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पत्नी की मौत के बाद आखिर शम्मी कपूर के साथ ऐसा क्या हुआ कि पहचानना मुश्किल हो गया?

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आजा जा मैं हूं प्यार तेरा [संगीत] अल्लाह हाय दिल लगा तो ऐसा लगा चर्चा गली गली [संगीत] आज हम बॉलीवुड के उस तूफानी एक्टर की कहानी लेकर आए हैं जिसकी एनर्जी के सामने अच्छे-अच्छों की नींद उड़ जाती थी। [चीखने की आवाज़] वो सुपरस्टार जिसका डांसिंग स्टाइल और क्रेजी एक्सप्रेशनंस देखकर हर कोई उनका दीवाना हो गया था। बदन पे सितारे लपेटे हुए ओ जाने तमन्ना के एक ऐसा हीरो जो सैफ अली खान की मम्मी को ऐसे प्रपोज करता था। कहो प्यार है तुमसे। जाना कहो प्यार है [संगीत] तुमसे। तो हम बात कर रहे हैं बॉलीवुड के याू सुपरस्टार और भारतीय सिनेमा के पहले रॉकस्टार कहे जाने वाले एक्टर शम्मी कपूर की। तारीफ करूं क्या उसकी जिसने तुम्हें आखिर कैसे एक स्मार्ट

और बेहद हैंडसम दिखने वाला शम्मी कपूर धीरे-धीरे मोटा और उम्रदराज इंसान में बदल गया था। पत्नी गीता बाली की मौत के बाद आखिर शम्मी कपूर की जिंदगी में ऐसा क्या हुआ था जिसने उन्हें अंदर से तोड़ दिया था? एहसान [संगीत] तेरा [गाना गाने की आवाज़] होगा मुझ पर दिल चाहता शम्मी कपूर की कौन सी फिल्म ने उन्हें ओवरनाइट सुपरस्टार बना दिया? आखिर उनकी एनर्जी का राज क्या था? क्यों लोग उन्हें बॉलीवुड का सबसे स्टाइलिश एक्टर मानते थे? क्या शम्मी कपूर ने कई एक्ट्रेसेस का करियर चमकाया था? निगाहों में जादू [संगीत] [गाना गाने की आवाज़] चलाना मेरी जान शम्मी कपूर की मौत कैसे हुई थी उनके आखिरी दिन इतने दर्दनाक क्यों थे

और क्यों आज भी उनके गाने लोगों के दिलों पर राज करते हैं ओ बार-बार देखो हजार बार देखो के देखने की चीज है हमारा दिल दुबे हो जानेंगे और भी बहुत कुछ आप बस दिल थाम कर बैठ जाइए और इस वीडियो को एक लाइक कर दीजिए तो चलिए शुरू करते हैं शम्मी कपूर की कहानी आजकल तेरे मेरे प्यार के चर्चे हर जबान पर सबको मालूम है और सब शम्मी कपूर का जन्म 21 अक्टूबर 1931 को सपनों का शहर मुंबई में हुआ था। उनका जन्म एक ऐसे परिवार में हुआ था जिसने हिंदी सिनेमा जगत की नींव रखी थी। दूसरे शब्दों में कहें तो वह बचपन से ही शाही

ठाट बाट में पले बड़े। उनके पिता का नाम था पृथ्वीराज कपूर, जिसने भारत की पहली ऑडियो फिल्म आलम आरा में काम किया था क्योंकि इससे पहले की फिल्मों में सिर्फ दृश्य दिखाया जाता था। मतलब हम कह सकते हैं कि भारत में हिंदी सिनेमा जगत की शुरुआत कपूर खानदान ने किया था। उनके पिता एक जाने-माने एक्टर, डायरेक्टर और प्रोड्यूसर थे, जिसने अपने दौर में खास पहचान बनाई थी और मुगले आजम में निभाया गया उनका अकबर का किरदार कौन भूल सकता है? इस बेबाक लौंडी को ले जाओ और कैदखाने के अंधेरों [हंसी] में गर्क कर दो। उनकी मां का नाम था रामशरणी देवी। शम्मी कपूर के बड़े भाई थे राज कपूर जिसे बॉलीवुड का शो मैन कहा जाता था। इसी के वास्ते हो तेरे दिल में [संगीत][गाना गाने की आवाज़] प्यार। जीना इसी का। उनके एक छोटे भाई भी थे शशि कपूर, जिन्होंने अपनी एक फिल्म से पूरे बॉलीवुड में तहलका मचा दिया था। एक रास्ता है जिंदगी जो थम गए तो कुछ नहीं। शम्मी कपूर के बचपन का नाम था शमशेर राज कपूर लेकिन घर में प्यार से उन्हें शम्मी कहा जाता था। तो आगे चलकर यही नाम फिल्मों में दर्ज कराया गया। उनके पिता थिएटर में काम करते थे इसलिए उनका परिवार कभी बंबई तो कभी कोलकाता में आता जाता रहता था

