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सुशांत सिंह राजपूत को लेकर क्रांति प्रकाश जा ने दिया चौंकाने वाला बयान, मचा बवाल!

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सुशांत के जाने के बाद लोगों ने सुशांत का जिक्र बहुत किया। सुशांत की का सच सुशांत सिंह राजपूत सुशांत सिंह राजपूत दो दो ये पॉलिटिकली सुशांत को बेचा गया या सुशांत से वाकई में इतना इमोशनल कनेक्शन धोनी को आए हुए 10 साल होने को आए हैं.

9 साल का बच्चा है अंकल आपका तो फिल्म हम 100 बार देखे हैं धोनी कैसे धोनी देखी होगी उस इंसान से आज का बच्चा भी रिलेट करता है सुशांत के जाने के बाद लोगों ने सुशांत का जिक्र बहुत किया ये पॉलिटिकली सुशांत को बेचा गया या सुशांत से वाकई में इतना इमोशनल कनेक्शन था? कनेक्शन तो था सर। कनेक्शन इसलिए था क्योंकि उनकी कहानी वैसी थी। पटना से निकला हुआ एक आदमी सबसे इंटेलिजेंट आदमी इतने बड़े एग्जाम को क्लियर करता है। पढ़ाई करता है। आप ही की तरह जो आपने कहा बीटेक छोड़ के बाद आपने कहा नहीं ये नहीं करना।

थर्ड ईयर में छोड़ देता है। तो कहानी कहीं ना कहीं उस छोटे शहर के किसी इंसान की होती है जो हमने एक एक सपना देखा है और जाके वहां पर इतना सक्सेस मिलता है। इतनी सफलता मिलती है। तो आदमी का एक इंस्पिरेशन बढ़ जाता है। मैं खुद देखता था कि अरे यार कितना बढ़िया काम कितना अच्छा काम जब मैं उनको जानता नहीं था ऐसे रूबरू नहीं हुआ था। जब हम मिले तो मिलने के बाद फिर हमारे कुछ कॉमन कनेक्शन निकले। तो हम बोले कि वो भैया को जानते हो। अब वो लहजा आ जाता है तो तुम भी जानते हो बोले हां यार रुको ना बाद एक बार बोले थे कभी तुम जाओगे तो बोलना कि ये फोन आया था इनका तो हम फोन लगा के दिए उनको फिर वो शुरू हो गए और वैसे ही शुरू हुए जैसा जब वो पटना में रहते थे स्कूल में जब वो कभी मिलते होंगे.

उस भैया से एक्सजेक्टली वैसे ही थे कोई बदला नहीं था तो मेरे पास तो इतनी अच्छी-अच्छी मेमोरीज हैं कि जब लोग कहते हैं मैं अपने हिसाब से कह सकता हूं कि वो इंसान जितने दिलों को छुआ है इसी वजह से उस इंसान को आज भी इतना याद किया जाता है। और वो इंसान सिर्फ ये नहीं कि बिहार के लोग याद करते हैं। साउथ के लोग हैं। उस कहानी को साउथ के लोग कितनी बार धोनी देख चुके हैं। कभी मैं अगर गया भी हूं। कभी कुछ साउथ के लोग मिले भी हैं। वो भी कहते हैं अन्ना दैट हेलीकॉप्टर शॉट आई हैव सीन द फिल्म मेनी एट टाइम्स। .

कल मुझे एक 9 साल का बच्चा है। अब 9 साल के बच्चे धोनी को आए हुए 10 साल होने को आए हैं। 9 साल का बच्चा है। तो मुझे एक वीडियो कॉल भी है मेरे पास। वो वीडियो भेजा उन्होंने हमारे एक भाई साहब हैं उन्होंने। हम अरे अंकल आपका तो अब अंकल तो हो ही चुके। अंकल आपका तो फिल्म हम 100 बार देखे हैं धोनी। अब सोचिए तो कैसे धोनी देखी होगी? उस इंसान से आज का बच्चा भी रिलेट करता है। बड़े बूढ़े तो छोड़िए अगर बच्चा रिलेट कर रहा है 10 साल का उनको गए हुए इतने साल हो गए। जब सुशांत की खबर आई थी आप क्या कह रहे थे?

