ये जितनी बार आज ये दास्तान है हुस्न की उस तिलिस्मी मल्लिका की जिसके चेहरे की एक मासूम मुस्कान और आंखों के जादुई इशारों पर उस जमाने के बड़े-बड़े सुपरस्टार्स और करोड़ों फैंस अपना दिल हार बैठते थे। तेरा बीमार मेरा दिल मेरा जीना हुआ मुश्किल तेरा बीमार आज बात उस बला की खूबसूरत चेहरे की जो पर्दे पर नजर आता तो लोग फिल्मों की कहानी भूलकर सिर्फ उसे ही देखते रह जाते क्योंकि वो सिर्फ एक अदाकारा नहीं थी वो हिंदी सिनेमा का एक मुकम्मल ख्वाब थी .
जिसके हर ठुमके में हवाह हवाई का शोर था जिसकी आंखों में नागिन सा सम्मोहन था मैं तेरी दुश्मन दुश्मन मैं नागिन और उसकी अदाओं में ऐसा जादू कि बड़े-बड़े शहंशाह भी उसके सामने फीके पड़ जाते थे। आज ये कहानी है उस अभिनेत्री की जिसने सिर्फ फिल्मों में नहीं बल्कि पूरे हिंदुस्तान के दिलों पर राज किया और खुद बन गई भारतीय सिनेमा की पहली लेडी सुपरस्टार। सूरत ही मैं सूरत ही मैं लेकिन दोस्तों क्या आप जानते हैं कि इसी चकाचौंध अपार शोहरत और अरबों रुपए की दौलत के पीछे संघर्षों गिल्ट और धोखे की एक ऐसी अंधेरी गली भी थी
जिसने इस मल्लिका को अंदर तक खोखला कर दिया था। कि तूने क्या किया? ये तूने क्या किया? क्या किया? क्या आप जानते हैं कि जिस अभिनेत्री को दुनिया सर आंखों पर बिठाती थी, उसी पर यह संगीन इल्जाम लगा कि उसने एक हंसतेखेलते परिवार को उजाड़ कर पैसे और रसूख के दम पर किसी का सुहाग छीना है। दुनिया की कोई भी ताकत तुम्हें मुझसे नहीं बांट सकती। क्या आपको पता है कि जिस शख्स को वो दुनिया के सामने अपना भाई कहती थी जिसे उन्होंने सरेआम राखी बांधी थी। आगे चलकर उसी शख्स की वो सौतन बन बैठी। आखिर क्या थी उस और सीक्रेट शादी की सच्चाई। जिसने बॉलीवुड के एक दिग्गज सुपरस्टार की पत्नी को हत्या की कगार पर धकेल दिया था। और क्यों अपने ढलते करियर और ढलते उम्र को छुपाने के लिए इस हसीना ने खुद को एक ऐसे और दवाइयों के जाल में झोंक दिया जिसने उनके जिस्म को अंदर से बेजान कर दिया था। यह कोई और नहीं बल्कि हम बात कर रहे हैं दिग्गज अभिनेत्री श्रीदेवी की। हाथों से चूड़ियां आज बॉलीवुड नवेल के इस सबसे सनसनीखेज और हैरान कर देने वाले एपिसोड में हम पर्दे के पीछे छुपे उस कड़वे सच से पर्दा उठाएंगे। जानेंगे मिथुन चक्रवर्ती से मिली वो भयंकर बेवफा बेवफाई। बोनी कपूर के साथ वो विवादित रिश्ता, अनिल कपूर के साथ वो अजीब से संबंध और दुबई के उस होटल के बाथ टब में गुजरी वो आखिरी खौफनाक रात जिसने पूरी दुनिया को हिला कर रख दिया। की पहली महिला सुपरस्टार अब हमारे बीच नहीं रही।
बड़ी खबर आपको बता दें श्रीदेवी की की खबर पर किसी को भी भरोसा करना मुश्किल हो रहा है।
इस लेडी सुपरस्टार की जिंदगी की किताब का वो पहला और सबसे अंधेरा पन्ना जहां चकाचौंध नहीं बल्कि एक मासूम सी बच्ची की चीखें और सन्नाटा पसरा हुआ था। तारीख थी 13 अगस्त साल 1963 जब तमिलनाडु के शिवकाशी में एक छोटी सी बच्ची ने जन्म लिया। जिसका नाम रखा गया श्री अम्मा यंगर अयन जिसे आज दुनिया श्री देवी के नाम से जानती है। साल की उम्र से कैमरे का सामना करने वाली इस मल्लिका की जिंदगी कितनी हसीन रही होगी। लेकिन दोस्तों हकीकत इसके बिल्कुल उलट थी। श्रीदेवी का अपना कोई बचपन था ही नहीं। वह जब घुटनों के बल चलना सीख रही थी, तब उनकी मां राजेश्वरी देवी ने उन्हें पैसा कमाने के इस बेरहम बाजार में झोंक दिया था।
