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नागपुर के जंगलों में छिपी, कपूर खानदान की इकलौती शहज़ादी उर्मिला कपूर का रहस्य!

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महलों की राजकुमारी जो जंगलों में खो गई। बॉलीवुड का कपूर खानदान एक ऐसा नाम है जिसे सुनते ही चकाचौंध, आलीशान हवेलियों और शोहरत की बुलंदियां याद आ जाती हैं। राज कपूर की नीली आंखें, शम्मी कपूर का डांस और शशि कपूर की मासूम मुस्कान। इस परिवार के बेटों ने पूरी दुनिया पर राज किया। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसी शानदार महल में एक राजकुमारी भी रहती थी? एक ऐसी बेटी जो रूप और खूबसूरती के मामले में किसी भी टॉप एक्ट्रेस को मात दे सकती थी। लेकिन उसका नाम इतिहास के पन्नों में कहीं खो गया। राज कपूर की इकलौती सगी बहन। वह मुंबई की फिल्मी पार्टियों के बीच पली-बढ़ी, लेकिन शादी के बाद उसे ऐसे जंगल में भेज दिया गया जहाँ न बिजली थी और न पीने का साफ पानी; एक लाड़ली बहन जिसने अपनी पूरी जिंदगी कोयला खदानों के बीच एक आम बहू की तरह बिता दी। आज हम बात करेंगे कपूर खानदान की पहली और इकलौती बेटी, उर्मिला सियाल कपूर की। एक ऐसी जीवन कहानी जो आपको अंदर तक झकझोर देगी। इस वीडियो को अंत तक जरूर देखिएगा, क्योंकि आज आप कपूर खानदान का एक ऐसा चेहरा देखेंगे जो आपने पहले कभी नहीं देखा होगा।कोलकाता में जन्म और गोद ली हुई बेटी होने का मज़ाक। हमारी कहानी शुरू होती है 30 दिसंबर 1933 को।

जगह थी कोलकाता; पृथ्वीराज कपूर और रामसरनी मेहरा के घर एक नन्ही परी का जन्म हुआ। उसका नाम उर्मिला कपूर रखा गया। राज कपूर और शम्मी कपूर उसके बड़े भाई थे। इसीलिए इस छोटी बहन को पूरे घर में बहुत लाड़-प्यार मिलता था। कुछ सालों बाद उनका सबसे छोटा भाई शशि कपूर भी पैदा हुआ। कपूर खानदान के सभी पुरुष अपने बेहद गोरे, दूधिया रंग और नीली-हरी आंखों के लिए जाने जाते थे। लेकिन उर्मिला का रंग उनके भाइयों जितना गोरा नहीं था। उनका रंग थोड़ा सांवला या गेहूंवा था। और बस फिर क्या था। तीनों भाइयों—राज, शम्मी और शशि—को अपनी इकलौती बहन से बेहद प्यार था। लेकिन वे उसे चिढ़ाने का कोई मौका नहीं छोड़ते थे। बचपन में तीनों भाई उर्मिला को घेर लेते और कहते, “तुम हमारी सगी बहन बिल्कुल नहीं हो।” “देखो हम सब कितने गोरे हैं, और तुम सांवली हो।” “मम्मी और पापा ने तुम्हें कहीं से गोद लिया होगा।” यह सुनकर उर्मिला रोने लगती और सीधे अपनी मां की गोद में छिप जाती। हालाँकि यह भाई-बहनों के बीच का एक मासूम सा मज़ाक था। लेकिन बड़े होने के बाद भी उर्मिला अक्सर हंसते-हंसते यह किस्सा याद करती थीं। कि कैसे उनके सुपरस्टार भाइयों ने उनके बचपन को यादों से भर दिया था।कॉलेज के दिन और परिवार का वह कड़ा नियम। जैसे-जैसे उर्मिला बड़ी हुईं, उनकी खूबसूरती और निखरने लगी। उनकी आँखें इतनी एक्सप्रेसिव (भावपूर्ण) थीं कि अगर वह फिल्मों में आ जातीं, तो उस दौर की लीड हीरोइनें बेरोजगार हो जातीं। लेकिन कपूर खानदान का एक सख्त और अटूट नियम था। घर के बेटे दुनिया के सामने परफॉर्म करेंगे। लेकिन बेटियां और बहुएं कभी कैमरे के सामने नहीं आएंगी। उर्मिला को भी इस नियम का सम्मान करना पड़ा था। पृथ्वीराज कपूर ने अपनी बेटी की शिक्षा में कोई कमी नहीं छोड़ी।

