिखा पाई। बेचैन कर दिया है। [संगीत] तूने चैन चुरा के इसी साल बॉक्स ऑफिस पर इनकी एक और फिल्म कसम तेरी कसम रिलीज हुई। मार दिया जाए के छोड़ दिया [संगीत] जाए बोल उसके साथ। लेकिन पहली फिल्म की तरह यह फिल्म भी फ्लॉप ही रही और इन्हें कोई फायदा नहीं हुआ। इसके बाद गुलशन कुमार ने इनके लिए एक म्यूजिक फिल्म प्लान की।

बेवफा सनम जिसके प्रोड्यूसर और डायरेक्टर दोनों खुद गुलशन कुमार ही थे। कर याद वो [संगीत] जमाना मेरे प्यार का लूट ना तू दिल। एक से बढ़कर एक गीतों से सजी यह फिल्म 1995 में रिलीज हुई। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट रही और किशन कुमार रातोंरात स्टार बन गए। अच्छा शीला [संगीत] दिया तूने मेरे प्यार का। यार ने ही लूट लिया घर। लेकिन साल 1997 में गुलशन कुमार के इस दुनिया से चले जाने के बाद एक तरफ जहां यह अपने भाई को इंसाफ दिलवाने के लिए कोर्ट के चक्कर काटने लगे तो दूसरी तरफ भाई के बिजनेस और घर परिवार को संभालने की भी पूरी रिस्पांसिबिलिटी अकेले इनके ऊपर ही आ गई। हालांकि साल 2000 में यह फिल्म मेरे पापा द ग्रेट में बतौर लीड एक्टर दर्शकों को जरूर एक बार नजर आए थे। ओ मेरे बेटा द ग्रेट। [गाना गाने की आवाज़] ओ मेरे [संगीत] बेटे इस फिल्म के बाद बतौर एक्टर यह किसी फिल्म में दर्शकों को नहीं दिखे। हालांकि इन्होंने प्रोड्यूसर के तौर पर कई फिल्मों का निर्माण किया और अपने भतीजे भूषण कुमार के साथ म्यूजिक इंडस्ट्री की लीडिंग कंपनी टी सीरीज का भी अहम हिस्सा रहे और आज भी हैं। हमारे इस लिस्ट में जो अगला नाम है वो एक बहुत बड़े फिल्मी खानदान से आते हैं। तो पहले इनका यह गाना देखिए। चेहरा [संगीत] क्या देखते हो दिल में उतर कर जी हां हम बात कर रहे हैं महान अभिनेता दिलीप कुमार के भतीजे अयूब खान की। अय्यूब खान का जन्म 23 फरवरी 1967 को मुंबई में अभिनेता नासिर खान और अभिनेत्री बेगम पारा के घर में हुआ था। इनके मम्मी पापा उस दौर के जाने-माने एक्ट्रेस थे। इनके पिता दिग्गज अभिनेता दिलीप कुमार के भाई थे। बचपन से ही घर पर फिल्मी माहौल होने के चलते अय्यूब खान को भी एक्टिंग का शौक बचपन से ही हो गया। तो अपनी पढ़ाई लिखाई खत्म करने के बाद अय्यूब खान ने साल 1992 में आई फिल्म माशुक से हिंदी फिल्मों में डेब्यू किया। दीवाना दिल ढूंढे [संगीत] माश। अगले साल इन्होंने फिल्म मेरी आन में काम किया। इस नजर ने कभी पहले देखी ना थी वो हसीना जो फिल्म के गाने तो ऑडियंस को काफी पसंद आए लेकिन फिल्म कुछ खास कमाल नहीं दिखा पाई इसके बाद इन्होंने कई और फिल्मों में काम किया जैसे सलामी खोटे सिक्के सलमा पर दिला गया मृत्युदंड दादागिरी हफ्ता वसूली आदि बादल है [संगीत] तेरा काजल अंबर है तेरा आंचल सूरज है लेकिन कई फिल्मों में अच्छा काम करने के बाद भी इन्हें कोई पहचान नहीं मिल सकी और आखिरकार बतौर लीड एक्टर अय्यूब खान साल 1999 में फिल्म चेहरा में नजर आए। चेहरा [संगीत] अपना देखते हैं आईने में वो। फिल्म के गाने तो जबरदस्त हिट रहे लेकिन फिल्म फिर से कुछ खास नहीं चल