उनकी मां बेहद कड़क, सख्त और पैसों की लालची महिला थी। उन्होंने श्रीदेवी को कभी एक बेटी की ममता नहीं दी बल्कि उन्हें हमेशा पैसा कमाने वाली मशीन की तरह देखा। श्रीदेवी दिन रात जागकर जो भी खून पसीना बहाती थी उनकी मां वो सारे पैसे अपनी मुट्ठी में कैद कर लेती थी। यहां तक कि जब श्रीदेवी बड़ी होकर देश की नंबर वन एक्ट्रेस बन गई तब भी उन्हें अपनी पसंद के कपड़े खरीदने या अपनी मर्जी से एक रुपया भी खर्च करने की आजादी नहीं थी। वह अपने ही घर में एक सोने के पिंजरे की मैना बनकर रह गई थी।
अपनी सगी मां के इसी मानसिक शोषण, बंदिशों और कड़े पहरे ने श्रीदेवी को अंदर से इतना डरा हुआ और खोखला बना दिया था कि वो ता जिंदगी किसी ना किसी मर्द के कांधे पर अपना सहारा ढूंढती रही। मुझको हमेशा चाहोगे। मां के इसी कड़े पहरे और मानसिक घुटन के बीच जब श्रीदेवी ने साउथ से निकलकर बॉलीवुड की दुनिया में कदम रखा तो उनकी किस्मत का सितारा चमका सुपरस्टार जितेंद्र के साथ। नैनो में सपना सपनों में सजना सजना पे दिल आ गया। साल 1983 में आई फिल्म हिम्मतवाला ने उन्हें रातोंरात पूरे देश की धड़कन बना दिया। इसी दौरान जितेंद्र और श्रीदेवी के अफेयर के चर्चे इस कदर उड़े कि जितेंद्र की शादीशुदा जिंदगी में तूफान आ गया।
आएगा वो हम करेंगे। तुम कौन होते? दोस्तों इसी सेट से जुड़ा एक बेहद दिलचस्प और विवादित किस्सा है। उस दौर में श्रीदेवी और उनकी सबसे बड़ी राइवल एक्ट्रेस जया प्रदा के बीच भयंकर कोल्ड वॉर चल रहा था। दोनों एक दूसरे से बात करना तो दूर देखना भी पसंद नहीं करती थी। तुम्हारे दूध का हिसाब मैं कहां चुका सकती हूं बहन? ये ये तुम्हारा बच्चा है। मेरा नहीं देंगे। मैं तुम्हें इतनी बड़ी कुर्बानी नहीं करने दूंगी। ये अन्याय है।
एक दिन जितेंद्र और राजेश खन्ना ने इन दोनों की दुश्मनी खत्म कराने के लिए एक तरकीब निकाली। उन्होंने सेट पर श्रीदेवी और जया प्रदा को एक ही मेकअप रूम में बंद कर दिया और बाहर से ताला लगा दिया। दोनों स्टार्स को लगा कि एक-दो घंटे साथ रहने से इनके बीच की कड़वाहट थोड़ी दूर हो जाएगी। लेकिन साहब जब 2 घंटे बाद दरवाजा खोला गया तो नजारा हैरान करने वाला था। कमरे के एक कोने में श्रीदेवी मुंह फुलाकर बैठी थी और दूसरे कोने में जयाप्रदा। दोनों ने 2 घंटे में एक शब्द भी नहीं बोला था। इस बचपने और ईगो क्लैश ने उस दौर में खूब सुर्खियां बटोरी थी। आपके पास बहुत पैसा है। इसलिए आपको पैसे फेंकने की आदत हो गई है। मगर मुझे फेंके हुए पैसे उठाने की बिल्कुल आदत नहीं। जितेंद्र के साथ उड़ती अफवाहों और जया प्रदा के साथ इस कोल्ड वॉर के बीच श्रीदेवी बॉलीवुड की नंबर वन लेडी सुपरस्टार के सिंहासन पर बैठ चुकी थी।
लेकिन बचपन से मिली वो तनहाई और मां का वो पहरा अब भी उनके दिल को कचोट रहा था। वो तड़प रही थी किसी ऐसे सच्चे हमसफर के लिए जो उन्हें इस घुटन से आजाद करा सके और तभी साल 1984 में उनकी जिंदगी में एंट्री होती है उस जमाने के सबसे बड़े डिस्को डांसर मिथुन चक्रवर्ती की और यहीं से शुरू होती है प्यार बगावत और एक हंसतेखेलते परिवार की तबाही का वो खौफनाक मंजर जिसने पूरे बॉलीवुड को हिला कर रख दिया था। क्या हुआ? कपड़ा? तुम तो शहर से कल आने वाली थी। देर तो हुई? तुम्हारे लिए कुछ खरीद रहा था। श्रीदेवी एक ऐसे मकाम पर थी जहां उनके करियर का सूरज तो सातवें आसमान पर था। लेकिन निजी जिंदगी में एक ऐसा बवंडर उठ रहा था .
