झाल हो सकती है क्योंकि यहां तिलावत सीएम योगी आदित्यनाथ सीरीज के पहले भाग में आपने देखा कि कैसे योगी आदित्यनाथ उत्तराखंड स्थित अपने पैतृक गांव पंचू से गोरखपुर आए और उनके पिता ने पहली बार बेटे को भगवा वेश में देखा तौर पर क्या बीती वापस अपने गांव लौटे तो जोगी की मां को बेटे के संन्यासी बनने की बात तो विश्वास नहीं हुआ और मैं खुद भी गोरखपुर आ गई अब आगे की कहानी पहली बार गोरखनाथ मंदिर पहुंची योगी आदित्यनाथ की मां अपने बेटे को संन्यासी के वेश में देख कर फूट-फूट कर रोने लगी इस बार पीठाधीश्वर महंत अवैद्यनाथ यहीं पर मौजूद थे।
उन्होंने बात को समझाया कि योगी पर कोई प्रतिबंध नहीं है वह जब चाहे आप लोगों के पास जा सकता है और आप भी जब चाहे यहां आ सकती हैं रह सकती हैं आपका सदैव स्वागत है मां को भावुक देख जोगी भावुक हुए परंतु मन ने उठ रहे ज्वार को समझ कर रखा और ऐसे विदा करते समय मां से कहा छोटे परिवार से बड़े परिवार में मेरा एक संन्यासी के रूप में मिलन है मैं उसी रूप में अपने जीवन को जी रहा हूं चार वर्ष बाद योगी आदित्यनाथ ने संन्यासी के रूप में पंचूर की पहली यात्रा की लेकिन यात्रा अपने परिवार को देखने आऊं से मिलने के लिए नहीं थी ।
आदित्यनाथ को अपने माता-पिता से समझौते के रूप में रिक्शा लेकर संन्यासी जीवन का एक महत्वपूर्ण विधान पूरा करना था वह आपने भी अपना फर्ज पूरा करते हुए अपने संन्यासी पुत्र को यह तो चित्त भिक्षा के रुप में चावल फल और कुछ सिक्के भैंस रूप दे दिए अब योगी आदित्यनाथ का स्थाई ठिकाना गोरखनाथ मंदिर हो गया था योगी अपने गुरुदेव की सेवा के साथ-साथ योग और आध्यात्म की शिक्षा ले रहे थे ।
इसी बीच विद्यार्थी परिषद के दो कार्यकर्ता कामेश्वर सिंह और डॉ प्रदीप राव महंत अवैद्यनाथ से मिलने पहुंचे उन लोगों ने बताया कि उनको विद्यार्थी परिषद के कोटद्वार शाखा के कार्यकर्ता कि आप सभी ने बताया है क्यों कई कार्यकर्ता गोरखनाथ मंदिर उच्च अध्ययन के लिए आया है हमें उनका सहयोग करने को कहा है क्योंकि वह इस शहर में नया हैं योगी हम इस माहौल में घुलने मिलने लगे और लोगों के साथ संवाद बोलने लगा इसे भी योगी आदित्यनाथ को योग्य बनाने की प्रक्रिया शुरू हो गई नाच पंच की दीक्षा के लिए उन्हें तैयार किया जा रहा था।
यह बात अलग थी कि छात्र जीवन से ही अनुशासित दिनचर्या का पालन करने की वजह से योगी के लिए यह कोई बहुत कठिन साधना नहीं थी संन्यासी जीवन में प्रवेश से पूर्व व्यक्ति को अपना अंतिम संस्कार करना पड़ता है यह पूर्व जीवन से मुक्ति और नए जीवन का प्रतीक होता है इसी लिए योगी लोग राहु का प्रयोग करते हैं यह राख दुनिया के लिए मृत्यु का प्रतीक है।