और इसी कारण उनकी पढ़ाई लिखाई इन्हीं दोनों जगह पर हुई। परिवार का माहौल पूरा फिल्मों से भरा हुआ था। तो शम्मी कपूर ने बिना ट्रेनिंग लिए ही एक्टिंग करने लगे थे। मैं हूं प्यार [संगीत] तेरा। उनके बचपन से जुड़ा एक किस्सा भी कमाल का रहा। शम्मी कपूर बचपन से ही पढ़ाई से ज्यादा थिएटर और फिल्मों की दुनिया में दिलचस्प रखते थे। स्कूल की किताबों से ज्यादा उनका मन स्टेज की रोशनी और अभिनय में लगता था। अक्सर ऐसा होता था कि वहां स्कूल कम और थिएटर में ज्यादा दिखाई देते थे। एक दिन उनकी लगातार गैर हाजिरी से परेशान होकर स्कूल के टीचर ने साफ कह दिया कल अपने पिता को स्कूल लेकर आना। लेकिन उस समय पर पृथ्वीराज कपूर अपने काम में व्यस्त थे। इसलिए शम्मी कपूर के बड़े भाई राज कपूर स्कूल पहुंच गए। स्कूल में टीचर ने शम्मी कपूर की जमकर शिकायत की। तुम्हारा नाम रजिस्टर से काट दिया गया है। हां अब तुम यहां नहीं पढ़ सकते। मगर मास्टर जी मैं तो फीस भी लेकर आया हूं। उन्होंने कहा कि ये लड़का पढ़ाई में बिल्कुल ध्यान नहीं देता है और हर वक्त बस थिएटर और फिल्मों के पीछे भागता रहता है। बात यहीं तक रहती तो शायद राज कपूर शांत रहते। लेकिन जब टीचर ने फिल्मों और थिएटर में काम करने वाले लोगों को नीची नजर से देखना शुरू किया। उन्हें नाचने गाने वाले कहकर अपमानित करने लगे तब राज कपूर का गुस्सा फूट पड़ा।

अनपढ़? यही मेरी बदकिस्मती है देवी जी कि मैं अनपढ़ नहीं। मैं ग्रेजुएट हूं। बीए पास। राज कपूर ने गुस्से में कहा, जिस जगह पर कला और कलाकारों की इज्जत नहीं होती, वहां मेरा भाई नहीं पढ़ेगा। फिर उन्होंने शम्मी कपूर की तरफ देखा और कहा, चलो शम्मी, अपना बस्ता उठाओ, यह स्कूल तुम्हारे सपनों के लायक नहीं है। याद रखना, एक दिन यही दुनिया तुम्हारे नाम की मिसाल देगी। और इस स्कूल में पढ़ने वाला हर बच्चा शम्मी कपूर जैसा बनने का सपना देखेगा। जिसे दिल दिया है वो तुम हो। मेरी जिंदगी तुम्हारी है। उस दिन के बाद शम्मी कपूर का मन पढ़ाई से और भी दूर हो गया। धीरे-धीरे उनका पूरा झुकाव अभिनय की तरफ बढ़ने लगा। कॉलेज तक पहुंचते-पहुंचते उन्होंने फैसला कर लिया था कि अब उनकी असली दुनिया किताबों में नहीं बल्कि कैमरे और स्टेज की रोशनी में है। यही वजह रही कि उन्होंने अपनी कॉलेज की पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी और पूरी तरह एक्टिंग को अपना लिया। [संगीत] शम्मी कपूर ने अपने एक्टिंग करियर की शुरुआत 1953 में आई फिल्म जीवन ज्योति से की थी। लेकिन ना तो फिल्म की ज्योति जली और ना ही शम्मी कपूर के करियर की। इसके बाद आई फिल्म रेल का डब्बा। इस फिल्म में शम्मी कपूर और मधुबाला की जोड़ी पहली बार पर्दे पर साथ में दिखाई दी थी। खाना पीना चलना फिरना घूमना काटना क्या मेरा मतलब है कोट काटना पतलूून काटना जेब काटना नाक काटना देखिए मैं शहर का बहुत ही बड़ा कटर हूं कटर हूं तू समझा हां उस समय पर मधुबाला की खूबसूरती का इतना क्रेज था

कि शूटिंग के दौरान कई लोग सिर्फ उन्हें देखने के लिए सेट पर पहुंच जाते थे। कहा जाता है कि एक रोमांटिक सीन की शूटिंग के दौरान शम्मी कपूर मधुबाला को देखकर इतने नर्वस हो गए थे कि अपने डायलॉग भूल गए थे। हकीकत की बात है। किसने बताया आपको? आप तो पैदा भी नहीं हुए तो ये हुआ था रेल का डिब्बा पिक्चर थी। उसमें मधुबाला मेरी हेरोइन थी। नया-नया हीरो बना था और वो इतनी खूबसूरत लड़की मैं उसको देखकर अपना डायलॉग भूल गया था। इसके बाद ठोकर, लैला मजनू और गुल सनोबर जैसी फिल्में भी आई। लेकिन इनमें से कोई भी फिल्म नहीं चली और फ्लॉप हो गई। 1954 में शम्मी कपूर की एक के बाद एक पांच फिल्में रिलीज हुई। लेकिन किस्मत उनका साथ नहीं दे रही थी। उन्होंने अपने शुरुआती दौर में करीब 18 फिल्मों में काम किया। मगर इनमें से ज्यादातर फिल्में बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह से फ्लॉप साबित हुई। कहता है दिल तुम हो मेरे लिए। मेरे लिए। हालत ऐसी हो गई थी कि उनका करियर शुरू होने से पहले ही खत्म होता हुआ नजर आने लगा था। धीरे-धीरे इंडस्ट्री में लोग बातें करने लगे थे कि शम्मी कपूर सिर्फ अपने बड़े भाई राज कपूर की छवि को कॉपी कर रहे हैं। कुछ लोग तो यह तक कहने लगे थे कि वो कपूर खानदान के नाम पर धब्बा बनते जा रहे हैं। सबसे ज्यादा तकलीफ देने वाली बात यह थी कि लगातार फ्लॉप फिल्मों के बावजूद उन्हें काम मिलता जा रहा था क्योंकि वह राज कपूर के भाई थे। हमारे यहां ऐसा ही होता है। शम्मी कपूर को लगने लगा था कि शायद वो कपूर खानदान की उम्मीदों पर खड़े नहीं उतर पा रहे हैं। 1956 में शम्मी कपूर की मुलाकात गीता बाली से हुई, जिसने उनकी जिंदगी को पहले स्वर्ग बनाया, और फिर नर्क बना दिया, जिसकी चर्चा हम आगे करेंगे। गीता बाली ने शम्मी कपूर को सलाह दी कि सबसे पहले तो तुम अपना लुक बदलो ताकि तुम अपने बड़े भाई जैसा ना लगो और फिर शम्मी कपूर ने अपनी मूछ हटा दी। बाल छोटे करवा लिए और वेस्टर्न कपड़े पहनने लगे जिससे उनका लुक पूरी तरह से बदल गया और फिर एक नए शम्मी कपूर का जन्म हुआ।

