अमेरिका के मिड टर्म चुनाव में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी रिपब्लिकन पार्टी को बड़ा झटका लगा है। डेमोक्रेटिक पार्टी ने सेनेट और हाउस ऑफ़ रिप्रेजेंटेटिव्स दोनों में बहुमत हासिल कर लिया है। यानी अब अमेरिकी संसद के दोनों सदनों पर डेमोक्रेट्स का दबदबा होगा। इस हार को ट्रंप की लोकप्रियता और उनकी सरकार के कामकाज पर जनता के फैसले के तौर पर देखा जा रहा है। लेकिन ट्रंप अपनी हार मानने के बजाय इसकी वजह पार्टी के उम्मीदवारों को बता रहे हैं। उनका कहना है कि अगर वह खुद चुनाव लड़ रहे होते तो रिपब्लिकन पार्टी बड़े अंतर से जीतती। दिलचस्प बात यह है कि ट्रंप ने डेमोक्रेट्स की तारीफ भी की है।
उन्होंने कहा है कि विरोधी पार्टी ने अच्छा काम किया है। आइए समझते हैं कि चुनाव में हार के बाद ट्रंप ने क्या-क्या कहा और इसके राजनीतिक मायने क्या है। ट्रंप ने चुनाव से पहले अपनी पार्टी के उम्मीदवारों के लिए जमकर प्रचार किया था। उन्होंने रैलियां की थी और समर्थकों से अपील की कि वे उम्मीदवारों को ऐसे वोट दें जैसे खुद ट्रंप चुनाव लड़ रहे हो। लेकिन, नतीजे आए, तो पार्टी को कई बड़े राज्यों में हार का सामना करना पड़ा। 3 नवंबर को चुनाव के नतीजे आने के दौरान ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफार्म ट्रुथ सोशल पर लिखा, “आई वाज़ंट ऑन द बैलेट एंड इफ आई वाज़, वी वुड हैव वन इन अ लैंडस्लाइड।”
यानी मैं बैलेट पर नहीं था। अगर मैं चुनाव लड़ रहा होता, तो हम भारी अंतर से जीतते। ट्रंप का इशारा साफ था। उनका मानना था कि उनकी लोकप्रियता की वजह से रिपब्लिकन उम्मीदवारों को जीत मिल सकती थी। लेकिन चुनाव के बाद ट्रंप ने डेमोक्रेट्स की तारीफ भी की। न्यूज़ को दिए एक टेलीफोनिक इंटरव्यू में उन्होंने कहा डेमोक्रेट्स ने अच्छा काम किया है। उन्होंने कड़ी मेहनत की। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें चुनाव के नतीजे अपने खिलाफ फैसले नहीं लगते। ट्रंप के मुताबिक पिछले 2 साल राष्ट्रपति पद के इतिहास के सबसे अच्छे साल रहे हैं।
तो फिर ट्रंप ने हार का ठीकरा किस पर फोड़ा? ट्रंप ने कहा कि कई जगहों पर लोगों को रिपब्लिकन उम्मीदवार पसंद नहीं आए। उनका मानना था कि कुछ उम्मीदवारों के प्रति उनके समर्थकों में उत्साह नहीं था। इसलिए वे वोट डालने के लिए घरों से बाहर नहीं निकले। यानी ट्रंप ने अपनी सरकार की नीतियों को हार की वजह मानने के बजाय उम्मीदवारों को जिम्मेदार ठहराया। ट्रंप ने टेक्सस के गवर्नर ग्रेग एबोट को भी निशाने पर लिया है। एबोट को डेमोक्रेटिक उम्मीदवार जीना हिनोजोसा ने हरा दिया है।
रिपब्लिकन पार्टी के लिए बड़ा झटका था। टेक्सस को लंबे समय से रिपब्लिकन पार्टी का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है। इस हार के बाद ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा कि अगर एबोट पिछले 6 महीनों में अपने पुराने राजनीतिक रुख से नहीं हटे होते तो उन्हें हार नहीं मिलती। चुनाव में सिर्फ टेक्सिस ही नहीं कई दूसरे मजबूत रिपब्लिकन राज्यों में भी डेमोक्रेट्स ने जीत दर्ज की है। एपी की रिपोर्ट के मुताबिक डेमोक्रेट्स ने कैंसिस, आयोवा, टेक्सिस, ओहायो, मेन, नॉर्थ कैरोलना और साउथ कैरोलना की सेनेट की सीटें जीती। हाउस में भी उन्होंने कई ऐसी सीटें छीन ली जहां 2024 में ट्रंप को बड़ी बढ़त मिली थी। अब सवाल है कि इस हार का ट्रंप की सरकार पर क्या असर पड़ेगा? अमेरिका में राष्ट्रपति का कार्यकाल 4 साल का होता है। लेकिन हर दो साल में मिड टर्म चुनाव होते हैं। इनमें हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स की सभी सीटों और सेनेट की करीब 1/3 सीटों पर चुनाव होती है।
अब दोनों सदनों में डेमोक्रेट्स का बहुमत है। इसका मतलब है कि ट्रंप के लिए अपने एजेंडे को आगे बढ़ाना आसान नहीं होगा। डेमोक्रेट्स ट्रंप प्रशासन के फैसलों की जांच करवा सकते हैं। बड़े अधिकारियों को सवालों के लिए बुला सकते हैं। यहां तक कि महाभियोग की प्रक्रिया पर भी चर्चा हो सकती है। हालांकि ट्रंप के पास डेमोक्रेट्स के विधेयकों को वीटो करने का अधिकार रहेगा। न्यूज़ एजेंसी एपी के सर्वे के मुताबिक महंगाई, बढ़ती कीमतें ईरान के साथ युद्ध और सरकारी भ्रष्टाचार जैसे मुद्दे मतदाताओं की चिंता में शामिल थे। करीब 3/4 मतदाताओं ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था को खराब या बहुत खराब बताया। यानी चुनाव के नतीजे ने यानी चुनाव के नतीजों ने ट्रंप के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है।
अब उन्हें सिर्फ अपनी पार्टी को संभालना नहीं है बल्कि संसद में मजबूत विपक्ष के साथ भी काम करना होगा। बहरहाल ट्रम्प भले ही इस हार को अपने खिलाफ फैसला मानने से इंकार कर रहे हो लेकिन अगले 2 साल उनके लिए राजनीतिक तौर पर काफी मुश्किल हो सकता है।