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टीना मुनीम कैसे बनी टीना अंबानी? बच्चन की कंगाली में खोल दिया खजाना!

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बच के रहना रे बाबा बच के रहना रे बच के रहना रे बाबा तुझ पे नजर है कौन किससे बचा और किस पर किसकी नजर थी इसकी स्क्रिप्ट फिल्म के बाहर शायद किस्मत लिख रही थी 1983 में आई फिल्म पुकार की सेकंड एक्ट्रेस टीना मुनीम पहली और आखिरी बार इस फिल्म में अमिताभ बच्चन के साथ नजर आई थी तब अमिताभ का स्टारडम अपनी बुलंदी पर था और टीना मुनीम अपनी एक्टिंग से ज्यादा पुराने दिनों के सुपरस्टार राजेश खन्ना के साथ रिलेशनशिप के लिए सुर्खियों में थी लेकिन वक्त के साय में किसको पता था कि जिस एक्ट्रेस को जीनत अमान के आगे अमिताभ की हीरोइन बनने लायक नहीं समझा गया वह एक दिन अमिताभ की कंगाली के दिनों में उन पर लदा करोड़ों का कर्ज उतारने की हालत में आ

जाएगी जिस लड़की से लंबे रिलेशनशिप के बाद भी राजेश खन्ना ने शादी से इंकार कर दिया उसी की शादी एक ऐसे शख्स से होगी जो राजेश खन्ना तो क्या पूरी फिल्म इंडस्ट्री को खरीद सकता था बहुत कम लोगों को पता है कि अंबानी परिवार में बटवारे के 3 साल बाद तक अनिल अंबानी के पास मुकेश से ज्यादा संपत्ति थी और 2008 तक वह दुनिया के छठे सबसे अमीर आदमी बन चुके थे यहां से किस्मत ने पलटी ना मारी होती तो आज बेटे की शादी में दौलत लुटाने वाले हाथ नीता अंबानी के नहीं टी अंबानी के होते तो दोस्तों यह वही टीना मुनीम है जिन्हें दुनिया अब टीना अंबानी कहती है टीना ने फिल्मी दुनिया को उसी साल अलविदा कह दिया जब वह देश के सबसे अमीर घर की बहू बन गई लेकिन आज भी अगर उनका कोई फिल्मी कनेक्शन सुर्खियों में आता है तो वह बच्चन परिवार के साथ गेट टुगेदर की तस्वीरों में देखा जा सकता है अमिताभ बच्चन और अनिल अंबानी की दोस्ती किसी से छिपी नहीं है

यह बात अलग है कि अब जब अंबानिस हैं बहरहाल टीना अंबानी बच्चन परिवार से जुड़ाव का कोई भी मौका नहीं गवा और अक्सर इस दोस्ती को सदा बहार दोस्ती कहती हैं लेकिन इस दोस्ती की जड़ में उनका फिल्मी जुड़ाव है या फिर अनिल और अमिताभ की जिंदगी के उतार चढ़ाव इस पर भी गौर करेंगे लेकिन पहले आपको बताते हैं कि कैसे कभी संजय दत्त और राजेश खन्ना से अफेयर के लिए जानी जाने वाली एक औसत दर्जे की अदाकारा देश ही नहीं दुनिया के सबसे बड़े औद्योगिक घराने की बहू बन गई टीना मुनीम का जन्म 11 फरवरी 1957 को एक गुजराती परिवार में हुआ था और वह फैशन डिजाइनिंग की पढ़ाई के लिए पेरिस गई थी उसी दौर में कुछ इंटरनेशनल ब्यूटी कंटेस्ट में मिस फोटोजेनिक और मिस बिकनी के खिताब से उन्होंने सुर्खियां बटोरी कि तभी फिल्म स्टार देवानंद की नजर उन पर पड़ी और उन्हों ने