जो कई घरों को तबाह करने वाला था। आंखों आंखों में भी हो जाती है। लेकिन यहां तो वो बात भी नहीं हो सकती। यह वो दौर था जब पर्दे पर श्रीदेवी और डिस्को डांसर मिथुन चक्रवर्ती की जोड़ी आग लगा रही थी। जाग उठा इंसान के सेट पर काम करते-करते यह दोनों कब एक दूसरे के प्यार में इस कदर गिरफ्त हो गए कि उन्हें दुनिया की परवाह ही नहीं रही। फोटो अरे गुरु कोई देख लेगा। अरे देख लेगा तो क्या होगा? यही कहेगा ना तेरा कोई लफड़ा चल रहा है नका पुश डाकू के साथ।
लेकिन दोस्तों इस प्यार के रास्ते में एक बहुत बड़ी दीवार थी। मिथुन चक्रवर्ती पहले से शादीशुदा थे। और उनकी पत्नी थी योगिता बाली। मिथुन ने श्रीदेवी को भरोसा दिलाया था कि वह योगिता को तलाक दे देंगे। प्यार में अंधे हो चुकी श्रीदेवी ने साल 1985 में मिथुन के साथ गुपचुप तरीके से कोर्ट मैरिज कर ली। कई महीनों तक ये शादी एक गहरा राज बनी रही। लेकिन जब यह कड़वा सच योगिता बाली के सामने आया तो कपूर खानदान और पूरे बॉलीवुड में भूचाल आ गया। योगिता बाली इस धोखे को बर्दाश्त नहीं कर पाई और उन्होंने एक बेहद खौफनाक और आत्मघाती कदम उठाने का फैसला कर लिया। योगिता ने सरेआम मीडिया में बयान दिया कि अगर मिथुन ने श्रीदेवी को नहीं छोड़ा तो वो कर लेंगी।
वह अपनी जान दे देंगी। अपनी पत्नी के इस रौद्र रूप और आत्या की धमकी को देखकर मिथुन के पैर पीछे खींच गए। वो श्रीदेवी से प्यार तो करते थे लेकिन अपना घर और बच्चे नहीं छोड़ पा रहे थे। मिथुन की इस भयंकर बेवफा बेवफाई ने श्रीदेवी को अंदर से तोड़ कर रख दिया। आखिरकार साल 1988 में इनका तलाक हुआ और श्रीदेवी के हिस्से आई एक गहरी तन्हाई। मिथुन से मिले इस धोखे के बाद श्रीदेवी को एक मानसिक और भावनात्मक सहारे की सख्त जरूरत थी।
और इसी दौरान उनकी जिंदगी में एंट्री होती है फिल्म प्रोडूसर बोनी कपूर की। बोनी कपूर कई सालों से श्रीदेवी के दीवाने थे। लेकिन दोस्तों यहां कहानी में एक ऐसा मोड़ आता है जो आज भी लोगों को हैरान कर देता है। जब बोनी कपूर श्रीदेवी के करीब आने की कोशिश कर रहे थे तब समाज के तानों और अफवाहों से बचने के लिए श्रीदेवी बोनी कपूर की पहली पत्नी मोना शौरी कपूर के घर रहने लगी। मोना ने श्रीदेवी को अपनी सगी बहन की तरह माना। उन्हें अपने घर में पनाह दी और बस इसी दौरान दुनिया के सामने अपने रिश्ते को पाक साफ दिखाने के लिए श्रीदेवी ने बोनी कपूर की कलाई पर सरेआम राखी बांधी थी। उन्होंने बोनी को अपना भाई कहा था। लेकिन दोस्तों वक्त का पहिया ऐसा घूमा कि जिस शख्स को भाई कहकर राखी बांधी उसी के साथ श्रीदेवी के गुपचुप अफेयर की खबरें उड़ने लगी। मोना कपूर को कानो कान खबर नहीं थी कि जिस लड़की को वो अपनी बहन मानकर घर पर रख रही हैं।