सकी और इस तरह लीड एक्टर के रूप में इनके करियर का भी अंत हो गया। सारी बदतमीजियां छोड़ देंगी। पहले ये बताइए आपने हमें माफ किया कि नहीं? आप मेरे पीछे क्यों पड़े हैं? क्योंकि जब से आपको देखा है दिल की हालत बहुत नाजुक हो गई है। और अगर आपने हमें माफ नहीं किया तो ये हालत और भी नाजुक हो सकती है। खैर इसके बाद यह कई फिल्मों में बतौर कैरेक्टर आर्टिस्ट नजर आए जैसे मेला दिल चाहता है कयामत, गंगाजल, एलओसी कारगिल, अपहरण आदि। मेला दिलों का आता है एक बार आके। अय्यूब खान ने बड़े पर्दे पर कामयाबी ना मिलता देख छोटे पर्दे पर भी काफी काम किया। अब बोलिए क्या बोलना है आपको? क्या कहना चाहती हैं आप? अरे जिस बहन के लिए हम झुक सकते हैं उसी बहन की रक्षा के लिए हम दुनिया के साथ भी लड़ सकते हैं। अगर इनके कुछ फेमस टीवी सीरियल्स की बात करें तो मुस्कान, उतरन, एक हसीना थी, गुड से मीठा इश्क, नीरजा एक नई पहचान शामिल रहे। हमारे इस लिस्ट में जो अगले एक्टर हैं, इन्हें हम इंडियन टार्जन या इंडियन अर्नोल्ड के नाम से भी जानते हैं। 80 के दशक में हिंदी सिनेमा में इनका जबरदस्त लॉन्च हुआ जिससे यह चर्चा में आ गए। इनकी पर्सनालिटी और सुपर फिट बॉडी के कॉम्बिनेशन के साथ इन्हें फिल्म टार्जन से लॉन्च किया गया था। आजा मैं बता दूं तुझे प्यार कैसे हो? हो [चीखने की आवाज़] टार्जन। शत्रुघ्न सिन्हा हेमा मालिनी एंड ऑल तो ऐसे मिलते एक्टर लोग हैं शत्रुघ्न सिन्हा मैं कैसे सर बोले यार तुम बॉम्बे जाओ हीरो बन सकते हो इधर क्या कर रहे हो पुणे में फिल्मों में आने से पहले यह पुणे के प्रेस्टीजियस वाडिया कॉलेज में पढ़ा करते थे बचपन से ही बॉडी बिल्डिंग का शौक रखने वाले हेमंत ने अपने कॉलेज टाइम में मिस्टर पुणे मिस्टर महाराष्ट्र और मिस्टर इंडिया जैसे शोज़ में कम्पीट किया। इसके बाद यह फिल्मों में आ गए और साल 1985 में आई फिल्म एडवेंचर ऑफ टार्जन से सेंसेशन बन गए। उफ! [हंसी] अब तो काफी शाम हो गई। अब मैं वापस कैसे जाऊंगी? मुझे तो इस जंगल का रास्ता भी नहीं मालूम। इस फिल्म के बाद रातोंरात स्टार बने हेमंत को हर निर्माता निर्देशक अपने फिल्म में लेने के लिए बेताब हो गया।

और देखते ही देखते इन्होंने 107 फिल्मों को साइन कर लिया। मैंने 107 फिल्में साइन की। फिर तो फिर प्रोड्यूसर बोले बॉडी बॉडी कम करो सर। बॉडी बहुत ज्यादा है। लेकिन इंडस्ट्री में इनकी शानदार पर्सनालिटी और एक्टिंग से घबराकर कई एक्टर्स ने इनके साथ काम करने तक से इंकार कर दिया। फिर कुछ एक्टर है मैं नाम नहीं लूंगा। मेरे साथ काम करने से मना कर दिया। बोले नहीं यार उसको मत लो। जिसकी वजह से इन्हें कई अच्छी फिल्मों से हाथ धोना पड़ा। सडनली एक हफ्ते में फोन आता है जोरदार पिक्चर संजय दत्त मैं और गोविंदा ही डोंट गिव मी मनी बैक बट यू आर नॉट डूइंग माय फिल्म इसके बाद इन्होंने एक दो और फिल्मों के अलावा रामसे ब्रदर्स के हिंदी सिनेमा कल्ट क्लासिक हॉरर फिल्म वीराना में काम किया। मुझे तो इन सारे हादसों के पीछे बाबा का हाथ लगता है। ये क्या कह रहे हो तुम? मैंने बाबा को अक्सर आधी रात गए हवेली से बाहर जाते हुए देखा। करेक्ट। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बहुत बड़ी हिट साबित हुई और देखते ही देखते हेमंत उन दिनों हॉरर फिल्मों का चेहरा बन गए। अरे मूड तो इसका ऐसे भी ठीक हो जाएगा जब भंग का एक ग्लास इसके पेट में चला जाएगा। लेकिन फिर यह मेन स्ट्रीम फिल्मों में वापसी नहीं कर पाए और इंडस्ट्री से गायब हो गए। यह मेरी बेटी रुबीना की है। रुबीना यह फोटो रुबीना की हो या जूल की। लेकिन मैं यकीन के साथ सकता हूं कि कल रात मैं इसी लड़की से मिला था। साल 2004 में गर्व प्राइड एंड ऑनर में आखिरी बार इन्हें देखा गया। बहुत हो गया भाई। आपका सिर्फ नाम सुनके जिस मुंबई पुलिस का मूत निकल जाता था वही पुलिस। आज 13 दिन में अपना 27 छोकरा लोग को टपका। इसके बाद यह रीजनल फिल्म इंडस्ट्री में काम करने लगे और साल 2023 में यह आखिरी बार मराठी फिल्म सूर में नजर आए थे। हमारी इस लिस्ट में जो नेक्स्ट एक्टर हैं, इन्होंने अपनी पहली फिल्म में ही अपनी शानदार एक्टिंग से बॉलीवुड के मिस्टर परफेक्शनिस्ट आमिर खान तक को मात दे दी थी। यहां तो बड़े-बड़े [संगीत] लुट गए खड़े-खड़े बच के वो भी जहां जाएंगे। साल 1992 में आई फिल्म जो जीता वही सिकंदर सिंह हिंदी फिल्मों में कदम रखने वाले मामिक सिंह दर्शकों के दिलो दिमाग पर छा गए। इतने लोगों की उम्मीदें कभी-कभी इंसान को नर्वस कर देती हैं। खासतौर से पिताजी सोते जागते वो शेखर की हार और मेरी जीत का सपना देखते हैं। तुम्हें पता है वो मेरे लिए इटली की साइकिल लेना चाहते हैं? लेकिन अफसोस अपनी एक गलती की वजह से इन्होंने अपना करियर खुद ही बर्बाद कर लिया और छोटे पर्दे तक सीमित रह गए। वो लड़की मेरी बहन है नवाबजादे तूने अगर उसकी तरफ आंख उठाकर भी देखा ना तो मैं वहीं खोद कर तुझे गाड़ डालूंगा। मेरी बात समझ आ रही है ना तुझे? हरमीत सिंह मामिक उर्फ मामिक सिंह का जन्म थर्ड मई 1963 को मुंबई में हुआ था। 6 फुट हाइट वाले मामिक ने कॉमर्स की डिग्री लेने के बाद कुछ दोस्तों के कहने पर मॉडलिंग की तरफ रुख किया और कई फेमस ऐड फिल्मों में काम मिलता गया। जैसे रेड बुल, काइनेटिक, सोना मिल्क आदि। बालों का निखार अनोखा था। सच था [संगीत] या वो धोखा था। आई थी मेरे ख्वाबों में। 1992 में बन रही फिल्म जो जीता वही सिकंदर में इन्हें आमिर खान के साथ काम करने का मौका मिला। संजू चुप कर यार। राजपूत के प्रिंसिपल से बात हो गई? हां हुई। नुकसान हमारा हुआ और उनको कोई खास सजा भी नहीं हुई। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट साबित हुई और इससे मामिक भी काफी मशहूर हो गए। देख संजू क्यों बात को आगे बढ़ा रहा है? जो हो गया सो हो गया। भूल जा अब भूल जाऊं। देखो मैं किसी से डरता नहीं। अच्छा तू उस वक्त चुप क्यों थे? क्योंकि हर बात का फैसला मारपिटाई से नहीं होता है। लेकिन इसी पॉपुलैरिटी के चलते इन्हें अपने स्टारडम का घमंड हो गया और यह फिल्म इनके लिए एक अभिशाप बनकर रह गई। दरअसल पहली हिट फिल्म के बाद मामिक