भिलाई में जूस की दुकान पर ₹15,000 महीने की नौकरी करने वाला एक शख्स कुछ साल बाद दुबई में उसका आलीशान विला होता है। करोड़ों की उसके पास संपत्ति होती है और अपनी शादी में ₹200 करोड़ तो वो खर्च कर देता है।
मेहमानों को लाने के लिए चार्टेड प्लेन और बॉलीवुड के जो स्टार्स हैं उनका डांस परफॉर्मेंस होता है उसकी शादी में। लेकिन इस अमीरी के पीछे था एक कथित अवैध बैटिंग का कारोबार। और इस शख्स का नाम है सौरभ चंद्राकर। महादेव ऑनलाइन बेटिंग ऐप का मुख्य प्रमोटर और इस नेटवर्क का एक प्रमुख आरोपी।
अब सौरभ को ओमान से भारत लाया जा चुका है। 1 नवंबर 2026 की शाम सीबीआई की टीम उसे भारत लेकर पहुंची। 2 नवंबर को उसे रायपुर की विशेष सीबीआई अदालत में पेश किया जाना है। लेकिन सवाल अब भी वही है। आखिर ₹15,000 महीने कमाने वाला सौरभ चंद्राकर कुछ ही सालों में इतनी बड़ी दौलत का मालिक कैसे बन गया? जूस की दुकान से दुबई और फिर हजारों करोड़ रुपए की कथित वेटिंग कारोबार तक उसका सफर कैसे पहुंचा? समझते हैं उसकी पूरी कहानी।
सौरभ चंद्राकर छत्तीसगढ़ के भिलाई का रहने वाला है। उसके पिता भिलाई म्युनिसिपल कॉरपोरेशन में क्लर्क थे। बाद में उन्होंने समय से पहले रिटायरमेंट ले लिया जिसे वीआरएस भी कहते हैं। मां घर संभालती थी। परिवार की एक जूस की दुकान थी जिसका नाम था जूस फैक्ट्री। दुकान में सौरभ के बड़े भाई गीतेश की 51% हिस्सेदारी थी। सौरभ भी इसी दुकान पर काम करता था।
उसे महीने के करीब ₹15,000 मिलते थे। इसी दुकान पर रवि उपलक्ष अक्सर आया करता था। बाद में वह सौरभ का बिजनेस पार्टनर भी बना। जांच एजेंसियों के मुताबिक सौरभ ने दुकान से पैसे लेकर अपना अलग कारोबार शुरू किया। दिसंबर 2020 तक उसका काम छोटे लेवल पर था लेकिन 2 साल में उसकी जिंदगी बदल गई। सौरभ और रवि उपल मिलकर महादेव ऑनलाइन बेटिंग ऐप जो है उसका नेटवर्क शुरू किया। इसका ऑफिस दुबई में था। महादेव के अलावा रेड्डी अन्ना फेयर प्ले स्काई एक्सचेंज और लोटस 365 जैसे प्लेटफार्म भी जांच के दायरे में आए। इस कारोबार का मॉडल फ्रेंचाइजी जैसे था।
दुबई में बैठे मुख्य संचालक अलग-अलग ऑपरेटर्स को बैटिंग पैनल चलाने के लिए लॉग इन और पासवर्ड देते थे। यह ऑपरेटर अपने पैनल के जरिए लोगों को जोड़ते थे। उनसे दांव लगवाते थे। हर हफ्ते उनके मुनाफे और नुकसान का हिसाब मुख्य ऑफिस में होता था। यानी कारोबार अलग-अलग जगह चल रहा था। लेकिन उसको कंट्रोल दुबई से किया जा रहा था। जांच एजेंसियों के अनुमान के मुताबिक भारत और यूएई में ऐसे 3200 से ज्यादा पैनल चल रहे थे। सौरभ और रवि उपल है कि इस नेटवर्क में होने वाली कमाई को फर्जी बैंक खातों और हवाला के जरिए विदेश भेजा जाता था। सीबीआई का यह भी आरोप है कि कारोबार को बिना रुकावट चलाने के लिए सरकारी कर्मचारियों को रिश्वत दी जाती थी।