वहीं उनकी पीठ में छुरा घोंप रही थी। और इस रिश्ते का सबसे खतरनाक विस्फोट तब हुआ। जब साल 1996 में श्रीदेवी शादी से पहले ही प्रेग्नेंट हो गई। जब ये बात मोना कपूर के सामने आई तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। बोनी कपूर ने अपनी पहली पत्नी और दो मासूम बच्चों अर्जुन कपूर और अंशुला को तड़पता हुआ छोड़ दिया और अपनी ही मुंह बोली बहन यानी कि श्रीदेवी से शादी रचा ली। मोना कपूर इस सदमे से कभी उभर नहीं पाई। रात दिन उन्हें यह गम अंदर ही अंदर खाए जा रहा था। वह ना दिन को चैन से सांस ले पाती थी और ना ही रातों में सुकून की नींद सो पाती थी। उनके सीने में दुखों का ऐसा पहाड़ बना जिसने कैंसर का रूप ले लिया और अंत में इसी बीमारी की वजह से घुट-घुट कर वो इस दुनिया से रुखसत हो गई।
बोनी कपूर से शादी करने के बाद श्रीदेवी कपूर खानदान की बहू तो बन गई लेकिन इस शादी ने उनके और बोनी के छोटे भाई यानी सुपरस्टार अनिल कपूर के रिश्तों में एक अजीब सी खटास पैदा कर दी। पर्दे पर अनिल कपूर और श्रीदेवी की जोड़ी ने मिस्टर इंडिया और जुदाई जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्में दी थी। तेरे बिना सजना दरअसल अनिल कपूर अपनी भाभी मोना कपूर के बेहद करीब थे और वो बोनी कपूर के इस फैसले के सख्त खिलाफ थे कि उन्होंने मोना को धोखा दिया। इसके अलावा फिल्मी गलियारों में यह चर्चा भी आम थी कि श्रीदेवी अनिल कपूर की फिल्मों में अपनी फीस और स्टारडम को लेकर बेहद कड़क रुख अपनाती थी। जो अनिल कपूर को नागवार गुजरता था। पारिवारिक महफिलों में भी दोनों के बीच एक अजीब सा सन्नाटा पसरा रहता था, जो इस बात की गवाही देता था कि रिश्तों की यह डोर अंदर से कितनी कमजोर हो चुकी थी। सालों गुजर गए।
श्रीदेवी दो बेटियों जानवी कपूर और खुशी कपूर की मां बन चुकी थी। लेकिन एक लेडी सुपरस्टार के सिर पर हमेशा जवान दिखने का हमेशा नंबर वन रहने का एक ऐसा भयंकर जिसने उनकी जिंदगी को एक चलती फिरती दवाइयों की दुकान बना दिया। ढलती उम्र को छुपाने और बॉलीवुड में दोबारा कमबैक करने के लिए श्रीदेवी ने अपने जिस्म के साथ वो खिलवाड़ किया जिसे सुनकर रूह कांप जाती है। अपनी स्किन को टाइट रखने और चेहरे की झुर्रियों को मिटाने के लिए उन्होंने कई खतरनाक प्लास्टिक सर्जरीज और बोटोक्स ट्रीटमेंट्स का सहारा लिया। डॉक्टर्स की सख्त मनाही के बावजूद उन्होंने अपने खाने में नमक का इस्तेमाल पूरी तरह से बंद कर दिया ताकि उनकी बॉडी में वाटर रिटेंशन ना हो और वो स्क्रीन पर मोटी ना दिखे। नमक बंद होने के कारण उनका ब्लड प्रेशर हमेशा खतरनाक रूप से लो रहता था। इतना ही नहीं अंदरूनी अकेलेपन, और स्लिम दिखने के इस पागलपन के चक्कर में वो कई तरह की और डाइट यानी दवाओं के हैवी डोज़ लेने लगी थी। धीरे-धीरे यह दवाइयां उनके लिए एक ऐसा नशा बन गई जिसके बिना उनका गुजारा नामुमकिन था। उनका शरीर अंदर से पूरी तरह से खोखला और बेजान हो चुका था। वह महज एक परछाई बनकर रह गई थी और बस अपनी बेटियों को अपने से भी बड़ा नाम दिलाना चाहती थी। वह अपनी बड़ी बेटी जानवी कपूर को बॉलीवुड की अगली सुपरस्टार बनाना चाहती थी। उन्होंने अपनी बेटी के डेब्यू फिल्म धड़क के लिए अपनी जान लगा दी थी। लेकिन किस्मत का खेल देखिए।