यूं तो हमने लाख हंसी देखे हैं। तुम [संगीत] सा नहीं देखा। और इस फिल्म ने शम्मी कपूर की किस्मत ही बदल दी। यह फिल्म बड़ी हिट हुई और जो लोग उनकी बुराई कर रहे थे, वह भी शम्मी कपूर से कहने लगे, वाह, क्या एक्टिंग कर रहा है। इसके बाद उनकी इसी साल कई फिल्में आई, जो ठीक-ठाक रही। 1958 में शम्मी कपूर मुजरिम बने, मतलब फिल्म का नाम था मुजरिम, और यह फिल्म भी बड़ी हिट हुई। ओए, गोरे-गोरे गाल गाल पे उलझे उलझे बाल, हो तेरा क्या कहना। 1959 में आई फिल्म उजाला और शम्मी कपूर ने अपनी अदायकी से ऐसा उजाला फैलाया कि लोग दूर से ही उन्हें पहचानने लगे। याला याला दिल ले गई या ला या ला दिल ले गई यह फिल्म भी बड़ी हिट हुई। इस साल उनकी और भी कई बेहतरीन फिल्में आई और उन्हीं में से एक थी दिल दे के देखो। दिल देखो दिल देखो दिल देखो जी [संगीत] दिल लेने वालों दिल देना। और इस फिल्म ने भी शम्मी कपूर की पॉपुलैरिटी को दुगना कर दिया। इस फिल्म के गाने भी बड़े हिट हुए और यही वो फिल्म थी जिसमें एक हीरोइन के तौर पर आशा पारिक ने बॉलीवुड में कदम रखा था। यह फिल्म ऐसी हिट हुई कि आशा पारिक को लोगों ने खूब पसंद किया। बड़े हैं दिल के काले, आ नहीं, नीली सी आंखों वाले, और शम्मी कपूर एक बार फिर से चर्चे में आ गए थे। 1960 में शम्मी कपूर ने नूतन के साथ वसंत देखा और यह फिल्म भी बड़ी हिट हुई।

इसके बाद कॉलेज गर्ल आई और शम्मी कपूर की यह फिल्म भी बड़ी चर्चित रही और अब धीरे-धीरे शम्मी कपूर अपने डांस के लिए भी तारीफें बटोरने लगे थे। शम्मी कपूर लगभग 30 से भी ज्यादा फिल्मों में काम कर चुके थे। लेकिन फिर भी अभी तक वो सिर्फ एक एक्टर ही थे और स्टार नहीं बन पाए थे। फिर 1961 में एक फिल्म आई जिसने रातोंरात शम्मी कपूर को स्टार बना दिया। फिल्म का नाम था जंगली और जैसे ही शम्मी कपूर ने कहा, [चीखने की आवाज़] [संगीत] उनका Yahoo इतना फेमस हुआ कि वो रातोंरात हर किसी का फेवरेट बन गया। इस फिल्म से सायरा बानो ने अपने एक्टिंग करियर की शुरुआत की थी और इस फिल्म के लिए शम्मी कपूर को आज भी याद किया जाता है। सारा गुजारा [संगीत] अंगना अब जाने दे मुझे मोर सजना। इस फिल्म के गाने बड़े हिट हुए और शायरा बानो अपनी पहली फिल्म से ही हर तरफ छा गई थी। अरे काश्मीर की गली हूं मैं मुझसे ना रूठोपा मुझे। इसके बाद शम्मी कपूर मधुबाला के बॉयफ्रेंड बने। मतलब फिल्म का नाम था बॉयफ्रेंड और मधुबाला के साथ शम्मी कपूर की जोड़ी खूब जमी। 1962 में शम्मी कपूर प्रोफेसर बने, और यह फिल्म भी शम्मी कपूर की एक यादगार फिल्म बनी। आवाज़ देके हमें [गाना गाने की आवाज़] तुम बुलाओ। जिसमें उनकी एक्टिंग की भी लोगों ने खूब तारीफ की। इसके बाद वो माला सिन्हा के प्यार में दीवाने हुए। फिल्म आई दिल तेरा दीवाना। मूवी का टाइटल सॉन्ग ओ दिल तेरा दीवाना है सनम। और उनकी एनर्जेटिक एक्टिंग लोगों को इतनी पसंद आई कि यह फिल्म उस दौर की बड़ी म्यूजिक हिट बन गई। मुझे कितना प्यार है तुमसे अपने ही दिल से पूछो तुम। इसी साल चाइना टाउन भी रिलीज हुई थी। इसमें शम्मी कपूर ने डबल रोल निभाया था जो उस समय ऑडियंस के लिए काफी एक्साइटिंग माना गया। फिल्म का गाना बार-बार देखो बहुत बड़ा हिट हुआ। बार-बार देखो, [संगीत] हजार बार देखो के देखने की चीज है हमारा दिल रुबा। और इसी फिल्म के बाद लोगों के बीच शम्मी कपूर की दीवानगी और भी ज्यादा बढ़ गई थी। 1963 में शम्मी कपूर ब्ल मास्टर बने। इस फिल्म में उनका स्टाइलिश अंदाज ऑडियंस को खूब पसंद आया। हुस् कला कुछ ऐसी चाल दीवाने का पूछ ना हाल प्यार की कसम कमाल हो। फिल्म का गाना गोविंदा आला रे आला बहुत बड़ा हिट हुआ। आ रे आला जरा मट्टी संभाल ब्रिजवाला और एक गाने में पहली बार शम्मी कपूर औरत बने थे। 