रात शमशान का आधार होती है यह संकेत देती है कि शरीर को अंत है राख में बदल जाना है इसका लक्षण है योगी ने सांसारिक ताकत याद कर दिया है चौ जनवरी 1994 को दीक्षा के बाद योगी की सभी क्रियाओं को पूरा करके योगी आदित्यनाथ पूर्णत है योग बन गए अब यह क्रॉस राशि बंद भगवान रहने वाले थे 15फरवरी 1994 को ढोलक पीठ के महंत अवैद्यनाथ ने उन्हें अपना उत्तराधिकारी घोषित किया प्रोडक्ट के भक्त भी जब जोगी को छोटे महाराज की उपाधि देकर संबोधित करने लगे थे मार्च 1994 में पहली बार योगी मजबूरन गोरखनाथ मंदिर से बाहर निकले इसकी जरूरत भी नहीं पड़ती है अगर पुलिस गोलघर में हुए विवाद के आरोपियों की तलाश में प्रकाशित छात्रावास में नहीं घुसी होती अंत में जब पुलिस ने इस मामले में कोई कदम नहीं उठाया तो योगी का धैर्य जवाब दे गया था में उन्होंने जिसमें अधिकांश स्थानीय कॉलेज के छात्र थे वहां से 5 मिनट की दूरी पर स्थित प्रताप छात्रावास से एसएसपी आसपास के बीच जुलूस के जरिए रास्ता जाम कर दिया वह और के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक केके सक्सेना का घर चारों तरफ से घेर लिया गया।
उस समय वह प्रदर्शनकारी छात्रों का नेतृत्व भगवा वस्त्र पहने एक विश्वास का इस संन्यासी से प्रतीत होने वाला यह बात कर रहा था वह खुद कोई और नहीं बल्कि खुद जो भी याद ना थे भीड़ में बहुत से इस समय तक योगी आदित्यनाथ के बारे में जानते भी नहीं थे लेकिन उसके अदम्य साहस से प्रभावित जरूर थे वह घर के पास बने छात्रावास में गोरखनाथ मंदिर की शिक्षा शाखा महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद द्वारा संचालित विभिन्न विद्यालयों के करीब ढाई सौ छात्र रहा करते थे 1978 में यह छात्रावास स्थापित हुआ था लेकिन समस्या तब शुरू हुई जब कपड़ा खरीदने गए हॉस्टल के छात्रों की दुकानदार से दाम को लेकर होने वाली मोलभाव बहस में बदलने लगी दुकान के मालिक प्रमोद टेकरीवाल प्रमुख व्यवसाई होने के साथ-साथ अशंकालिक नेता भी था।
उसे नाराज छात्रों को सबक सिखाने के लिए अपनी ताकत दिखाने का फैसला किया उसे दुकान से बाहर आकर हवा में दो चला दी इससे पूरे बाजार में हंगामा हो गया और वहां पर पुलिस पहुंच गई उस समय प्रदेश में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी कि अगर सरकार थी कांग्रेस भी अप्रत्यक्ष रूप से सरकार में शामिल थी समाजवादी पार्टी और कांग्रेस में ही बैठ होने के कारण टेक्निकल कि शहर में अच्छी खासी धूम थी पुलिस पर त्वरित कार्रवाई करने का दबाव बनाया गया छात्रों पर यह कार्रवाई गौड़ा की पीठ की सत्ता को चुनौती थी युवा योगी के दिमाग में कुछ और ही चल रहा था मठ के अधिपति इस प्रकार अपेक्षा नहीं की जा सकती थी ।
एक नजीर तय करनी थी जोगी ने अपना फोन उठाया और इस नुस्खे के सक्सेना को मिला दिया मंदिर के बाहर यह उनका पहला संवाद था गोरक्षपीठ के उत्तराधिकारी के द्वारा पुलिस प्रमुख को चेतावनी कि यह खबर शहर में जंगल की आग की तरह फैल गई गोरखपुर के जो वास्तव में नायक के अभाव में माफिया और बाहुबलियों को अपना आदर्श मान रहे थे उनको अब एक नया लायक मिल गया था