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रोनाल्डो की ज़िंदगी का वो सच , जिसे जानकर रोंगटे खड़े हो जाएंगे।

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की है। फुटबॉल की दुनिया का वो चमकता हुआ सितारा जिसे आज पूरी दुनिया क्रिस्टियानो रोनाल्डो के नाम से जानती है। यह सिर्फ एक खिलाड़ी का नाम नहीं बल्कि एक युग का नाम है।

एक ऐसा नाम जिसके बिना फुटबॉल की कहानी अधूरी लगती है। बहुत से लोगों के लिए फुटबॉल का मतलब ही रोनाल्डो है। लेकिन हाल ही में हुए वर्ल्ड कप मुकाबलों में उनकी आंखों से निकले आंसुओं ने दुनिया को एक बार फिर जिंदगी की सबसे बड़ी और कड़वी सच्चाई याद दिला दी।

कहते हैं कि हर उरूज का एक दिन जवाल होता है। रोनाल्डो की जिंदगी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। जब वह अपनी मां के पेट में थे तब उनका परिवार पुर्तगाल के एक गरीब इलाके में बेहद मुश्किल हालात से गुजर रहा था। घर में पहले से चार बच्चे थे और उनके पिता की तबीयत भी ठीक नहीं रहती थी।

आर्थिक परेशानियां इतनी ज्यादा थी कि उनकी मां मारिया ने फैसला किया कि वह इस बच्चे को दुनिया में नहीं लाएंगी और अबॉर्शन कराने का मन बना लिया। उन्होंने डॉक्टर से संपर्क भी किया। लेकिन डॉक्टर ने अबॉर्शन करने से इंकार कर दिया।

इसके बाद उनकी मां ने कई घरेलू उपाय भी आजमाए लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। जिस बच्चे को दुनिया में आने से रोकने की कोशिश की गई, कुदरत ने उसी बच्चे के लिए दुनिया की सबसे बड़ी कामयाबी लिख रखी थी।

यही बच्चा आगे चलकर करोड़ों लोगों के दिलों पर राज करने वाला क्रिस्टियानो रोनाल्डो बना। रोनाल्डो का बचपन बेहद गरीबी में गुजरा।

हालात ऐसे थे कि कई बार दो वक्त की रोटी के लिए उन्हें संघर्ष करना पड़ता था। कहा जाता है कि वह कभी कभी मैकडोनाल्ड के बाहर खड़े होकर बचा हुआ खाना मांगते थे। सिर्फ 15 साल की उम्र में रोनाल्डो को दिल की गंभीर बीमारी का सामना करना पड़ा। डॉक्टरों ने आशंका जताई थी कि शायद अब वह कभी फुटबॉल नहीं खेल पाएंगे। लेकिन जिसके इरादे मजबूत हो उसे मुश्किलें ज्यादा देर तक रोक नहीं सकती।

उनका ऑपरेशन हुआ और वह जल्द ही दोबारा मैदान पर लौट आए। रोनाल्डो के पास शुरुआत में ना अच्छे जूते थे ना सुविधाएं। लेकिन उनके पास एक चीज थी जो सबसे ज्यादा ताकतवर थी और वो था उनका जुनून।

उन्होंने गरीबी के अंधेरे से निकलकर अपनी मेहनत, अनुशासन और संघर्ष के दम पर दुनिया के सबसे सफल और मशहूर खिलाड़ियों में अपना नाम दर्ज कराया।

और आज रोनाल्डो पर बात करने की वजह सिर्फ उनका खेल नहीं है। रोनाल्डो मैदान के बाहर भी एक बड़े दिल वाले इंसान के रूप में जाने जाते हैं। वह हमेशा जरूरतमंद लोगों की मदद के लिए आगे आते रहे। दुनिया के कई हिस्सों में जब भी मुश्किल हालात पैदा हुए, उन्होंने अपनी तरफ से मदद का हाथ बढ़ाया। खासतौर पर गरीब और परेशान लोगों के लिए उनका योगदान हमेशा चर्चा में रहा है।

रोनाल्डो उन चुनिंदा खिलाड़ियों में शामिल हैं। जिनके शरीर पर कोई टैटू नहीं है क्योंकि वह कई बार रक्तदान करते हैं और जरूरतमंदों की मदद को प्राथमिकता देते हैं। उन्होंने अपने कई कीमती अवार्ड्स तक नीलाम कर दिए ताकि जरूरतमंद बच्चों की मदद की जा सके। यही वजह है कि लोग उनसे सिर्फ उनके खेल की वजह से नहीं बल्कि उनके इंसानी जज्बे और दर्दमंद दिल की वजह से भी मोहब्बत करते हैं।

लेकिन वक्त हमेशा एक जैसा नहीं रहता। इस वर्ल्ड कप में हालात बदले और रोनाल्डो को भी वक्त के फैसले के सामने झुकना पड़ा। वह पल शायद ही कोई फुटबॉल फैन भूल पाएगा जब पुर्तगाल की हार के बाद रोनाल्डो अकेले आंसू बहाते हुए स्टेडियम के टनल से बाहर जा रहे थे। वह खिलाड़ी जिसके पास दुनिया की हर दौलत और हर सम्मान था। उस वक्त दुनिया की सबसे बड़ी ट्रॉफी से दूर खड़ा था।

उनकी आंखों के आंसू बता रहे थे कि महान खिलाड़ी भी भावनाओं से ऊपर नहीं होते। रोनाल्डो की यह तस्वीर हमें जिंदगी की एक बड़ी सीख देती है। दुनिया में कोई भी दौर हमेशा के लिए नहीं रहता। वक्त का पहिया जब घूमता है तो वह ताकतवर से ताकतवर इंसान को भी उसकी हकीकत याद दिला देता है। जिस तरह रात के बाद दिन और दिन के बाद रात का आना तय है। उसी तरह हर ऊंचाई के बाद एक गिरावट भी जिंदगी का हिस्सा होती है।

लेकिन रोनाल्डो की हार उनकी महानता को कम नहीं करती। उन्होंने फुटबॉल को जो दिया है उसे दुनिया हमेशा याद रखेगी। उनकी जिंदगी हमें दो बड़ी सीख देती है। पहली जब हालात आपके खिलाफ हो और दुनिया आपको रोकने की कोशिश करे तब अपनी मेहनत और हौसले से अपनी तकदीर बदलने की कोशिश करते रहिए। और दूसरी जब आप कामयाबी की सबसे ऊंची मंजिल पर पहुंच जाएं और दुनिया आपके सामने झुकने लगे तब भी जमीन से जुड़े रहिए क्योंकि वक्त कभी एक जैसा नहीं रहता। उरूज में विनम्रता और जवाल में हौसला रखना ही असली इंसानियत है।

क्रिस्टियानो रोनाल्डो ने सिर्फ फुटबॉल की दुनिया नहीं जीती बल्कि जातेजाते दुनिया को जिंदगी का एक बड़ा सच भी सिखा दिया। रोनाल्डो की कहानी से आपको क्या सीख मिली?

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