मैं घर पर था में और मैं दो दिन तक मैं सन्नाटे में था क्योंकि उसके ठीक कुछ दिनों पहले सीजन वन आई थी तो मैंने उनको मैसेज किया था कि भवा भवा कह के ही बुलाता था मैं कि भवा सीजन 3 सीजन वन आ रहा है तो जरा देख के बताना भवा तुम कैसा लगा उनका रिप्लाई नहीं आया था पर मैं रिप्लाई के इंतजार में रह गया और रह गया। अफसोस बहुत हुआ था। मेरे देश को बहुत दुख था। मैंने कभी बात नहीं की है और मैं कभी क्योंकि एक ऐसा एक टॉपिक है हमारे लिए मेरा दिल हो जाता है।

मैं बिल्कुल टूट जाता हूं ये सोच के कि यार वो इंसान मतलब कैसे हो गया ये? क्यों हुआ ये? एक बार कह देता किसी से भी कह देता। पर मेबी जब उनकी आप कह रहे हैं कि उनकी दीदी आई थी जब तो जब वो हम लोग तो बहुत दूर की बात थे शायद उनको भी समझ में नहीं आया होगा कुछ चल रहा था अंदर और अंदर का चलना बहुत ही हिला देने वाला होता है मुझे लगता है कि सबके एक दो दोस्त ऐसे होने चाहिए चाहे आप कितने भी ऊपर जाओ या नीचे जाओ उनको पकड़ के रखो यार मन करे तो बोल दो कि भाई करोड़ों रुपैया है लेकिन मैं टूट रहा हूं अंदर से आदमी कह नहीं पाता कह नहीं पाता हालांकि सुशांत के केस में बड़ी लेयर्स है।

मैं कोई लाइन कह के कंट्रोवर्सी नहीं क्रिएट करूंगा क्योंकि उनके फैंस का भी मानना है कि इट वास नॉट उनकी दीदी भी दुनिया के एक अलग-अलग कोनों में जाती हैं। बहुत सारे मोंग से मिलती हैं। बहुत सारे ऐसे लोगों से मिलती हैं। संवाद होते हैं उनके। तो उनका एक बिलीफ है और कानून की अपनी भाषा है। मैं तीनों का सम्मान करता हूं। मैं उसमें टिप्पणी नहीं करूंगा। बट मैंने लोगों को कमजोर होते हुए देखा है। अगर मैं सुशांत से आगे भी देखूं। अंदर से कमजोर इंसान वो बहुत अलग पीड़ा होती है और सबसे बड़ी समस्या इंसानों में होती है कि जैसे-जैसे आप सक्सेसफुल हो जाते हैं.

आप संकुचित हो जाते हैं। दायरा आपका कम होता एक्सप्रेसिव नहीं हो पाते। कहानी वही ना हमारे मर्दों को रोना नहीं सिखाया गया। हम डरते हैं लोग जज कर लेंगे। हम रोएंगे तो लोग कहेंगे कमजोर हो तुम। बहुत कम मर्द होते हैं नीलेश मिश्रा की तरह जो कह देते हैं कि मैं कमजोर होने से नहीं डरता। मुझे सख्त होने का कोई शौक नहीं है। इससे मैं भी डरता हूं। आई कांट एक्सप्रेस इफ दे समथिंग गोइंग इनसाइड मी। हालांकि आई एम मेंटली टफ नाउ। आई नो हाउ टू हैंडल मसेल्फ। आई नो हाउ टू मूव ऑन। आई नो हाउ टू फेस दिस। मेरा ईश्वर से जुड़ाव थोड़ा अच्छा है। हम मुझे लगता है आप ईश्वर से कनेक्टेड होते हैं तो मेरा तो भोलेनाथ हेल्प कर देते हैं। सेम। यहां भी वही है।

लेकिन जो लोग ईश्वर से शायद कनेक्टेड थोड़े कम हो जाते हैं। मुझे लगता है और विचार ज्यादा अंदर आते हैं। बड़ी मुश्किल होती होगी। वहीं से शायद ये डिप्रेशन, एंजाइटटी या मेंटल इश्यूज, मेंटल हेल्थ जबकि वो ईश्वर से इतने कनेक्टेड थे भी बहुत ज्यादा वो कनेक्टेड थे। बहुत ज्यादा वो उनके भजन के आप वीडियोस हां मैंने देखे हैं बहुत सारे वीडियोस देख सकते हैं। तो कहना बड़ा मुश्किल है कि इसके अंदर क्या चलता है लेकिन मुझे लगता है कि दोस्त होने चाहिए।

एक जितनी थ्योरी आई थी उनको लेके। पता नहीं सर मतलब बहुत सारी थ्योरी है। हर आदमी कुछ ना कुछ कर रहा था। हर आदमी कुछ ना कुछ बेच रहा था। हां मतलब इसीलिए मैंने पूछा। आपको लगता है सुशांत का इस्तेमाल किया गया उनके डेथ के बाद अपनी दुकान चलाने के लिए? हर आदमी ने अपने तरीके से उनको उस चीज को सच क्या था वो किसी को नहीं पता लेकिन सच तक पहुंचते-पहुंचते नैरेटिव बहुत बन जाते हैं। मुझे लगता है कि थोड़ी संवेदनशीलता दिखानी चाहिए थी। हम वो बहुत जरूरी था। एक इंसान गया है। एक ऐसा इंसान गया है जिसने दुनिया को इतना प्रेम दिया है। जिसने अपने काम के माध्यम से लोगों के सपनों को बताया है कि सपने साकार हो सकते हैं। थोड़ी संवेदनशीलता और वैसे भी समाज में भी होनी चाहिए एक दूसरे के प्रति जो आजकल नहीं है शायद। पर क्या हिंदुस्तान में लोग को सेलिब्रेट करते ज्यादा हैं? मतलब आप जी रहे हैं।

आप कैसे भी हैं? आपके बारे में चर्चा नहीं होगी। यह बहुत ही मतलब मैं हारश क्वेश्चन पूछ रहा हूं। सुशांत सिंह राजपूत और जुबिन गर्ग, सिद्धू मूसेवाला यह कुछ घटनाएं ऐसी हैं जिसको देखकर मुझे लगता है कि जितना प्यार इनके जाने के बाद उमड़ा पूरे देश से क्या वो मृत्यु के बाद हम ज्यादा समर्पित हो?