आज उनके बेटियों को नेपोटिज्म के तानों और लगातार मिल रही फ्लॉप फिल्मों का सामना करना पड़ रहा है। लेकिन अफसोस अपनी बेटे की पहली फिल्म देखने के लिए भी श्रीदेवी इस दुनिया में मौजूद नहीं थी। लाल मेरा शंकर वो तारीख थी 24 फरवरी साल 2018। दुबई का आलीशान जुमेरा एमिरेट्स टावर्स होटल। एक पारिवारिक शादी में शामिल होने गई श्रीदेवी अपने कमरे के बाथरूम में तैयार होने जाती हैं। भोले कपूर कमरे में उनका इंतजार कर रहे थे। जब काफी देर तक बाथरूम का दरवाजा नहीं खुला, तो दरवाजा तोड़ा गया, और जो मंजर सामने था, उसने पूरे हिंदुस्तान के होश उड़ा दिए। भारत की पहली लेडी सुपरस्टार बाथ टब में बेसुध पड़ी थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कहा गया कि दुर्घटनावश डूबने की वजह से उनकी हुई।
लेकिन आज भी यह सवाल हवा में तैर रहा है कि क्या महज 5 फीट के बाथ टब में जिसमें घुटनों तक पानी आता है। कोई तंदुरुस्त इंसान इस तरह डूबकर क्या मर सकता है? या फिर उस रात उनके जिस्म में दौड़ रहे एंटी डिप्रेसेंट दवाओं के हाई डोज, लो ब्लड प्रेशर और उस अंदरूनी तनाव ने उनकी जान ले ली थी। लेकिन दोस्तों बात सिर्फ दवाओं के हैवी डोज़ या लो ब्लड प्रेशर तक ही सीमित नहीं थी। दुबई के उस बंद और आलीशान बाथरूम की दीवारों के पीछे एक ऐसा खौफनाक सच भी दफन था जिसने इस हादसे को हिंदी सिनेमा के इतिहास के सबसे बड़े मर्डर मिस्ट्री के शक के घेरे में लाकर खड़ा कर दिया। इस रहस्यमई मौत के बाद सोशल मीडिया से लेकर देश की अदालतों तक में ऐसी कई याचनाएं दायर हुई जिन्होंने सीधे बोनी कपूर की तरफ उंगली उठाई। इस थ्योरी के पीछे एक ऐसी सनसनीखेज वजह बताई जाती है जिसे सुनकर किसी के भी होश उड़ जाए।
खबरों और रिपोर्ट्स के मुताबिक दुबई जाने से कुछ समय पहले ही ओमान में श्रीदेवी के नाम पर एक बहुत बड़ी लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी ली गई थी और साहिब यह कोई मामूली रकम नहीं थी। दावा किया जाता है कि यह इंश्योरेंस पॉलिसी पूरे 240 करोड़ों की थी। लेकिन इस पॉलिसी के पीछे एक बेहद अजीब और डरावनी शर्त जुड़ी हुई थी। शर्त यह थी कि इस पॉलिसी के ₹240 करोड़ अगर श्रीदेवी की मौत यूएई यानी संयुक्त अरब अमीरात की धरती पर होती। और इत्तेफाक देखिए दोस्तों, कि शादी खत्म होने के बाद जब पूरा परिवार भारत वापस लौट आया, तब बोनी कपूर अचानक श्रीदेवी को सरप्राइज देने के बहाने वापस दुबई के उसी होटल के कमरे में पहुंच जाते हैं, और उनके पहुंचने के महज कुछ ही घंटों के भीतर श्रीदेवी की हो जाती है।
