टाइगर श्रॉफ पर जो हमले की कोशिश हुई उस पर अब चौंकाने वाले अपडेट एक के बाद एक सामने आ रहे हैं। अंधेरी की व्यस्त सड़क पर दिन दहाड़े ताबड़तोड़ फायरिंग होती है। तीन शूटर बाइक पर सवार होकर फरार होते हैं। और चंद घंटों के अंदर एक ऐसा नाम सामने आता है जिसने पूरीफिल्म इंडस्ट्री की नींद उड़ा दी है।
लॉरेंस बिश्नोई गैंग। लेकिन इस सनसनीखेज हमले के पीछे सबसे बड़ा सवाल यह नहीं है कि गोलियां किसने चलाई? असली कहानी है कि जिन लड़कों के हाथ में हथियार थमाए गए उन्हें सिर्फ ₹00 का एडवांस और एक ऐसा खतरनाक सपना दिखाया गया था जिसका सच जानकर आप दंग रह जाएंगे। आखिर वो कौन सा वादा था जिसके लालच में 18 से 22 साल के नौजवान किसी की जान लेने पर आमदा हो गए। और नेपाल भागने से ठीक पहले ट्रेन के कोच में ऐसा क्या हुआ जिसने इसपूरी साजिश का पर्दाफाश कर दिया। चलिए जानते हैं इस पूरे मामले के अपडेट्स को। क्या-क्या इसमें अभी तक कारवाईयां हुई हैं? क्या-क्या इसमें एक्शन हुए हैं। टाइगर श्रॉफ को निशाना बनाकर दो शूटर्स अंधाधुंध गोलियां बरसाते हैं। पास में ही तीसरा लड़का एक बाइक स्टार्ट रखकर खड़ा था। गोलियां चलते ही भगदड़ मचती है और चंद सेकंड में तीनों आरोपी एक ही बाइक पर बैठकर तेजी से ओझल हो जाते हैं। लेकिन प्लान सिर्फ गोली चलाने का नहीं था।
प्लान था कानून की आंखों में धूल झोंकने का। शूटर्स अपनी बाइक को अंधेरी वेस्ट रेलवे स्टेशन के पास लावारिस छोड़ते हैं और भीड़ का फायदा उठाकर स्टेशन के अंदर दाखिल हो जाते हैं। मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच जब तक मौके पर पहुंचती है तब तक 20 से ज्यादा स्पेशल टीमें शहर के चप्पे-चप्पे पर तैनात कर दी जाती हैं। सीसीटीवी फुटेज खंगाले जाते हैं। बाइक का नंबर और हुलिया मिलता है। डीसीपी राज तिलक रोशन की अगुवाई में जांच आगे बढ़ती है तो टेक्निकल सर्विलांस एक बहुत बड़ा सुराग देता है। तीनों हमलावर मुंबई से निकल चुके थे और पुणे जयपुर एक्सप्रेस में सवार होकर उत्तर दिशा की ओर भाग रहे थे। उनका इरादा सीधा था जयपुर वहां से बॉर्डर पार करके नेपाल और फिर हमेशा के लिए भारत से गायब हो जाना। लेकिन यहीं पर पुलिस का जाल बिछता है। मुंबई पुलिस तुरंत राजस्थान की कोटा पुलिस से संपर्क साधती है। ट्रेन जैसे ही सोमवार सुबह कोटा स्टेशन पर भिन्न भी होती है।
हथियारों से लैस पुलिस दल बोगी में दाखिल होते हैं। रितिक उर्फ रोशन, रिहान और फूल सिंह तीनों को बिना किसी मुकाबले केंगे हाथों दबोच लिया जाता है। अब आते हैं उस बड़े खुलासे पर जिसके जवाब का इंतजार हर कोई कर रहा था। पुलिस की शुरुआती पूछताछ में इन तीनों ने जो कबूला उसने जांच एजेंसियों के भी होश उड़ा दिए हैं। यह कोई पेशेवर शार्प शूटरनहीं थे। 18 से 20 साल के इन लड़कों को विदेश में शानदार नौकरी आलीशान जिंदगी और करोड़ों रुपए कमाने के झूठे सपने दिखाए गए थे।
एक मिस्टीरियस हैंडलर ने इनसे संपर्क किया था। उनसे वादा किया था कि काम खत्म होते ही उन्हें नेपाल के रास्ते सुरक्षित विदेश भेज दिया जाएगा। वहां उन्हें एक नया नाम, नई पहचान और मोटी तनख्वाह वाली नौकरी मिलेगी। और इस खौफनाक काम के लिए उन्हें एडवांस में दिए गए थे महज सिर्फ और सिर्फ ₹00। पुलिस की नजरों से बचने के लिए यह रकम भी छोटी किश्तों में ट्रांसफर की गई थी। यानी चंद000 और एक फर्जी सपने के बदले तेज जिंदगियों को जुर्म की आग में ढूंढ दिया गया। लेकिन कहानी यहीं पर खत्म नहीं होती है। हमले के फौरन बाद सोशल मीडिया पर एक ऑडियो क्लिप तेजी से वायरल होता है। क्लिप में बोलने वाला खुद को अनिल पंडित बताता है और दावा करता है कि वो लॉरेंस बिश्नोई के भाई जैसा है। ऑडियो में साफ शब्दों में कहा गया है कि टाइगर श्रॉफ के साथ जो हुआ उसकी जिम्मेदारी हम और हरमन संधू लेते हैं। हमने पहले समझाया था लेकिन वो नहीं माने।
इस ऑडियो में सिर्फ टाइगर श्रॉफ ही नहीं बल्कि पूरी फिल्म इंडस्ट्री को खुली धमकी दी गई है। यह कहा गया है कि जो भी सलमान खान के साथ काम करेगा या उनके साथ खड़ा होगा उसे बख्शा नहीं जाएगा। हालांकि पुलिस अभी इस ऑडियो की सत्यता की जांच कर रही है। लेकिन इस धमकी ने बॉलीवुड के गलियारों में गहरा सन्नाटा पैदा कर दिया है। कोटा की अदालत से मुंबई पुलिस को तीन आरोपियों की 48 घंटे की ट्रांजिट रिमांड मिल चुकी है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि वो अज्ञात हैंडलर कौन है जिसने इन युवाओं का ब्रेन वाश किया? इन्हें सपने दिखाए। हथियार कहां से मुहैया कराए गए? और क्या यह वाकई सीधे बिश्नोई सिंडिकेट का हमला था या कोई स्थानीय गैंग लॉरेंस के नाम पर अपनी दहशत कायम करना चाहता है।
इस घटना ने एक कड़वी हकीकत उजागर कर दी है कि कैसे सोशल मीडिया और फर्जी वादों के जाल में फंसाकर कम उम्र के लड़कों को डिस्पोजेबल शूटर्स की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। चंद हजार रुपयों के लालच में यह नौजवान अपराध की उस दलदल में कूद जाते हैं जहां से वापसी का कोई भी रास्ता नहीं बचता है। फिल्म इंडस्ट्री के लिए यह एक बहुत बड़ा अलार्म है।
सितारों की सुरक्षा व्यवस्था पर अब नए सिरे से काम करना होगा क्योंकि धमकियां अब सिर्फ फोन कॉल तक सीमित नहीं है। वह सड़कों पर गोलियों की शक्ल में उतरती नजर आ रही है। आपको क्या लगता है क्या विदेशों में बैठे गैंगस्टर भारत के युवाओं को मोहरा बना रहे हैं या कहानी में कुछ और ही है। देखना होगा क्या कुछ अपडेट आते हैं पुलिस की जांच में क्या-क्या खुलासे होते हैं।