1964 में शम्मी कपूर राजकुमार बने जिसमें उनकी राजकुमारी बनी साधना शिवदासनी। [चीखने की आवाज़] राजकुमार। फिल्म के गाने एवरग्रीन थे और शम्मी कपूर का रॉयल और रोमांटिक अंदाज बेहद पसंद किया गया था। देखो मुझसे रूठ कर मेरी जान जा रही है। इसके बाद शर्मिला टैगोर कश्मीर की कली बनी और शायद ही कोई होगा जिसने यह फिल्म उस समय ना देखी हो और अगर किसी ने ना भी देखी हो तो इसके गाने तो जरूर सुने होंगे। चांद सा रोशन चेहरा जुल्फों का रंग सुनहरा ये झील सी नीली आंखें। तो यह गाना सुनकर हर कोई अपनी पसंदीदा औरत से कहने लगा तारीफ [संगीत] करूं क्या उसकी जिसने तुम्हें बनाया इसी फिल्म से सैफ अली खान की मां यानी कि शर्मिला टैगोर ने बॉलीवुड में कदम रखा था। शम्मी कपूर ने कई नई हीरोइनों को लॉन्च भी किया था।

मतलब हम कह सकते हैं कि बॉलीवुड में सलमान खान रोजगार योजना से पहले शम्मी कपूर रोजगार योजना भी चल चुकी है। हाय रे हाय [संगीत] नींद नहीं [गाना गाने की आवाज़] आए चैन नहीं आए। ये फिल्म इतनी बड़ी हिट हुई कि शर्मिला का शर्माना पूरे देश ने देखा और शम्मी कपूर के गाने सदाबहार बने। निगाहों निगाहों [गाना गाने की आवाज़] में जादू चलाना। 1965 में शम्मी कपूर जानवर बने और इसमें उनकी हीरोइन थी राज श्री। खाओ मां कसम। अरे मेरा मतलब पान मसाला वाली नहीं बल्कि उस दौर की खूबसूरत एक्ट्रेस राजश्री। ओ तुमसे अच्छा कौन है? दिलो जिगर लो जान लो। और उन्हीं के नाम पर राजश्री फिल्म प्रोडक्शन बना और आज भी उनके नाम पर कई कंपनियां चल रही है। इसके बाद तीसरी मंजिल आई। और जब शम्मी कपूर ने आशा पारिक को ऐसे बुलाया जा मैं हूं प्यार तेरा तो इस गाने ने खूब तहलका मचाया इसके गाने लाजवाब थे फिर चाहे यह गाना हो ओ हसीना जुल्फों वाले जाने जहां ढूंढती है काफिर आंखें या फिर ये ओ मेरे सोना रे सुन रे सुन रे दे [संगीत] दूंगी जान जुदा इसके बाद भी प्रीत ना जाने रीत बदतमीज लाड साहेब जैसी कई बेहतरीन फिल्में आई और यह वो समय था जब शम्मी कपूर अपने करियर के पीक पर चल रहे थे और उनकी हर फिल्म सुपरहिट हो रही थी। बदतमीज कहो या कहो जानवर मेरा दिल तेरे दिल पे फिदा हो। 1967 में उनकी फिल्म आई एनी इन पेरिस। जैसे कि नाम से ही पता चल रहा है कि यह फिल्म पेरिस में शूट हुई थी जिसमें शम्मी कपूर का विदेशी अंदाज देखकर ऑडियंस हैरान रह गए थे। इसमें उनकी हीरोइन शर्मिला टैगोर ही थी। ले जा ले जा ले जा मेरा दिल [संगीत] तेरी दुनिया तेरी महबूब और अब वह पूरी तरह से शर्माना छोड़ चुकी थी और कश्मीर की कली से अब वह बिकनी गर्ल बन चुकी थी। इस फिल्म का हर गाना लाजवाब था और आज भी इसके गाने सुनकर शम्मी कपूर का खिलखिलाता हुआ चेहरा सामने आ जाता है। दीवाने का नाम तो पूछो और जब हेलीकॉप्टर से लटकते हुए शम्मी कपूर ने यह कहा कहो प्यार है तुमसे। जाना कहो प्यार है तुमसे। तो इस गाने को लोगों ने अपने फेवरेट वाली लिस्ट में शामिल कर लिया। 1968 में शम्मी कपूर ब्रह्मचारी बने और यह फिल्म उनके करियर की सबसे बड़ी हिट फिल्मों में शामिल हो गई। इस फिल्म का हर गाना लाजवाब था। फिर चाहे सड़क पर बच्चों से भरी गाड़ी चलाते हुए यह गाना हो चक्के में चक्का चक्के पे गाड़ी गाड़ी में निकली अपनी सवारी। बच्चों को सुलाने के लिए दर्द भरी लोरी हो। मैं गाऊं तुम सो जाओ मैं गाऊं। और इसी फिल्म का गाना था हमें काले हैं तो क्या हुआ दिलवाले हैं जिसे सुनकर आज भी काले लोगों को खुद पर गर्व होने लगता है और सबसे लाजवाब था फिल्म का यह गाना आजकल तेरे मेरे प्यार के चर्चे हर जबान पर सबको मालूम है और सबको जिसमें मुमताज ने वो जलवा बिखेरा कि इसे ऑल टाइम हिट सॉन्ग का दर्जा मिला। इस गाने में जिस साड़ी से मुमताज ने डांस किया था, वह साड़ी औरतों को इतनी पसंद आई थी कि हर औरत दुकान में जाकर अपने लिए ऑरेंज कलर का साड़ी खरीदने लगी थी। और इस फिल्म के लिए शम्मी कपूर को पहला बेस्ट एक्टर का अवार्ड भी मिला। कहा जाता है कि इस फिल्म से मुमताज और शम्मी कपूर एक दूसरे को पसंद करने लगे थे। लेकिन शादी की बात इसलिए आगे नहीं बढ़ पाई क्योंकि कपूर खानदान की बहुओं के फिल्मों में काम करने को लेकर उस समय काफी सख्त नियम थे। परंपरा, प्रतिष्ठान, अनुशासन। इसके बाद शम्मी कपूर ने कहा, तुमसे अच्छा कौन है? इसके बाद आई सच्चाई और इस फिल्म में शम्मी कपूर के साथ शोले के ठाकुर यानी कि संजीव कुमार ने काम किया था। ए दोस्त, ए दोस्त, ए दोस्त मेरे मैंने दुनिया देखी है। 