अपनी फिल्म देश परदेश में उन्हें ब्रेक दे दिया संजय दत्त की डेब्यू फिल्म रॉकी के हिट होते ही उसकी हीरोइन टीना मुनीम भी चमक गई और यहीं से उनका और संजय का प्यार भी परवान चढ़ा जो ज्यादा दिन तक नहीं टिक सका टीना ने संजय के नशे की आदत से तंग आकर उनसे पीछा छुड़ा लिया और तभी उनकी जिंदगी में आया उस दौर का सबसे बड़ा नाम राजेश खन्ना शुरू हुई प्यार की कहानी कभी खत्म मन करना टीना ने अपने करियर में सबसे ज्यादा 11 फिल्में राजेश खन्ना के साथ की है जो उनकी नजदीकियों की गवाह है उस दौर में जब लड़कियां राजेश खन्ना की दीवानी थी बॉलीवुड में कहावत हुआ करती थी ऊपर आका नीचे का का राजेश खन्ना के स्टारडम में किसी भी हीरोइन को फर्श से उठाकर अर्श पर पहुंचा देने का मादा था लेकिन वह भी टीना से बेपनाह मोहब्बत करने लगे थे और इसकी मिसाल देते हुए एक बार उन्होंने मीडिया में कह डाला था कि हम दोनों एक ही टूथब्रश का इस्तेमाल करते हैं राजेश खन्ना शादीशुदा थे और अपनी पत्नी डिंपल कपाड़िया की तरह ही टीना से 15 साल से ज्यादा बड़े थे जल्द ही डिंपल से उनकी अनबन शुरू हुई और वे अलग रहने लगे इसी दौरान टीना उनकी जिंदगी में आई और साथ रहने लगी टीना चाहती थी कि राजेश खन्ना डिंपल को तलाक देकर उनसे शादी कर ले और राजेश खन्ना ने भी बहुत दिनों तक उन्हें इसी खुश फहमी में रखा था शायद मेरी शादी का खयाल दिल में आ जब टीना ने देखा कि राजेश खन्ना शादी से आनाकानी कर रहे हैं तो उन्होंने खुद ही अपना रास्ता अलग कर लिया हालांकि राजेश डिंपल से बहुत पहले ही अलग हो गए थे लेकिन कहा जाता है कि उनके बीच फॉर्मल डिवोर्स कभी नहीं हुआ इधर पर्दे पर टीना की जोड़ी कुछ समय के लिए ऋषि कपूर के साथ जमी और कर्ज जैसी सुपरहिट फिल्म भी दी दर् दिल दर्द दिग दिल में जगाया इस दौरान विदेश में उनकी मुलाकात अनिल अंबानी से होती है और गुजराती मुलक की दोस्ती शादी के फैसले तक पहुंच जाती है कहते हैं कि अनिल पिता धीरू भाई अंबानी टीना को बहू बनाने के खिलाफ थे और इसमें टीना का अफेयर्स भरा अतीत आड़े आ रहा था लेकिन अनिल की जिद के आगे उनकी नहीं चली और साल 1991 में टीना मुनीम टीना अंबानी हो गई फिल्मी दुनिया में यह उनका आखिरी साल था टीना की किस्मत पर खुद किस्मत को भी रश खो रहा था लेकिन दूसरी तरफ बच्चन की बुलंदी पर बदकिस्मती दस्तक दे रही थी अमिताभ बच्चन की चमक फीकी होने लगी फ्लॉप फिल्मों

