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वेदांत श्रीवास्तव कौन जिसने CBSE का पूरा सिस्टम हिला दिया?

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वेदांत श्रीवास्तव सोशल मीडिया पर सीबीएसई 12वीं बोर्ड देने वाले इस लड़के की कहानी वायरल है। जो भी इस लड़के की कहानी पढ़ देख रहा है वो सिर्फ यही सोच रहा है कि ऐसे ना जाने कितने छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हो चुका होगा और हो रहा होगा। क्या है वेदांत की कहानी? क्यों ट्रूल्स उन पर निशाना साध रहे हैं और आखिर क्यों कुछ लोग वेदांत के पीछे लग गए हैं? क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि आप साल भर रात दिन जागकर पढ़ाई करें। परीक्षा में हर सवाल का सही जवाब लिखकर आए। लेकिन जब रिजल्ट खुले तो आपके नंबर गायब हो जाए।

और जब आप अपनी कॉपी मांगे तो उस कॉपी पर आपकी लिखावट होगी ही ना। जी हां, यह कोई फिल्मी कहानी नहीं है। यह हकीकत है दिल्ली के वेदांत श्रीवास्तव की। सीबीएसई की रिवैल्यूएशन विंडो खुली क्या? वेदांत श्रीवास्तव के केस के साथ पूरे देश के एजुकेशन सिस्टम की कलाई खुलकर सामने आ गई। कहानी शुरू होती है सीबीएसई 12वीं के रिजल्ट के दिन से। वेदांत श्रीवास्तव जिसने पूरे साल मेहनत की उसे फिजिक्स के पेपर में बेहद कम अंक मिले।

वेदांत हैरान था, परेशान था। उसे पूरा भरोसा था कि उसका पेपर बेहतरीन गया था। फिर इतने कम नंबर कैसे आ सकते हैं? वेदांत उसके परिवार ने हर तरीके से सोचा कि अब क्या करना चाहिए? जिस वेदांत के केमिस्ट्री में 91 अंक आए, कंप्यूटर साइंस में 91 अंक आए, फिजिकल एजुकेशन में भी 91 अंक आए, इंग्लिश में 86 नंबर मिले, उसको फिजिक्स में 65 अंक कैसे मिले? फिजिक्स में 65 नंबर आने का मतलब यह भी था कि वेदांत का टोटल ओवरऑल परसेंटेज भी इससे बिगड़ जाता है।

मतलब यह कि इस कम परसेंट की वजह से वेदांत के हाथ से वो बेहद महत्वपूर्ण और जिंदगी बदलने वाले अवसर हमेशा हमेशा के लिए निकल सकते थे। जिसके लिए उसने बरसों तपस्या की थी। परिवार का कहना है कि बेहतर स्कोर होने पर वेदांत देश की सबसे प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग परीक्षा जेई और भारतीय सेना की आर्मी टेक्निकल एंट्री स्कीम जैसी बड़ी प्रक्रियाओं में एक बेहद मजबूत स्थिति में वो खड़ा होता। इन सपनों को पंख देने के लिए खूब मेहनत की लेकिन फिजिक्स का स्कोर देखकर वेदांत शॉक्ड था। मेहनत की है तो आवाज उठाना लाजमी था। मामला किसी टोटलिंग एरर से आगे का लग रहा था। वेदांत चुक नहीं बैठा।

उसने सीबीएसई के नियमों के तहत अपनी आंसर शीट की स्कैन कॉपी के लिए अप्लाई कर दिया। 23 मई को जब उसके हाथ में फिजिक्स की वो आंसर शीट आई तो वेदांत के पैरों तले जमीन खिसक गई। वेदांत ने जब अपनी कॉपी देखी तो उसका पहला पन्ना जिस पर उसका रोल नंबर और डिटेल्स थी वो तो उसी की थी। लेकिन जैसे [संगीत] ही उसने पन्ना पलटा अंदर की हैंडराइटिंग उसकी थी ही नहीं। अंदर वह सवाल हल किए गए जो वेदांत ने कभी छुए तक नहीं थे।