1969 में शम्मी कपूर प्रिंस बने और उन्होंने विजयंती माला से जब यह कहा बदन पे सितारे लपेटे हुए। तो इस गाने ने शम्मी कपूर को अमर कर दिया और आज भी यह गाना लोगों का फेवरेट है। जरा पास आओ तो चैन आ जाए। 1970 में आई पगला कहीं का और यह फिल्म भी हिट रही। 1971 में शम्मी कपूर ने पहली बार राजेश खन्ना के साथ काम किया। फिल्म आई अंदाज और एक तरफ जहां राजेश खन्ना अपना अंदाज बता रहे थे। जिंदगी एक सफर है सुहाना [संगीत] यहां कल क्या हो किसने जाना। तो वहीं शम्मी कपूर ने भी अपना अलग अंदाज बताया। दिल उसे दो जो जान दे दे जान। [संगीत] इस मूवी के गाने एवरग्रीन बने और बच्चों का अपने मम्मी पापा के लिए यह गाना पापा को मन में [संगीत] मम्मी को पापा से प्यार है। जिसे सुनकर आज भी दिल खुश हो जाता है। इसके बाद आई जाने अनजाने। इसमें उनकी हीरोइन थी लीना चंद्रवारकर जिनकी खूबसूरती उस समय पर काफी चर्चे में रहती थी। तेरी नीली नीली आंखों के दिल पे चीर चल गए। चल गए चल गए। फिल्म के गाने हिट रहे लेकिन मूवी बॉक्स ऑफिस पर कोई बड़ा धमाका नहीं कर पाई थी। इसके बाद लीना मुमताज की साड़ी को कॉपी करके डांस करने लगी। [संगीत] फिल्म आई प्रीतम जो रोमांटिक कॉमेडी पर आधारित थी और दोनों की जोड़ी पर्दे पर फिर से छा गई थी। चाल सुहानी बात रसीली। [संगीत] फिल्म के गाने बड़े हिट हुए, लेकिन अब धीरे-धीरे शम्मी कपूर की उम्र ढलने लगी थी

और उन्हें मेन लीड में काम मिलना भी कम होने लगा था। यही वो समय था जब शम्मी कपूर डिप्रेशन का शिकार भी हो गए थे और वह बहुत ज्यादा शराब पीने लगे थे, जिसकी चर्चा हम आगे करेंगे। इसके बाद शम्मी कपूर ने अचानक से फिल्मों से दूरी बना ली और लगभग 3 साल तक किसी मूवी में काम नहीं किया और जब 1974 में वह दोबारा लौटे तो उन्हें देखकर हर कोई हैरान रह गया था। अब शम्मी कपूर वो शम्मी नहीं रह गए थे। उन्हें देखकर लोगों को बहुत दुख हुआ कि उनका चुलबुला और उछलता कूदता हुआ स्टार अब खत्म हो चुका था और एक बार फिर से एक नए शम्मी कपूर का जन्म हो चुका था। मनोरंजन मूवी में उन्होंने एक सपोर्टिंग किरदार निभाया। मुलजिम को पूरा अधिकार है कि वह अपने वकील के साथ प्राइवेटली सलाम मशवरा कर सके। आपकी आंखों के सामने लेकिन कानों से दूर। 1975 में शम्मी कपूर ने अमिताभ बच्चन के साथ काम किया। लेकिन बड़ी बात यह थी कि जिस साहरा बानो के वह फिल्मी पति बन चुके थे और उनके साथ पर्दे पर रोमांस कर चुके थे। वह उसी साहरा बानो के पिता बने थे। क्या बात कर रहा है? इस प्यार को क्या नाम दिया जाए? आप हमें नीचे कमेंट करके जरूर बताइएगा। दिन सारा गुजारा तो अंगना [संगीत] अब जाने दे मुझे मोरे सजना। 1976 में राजेश खन्ना के साथ शम्मी कपूर ने काम किया। मूवी आई बंडलबाज और इस फिल्म की खासियत यह थी कि इस फिल्म के डायरेक्टर शम्मी कपूर ही थे और यही उनके डायरेक्टर के तौर पर आखिरी फिल्म भी थी। इसे वो अपने जीवन की सबसे बकवास फिल्म मानते हैं। मैं उसका चाचा हूं और मैं उसका मामू बताइए किस बोतल में बंद कर रखा है आपने मेरे आका को? बोतल और राजेश खन्ना के साथ इस फिल्म में लड़ाई भी हो गई थी। इसके बाद परवरिश, मामा भांजा, शालीमार, रॉकी, नसीब, देश प्रेमी और प्रेम रोग जैसी कई बेहतरीन फिल्मों में शम्मी कपूर एक सपोर्टिंग किरदार निभाए थे और वह पिता और दादा जैसे किरदार निभाने लगे थे। कहीं से थोड़ा सा जहर लाकर दे देना हमें बेटी। हम आंखें मूंद लें, तो फिर हमारी छाती पर पांव रखकर निकल जाना और जो जिम में आए करना, हम रोकने नहीं आएंगे। और इन फिल्मों को देखकर कोई भी यह नहीं कह सकता था कि यह बंदा कभी बॉलीवुड का सबसे एनर्जेटिक डांसिंग स्टार रह चुका है। 1982 में आई विधाता फिल्म में उन्होंने दिलीप कुमार के साथ अपने नए अवतार में काम करके सबको चौंका दिया था और इस फिल्म के लिए उन्हें बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का अवार्ड भी मिला। हाथों [गाना गाने की आवाज़][संगीत] की चंद लकीरों का। 