की लाइन लगी थी और भविष्य अंधकारमय था उन्होंने एक्टिंग छोड़ प्रोडक्शन कंपनी खोल ली जो जल्द ही दिवालिया हो गई अमिताभ पर 90 करोड़ का कर्ज और करीब 50 मुकदमे लद चुके थे अमिताभ के इन्हीं बुरे दिनों में एक दिन धीरू भाई अंबानी ने उनके सिर पर हाथ रखा खुद अमिताभ की जुबान से सुनिए कि उन्होंने क्या कहा जीवन में एक बार ऐसा दौर आया जब मैं बैकर हो गया दिवालिया हो [संगीत] गया मेरी बनाई हुई कंपनी घाटे में चली गई करोड़ों का कर्जा चढ़ गया मेरा व्यक्तिगत बैंक बैलेंस जीरो यानी शून्य हो गया कमाई के सब जरिए बंद थे और सरकार की तरफ से घर पर कुड़की के छापे लग गए यह बात धीरू भाई को पता चली बिना किसी से से पूछे या जाने उन्होंने अपने छोटे बेटे और मेरे मित्र अनिल से कहा इसका बुरा वक्त है इसे कुछ पैसे दे दो अनिल ने मुझे आकर यह बताया अनिल ने अमिताभ से मिलकर पैसे देने की पेशकश तो की लेकिन कहा जाता है कि अमिताभ ने इतना बड़ा उपकार लेने से मना कर दिया खैर बुरे दिनों का साथी हमेशा याद रहता है और दरिया दिली की इसी बुनियाद पर छोटे अंबानी और बच्चन की दोस्ती गहरा चली गई आगे अमिताभ बच्चन ने छोटे पर्दे का रुख किया और कौन बनेगा करोड़पति के सहारे अपनी किस्मत बदलनी शुरू कर दी धीरे-धीरे उन्होंने अपना सारा कर्च उतार दिया लेकिन ठहर यह कोई फिल्मी कहानी तो है नहीं कि अंत में सब कुछ ठीक-ठाक ही होगा समय ने फिर पलटी मारी और किस्मत छोटे अंबानी के लिए कोई और ही कहानी लिख रही थी धीरू भाई अंबानी के निधन के 3 साल बाद साल 2005 में देश के सबसे बड़े औद्योगिक घराने का दो भाइयों में बंटवारा हो गया मां के दखल से दोनों को लगभग बराबर हिस्से मिले अनिल के हिस्से में कम्युनिकेशन कंस्ट्रक्शन एंटरटेनमेंट हेल्थ केयर एविएशन और डिफेंस जैसे सेक्टर मिले जबकि मुकेश के हिस्से में पारंपरिक टेक्सटाइल और पेट्रोलियम आया जानकारों की माने तो भविष्य अनिल के साथ था

और अगर उन्होंने पिता के नक्शे कदम पर चलते हुए कारोबार किया होता तो आज मुकेश अंबानी और गौतम अडानी की जगह इस देश में अनिल अंबानी की तूती बोल रही होती साल 2008 में अनिल अंबानी की कुल संपत्ति 42 अरब डॉलर थी और वह दुनिया के छठे सबसे बड़े अमीर थे तब उनकी संपत्ति मुकेश के मुकाबले 500 करोड़ ज्यादा ही थी लेकिन कहते हैं कि गलत संगत और मनमाने फैसलों ने अनिल की बर्बादी लिखनी शुरू कर दी उसके बाद से ही मुकेश की संपत्ति लगातार बढ़ती गई और छोटे भाई का कारोबार गिरता ही चला गया साल 2020 आते-आते अनिल पर कर्ज का पहाड़ लग चुका था और उनकी कई कंपनियां दिवालिया हो गई खैर हम लौटते हैं बच्चन से रिश्तों पर अमिताभ अनिल के घाटों की भरपाई तो नहीं कर सकते थे लेकिन उन्होंने अपनी ब्रांड वैल्यू और सियासी तालूका तों के जरिए उन्हें काफी राहत पहुंचाई गिरते का कारोबार के बीच अगर किसी बड़े ब्रांड एंबेसडर का हाथ आपके कंधे पर हो तो इसे भी एक अच्छा गुडविल माना जाता है लेकिन अमिताव की कमाई जिस एंटरटेनमेंट और विज्ञापन पर टिकी थी वहां अब मुकेश अंबानी का राज था ऐसे में उनके लिए मुकेश का हाथ थामे रखना भी जरूरी था यही वजह है कि बच्चन परिवार अंबानी के दोनों खेमों का हाथ थामे रहता है बहरहाल टीना अंबानी के शब्दों में कहे तो उनकी बच्चन परिवार से दो दोस्ती सदा बहार है तो दोस्तों उम्मीद है कि आपको यह वीडियो पसंद आया होगा और ऐसी ही जानकारियों के लिए चैनल सब्सक्राइब कर ले और वीडियो लाइक शेयर करने के साथ ही कमेंट बॉक्स में अपनी राय जरूर दें शुक्रिया नमस्ते आभार

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