के पास कई फिल्मों के ऑफर आने लगे। लेकिन एक्सपर्ट्स के मुताबिक स्टारडम के नशे में चूर मामिक सभी फिल्मों के ऑफर ठुकराते चले गए। क्योंकि इन्हें अब सिर्फ लीड रोल प्ले करना था और धीरे-धीरे इनके पास फिल्मों के ऑफर भी आने बंद हो गए और इस तरह यह 5 साल तक किसी भी फिल्म में दिखाई नहीं दिए और दर्शक भी मामिक को भूल गए। हालांकि इसके बाद साल 1997 में मामिक तीन फिल्मों में नजर आए आर्या पार दिल के झरोखे में और कोई किसी से कम नहीं। लेकिन कोई भी फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं हो सकी और यह गुमनामी में ही खो गए। हालांकि यह साल 2000 में आई हिट फिल्म क्या कहना और इसके बाद कुछ और फिल्मों जैसे मल्लिका, दो लफ्जों की कहानी और बेल बॉटम में बतौर कैरेक्टर आर्टिस्ट जरूर नजर आए। देखो राहुल सबसे पहले तो मैं तुमसे माफी मांगना चाहता हूं। देखो आज तक जो कुछ भी हुआ है,

मुझसे जो भी गलतियां हुई है, जो भी ज्यादयां हुई है, मैं उसके लिए बहुत शर्मिंदा हूं। मामिक ने छोटे पर्दे पर कुछ शानदार टीवी सीरियल्स में अपनी एक पहचान जरूर बनाई। बोर्डिंग स्कूल से भागते हुए तुम्हें यह तो सोचना चाहिए था कि तुम्हारे पापा को कितना दुख होगा। जानते हो जब स्कूल से फोन आया तो मैं कितना परेशान था। अगर तुम्हें कुछ हो जाता तो? दोस्तों हमारी इस लिस्ट में जो अगला नाम है वैसे तो यह किसी पहचान के मोहताज नहीं है। लेकिन इन्होंने भी हिंदी फिल्मों में शुरुआत तो धमाकेदार ही की थी। लेकिन उसके बाद यह छोटे पर्दे पर सीमित होकर रह गए। फर्स्ट टाइम देखा [संगीत] तो मैं हम खो गया। सेकंड टाइम में लव हो गया। छोटे पर्दे के मिस्टर बजाज उर्फ एडवोकेट के डी पाठक मुझे पकड़वा कर इसका मकसद पूरा हो चुका था। जो बदला यह मुझसे लेना चाहता था वो उसे मिल चुका था। फिर उसे केडी पाठक बनकर इस अदालत में आने की क्या जरूरत थी? सबसे बड़ी गलती है यह तुम्हारी। रौनित रॉय जिन्होंने अपनी पहली फिल्म सुपरहिट होने के बावजूद इतना बुरा समय देखा कि कोई और होता तो टूट कर बिखर जाता। रौनित रॉय ने साल 1992 में आई फिल्म जान तेरे नाम से हिंदी फिल्मों में अपना डेब्यू किया। मैंने दिल [संगीत] तुमको दिया ओ मेरी ये फिल्म आते ही बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट साबित हुई और इसके सारे गाने पॉपुलर हो गए। तुम मुझसे जुदा [संगीत] हो जाओगी बोलो कैसे रह पाऊंगा? इस फिल्म के बाद रौनित अगले साल बॉम ब्लास्ट, सैनिक और तहकीकात जैसी फिल्मों में दिखे। अरे भाई तुम्हारे डैडी आईजी है यानी पब्लिक सर्वेंट और हम लोग पब्लिक अब पब्लिक सर्वेंट पब्लिक के लिए थोड़ा तो वेट कर सकता है ना क्यों सही कह रहे हो कि नहीं लेकिन ये फिल्में या तो मल्टीस्टारर थी या तो रौनीत का रोल बहुत छोटा था तो इन्हें कोई फायदा नहीं हुआ इसके बाद साल दर साल इन्होंने कुछ और फिल्मों में काम किया जैसे लक्ष्य, हलचल, रॉक डांसर, आर्मी, जुर्माना आदि। अब जीना हुआ दुश्वार। बताओ हम क्या करें? लेकिन अफसोस ये फिल्में फ्लॉप हो गई और फिर इन्हें काम मिलना