इसी वजह से कई रिटायर्ड पुलिस ऑफिसर्स और दिल्ली हाई कोर्ट के वकीलों ने अदालतों में अर्जी लगाकर यह गंभीर शक जताया कि क्या बोनी कपूर उस वक्त कर्ज के उस गहरे दलदल में डूबे हुए थे जिसे बाहर निकलने के लिए उन्होंने पैसों की खातिर खुद इस खौफनाक साजिश को अंजाम दिया। क्या 240 करोड़ की उस भारीभरकम रकम को हासिल करने के लिए भारत की पहली लेडी सुपरस्टार को उस बाथ टब में डुबोकर मार दिया गया। लगी आज साध घड़ी है। हालांकि दुबई पुलिस की सख्त जांच और रिपोर्ट ने इसे महज एक एक्सीडेंटल ड्राउनिंग यानी हादसा करार देकर केस को बंद कर दिया।
कानून के इस पुजारिन को कानून का दुश्मन किसने बनाया? ये आप अच्छी तरह जानते हैं भैया। खुद कानून ने। और बोनी कपूर को इस मामले में क्लीन चिट मिल गई। लेकिन दोस्तों भले ही कानूनन इस मामले पर पर्दा डल गया हो पर आज भी लोगों के जहन में यह सवाल एक गहरे जख्म की तरह जिंदा है कि क्या वो सच में एक हादसा था या फिर पैसों की में लिखा गया एक क्लाइमेक्स। इस 240 करोड़ के खौफनाक शक ने पूरी दुनिया के रोंगटे खड़े कर दिए।
लेकिन जब लोगों ने इस दर्दनाक अंत और पैसों के इस बाजी को श्रीदेवी के पुराने अतीत से जोड़कर देखा तो सबके सामने वो अंतहीन इंसाफ आया जो किसी भी अदालत के फैसले से कहीं ज्यादा बड़ा था। तो दोस्तों आज जब हम श्रीदेवी की इस पूरी दास्तान को देखते हैं तो दिल में एक अजीब सी कशमकश पैदा होती है। दुनिया इसे महज एक इत्तेफाक कह सकती है लेकिन कई लोग इसे कर्मा यानी कर्मों का वो अंतहीन इंसाफ मानते हैं जो लौट कर जरूर आता है। तू ना जा मेरे बादशाह के लिए। कहा जाता है कि इतिहास खुद को दोहराता है। श्रीदेवी ने जिस मोना कपूर के घर में रहकर उनके पति को राखी बांधकर उन्हीं का सुहाग छीना था और मोना को उनके दो मासूम बच्चों के साथ तड़पने के लिए छोड़ दिया था। नियति का खेल देखिए कि ठीक उसी तरह श्रीदेवी की मौत के बाद उनकी दोनों बेटियां भी इस दुनिया में अकेली रह गई। जिस मोना कपूर की रोती हुई आंखों को श्रीदेवी ने अनदेखा किया था। क्या दुबई के उस सोने बाथटब में तड़पते वक्त श्रीदेवी को उस दर्द का एहसास हुआ होगा। क्या उन्होंने जो दूसरों के साथ किया उसका कड़वा फल उन्हें भुगतना पड़ा। यह एक ऐसा सवाल है जिसका जवाब सिर्फ वक्त के पास है। इसमें कोई शक की बात नहीं कि फिल्मी पर्दे पर वो हमेशा हमारे दिलों की रानी रहेंगी।
लेकिन उनकी असल जिंदगी हमें यह सीख दे जाती है कि चकाचौंध चाहे जितनी भी बड़ी क्यों ना हो, इंसान अपने कर्मों के हिसाब से कभी भी और कहीं भी भाग नहीं सकता। तो दोस्तों, आपको श्रीदेवी की जिंदगी का यह उतार-चढ़ाव भरा सफर कैसा लगा? क्या आपको भी लगता है कि इंसान को उसके कर्मों का फल इसे जन्म में भुगतना पड़ता है? को लगता है कि वाकई पैसों के लालच में श्रीदेवी की हुई या फिर वह महज एक हादसा
Post Views: 126