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वो रकम नहीं बनी जो मुझे खरीद सके ! राघव का ये वीडियो क्यों हुआ वायरल ?

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आज तक वह रकम नहीं बनी। मैं साफ तौर पे कहना चाहता हूं। आज तक वह रकम नहीं बनी और वह शख्स पैदा नहीं हुआ जो राघव चड्डा को आम आदमी पार्टी को या अरविंद केजरीवाल को खरीद। आम आदमी पार्टी में शुक्रवार को बड़ी टूट सामने आई। राज्यसभा सांसद राघव चड्डा समेत छह अन्य राज्यसभा सांसदों ने पार्टी से दूरी बना ली है। दोपहर में राघव चड्डा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस का ऐलान किया.

और शाम होते-होते बीजेपी का दामन थाम लिया। राघव को लेकर आम आदमी पार्टी के नेता अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। इसी कड़ी में दिल्ली में तिलक नगर से विधायक जनरल सिंह ने भी राघव चड्ढा का एक वीडियो Instagram अकाउंट पर शेयर किया है जिसमें वे आम आदमी पार्टी के लिए समर्पण और ईमानदारी को लेकर बड़े दावे करते हुए नजर आ रहे हैं। दरअसल यह एक पुराना वीडियो है जो कि एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का है। राघव चड्डा के साथ खुद जनरल सिंह भी बैठे हैं। वीडियो में राघव चड्डा कहते हैं कि आज तक वह रकम नहीं बनी। मैं साफ तौर पर कहना चाहता हूं आज तक वह रकम नहीं बनी और वह शख्स पैदा नहीं हुआ जो राघव चड्ढा को आम आदमी पार्टी को या अरविंद केजरीवाल को खरीद ले।

अपने विरोधियों से यह स्पष्ट रूप से कहना चाहता हूं आज तक वो रकम नहीं बनी। मैं साफ तौर पे कहना चाहता हूं आज तक वो रकम नहीं बनी और वो शख्स पैदा नहीं हुआ जो राघव चड्डा को आम आदमी पार्टी को या अरविंद केजरीवाल को खरीद ले। मैं साफ तौर पे अपने विरोधियों को कहना चाहता हूं। वहीं इस वीडियो के कैप्शन में जनरल सिंह लिखते हैं कि चड्डा जी शख्स तो मालूम चल गया। अब जरा रकम भी बता दीजिए। कितने में नीलाम हुए हो। आम आदमी पार्टी से क्यों तोड़ा राघव ने रिश्ता? पार्टी से अलग होने के फैसले पर राघव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि जिस आम आदमी पार्टी को मैंने अपने खून पसीने से सींचा, अपनी जवानी के 15 साल दिए वह अब अपने सिद्धांतों और मूल्यों और नैतिकता से पूरी तरह से भटक गई है।

आपको बता दें कि हाल ही में राघव चड्डा को राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के उपनेता पद से हटा दिया गया और उनकी जगह मित्तल को नियुक्त किया गया। इसके बाद ही राघव ने संकेत दिए कि वे कोई बड़ा कदम उठाने जा रहे हैं। आप में उनका कद घटाए जाने के बाद से ही चर्चाएं तेज थी। राघव के अलावा स्वाति मालीवाल, अशोक कुमार मित्तल, संदीप पाठक, हरभजन सिंह, राजेंद्र गुप्ता और विक्रम साहनी ने आम आदमी पार्टी का साथ छोड़ दिया है। सात राज्यसभा सांसदों के अलग होने के बाद आम आदमी पार्टी के पास अब सिर्फ तीन ही सांसद रह जाएंगे। जिनमें संजय सिंह, नारायण दास गुप्ता और संत बलवीर सिंह भी शामिल हैं। आम आदमी पार्टी गुजरात में सत्ता पर काबिज होने की संभावना तलाश रही है।

तो वहीं पंजाब में सत्ता बरकरार रखने की कोशिश में है। पार्टी में इतनी बड़ी टूट और राघव चड्ढा जैसे बड़े नेता का अन्य छह सांसदों संग अलग होना कहीं ना कहीं केजरीवाल की टेंशन बढ़ा सकता है। बहरहाल देखने वाली बात यह होगी कि आम आदमी पार्टी आलाकमान अब आगे क्या कदम उठाता है। और पिछले कुछ सालों से आप लोग लगातार मुझसे पूछ रहे थे कि राघव जी आप एक साल से पार्टी की गतिविधियों से अलग क्यों नजर आते हैं? पार्टी से किनारा क्यों कर लिया? तब मैं कुछ बोलता नहीं था। मैं प्रयास कर रहा था कि चीजें बेहतर हो।लेकिन आज मैं आपको असल कारण बताता हूं कि क्यों मैंने पार्टी की गतिविधियों से अपने आप को अलग कर लिया और उसका कारण यह है क्योंकि मैं उनके गुनाह में शामिल नहीं होना चाहता था। मैं उनकी दोस्ती के काबिल नहीं था क्योंकि मैं उनके गुनाह में शामिल नहीं था।