उर्मिला को दिल्ली के मशहूर लेडी इरविन गर्ल्स कॉलेज भेजा गया। वहाँ उन्होंने होम साइंस में अपनी ग्रेजुएशन पूरी की। कॉलेज के दिनों में भी हर कोई जानता था कि वह पृथ्वीराज कपूर की बेटी हैं। लेकिन उर्मिला बहुत सादगी से रहती थीं। उन्हें पैसों या अपने फिल्मी बैकग्राउंड का कोई घमंड नहीं था। उन्होंने एक आम लड़की की तरह अपनी पढ़ाई पूरी की और मुंबई लौट आईं। जहाँ उनके भाई राज कपूर अब फिल्म इंडस्ट्री के शोमैन बन चुके थे।आलीशान मुंबई पीछे छूट गई और खदानों की तरफ सफर शुरू हुआ। यह 1950 का दशक था, और अब उर्मिला शादी की उम्र की हो चुकी थीं। पृथ्वीराज कपूर ने अपनी इकलौती बेटी के लिए चरनजीत सियाल को दूल्हा चुना। चरनजीत नागपुर के एक बेहद प्रतिष्ठित और अमीर परिवार से ताल्लुक रखते थे, जिनका कोल माइंस (कोयला खदानों) का बहुत बड़ा बिजनेस था। शादी बड़ी धूमधाम से मनाई गई। भाई राज कपूर ने अपनी लाडली बहन को विदा किया। लेकिन इस विदा के साथ ही उर्मिला की जिंदगी 180 डिग्री बदल गई।

जरा सोचिए एक ऐसी लड़की जिसने बचपन से मुंबई के पॉश इलाकों के आलीशान बंगले देखे हों। जो हर शाम जुहू बीच की हवा में टहलती हो। जिसके घर रोज फिल्म स्टार आते हों। शादी के तुरंत बाद, वह सीधा नागपुर के दूर-दराज के माइनिंग एरिया (खनन क्षेत्रों) और जंगलों के बीच बने एक घर में रहने चली गईं। उर्मिला के बेटे, जतिन सियाल ने सालों बाद एक इंटरव्यू में अपनी मां की जिंदगी के उस दौर के बारे में बात की थी। उन्होंने कहा कि जब मां शादी के बाद नागपुर के उन माइनिंग इलाकों में गईं, तो वहाँ की जिंदगी बहुत कठोर और कठिन थी। अक्सर हफ्तों तक बिजली गायब रहती थी। पीने के पानी के लिए भी संघर्ष करना पड़ता था। चारों तरफ कोयले की धूल और घना जंगल था। लेकिन धन्य थी कपूर खानदान की वह बेटी। जिसने पल भर में इतनी अपार चामुंध और ग्लैमर को भुला दिया। उर्मिला नागपुर के एक बहुत सख्त और पारंपरिक संयुक्त परिवार में एक आदर्श बहू बनकर कदम रखा। उन्होंने कभी अपने पति या ससुराल वालों से बिजली, पानी या बुनियादी सुख-सुविधाओं को लेकर कोई शिकायत नहीं की। महलों की राजकुमारी उन जंगलों की रानी बन गई।शम्मी कपूर की दोस्ती और वह भयानक 60वां जन्मदिन। नागपुर में रहने के बाद भी भाई-बहनों के बीच का प्यार कम नहीं हुआ। उर्मिला के पति, चरनजीत सियाल, स्वभाव से बहुत मिलनसार और जिंदादिल इंसान थे। यही वजह है कि उर्मिला के मौज-मस्ती करने वाले भाई शम्मी कपूर और चरनजीत के बीच गहरी दोस्ती हो गई। शम्मी कपूर अक्सर अपनी फिल्मों की शूटिंग से वक्त निकालकर बिना किसी तामझाम के सीधे नागपुर में उर्मिला के घर पहुँच जाते थे। दोनों दोस्त,