ये सब महान लोग हैं। सबने बहुत अच्छा काम किया। मैं सबका जुबिन घर का बहुत बड़ा फैन हूं मैं। सिद्धू मूसेवाला के बाद भी मैंने बहुत सारे गाने सुने। अनफॉर्चूनेटली उसके पहले मेरा उनसे इतना राब्ता नहीं था क्योंकि मैं आई वास मोर इनू हिंदू म्यूजिक जी और सुशांत कमाल के एक्टर थे बट जिस तरह से महीनों तक सालों तक इनको चर्चा की गई मैंने वो चर्चाएं लता मंगेशकर के जाने पर नहीं देखी। मैंने वो चर्चा दिलीप कुमार के जाने पर नहीं देखी। मैंने वो चर्चा और बीएसपी बाला सुब्रमण्यम होंगे जिनको मैंने अपने सामने जाते देखा जो बहुत बड़े-बड़े लेजेंड्स रहे हैं। अलग-अलग फील्ड में नहीं देखी। तो क्या जो लोग जल्दी चले जाते हैं उनके बारे में हम ज्यादा बात करना पसंद करते हैं या फिर वही कहानी कि जो नहीं हुआ वो संभावनाओं से भरा पड़ा होता है और संभावनाओं पर चर्चा ज्यादा होती है।

यह शायद उन लोगों के लिए आप सोचते हैं जिनसे आपका जुड़ाव होता है या जो आपके सपनों को एक एक तामीर देते हैं या फिर सपनों को आगे बढ़ाते हैं। बहुत सारे लोग ऐसे होते हैं जो चले जाते हैं। कोई किसी के बारे में बात नहीं करता। इंसान को इंसान से हमेशा लगाव रहना चाहिए। चाहे इंसान बड़ा हो या छोटा हो। मेरा ऐसा मानना है। मैं अगर अभी भी ऑटो में बता हूं, मैं कैब में बैठता हूं, मैं कोशिश यही करता हूं कि सामने वाले से पूछूं कि भाई नाम क्या है आपका? वो कहता है फलाना नाम है। कहां के हैं? वो कहता है यहां के हैं। एक बार बात होती है। वो भी खुश मैं भी खुश। मेरे जाने के बाद अगर लोग मुझे प्रेम देते हैं या फिर यह बोलेंगे। मैं ऐसे हाइपोथेटिकली कह रहा हूं कि अरे वो तो बहुत अच्छा आदमी था। बहुत बढ़िया। तो समाज को देखने की जरूरत है।

तुम्हारी जिंदगी खुद कल सुबह तुम रहोगे या नहीं रहोगे तुम्हें पता नहीं है। मैंने यह सवाल इसलिए पूछा कि अनू कपूर ने हमारे पॉडकास्ट में कहा था कि अगर मैं आज तो मैं महान बन जाऊंगा। जीते जी लोग सेलिब्रेट नहीं करते हैं। के बाद महान बनाते हैं। पर मरने के बाद एक बहुत कमाल की चीज है। दुनिया का सच है सर ये। अगर मेरी यहां पड़ी हो। इस रूम में जितने लोग हैं सब बोलेंगे अरे को यहां से वहां रख दो। l

सब लोग आएंगे लेकिन कहेंगे अरे इस को यहां से वहां रख दो। वो नाम खत्म, वो पहचान खत्म, वो इंसान खत्म। जिसके लिए मिटे थे। जिसके लिए हम मर मिटे थे। छल, कपट सब कुछ। लोभ, लालच। अगेन हमारे पिताजी एक बड़ी अच्छी बात कहते थे। कीर्ति, कामिनी और कंचन से कौन बचा है? कीर्ति, कामिनी और कंचन से कौन बचा है? इन तीन कतारों में पूरी दुनिया तबाह है। सर आप देखिए बात सही है। कीर्ति माने यश, कामिनी माने काम, कंचन सोना, कंचन माने लक्ष्मी, लक्ष्मी ककार मतलब जो आपके दुनिया को हिला के रख देते हैं। जो एक तरह से कह सकते हैं कि एक व्याधि की तरह होते हैं। तो इन तीन ककारों में कोई बचा नहीं है। पूरा पूरी दुनिया इसी में है।

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