यानी पहले पन्ने को छोड़कर अंदर की पूरी की पूरी आंसर शीट जो है वो किसी दूसरे छात्र की थी। यानी किसी दूसरे छात्र की कॉपी से स्वाइप कर दी गई थी। इसे अब लापरवाही कहें या ब्लंडर कहें। वेदांत ने सिर्फ फिजिक्स ही नहीं बल्कि मैथ्स, इंग्लिश और कंप्यूटर साइंस की आंसर शीट्स भी मंगवाई थी। बाकी सभी विषयों की कॉपियों में लिखावट एक जैसी दिखाई देती है। लेकिन फिजिक्स की कॉपी में लिखावट यानी हैंडराइटिंग पूरी तरह अलग नजर आती है।

इस मामले ने तूल पकड़ा तो सोशल मीडिया पर सीबीएसई और सरकार को घेरा गया। सवाल पूछे गए कि आखिर ये कैसी व्यवस्था है? क्या एक छात्र का पेपर ही चेंज हो जाता है? सीबीएसई ने इस साल आपको याद होगा कॉपियों को जांचने के लिए ओएसएम यानी कि ऑन स्क्रीन मार्किंग सिस्टम का इस्तेमाल किया था। दावे भरे थे। यह डिजिटल सिस्टम पूरी तरह से पारदर्शी है। लेकिन वेदांत के दावे उस सिस्टम पर सवाल खड़े करते हैं। डिजिटल स्कैनिंग और अपलोडिंग के दौरान कॉपियों का शायद ऐसा घालमेल हुआ ना जाने कितने छात्रों की किस्मत किसी और के हाथों में चली गई। वेदांत ने सवाल उठाया कि अगर उसके रोल नंबर पर किसी और की कॉपी अपलोड हुई है तो फिर खुद उसकी असली फिजिक्स की कॉपी इस समय कहां है और उस उसे किस आधार पर नंबर दिए गए हैं।

उधर वेदांत सोशल मीडिया पर कई लोगों के निशाने पर भी आ गए। वेदांत के अकाउंट का लोकेशन यानी सोशल मीडिया अकाउंट का लोकेशन साउथ एशिया दिखा तो लोगों ने सवाल खड़े कर दिए। उन्हें पाकिस्तानी कहा। खैर लेफ्ट राइट की जद में अक्सर कई आ जाते हैं। वैसे सीबीएसई ने भी इस मामले पर रिएक्ट किया है। सीबीएसई अधिकारियों ने छात्रों को सलाह दी है कि वो रीवैल्यूएशन पोर्टल दोबारा खुलने का इंतजार करें और उसी पोर्टल के माध्यम से एक ऑफिशियल शिकायत जो है कंप्लेंट वो दर्ज करें। बोर्ड अधिकारियों ने यह भी आश्वासन दिया कि छात्र की शिकायत की पूरी जांच की जाएगी। हालांकि सीबीएसई ने फिलहाल आंसर शीट में कोई गलती नहीं मानी लेकिन शिकायत मिलने के बाद जांच का भरोसा जरूर दिया। सीबीएसई की ऑन स्क्रीन मार्किंग इस साल विवादों के घेरे में रही। छात्रों का गुस्सा लगातार सीबीएसई और सरकार पर फूट रहा है। छात्रों का आरोप है कि कॉपियों की स्कैनिंग बेहद खराब क्वालिटी में हुई है।

जिससे लिखे हुए आंसर्स और डायग्राम्स ठीक से दिखाई नहीं दे रहे। छात्र सवाल उठा रहे हैं कि जब कॉपी पढ़ी ही नहीं जा सकती तो एग्जामिनर्स ने नंबर कैसे दिए? छात्रों का दावा है कि इस डिजिटल स्कैनिंग, लॉटरी और सख्त स्टेप मार्किंग ना होने के कारण इस साल 12वीं का कुल पास परसेंटेज जो है वो गिर गया जो हाल के सालों में सबसे कम है। कई जेई क्वालिफाइड मेधावी छात्रों को भी बोर्ड में अप्रत्याशित रूप से बेहद कम नंबर मिलने की बात सामने आई

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