शम्मी और चरनजीत, घंटों बैठकर माइनिंग के काम, गाड़ियों और जिंदगी पर बातें करते थे। उर्मिला अपने हाथों से खाना बनाकर अपने भाई को खिलाती थीं। वक्त गुजरता गया। उर्मिला और चरनजीत के चार बच्चे हुए। तीन बेटियों—अनुराधा, प्रीति, नमिता—और एक बेटे जतिन के साथ जिंदगी बहुत खूबसूरती से चल रही थी। लेकिन तभी साल 1993 आया। उर्मिला सियाल कपूर अपने जीवन के 60वें साल में कदम रख रही थीं। 30 दिसंबर 1993 को पूरे परिवार ने उर्मिला का 60वां जन्मदिन बहुत धूमधाम से मनाया। खूब हंसी-मजाक हुआ। बच्चों ने केक काटा, और चरनजीत ने अपनी पत्नी को बधाई दी। पूरा घर खुशियों से चहक रहा था। लेकिन किस्मत ने पर्दे के पीछे कुछ बेहद डरावना लिख रखा था। इस शानदार जश्न के ठीक अगले ही दिन, यानी 31 दिसंबर 1993 को, चरनजीत सियाल को अचानक दिल का गंभीर दौरा (मैसिव हार्ट अटैक) पड़ा और मिनटों में उनका निधन हो गया। जिस घर में कल तक जन्मदिन की धुनें बज रही थीं, अगले ही दिन वहाँ मातम छा गया। उर्मिला के सिर से उनके जीवनसाथी का साया हमेशा के लिए उठ गया। इस सदमे ने उर्मिला को अंदर से पूरी तरह तोड़ दिया था।बेटे ने पूरा किया सपना और अंतिम विदाई। पति के निधन के बाद उर्मिला बहुत शांत और धार्मिक हो गईं। लेकिन उनके जाने के बाद, उनके बेटे जतिन सियाल ने वह कर दिखाया जो कपूर खानदान की बेटियां नहीं कर पाई थीं। जतिन ने अपनी मां की आँखों में छिपी उस फिल्मी प्रतिभा को देखा था। जतिन सियाल फिल्म इंडस्ट्री में आ गए। अभिनेता बनकर उन्होंने अपनी मां के अधूरे सपने को जीया। दिलचस्प बात यह है कि जब उनके चचेरे भाई ऋषि कपूर ने फिल्म ‘आ अब लौट चलें’ का निर्देशन किया, तो उन्होंने अपनी बुआ के बेटे जतिन सियाल को उसमें एक अहम रोल दिया। इसके बाद जतिन ने सूरज बड़जात्या की मशहूर फिल्म ‘विवाह’ और कई बड़े टीवी सीरियलों में काम करके अपनी मां का नाम रोशन किया। अपने जीवन के अंतिम वर्षों में उर्मिला ने अपने बच्चों के साथ समय बिताया। और फिर वह तारीख आ ही गई। 25 जुलाई 2001। 67 वर्ष की आयु में, कपूर खानदान की इस बेहद गरिमामयी, शांत और इकलौती बेटी ने हमेशा के लिए अपनी आँखें बंद कर लीं। इस नश्वर दुनिया को छोड़कर, वह अपने भाइयों और अपने पति के पास चली गईं।एक अनसुनी सलामी। दोस्तों,

उर्मिला सियाल कपूर की यह कहानी हमें सिखाती है कि ग्लैमर और करोड़ों की चामुंध से भी बढ़कर कुछ होता है, और वह है परिवार की मर्यादा और अपनी परिस्थितियों से समझौता करके खुशी ढूंढना। जहाँ आज लोग थोड़ी सी शोहरत के लिए कुछ भी करने को तैयार हैं। वहीं उर्मिला ने कपूर खानदान की इकलौती बेटी होने के बावजूद एक गुमनाम लेकिन बहुत खूबसूरत और संतोषी जीवन जिया। कपूर खानदान की इस इकलौती राजकुमारी की जीवन कहानी आपको कैसी लगी? क्या आप पहले से उनकी इस कुर्बानी और सादगी के बारे में जानते थे? अपने विचार हमें कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें। अगर इस अनसुनी कहानी ने आपके दिल को छू लिया है, तो वीडियो को लाइक जरूर करें। इसे अपने दोस्तों के साथ शेयर करें और ऐसे ही दिलचस्प बॉलीवुड किस्सों के लिए हमारे चैनल को सब्सक्राइब करना न भूलें। मिलते हैं अगले वीडियो में। तब तक अपना ख्याल रखें। धन्यवाद।

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