1983 में जब सनी देओल बेताब बने और हीरो बनकर उन्होंने बॉलीवुड में कदम रखा। ऐसे हंसती थी वो ऐसे चलती थी। [संगीत] तो इस फिल्म में अमृता सिंह के पिता शम्मी कपूर ही बने थे। इसके बाद जैकी सरफ हीरो बने तो शम्मी कपूर मीनाक्षी शेषाद्री के पिता बने। इसके बाद भी शम्मी कपूर ने कई फिल्मों में साइड किरदार निभाए और अच्छी बात यह थी कि जहां दूसरे एक्टर उमर ढलने के बाद फिल्मों से गायब हो जाते हैं तो वहीं शम्मी कपूर ने इस बात को बहुत जल्द समझ लिया था कि अब वो हीरो तो नहीं बचे हैं तो सपोर्टिंग किरदार निभाने में ही फायदा है और यही कारण रहा कि उनका फिल्मी करियर सबसे लंबा रहा। अगर यह मजाक था तो मैं यही कहूंगा कि इसने अपने फर्ज़ का मजाक उड़ाया। 1991 में जब अमिताभ बच्चन अजूबा बने, तो शम्मी कपूर ने उनके पिता का किरदार निभाया था और जो एक्टर उनके सामने हीरो बना था, उसके भी बाप का किरदार निभाकर शम्मी कपूर ने रिकॉर्ड बना दिया। तुम्हारे आंसों की कीमत वजीर के खून से अदा की जाएगी। आज से अजूबा हमारा सेफा सलवार होगा। इसके बाद भी हिना, लक्ष्मण रेखा, मस्त कलंदर, तहलका, चमत्कार, गर्दिश, प्रेम ग्रंथ, सैंडविच और प्यार हो गया जैसी कई फिल्मों में शम्मी कपूर छोटे-मोटे किरदार निभाते हुए नजर आए। शम्मी कपूर ने आखिरी बार 2011 में अपने पोते, रणवीर कपूर के साथ फिल्म रॉकस्टार में काम किया था। ये आपके छोटे पिंजरे में नहीं समाएगा। ये अपनी दुनिया बनाएगा। मतलब ये लड़का उस्ताद जी, यह दूसरी चीज है ढींगरा। इस पर उसका हाथ है। उसकी इनायत है। और यही उनकी आखिरी फिल्म थी जिसके बाद उन्होंने फिल्मों में काम करना ही बंद कर दिया था। फिल्मों में अपनी अलग पहचान बनाने वाले शम्मी कपूर की पर्सनल लाइफ भी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं था। अब हम जानेंगे उनकी जिंदगी के कुछ ऐसे किस्से जो आज भी लोगों को हैरान कर देते हैं। शम्मी कपूर अपने रंगीन मिजाज और आशिकाना अंदाज के लिए काफी मशहूर थे। वह जिस भी हीरोइन के साथ काम करते थे, उसी पर उनका दिल आ जाता था। दिल है बड़ा ही दीवाना। छेड़ा ना करो इस शम्मी कपूर अपने कॉलेज के ही दिनों में थे। तभी से वह मधुबाला को चाहने लगे थे। वह मधुबाला को अपनी पत्नी बनाने के सपने देखने लगे थे। और जब उन्हें मधुबाला के साथ काम करने का मौका मिला तो एक रोमांटिक सीन की शूटिंग के दौरान वो मधुबाला को देखकर इतना नर्वस हो गए थे कि वह दो-चार डायलॉग भूल गए थे। रेल का डिब्बा पिक्चर थी उसमें मधुबाला मेरी हेरोइन थी। नया-नया हीरो बना था और वो इतनी खूबसूरत लड़की मैं उसको देखकर अपने डायलॉग भूल गया था। लेकिन मधुबाला ने कभी भी शम्मी कपूर को भाव नहीं दिया क्योंकि उस समय पर वो दिलीप कुमार की दीवानी थी और जैसे ही शम्मी कपूर की मां को यह पता चला कि शम्मी कपूर मधुबाला के दीवाने हैं तो उन्होंने साफ कह दिया कि एक मुस्लिम लड़की मेरे घर की बहू नहीं बन सकती। इसलिए फिर शम्मी कपूर ने भी मधुबाला का ख्याल दिल से निकाल दिया। दिल में आता है क्या तुझे देखूं भी नहीं। पर क्या करूं यह दिल जो फिदा हो गया। शम्मी कपूर का नाम नूतन के साथ भी जोड़ा गया। शम्मी कपूर नूतन को केवल गर्लफ्रेंड बनाकर रखना चाहते थे, लेकिन नूतन को टाइम पास पसंद नहीं था, इसलिए यह रिश्ता भी ज्यादा लंबा नहीं चल सका। इसके बाद शम्मी कपूर का नाम जुड़ा नाडिया गमाल के साथ, जो उस समय की एक डांसिंग एक्ट्रेस थी। दोनों लंबे समय तक रिलेशनशिप में रहे और शम्मी कपूर उन्हें पब्लिकली अपनी गर्लफ्रेंड बता चुके थे। हालांकि नाडिया भारतीय नहीं थी बल्कि इजिपियन की डांसर और एक्ट्रेस थी जिसकी शम्मी कपूर से मुलाकात श्रीलंका में हुई थी और शम्मी कपूर की गर्लफ्रेंड बनकर उसे कई फिल्मों में काम भी मिलने लगा। लेकिन फिर कुछ समय बाद वो अपने देश लौट गई और शम्मी कपूर अपना अगला शिकार ढूंढने लगे। से लड़ने आई [संगीत] देखो शहर की एक बिल्ली। फिल्म रंगीन रातों में काम करते हुए शम्मी कपूर की मुलाकात हुई थी गीता बाली से। शम्मी कपूर गीता बाली के दीवाने हो गए थे और उन्हें हर हाल में पाने के लिए मेहनत करने लगे। लेकिन गीता बाली ने