दिवाली पर पटाखे जलाना अब सिर्फ पोल्यूशन का मुद्दा नहीं रह गया बल्कि यह बहस अब एंटी नेशनल तक पहुंच गई है। पहले दिया मिर्जा का पटाखों के खिलाफ वीडियो विवादों में आया और अब आलिया भट्ट की मां सोनी राजदान ने ऐसा बयान दिया है जिस पर नई बहस छिड़ सकती है।
सोनी राजदान का कहना है कि पटाखे जलाना सिर्फ सेहत के लिए नुकसानदायक नहीं बल्कि उनके हिसाब से यह लाइफ हेल्थ और देश के हित के भी खिलाफ है। अब सवाल यह है कि पटाखे जलाने को एंटीनेशनल कहना कितना सही है या फिर यह पोल्यूशन के खिलाफ जागरूकता फैलाने का एक तरीका। दरअसल दिवाली से पहले सोनी राजदान ने Instagram पर एक पोस्ट किया। इसमें उन्होंने एयर पोल्यूशन के बढ़ते खतरे पर चिंता जताई।
सोनी का कहना है कि पोल्यूशन का सबसे ज्यादा बुरा असर छोटे बच्चों पर पड़ रहा है। कई बच्चे बीमार हो रहे हैं। उन्हें स्कूल तक छोड़ना पड़ रहा है। उन्होंने लोगों खासकर पेरेंट्स से यह अपील की है कि बच्चों की सेहत को ध्यान में रखते हुए दिवाली पर पटाखे ना जलाएं। लेकिन उनके बयान में सबसे ज्यादा चर्चा उस लाइन की हो रही है जिसमें उन्होंने पटाखे जलाने को लाइफ सेहत और देश के हित के खिलाफ बताया और अब इस बयान को दिया मिर्जा की पुरानी कंट्रोवर्सी से जोड़कर देखा जा रहा है।
आपको बता दें कुछ टाइम पहले ही बीएमसी ने दिया मिर्जा का एक वीडियो शेयर किया था। इस वीडियो में दिया मिर्जा मुंबई के लोगों से बिना शोर और धुएं वाली दिवाली मनाने की अपील करती नजर आई। उन्होंने पटाखों से होने वाले पोल्यूशन और शोर को लोगों की हेल्थ के लिए नुकसानदायक बताया था। लेकिन इस वीडियो पर कुछ बीजेपी नेताओं ने आपत्ति जताई जिसके बाद बीएएमसी ने वीडियो हटा लिया। वीडियो हटाने के बाद दिया मिर्जा ने सफाई भी दी कि उनका मकसद किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था बल्कि लोगों को पर्यावरण और हेल्थ के प्रति जागरूक करना था। अब ऐसे टाइम में Sony राजदान का यह बयान सामने आया है जिसमें उन्होंने पटाखों को एंटीनेशनल कह दिया है।
तो सवाल उठना लाजमी है कि क्या बॉलीवुड में पटाखों के खिलाफ आवाज उठाने वाले सेलेब्स को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। एक तरफ लोग कहते हैं कि दिवाली खुशियों परंपराओं का फेस्टिवल है और पटाखे जलाना उनकी खुशी का हिस्सा। तो वहीं दूसरी तरफ पोल्यूशन और बच्चों की सेहत को लेकर चिंता जताने वाले लोग कहते हैं कि त्यौहार मनाने के ऐसे तरीके अपनाने चाहिए जिससे दूसरों को नुकसान ना पहुंचे। लेकिन यहां एक बड़ा सवाल है। क्या पटाखों के खिलाफ जागरूकता फैलाने के लिए एंटी नेशनल जैसे शब्द का इस्तेमाल करना जरूरी है? क्या इससे पोलुशन का मुद्दा पीछे छूट जाता है? और बहस किसी दूसरी डायरेक्शन में चली जाती है? फिलहाल सोनी राजदान के बयान ने दिवाली से पहले इस मुद्दे को फिर से चर्चा में ला दिया। अब देखना होगा कि उनके इस स्टेटमेंट पर लोगो और बॉलीवुड के बाकी सेलेब्स क्या रिएक्शन देते हैं।