भी बंद सा हो गया। धीरे-धीरे इनकी सारी सेविंग भी खत्म होने लगी और इसी बीच इनकी पत्नी भी बच्ची को लेकर इन्हें छोड़कर चली गई और इसी बीच इनकी तबीयत भी इतनी ज्यादा खराब रही कि यह काफी बुरे दौर से सालों तक गुजरते रहे। इसके बाद इन्होंने वापसी की और ठीक होने के बाद छोटे पर्दे का रुख किया। जहां कुछ छोटे-मोटे सीरियल्स करने को मिले और इसी के बीच इन्हें इनकी जिंदगी का माइल्ड स्टोन ऋषभ बजाज का रोल मिला। मैं नहीं था तब भी। और मैं था तब भी। तुम कानूनी तौर से मेरी बीवी थी। साल 2002 में आए सीरियल कसौटी जिंदगी की से देखते ही देखते यह घर-घर में फेमस हो गए और इन्हें दर्शक एक बार फिर से जानने लगे। इसके बाद यह टीवी सीरियल्स के साथ-साथ फिल्मों में भी छोटे-मोटे रोल्स प्ले करने लगे। जब दिल दिमाग के रास्ते आ जाए तो खतरा पैदा होता है। मंसूर अली को खतरा पालने का कोई शौक नहीं। गोली मारता दोनों को। और इसी दौरान इनकी एक फिल्म आई उड़ान जिसे अनुराग कश्यप ने डायरेक्ट किया था।

यह राइटर लोग लड़की के जैसा बाल भड़क के कुर्ता पहन के बगल में झूला लटका के सोच लेते हैं कि बहुत ज्ञान आ गया लेकिन होता नहीं है। फिर मरते हैं भूख से या फ्रस्ट्रेट होकर दारू पी के। साल 2010 में आई इस फिल्म में इन्होंने अपनी बेहतरीन एक्टिंग के जरिए फिल्म फेयर के बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का अवार्ड अपने नाम कर लिया। और यह जो तुम राइटर वाइडर बनने का बकवास सपना देख लिया। उसे बोरी में बंद करो और जाकर नदी में डाल के आओ। उड़ना बंद करो। पांव को जमीन पर रखो। इस फिल्म के बाद फिर कभी इन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और इन्हें फिल्म और टीवी से एक से बढ़कर एक ऑफर आने शुरू हो गए। यह इनका दूसरा सक्सेसफुल फेज रहा। इसी दौरान रौनित रॉय ने एक और टीवी सीरियल किया अदालत जो कि इनके करियर में मील का पत्थर साबित हुआ। हम्पटी डंपटी सेट ऑन अ वॉल हम्पटी डमटी हैड अ ग्रेट फॉल इसका ये अर्थ होता है कि कोई बहुत ही बड़ी इमारत थी। इसके बाद इन्होंने कई फिल्मों में भी काम किया जैसे स्टूडेंट ऑफ द ईयर शूट आउट एट वडाला टू स्टेट्स काबिल सरकार 3 आदि। डॉली कौन है? लड़कियां देख रहा है ये। हां। मुझे क्यों नहीं बताया? क्या कर लेते आप जान के? इसके मन में यह गंध तूने और तेरे घर वालों ने भरी है। इनसे मत कहो मुझसे बात करो। तो दोस्तों, आपको इनमें से कौन से एक्टर पसंद थे या पसंद हैं? कमेंट करके जरूर बताइएगा। यह उन एक्टर्स की कहानी रही जिन्होंने पहले सफलता और फिर ढलान देखा और अपना स्टारडम कायम नहीं रख सके। तो आपको क्या लगता है यह एक्टर्स क्यों फिल्मों से गायब हो गए? क्या स्टार किड्स जैसा मौका ना मिलना, फिल्म मेकर्स का फेवरिज्म वाला एटीट्यूड या कोई और वजह रही इनके फेलियर के पीछे? आपको क्या लगता है? अपने थॉट्स कमेंट करके जरूर बताइएगा। तो मिलते हैं अगले एपिसोड में कुछ और नए किस्से कहानियों के साथ। तब तक के लिए नमस्कार।

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