जांच में अपराध से हासिल रकम का अनुमान 88,000 से 94,000 करोड़ के बीच लगाया गया। इसमें महादेव ऑनलाइन बैटिंग ऐप से 75 से 80000 करोड़, स्काई एक्सचेंज से 11 से 12,000 करोड़ और लोटस 365 से करीब ₹2400 करोड़ जुड़े बताए गए हैं। यह जांच एजेंसियों के अनुमान है। अदालत में साबित नहीं हुआ है। फिलहाल 16 फरवरी 2022 को सौरभ भारत छोड़कर दुबई चला गया। इसके बाद वह कभी वापस नहीं लौटा। 6 मई 2022 को भारतीय पासपोर्ट रखते हुए उसने वानुआ का पासपोर्ट भी हासिल कर लिया। बाद में उसका भारतीय पासपोर्ट रद्द कर दिया गया। फिर फरवरी 2023 में उसकी शादी हुई। जगह थी यूएई का रास अलखेमा और होटल था वेल्डोफस्टोरिया। ईडी के मुताबिक शादी पर करीब ₹200 करोड़ कैश खर्च किए गए। मेहमानों को नागपुर से तीन चार्टर्ड विमानों में यूएई लाया गया। बॉलीवुड सेलिब्रिटीज के लिए अलग से प्राइवेट जेट का इंतजाम किया गया और उन्हें शादी में परफॉर्म करने के लिए पैसे भी दिए गए। ईडी ने इस शादी को अपनी जांच का अहम हिस्सा बनाया। एजेंसी ने इवेंट मैनेजमेंट कंपनी, होटल, विमान ऑपरेटर, ट्रैवल एजेंट्स इनके सबके जरिए पैसों का लेनदेन खंगाला।
सवाल था कि आखिर इस शादी पर खर्च हुए ₹200 करोड़ आए कहां से? ईडी ने इस मामले में अब तक 11 प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर जारी किए हैं। यानी आरोपियों की संपत्ति को अस्थाई रूप से ज्त करने के आदेश दिए हैं। 25 मार्च 2026 को ईडी ने बताया कि मामले में अब तक करीब 4336 करोड़ की संपत्ति अटैच ज्त या फ्रीज की जा चुकी है। इसमें भारत और विदेशों की संपत्तियां भी शामिल है। मार्च 2026 में अकेले दुबई और दिल्ली की 20 संपत्तियों पर करीब ₹1700 करोड़ की कारवाई भी की गई थी। सौरभ के अलावा रवि उपल, विकास छपरिया, शुभम सोनी और अनिल कुमार अग्रवाल उर्फ़ अतुल अग्रवाल भी आरोपी हैं। इनके खिलाफ वारंट जारी किए गए हैं। जुलाई 2026 में विकास गर्ग को भी गिरफ्तार किया गया था। उसकी गिरफ्तारी के बाद करीब ₹940 करोड़ की संपत्ति अटैच की गई। अब सवाल है कि सौरभ ओमान से भारत कैसे पहुंचा? तो भारतीय एजेंसियां 2023 से सौरभ की तलाश कर रही थी। हाल ही में ईडी को उसके ओमान में होने की जानकारी मिली। इसके बाद इंटरपोल के रेड कॉर्नर नोटिस के आधार पर रॉयल ओमान पुलिस ने उसे हिरासत में लिया। भारत की सीबीआई और ईडी ने ओमान को प्रत्यार्पण का औपचारिक अनुरोध भेजा। दोनों देशों की एजेंसियों के बीच बातचीत हुई और आखिरकार सौरभ को भारत लाया गया।
सीबीआई के मुताबिक उसके खिलाफ दो मामलों में चार्जशीट दाखिल हो चुकी है। ईडी ने भी पीएमएलए यानी मनी लॉन्ड्रिंग कानून के तहत उसके खिलाफ प्रोसीक्यूशन कंप्लेंट दाखिल की है। अब 2 नवंबर को जब हम यह वीडियो रिकॉर्ड कर रहे हैं। कुछ देर बाद उसे रायपुर के विशेष सीबीआई अदालत में पेश किया जाना है। सीबीआई की जांच में बैटिंग के पैसों को फर्जी बैंक खातों और हवाला के जरिए विदेश भेजने के आरोप भी शामिल है। तो एक जूस की दुकान पर ₹15,000 की नौकरी से लेकर दुबई के आलीशान विला और ₹200 करोड़ की शादी तक सौरभ चंद्राकर की कहानी में कई ऐसे सवाल हैं जिनके जवाब जांच एजेंसियां तलाश रही हैं।
अब सौरभ को भारत लाया जा चुका है। देखना यह होगा कि अदालत में पूछताछ और आगे की जांच में इस कथित पेटिंग नेटवर्क में कौन-कौन से राज खुलते हैं।