आज हम एक ऐसे मोड़ पर खड़े हैं कि हमारे पास सिर्फ दो ही ऑप्शंस थे। दो विकल्प थे। या तो हम राजनीति छोड़ दें और पिछले 15 16 साल जो हमने सार्वजनिक जीवन में काम किया उसे त्याग दें या फिर हम अपने अनुभव को अपनी स्किल्स को अपनी पूरी ऊर्जा और एनर्जी को लेकर पॉजिटिव पॉलिटिक्स करें।इसीलिए हमने यह डिसाइड किया दैट वी द टू थर्ड मेंबर्स ऑफ पार्लियामेंट ऑफ दी बिलोंगिंग टू दी आम आदमी पार्टी इन राज्यसभा एक्सरसाइज द प्रोविजंस ऑफ द कॉन्स्टिट्यूशन ऑफ इंडिया एंड मर्ज आवरसेल्व्स विद द बीजेपी। हम बीजेपी में विलय करते हैं। पिछले 12 सालों में भारतीय जनता पार्टी की केंद्र की सरकार माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में जो सरकार चल रही है, उसने कई मजबूत ऐसे फैसले लिए जो आज से पहले नेता फैसले लेने से शायद डरते थे। चाहे वो आतंकवाद की जड़े उखाड़ कर फेंकना हो या भारत को विश्व की टॉप इकॉनमी में लाना हो। और इस नेतृत्व पर जनता ने एक बार नहीं दो बार नहीं तीन-तीन बार मोहर लगाई है।

हम सब अपने आप को सौभाग्यशाली महसूस कर रहे हैं कि हम माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की लीडरशिप में और गृह मंत्री अमित शाह जी की संकल्प शक्ति के साथ जुड़कर बिना रुके और बिना थके देश के लिए काम करेंगे। और जिन लोगों के मन में थोड़ी पीड़ा थी, दुख था कि मैं बतौर एक सांसद जो ऑर्डिनरी सिटीजंस के ऑर्डिनरी इश्यूज को पार्लियामेंट में उठा रहा था। मैं शायद नहीं उठा पाऊंगा क्योंकि मेरी अपनी पार्टी ने मेरी आवाज बंद कर दी थी। मैं उन्हें भी कहना चाहता हूं कि आप चिंता मत करिए। मैं उसी कमिटमेंट, उसी जोश और उसी एनर्जी के साथ आपके तमाम मुद्दे उठाता रहूंगा। जय हिंद। मैं अपने साथी संदीप जी को बोलता हूं आपसे संवाद करेंगे। मैंने अपने जीवन में नहीं सोचा था कि यह स्थिति आएगी पर यह आई। 10 साल से इस पार्टी से मैं जुड़ा रहा और आज मैं आम आदमी पार्टी से अपने रास्ते अलग कर रहा हूं। मैं एक बहुत छोटे से गांव से आया हूं। किसान परिवार से। मेरी यात्रा शुरू हुई। पढ़ाई करते करते मैं कैंब्रिज गया, ऑक्सफोर्ड गया, एमआईटी गया, फिर इंडिया आके देश में आकर आईआईटी का प्रोफेसर बना। अब आप सोचो कि इतनी पढ़ाई करने के बाद, दुनिया में इतना कुछ अचीव करने के बाद एक व्यक्ति क्यों राजनीति में आना चाहेगा?सिर्फ एक ही मकसद था दिल की गहराई से कि देश के लिए मैं प्रत्यक्ष रूप से कुछ अच्छा कर सकूं। और इसी भावना से इंडिया आया और इंडिया आकर फिर राजनीति में जुड़ा। आप खुद ही सोचिए कि जिस व्यक्ति के पास पद, पैसा, प्रतिष्ठा सब कुछ था,

उसका और क्या कारण और मकसद हो सकता है राजनीति में आने का। सिर्फ और सिर्फ देश सेवा ही एकमात्र मकसद था। पार्टी ज्वाइन करने की जब बारी आई कि भाई कौन सी पार्टी ज्वाइन करें तो बहुत सारे पॉलिटिकल पार्टियां थी, बड़ी पॉलिटिकल पार्टियां थी। वेल एस्टैब्लिश्ड पॉलिटिकल पार्टीज थी। आम आदमी पार्टी को ही क्यों ज्वाइन किए? यह जानते हुए भी कि पार्टी शुरू हुई है, पार्टी छोटी है। कहीं पर भी जाते, कहीं पर भी काम मिल जाता और आगे जीवन शुरू कर सकते थे।लेकिन उन सबके बावजूद आम आदमी पार्टी को चुना। क्यों चुना? वह इसलिए चुना क्योंकि एक काम की राजनीति नई राजनीति की बातें कही गई और उसको लेकर आया गया। ये सारी बातों को सुनकर इन सारी चीजों को देखकर आम आदमी पार्टी ज्वाइन की है। और इन 10 सालों में ईश्वर साक्षी है। मैंने खूब मेहनत की है।ना दिन देखा ना रात देखी। घर परिवार सब त्याग के छोड़ के सब कुछ झोंक दिया। अपने लिए नहीं। आपने देखा होगा कि मैंने कभी भी अपने आप को आगे नहीं किया है। बहुत सारे तो मुझे फर्स्ट टाइम भी देख रहे होंगे या फोटो में ही देखे होंगे। मैंने कभी अपने आप को आगे नहीं किया। क्यों? पार्टी को आगे रखा। अरविंद केजरीवाल जी को आगे रखा।

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