उनके प्रपोजल को ठुकरा दिया। शम्मी कपूर ने भी हार नहीं मानी और लगातार 4 महीने तक वो गीता बाली के चक्कर लगाते रहे। और उन्हें शादी के लिए मनाते रहे। अब मैं पुलिस को फोन करता हूं और मैं उनसे कहूंगा कि इस आवारा लड़की ने जबरदस्ती मेरे कमरे में घुसकर मेरी इज्जत लूटनी चाहे। आखिरकार गीता बाली मान गई और शम्मी कपूर ने यह बात साबित कर दी कि कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती। लेकिन गीता बाली ने तुरंत कह दिया कि मुझे अभी और इसी वक्त शादी करनी है। मैं अगले दिन का इंतजार नहीं कर सकती क्योंकि हो सकता है कि सुबह तक मेरा फैसला बदल जाए। शम्मी कपूर भी नहीं चाहते थे कि गीता बाली का फैसला बदल जाए। इसलिए उन्होंने जल्दबाजी में ऐसी शादी की कि यह शादी ही एक मिसाल बन गई। सुबह 4:00 बजे पंडित को उठाया गया। मंदिर को खुलवाया गया और रात के अंधेरे में सुबह 4:00 बजे शम्मी कपूर ने गीता वाली से शादी कर ली। जरा सीख लो कि ओ शर्माना झुक जाना कभी मुस्काना। कमाल की बात यह थी कि जब सिंदूर नहीं मिला, तो शम्मी कपूर ने गीता बाली की लिपस्टिक से ही उनकी मांग भर दी और इस तरह दोनों एक दूजे के हो गए। शादी के बाद शम्मी कपूर ने अपने परिवार को बताया, कि मैं आपकी बहू ले आया हूं। शम्मी कपूर की शादी सफल रही और उनके यहां दो बच्चों का जन्म हुआ। बेटा आदित्य राज कपूर और बेटी कंचन कपूर लेकिन यह खुशहाली ज्यादा समय तक नहीं रही और शादी के 10 साल बाद ही गीता बाली को अचानक स्मॉल पॉक्स से मौत हो गई। पत्नी के जाने के बाद शम्मी कपूर कई दिनों तक सदमे में रहे। उन्होंने सब कुछ छोड़ दिया और खुद को एक कमरे में बंद कर लिया और शराब के हवाले कर दिया। वह दिन रात अपनी पत्नी की यादों में खोए रहते और अपनी जिंदगी को खुद ही नर्क बना लिया था। क्योंकि उनके बच्चे अभी छोटे थे इसलिए परिवार को उनकी और उनके बच्चों की चिंता होने लगी। इसलिए घर वालों ने शम्मी कपूर से दूसरी शादी करने के लिए कहा, लेकिन शम्मी ने मना कर दिया। धीरे-धीरे शम्मी कपूर को भी बच्चों की चिंता होने लगी, तो फिर वह दोबारा से काम करने लगे, और शराब पीना उन्होंने बंद कर दिया। एक बार फिर से शम्मी कपूर ने फिल्मों में वापसी की और फिर धीरे-धीरे सब कुछ ठीक होने लगा। अकेले-अकेले [संगीत] कहां जा रहे हो हमें साथ ले लो। इसके बाद उनकी जिंदगी में आई मुमताज। मुमताज शम्मी कपूर से लगभग 17 साल छोटी थी। लेकिन फिर भी शम्मी कपूर का दिल मुमताज पर आ गया। दोनों ने लंबे समय तक एक दूसरे को डेट किया। शम्मी कपूर मुमताज से शादी करना चाहते थे।

मुमताज भी शम्मी कपूर की दीवानी थी। दोनों ने शादी करने का फैसला भी कर लिया, लेकिन शम्मी कपूर चाहते थे कि शादी के बाद मुमताज फिल्मों में काम करना छोड़ दे, क्योंकि उनके पिता भी अमिताभ बच्चन की तरह अपने नियम को लेकर सख्त थे, और उनका मानना था कि अच्छे घर की बहू बेटियां फिल्मों में काम नहीं करती, और खासकर शादी के बाद कपूर खानदान में बहू फिल्मों में काम नहीं करती, लेकिन मुमताज का करियर अभी शुरू ही हुआ था, और वह फिल्मों में काम करना नहीं छोड़ना चाहती थी। इसलिए उसने साफ मना कर दिया कि शादी करनी है तो करो और नहीं करनी है तो मत करो लेकिन मैं फिल्मों में काम करना बंद नहीं करूंगी। शम्मी कपूर अपने परिवार का नियम नहीं तोड़ सकते थे तो मुमताज ने भी शादी करने से मना कर दिया। आजकल तेरे मेरे प्यार के चर्चे हर जबान पर इसके बाद 1969 में शम्मी कपूर ने अचानक से एक लड़की से शादी कर ली जिसका नाम था नीला देवी। वह राज कपूर की बेटी नीतू कपूर की मित्र थी और शम्मी कपूर की फैन भी थी। इसलिए शम्मी कपूर से शादी की बात से ही वो इतनी खुश हो गई कि उसने शम्मी कपूर की अजीबोगरीब शर्त भी मान ली। शम्मी कपूर ने नीला के सामने शर्त रखी कि तुम कभी मां नहीं बनोगी और मेरे बच्चों को ही अपने बच्चे मानकर जिंदगी भर बे औलाद रहोगी। एक लड़की के लिए यह शर्त मानने का मतलब है कि फिर उसकी शादी का कोई मतलब ही नहीं रह जाता। लेकिन फिर भी नीला देवी ने यह शर्त मान ली और शम्मी कपूर से शादी कर ली और अपनी पूरी जिंदगी शम्मी कपूर के बच्चों के नाम कर दी। रंग