जिंदगी भर कठिनाइयां झेली। दुख कभी दूर नहीं हुआ। काफी स्ट्रगल करना पड़ा। लेकिन आशा जी को मौत बड़ी ही सुकून से आई। वो नींद में ही चल बसी। यह बात बताई है आशा भोसले के पोते चिंटू भोसले ने। जिन्होंने एक इंटरव्यू में रिवील किया कि मौत से एक दिन पहले आशा भोसले बिल्कुल ठीक थी। बिल्कुल नॉर्मल थी और उन्हें कुछ शिकायत नहीं थी। वह आराम से खा पी रही थी और शरीर में कोई तकलीफ नहीं थी। मौत से एक दिन पहले सुबह उन्होंने कहा कि उन्हें थोड़ा अनइजी फील हो रहा है
और सांस लेने में तकलीफ हो रही है। परिवार ने कहा कि तुरंत अपन डॉक्टर के पास चलते हैं या फैमिली डॉक्टर को घर बुलाते हैं और चेक करवाते हैं। तो आशा भोसले ने अपने परिवार वालों को कहा कि इतना भी प्रॉब्लम नहीं फील हो रहा है। मैं थोड़ी देर सोऊंगी रेस्ट करूंगी तो ठीक हो जाऊंगी।
आशा भोसले इसके बाद सोने चली गई। लेकिन उसके बाद वो उठी नहीं। घर पर जब आशा भोसले को परिवार वालों ने उठाने की कोशिश की, नींद से जगाने की कोशिश की तो उन्होंने रिसोंड नहीं किया। वो सांस ले रही थी लेकिन वो अनकॉन्शियस थी। जिसके बाद परिवार वालों ने तुरंत डॉक्टर को इनफॉर्म किया। डॉक्टर ने परिवार वालों को कहा कि तुरंत हॉस्पिटल लाना पड़ेगा और एडमिट करना पड़ेगा। आशा भोसले जी को अनकॉन्शियस हालत में ही हॉस्पिटल ले जाया गया।
जहां पर उन्हें वेंटिलेटर पर लिया गया। डॉक्टर्स ने बताया कि कंडीशन बहुत ज्यादा क्रिटिकल है और उनके ऑर्गन्स जो है वह उम्र की वजह से फेल होना शुरू हो गए हैं और उसके बाद आशा भोसले कभी होश में ही नहीं आई। वो पास ऑन हो गई। परिवार वालों का कहना है कि नींद में ही वो चल बसी थी और एकदम सुकून की मौत जो कहते हैं वो आशा भोसले जी को आई है।
उन्हें ज्यादा सफर नहीं करना पड़ा। शरीर को लेकर ज्यादा दिक्कतें नहीं देखनी पड़ी। वो बस रेस्ट करने गई और उसके बाद वो चल बसी। आशा भोसले जी को जिस तरह से मौत आई है वैसी जिंदगी होनी चाहिए। ऐसी कामना लोग करते हैं कि शांति भरी जिंदगी हो। लेकिन आशा भोसले जी के साथ उल्टा हुआ। जिंदगी में बहुत उतार-चढ़ाव देखे और मौत शांति से आई।