ना छूटेगा [संगीत] उल्फत की निशानी है। इसके अलावा भी बीना रहमानी नाम की एक राइटर और सोशल वर्कर के साथ शम्मी कपूर का नाम जुड़ा। मतलब वह शादी से पहले भी आशिक मिजाज के थे, और शादी के बाद दो बच्चों के बाप बनने के बाद भी उनकी आशिक मिजाजी खत्म नहीं हुई थी। शम्मी कपूर बॉलीवुड के उन एक्टर्सों में से एक रहे जिसने पहली बार कंप्यूटर का इस्तेमाल किया और यह बात भी बहुत कम लोग जानते होंगे कि शम्मी कपूर भारत के इंटरनेट यूजर कम्युनिटी के फाउंडर और चेयरमैन भी थे। शम्मी कपूर का सबसे फेमस सॉन्ग Yahoo जिसमें वो बर्फ पर फिसलते हैं। इस गाने में उन्होंने जो भी हरकतें की वो बिना किसी सेफ्टी के और बिना किसी सावधानी के की थी। तो इसीलिए इसी गाने की शूटिंग के दौरान उनके पैर में चोट लग गई थी। इलाज चल ही रहा था कि तभी उनकी मूवी राजकुमार आई और इसी फिल्म में जब उन्होंने हाथी पर बैठकर यह गाना गाया आगे पीछे हमारी सरकार यहां के हम है राजकुमार तो उनका वही पैर हाथी के पैर से फंसकर बुरी तरह से फंस कर मुड़ गया था और उनके पैर की हड्डियां भी टूट गई थी। इसके बाद शम्मी कपूर का लंबे समय तक इलाज चला, और इसी इलाज के दौरान उन्हें जो दवाइयां दी गई थी, वह दवाइयों का उन्हें साइड इफेक्ट हो गया, और वह पहले से ही हल्का मोटे थे, और अब बिस्तर पर पड़े पड़े उनका वजन और भी ज्यादा बढ़ गया, और अचानक से शम्मी कपूर का पूरा लुक ही बदल गया। शम्मी कपूर अपने आप को देखकर घबराने लगे। उन्हें भरोसा ही नहीं हो रहा था कि 2 साल पहले तक वह बॉलीवुड के सबसे एनर्जेटिक और उछल कूद करने वाले एक्टर थे और अब उनका शरीर हीरो जैसा लग ही नहीं रहा था। इसके बाद उन्होंने हीरो का रोल करना ही छोड़ दिया और फिल्मों को डायरेक्ट करना शुरू कर दिया था। शम्मी कपूर ने दो फिल्में बनाई। पहली थी मनोरंजन जिसमें उन्होंने संजीव कुमार और जीनत अममान को कास्ट किया था। मैंने कभी पटना में एक बैंक लूटा था। मेरे बाप का बैंक लेकिन वो के साथ फिर कभी पैसे निकालिए। और दूसरी थी बंडलबाज जिसमें हीरो थे राजेश खन्ना। लेकिन डायरेक्टर के तौर पर वह उतने सफल नहीं हो पाए और उन्हें बहुत जल्द यह समझ में आ गया कि डायरेक्टर बनना उनके बस की बात नहीं है। इसलिए वापस से वह फिल्मों में एक्टिंग करने लगे और सपोर्टिंग किरदार निभाने लगे। शम्मी कपूर ने लगभग 60 सालों तक फिल्मों में काम किया और वह सबसे लंबे समय तक फिल्मों में एक्टिव रहने वाले स्टार बने। शम्मी कपूर लंबे समय से किडनी फेलियर की बीमारी से जूझ रहे थे। और हफ्ते में कई बार डायलिसिस करवानी पड़ती थी। उनकी तबीयत अचानक ज्यादा खराब हो गई थी। जिसके बाद उन्हें मुंबई के ब्रिज कैंडी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों के मुताबिक शम्मी कपूर को क्रॉनिक रिनल फेलियर था। बढ़ती उम्र के साथ उनकी सेहत लगातार गिरती गई। उन्हें सांस लेने में दिक्कत होने लगी थी और शरीर बहुत ज्यादा कमजोर हो गया था। आखिरकार कार्डियक अरेस्ट आने के बाद उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया। 14 अगस्त 2011 को मुंबई के ब्रिज कैंडी अस्पताल में उन्होंने आखिरी सांस ली। उनके आखिरी दिन दर्दनाक इसलिए माने जाते हैं

क्योंकि एक समय पर पूरी जिंदगी ऊर्जा से भरे रहने वाले सम्मी कपूर आखिरी वर्षों में व्हीलचेयर तक सीमित हो गए थे। जो इंसान कभी Yahoo चिल्लाते हुए पहाड़ों पर नाचता था, वही बाद में अस्पताल और दवाइयों के सहारे जिंदगी जी रहा था। लेकिन एक दिलचस्प बात यह भी थी कि इतनी खराब तबीयत होने के बावजूद शम्मी कपूर जिंदगी से प्यार करना नहीं भूले थे। उन्हें इंटरनेट और टेक्नोलॉजी का बहुत शौक था। वो भारत के शुरुआती इंटरनेट यूज़र्स में गिने जाते थे और घंटों कंप्यूटर पर समय बिताते थे। तो यह थी बॉलीवुड के लेजेंड्री एक्टर रहे शम्मी कपूर की कहानी। आपको यह कहानी कैसी लगी? आप हमें नीचे कमेंट करके जरूर बताइए। साथ ही इस वीडियो को लाइक करके चैनल को सब्सक्राइब करना बिल्कुल ना भूलें। मिलते हैं नेक्स्ट वीडियो में। थैंक यू सो मच। मैं हूं प्यार तेरा [संगीत] अल्लाह

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